28 Oct उत्तराखंड: रामगंगा बांध से गैरसैंण की पेयजल समस्या होगी दूर, 122 करोड़ की मंजूरी
✎ जल राज्य सूची का विषय है (प्रविष्टि 17), जबकि अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन संघ सूची की प्रविष्टि 56 के अंतर्गत आता है; गैरसैंण बांध परियोजना एक राज्य-स्तरीय परियोजना है, जिसे SASCI से पूंजीगत सहायता मिलने की प्रत्याशा में राज्य…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राज्यव्यवस्था एवं शासन (संघवाद, राज्य सूची के विषय, केंद्र प्रायोजित एवं केंद्रीय सहायता योजनाएं) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (पूंजीगत व्यय, राज्यों को विशेष सहायता, राजकोषीय संघवाद) | GS Paper III — पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन (बांध सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन, पारिस्थितिक प्रवाह) | GS Paper I — भूगोल (पर्वतीय क्षेत्रों में जल संसाधन और जल स्रोत)
- Prelims: राज्य सूची की प्रविष्टि 17 (जल: जल आपूर्ति, सिंचाई, नहर, जल भंडारण, जलविद्युत), संघ सूची की प्रविष्टि 56 (अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन और विकास), अनुच्छेद 267 (राज्य आकस्मिकता निधि), विशेष सहायता योजना: SASCI (Special Assistance to States for Capital Investment) — राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण, PM Gati Shakti राष्ट्रीय मास्टर प्लान (परियोजनाओं के भौतिक एवं डिजिटल समन्वय हेतु), बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 (Dam Safety Act, 2021), रामगंगा नदी (गंगा की सहायक नदी), जल भंडारण क्षमता और घन मीटर में मापन की इकाई
- Essay: विकास योजनाओं में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण का महत्व, पर्वतीय राज्यों में जल सुरक्षा और सतत विकास के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: जल राज्य सूची का विषय है (प्रविष्टि 17), जबकि अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन संघ सूची की प्रविष्टि 56 के अंतर्गत आता है; गैरसैंण बांध परियोजना एक राज्य-स्तरीय परियोजना है, जिसे SASCI से पूंजीगत सहायता मिलने की प्रत्याशा में राज्य आकस्मिकता निधि से प्रारंभिक वित्त दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड सरकार ने गैरसैंण नगर और आसपास की आबादी की पेयजल समस्या के समाधान के लिए रामगंगा नदी पर बांध बनाने की परियोजना को 122.6891 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी है। परियोजना की शुरुआत के लिए पहली किश्त के रूप में 2.454 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। शासन के आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनराशि की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए प्रारंभिक राशि राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम के रूप में दी जाएगी और केंद्र सरकार की SASCI योजना से धनराशि मिलने पर उसका समायोजन होगा। परियोजना में संरचनात्मक डिजाइन की मान्यता प्राप्त संस्था से जांच, स्थल निरीक्षण, मृदा परीक्षण, भूगर्भीय जांच और तृतीय पक्ष गुणवत्ता जांच को अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही डाउनस्ट्रीम क्षेत्र के गांवों को निर्बाध पेयजल और जल स्रोत में न्यूनतम आवश्यक जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यह परियोजना वित्तीय, तकनीकी और पर्यावरणीय तीनों दृष्टियों से एक व्यापक शासन-प्रक्रिया का उदाहरण बनती है।
पृष्ठभूमि
- संविधान के अनुसार जल एक राज्य विषय है (राज्य सूची की प्रविष्टि 17), इसलिए गैरसैंण जैसी स्थानीय पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। अंतरराज्यीय नदियों का विनियमन संघ सूची की प्रविष्टि 56 के अंतर्गत आता है, जो इस परियोजना पर लागू नहीं होता, क्योंकि रामगंगा का उपयोग यहां राज्य के भीतर है।
- उत्तराखंड का गठन वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर हुआ। पर्वतीय भूभाग में बिखरी बसावट, ढलानदार भूगोल और जल स्रोतों की मौसमी उपलब्धता के कारण पेयजल आपूर्ति एक लगातार चुनौती रही है।
- राज्य सरकार ने गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में विधानसभा सत्र आयोजित करने की परंपरा शुरू की है, जिससे इस क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की मांग बढ़ी है।
- केंद्र सरकार की SASCI योजना वित्त मंत्रालय के अंतर्गत राज्यों के पूंजीगत निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लागू है, जिसमें राज्यों को ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण सहायता दी जाती है। इस परियोजना में प्रारंभिक व्यय राज्य आकस्मिकता निधि से होना और बाद में SASCI से समायोजन, इसी केंद्र-राज्य वित्तीय ढांचे का व्यावहारिक रूप है।
- PM Gati Shakti राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत परियोजनाओं की योजना, समन्वय और निगरानी के लिए डिजिटल पोर्टल का प्रयोग होता है। इस परियोजना की प्रगति को इसी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
बांध और पेयजल आपूर्ति परियोजना क्या है?
