एएलएमएम नीति: चुनिंदा सौर परियोजनाओं को दिसंबर 2026 तक मिली राहत

एएलएमएम नीति: चुनिंदा सौर परियोजनाओं को दिसंबर 2026 तक मिली राहत — ALMM Policy Exemption for Solar Projects

एएलएमएम नीति: चुनिंदा सौर परियोजनाओं को दिसंबर 2026 तक मिली राहत

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — पर्यावरण
  • Prelims: एएलएमएम सूची-II, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, नेट-मीटरिंग, ओपन एक्सेस नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ, सौर पीवी सेल, आत्मनिर्भर भारत, घरेलू विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