- बांध एक अवरोधक संरचना है जो नदी के प्रवाह को रोककर जल का भंडारण करती है। इस भंडारित जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
- गैरसैंण परियोजना में रामगंगा पर लगभग 35 मीटर ऊंचे बांध के निर्माण का प्रस्ताव है, जिसकी जल भंडारण क्षमता लगभग तीन लाख घन मीटर होगी।
- जल आपूर्ति का लक्ष्य वर्ष 2055 तक लगभग 32 हजार की आबादी को 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (lpcd) की दर से पेयजल उपलब्ध कराना है।
- बांध निर्माण से पहले मृदा परीक्षण और भूगर्भीय उपयुक्तता की जांच आवश्यक है, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और भूकंपीय संवेदनशीलता का खतरा अधिक रहता है।
- बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के अंतर्गत बांधों की सुरक्षा, निरीक्षण और रखरखाव के लिए संस्थागत ढांचा बनाया गया है। इससे दीर्घकालिक संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।
- डाउनस्ट्रीम गांवों के लिए निर्बाध पेयजल और जल स्रोत में न्यूनतम प्रवाह बनाए रखना, पारिस्थितिक प्रवाह की अवधारणा से जुड़ा है, जो नदी के निचले क्षेत्र के जलीय तंत्र और जल-उपयोगकर्ताओं दोनों के हितों की रक्षा करता है।
- वित्तीय अनुशासन के लिए स्वीकृत लागत से बची राशि को शासन को लौटाना और अतिरिक्त कार्य के लिए सक्षम स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य है। स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक करने का निर्देश दिया गया है।
- सार्वजनिक परियोजनाओं में तृतीय पक्ष गुणवत्ता जांच और मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से परीक्षण, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और परियोजना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने का प्रमुख साधन है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| 35 मीटर ऊंचा बांध (Dam) | रामगंगा नदी पर प्रस्तावित मुख्य संरचना, जिससे गैरसैंण नगर और आसपास की आबादी के लिए पेयजल स्रोत सुनिश्चित होगा |
| जल भंडारण क्षमता 3 लाख घन मीटर | मौसमी प्रवाह के उतार-चढ़ाव के बीच भी पेयजल आपूर्ति को स्थिर रखने का आधार |
| लक्ष्य आबादी: 2055 तक लगभग 32 हजार | दीर्घकालिक मांग-आकलन पर आधारित; 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (lpcd) की दर से आपूर्ति का मानक |
| परियोजना लागत: 122.6891 करोड़ रुपये | प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त; पहली किश्त के रूप में 2.454 करोड़ रुपये स्वीकृत |
| राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम, बाद में SASCI से समायोजन | राज्य के बजट पर तत्काल भार कम करने और केंद्रीय पूंजी निवेश सहायता से वित्त-पोषण का मॉडल |
| पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर परियोजना का अपलोड | भौतिक प्रगति की केंद्रीकृत निगरानी और अंतर-विभागीय समन्वय का डिजिटल माध्यम |
महत्व
सामाजिक-मानवीय
- पहाड़ी नगर में पेयजल की स्थिर उपलब्धता से दैनिक जीवन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य-सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ता है
- सुविधाजनक पेयजल से महिलाओं और बच्चों पर जल ढोने का बोझ घटने की संभावना रहती है
- पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास विकास-लाभ को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने का माध्यम बनता है
आर्थिक-वित्तीय
- राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम व्यवस्था यह दर्शाती है कि परियोजना-आरंभ के लिए त्वरित वित्तीय प्रबंधन कैसे किया जाता है
- केंद्रीय सहायता से समायोजन का प्रावधान केंद्र-राज्य वित्तीय सहयोग के एक व्यावहारिक रूप को दिखाता है
- स्वीकृत लागत से बची राशि शासन को लौटाने का नियम सार्वजनिक व्यय में अनुशासन सुनिश्चित करता है
पर्यावरणीय-संरचनात्मक
- जलाशय से प्रवाह का नियमन निचले क्षेत्र (डाउनस्ट्रीम) में जल-उपलब्धता को प्रभावित करता है, इसलिए न्यूनतम आवश्यक जल की व्यवस्था अनिवार्य की गई है
- बांध-निर्माण से पूर्व मृदा परीक्षण और भूगर्भीय उपयुक्तता की जांच पर्वतीय पारिस्थितिकी के संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है
शासन-संबंधी
- डिजाइन का मान्यता प्राप्त संस्था से सत्यापन और तृतीय पक्ष गुणवत्ता जांच परियोजना-प्रबंधन में पारदर्शिता का मानक उदाहरण है
- 31 मार्च 2027 तक धनराशि उपयोग की समय-सीमा परियोजना-क्रियान्वयन में समयबद्धता का संकेत देती है
चुनौतियाँ
1. पर्वतीय भूगर्भीय एवं भूकंपीय जोखिम
- हिमालयी क्षेत्र की नवीन और अस्थिर भूगर्भीय संरचना में बांध-निर्माण के लिए विस्तृत भू-तकनीकी जांच आवश्यक होती है
- भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए संरचनात्मक डिजाइन में सुरक्षा-मानकों का कड़ाई से पालन जरूरी है
- भूस्खलन-प्रवण ढलानों पर जलाशय का जलभार भू-स्थिरता को प्रभावित कर सकता है
यूपीएससी लिंक: भूगोल: भारत का भौतिक स्वरूप (हिमालय की संरचना); आपदा प्रबंधन
2. डाउनस्ट्रीम प्रभाव और पारिस्थितिक प्रवाह
- बांध के कारण नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव निचले क्षेत्र के जल-तंत्र और जलीय जीवन को प्रभावित कर सकता है
- न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह (Environmental Flow) बनाए रखना निचले गांवों की पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए आवश्यक है
- निर्माण-काल और संचालन-काल, दोनों में प्रभावित गांवों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रशासनिक चुनौती है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: जल-पारिस्थितिकी; पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया
3. वित्तीय निर्भरता और लागत-वृद्धि
- प्रारंभिक व्यय राज्य आकस्मिकता निधि से होगा, जबकि अंतिम समायोजन केंद्रीय सहायता प्राप्ति पर निर्भर है
- पर्वतीय परियोजनाओं में सामग्री-परिवहन और निर्माण-लागत अधिक होने से लागत बढ़ने की आशंका रहती है
- निर्धारित समय-सीमा में राशि-उपयोग न होने पर परियोजना में विलंब का जोखिम बना रहता है
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध; सार्वजनिक व्यय प्रबंधन
4. बांध सुरक्षा का नियमित निरीक्षण
- बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 (Dam Safety Act, 2021) के तहत निर्मित बांधों की नियमित निगरानी, निरीक्षण और मरम्मत का ढांचा आवश्यक है
- निर्माण के बाद संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने पर संरचनात्मक जोखिम बढ़ सकता है
यूपीएससी लिंक: शासन: नियामक संस्थाएं; आपदा प्रबंधन (बांध सुरक्षा)
5. दीर्घकालिक मांग-आकलन और जल-उपयोग प्रबंधन
- 2055 तक की आबादी और 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की मांग का आकलन जनसंख्या-वृद्धि और पर्यटन-दबाव पर निर्भर है
- पाइपलाइन-रिसाव और वितरण-हानि कम न होने पर उपलब्ध जल का पूरा लाभ नहीं मिलता
- जल भंडारण क्षमता और वास्तविक मांग के बीच संतुलन बनाए रखना सतत प्रबंधन का विषय है
यूपीएससी लिंक: भूगोल: जल संसाधन; सतत विकास लक्ष्य (SDG 6: स्वच्छ जल एवं स्वच्छता)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| भूगर्भीय स्थिरता | हिमालयी ढलानों और भूकंपीय क्षेत्र में संरचना की सुरक्षा और दीर्घायु |
| निचले क्षेत्र का जल-प्रवाह | बांध से नियंत्रित प्रवाह के कारण डाउनस्ट्रीम गांवों और जलीय तंत्र पर प्रभाव |
| वित्तीय समायोजन में विलंब | केंद्रीय सहायता (SASCI) प्राप्ति में देरी से परियोजना-प्रगति प्रभावित होने का जोखिम |
| लागत और समय-सीमा | पर्वतीय निर्माण में लागत-वृद्धि और 31 मार्च 2027 की उपयोग-समय-सीमा की चुनौती |
| संचालन और रखरखाव | निर्माण के बाद नियमित निरीक्षण और बांध सुरक्षा मानकों के अनुपालन की व्यवस्था |
| वितरण-हानि | पुरानी या अपर्याप्त पेयजल पाइपलाइन से जल-रिसाव और असमान आपूर्ति की समस्या |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (Special Assistance to States for Capital Investment – SASCI)
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti National Master Plan) के अंतर्गत पीएम गतिशक्ति पोर्टल
आगे की राह
- डिजाइन, ड्राइंग और स्थल-चयन का मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा समयबद्ध सत्यापन सुनिश्चित किया जाए
- भूकंपीय और भूस्खलन-संवेदी क्षेत्र के लिए विस्तृत भू-तकनीकी अध्ययन को निर्माण से पहले अनिवार्य किया जाए
- न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह की मात्रा को वैज्ञानिक आकलन से तय कर उसकी निगरानी की व्यवस्था बनाई जाए
- डाउनस्ट्रीम गांवों के लिए निर्बाध पेयजल का एक स्पष्ट निगरानी-ढांचा और शिकायत-निवारण तंत्र बने
- बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुरूप संचालन, निरीक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी पहले से निर्धारित की जाए
- केंद्रीय सहायता के समायोजन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाकर राज्य-बजट पर वित्तीय दबाव सीमित किया जाए
- पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर प्रगति का नियमित और सार्वजनिक अद्यतन हो, जिससे पारदर्शिता बनी रहे
- वितरण-नेटवर्क में रिसाव-नियंत्रण और जल-उपयोग दक्षता पर भी साथ-साथ ध्यान दिया जाए, ताकि भंडारित जल का पूरा लाभ मिले
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जल सुरक्षा (Water Security) · पर्वतीय क्षेत्र और जल प्रबंधन · बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 (Dam Safety Act, 2021) · राज्य सूची की प्रविष्टि 17 (Entry 17, State List) · राज्य आकस्मिकता निधि (State Contingency Fund) · विशेष सहायता योजना: SASCI (Special Assistance to States for Capital Investment) · पीएम गतिशक्ति (PM Gati Shakti) · जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) · पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) · निचले प्रवाह क्षेत्र की पारिस्थितिकी (Downstream Ecology) · सहभागी शासन (Participatory Governance) · सतत विकास (Sustainable Development)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 267 — राज्य आकस्मिकता निधि का संवैधानिक आधार
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 17 — जल आपूर्ति, सिंचाई और जलाशय
अवधारणा प्रवाह
पर्वतीय नगर गैरसैंण में पेयजल की दीर्घकालिक कमी की समस्या → रामगंगा नदी पर 35 मीटर ऊंचे बांध का प्रस्ताव → 122.6891 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति; पहली किश्त 2.454 करोड़ रुपये राज्य आकस्मिकता निधि से → गुणवत्ता, मृदा और भूगर्भीय जांच के बाद डिजाइन का अंतिम रूप → 3 लाख घन मीटर जल भंडारण से 2055 तक लगभग 32 हजार आबादी को 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति → निर्माण और संचालन के दौरान डाउनस्ट्रीम गांवों को निर्बाध पेयजल तथा न्यूनतम जल-प्रवाह सुनिश्चित → SASCI से समायोजन, 31 मार्च 2027 तक धनराशि-उपयोग और पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर निगरानी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 267 के अंतर्गत भारत की आकस्मिकता निधि की व्यवस्था की गई है।
2. राज्य की आकस्मिकता निधि राज्यपाल के निपटान में रखी जाती है और उसके अग्रिम से अप्रत्याशित व्यय की पूर्ति की जा सकती है, जब तक विधानमंडल उसकी अनुमति न दे।
3. राज्य की आकस्मिकता निधि का प्रबंधन वित्त आयोग द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 267(1) भारत की संचित निधि के अलावा आकस्मिकता निधि की व्यवस्था करता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 267(2) के अंतर्गत राज्य आकस्मिकता निधि राज्यपाल के निपटान में रहती है, और अग्रिम अप्रत्याशित व्यय के लिए दिया जाता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि इसका प्रबंधन सरकार (वित्त विभाग) के अधीन होता है, वित्त आयोग के अधीन नहीं।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
अभिकथन (A): पर्वतीय राज्य में पेयजल आपूर्ति की प्राथमिक जिम्मेदारी मुख्यतः राज्य सरकार की होती है।
कारण (R): संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें, जलनिकासी, तटबंध और जल भंडारण राज्य विषय के रूप में सम्मिलित हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में जल (जल आपूर्ति, नहरें, जलनिकासी, तटबंध, जल भंडारण और जल-शक्ति) राज्य विषय है, इसलिए पेयजल आपूर्ति की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य की होती है। यह व्याख्या (R) अभिकथन (A) को सीधे स्पष्ट करती है। अंतर-राज्यीय नदियों का नियमन संघ सूची की प्रविष्टि 56 में है, जो यहाँ प्रासंगिक नहीं है।
Q3. भारत सरकार की वह केंद्रीय योजना कौन-सी है जिसके अंतर्गत राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता दी जाती है और जिसके तहत राज्यों को मिलने वाली धनराशि का समायोजन परियोजनाओं के भुगतान के साथ किया जा सकता है?
- SASCI (Special Assistance to States for Capital Investment)
- AMRUT (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation)
- PMKSY (Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana)
- नमामि गंगे कार्यक्रम (Namami Gange Programme)
उत्तर: SASCI (Special Assistance to States for Capital Investment) — SASCI वित्त मंत्रालय की ऐसी योजना है जिसके अंतर्गत राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए विशेष सहायता दी जाती है। AMRUT शहरी जल एवं सीवरेज पर केंद्रित है, PMKSY सिंचाई पर, और नमामि गंगे गंगा के संरक्षण पर केंद्रित है, इसलिए ये विकल्प इस प्रश्न के उत्तर नहीं हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पर्वतीय राज्यों में पेयजल सुरक्षा के लिए छोटे और मध्यम आकार के बांधों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या ऐसी परियोजनाओं के निर्माण के समय निचले प्रवाह क्षेत्र के गांवों के जल अधिकारों और पारिस्थितिकी की रक्षा की जा सकती है? उपयुक्त तर्कों सहित विचार दीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (मॉडल उत्तर कंकाल):
1. भूमिका: गैरसैंण (चमोली, उत्तराखंड) की पेयजल समस्या और रामगंगा पर 35 मीटर ऊंचे बांध की 122.69 करोड़ रुपये की स्वीकृति का तथ्यात्मक उल्लेख; परियोजना का लक्ष्य 2055 तक लगभग 32 हजार की आबादी को 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन जल देना और लगभग 3 लाख घन मीटर भंडारण क्षमता।
2. संवैधानिक एवं संस्थागत ढांचा: जल आपूर्ति, सिंचाई और जल भंडारण राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में हैं; अंतर-राज्यीय नदियों का नियमन संघ सूची की प्रविष्टि 56 और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत आता है; अनुच्छेद 262 अंतर-राज्यीय जल विवादों के निर्णय से संबंधित है। बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति का निरीक्षण, मरम्मत और आपातकालीन कार्य-योजना से संबंध।
3. वित्तीय ढांचा: राज्य आकस्मिकता निधि (अनुच्छेद 267(2)) से अग्रिम, केंद्र की SASCI योजना से बाद में समायोजन; वित्तीय अनुशासन के प्रावधान (स्वीकृत लागत से बची राशि लौटाना, अतिरिक्त कार्य हेतु सक्षम स्तर की अनुमति, PM Gati Shakti पोर्टल पर अपलोड, 31 मार्च 2027 तक उपयोग)।
4. पक्ष: छोटे बांधों से स्थानीय जल भंडारण, जल जीवन मिशन के ‘हर घर जल’ लक्ष्य की पूर्ति, पर्वतीय बसावट में पाइपलाइन-आधारित आपूर्ति की कठिनाई के मुकाबले लागत-प्रभावी विकल्प, तथा PM Gati Shakti के अंतर्गत बहु-क्षेत्रीय योजना।
5. विपक्ष और संतुलन: हिमालयी भूकंपीय संवेदनशीलता, भूस्खलन और मृदा अस्थिरता; केदारनाथ आपदा (2013) के बाद जलविद्युत और बांध परियोजनाओं पर उठे प्रश्न; नदी के प्रवाह में कमी का निचले प्रवाह क्षेत्र की कृषि, जलीय जीवन और पारिस्थितिकी पर प्रभाव; पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006 के अनुसार स्थल-विशिष्ट अध्ययन की आवश्यकता; विस्थापन और सामुदायिक सहमति के प्रश्न।
6. सुधार के सुझाव: तृतीय पक्ष गुणवत्ता जांच, मान्यता प्राप्त संस्थाओं से डिजाइन सत्यापन, मृदा परीक्षण और भूगर्भीय उपयुक्तता, न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह (ecological flow) का सुनिश्चितीकरण, स्थानीय ग्राम पंचायतों की भागीदारी और जल-संसाधन के प्रबंधन में नदी-घाटी आधारित योजना।
7. निष्कर्ष: छोटे बांध पेयजल सुरक्षा का एक उपयोगी उपकरण हो सकते हैं, परंतु उनकी सफलता डिजाइन-सत्यापन, पारिस्थितिक संतुलन, निचले प्रवाह क्षेत्र के अधिकारों की रक्षा और वास्तविक निगरानी पर निर्भर है; सतत विकास के सिद्धांत के आधार पर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।
स्रोत: amarujala.com
Uttarakhand PCS (UKPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तराखंड के गैरसैंण क्षेत्र में पेयजल समस्या के समाधान हेतु स्वीकृत ‘रामगंगा बांध परियोजना’ का कुल प्रस्तावित बजट कितना है?
- 122.69 करोड़ रुपये
- 120 करोड़ रुपये
- 125 करोड़ रुपये
- 115 करोड़ रुपये
उत्तर: 122.69 करोड़ रुपये — उत्तराखंड सरकार द्वारा गैरसैंण क्षेत्र में पेयजल समस्या के स्थायी समाधान हेतु रामगंगा नदी पर निर्मित होने वाले बांध परियोजना का कुल बजट 122.69 करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया है।
Mains: उत्तराखंड में गैरसैंण क्षेत्र की पेयजल समस्या के समाधान हेतु प्रस्तावित ‘रामगंगा बांध परियोजना’ के महत्व और इससे संबंधित चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। साथ ही, इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सुझाव प्रस्तुत कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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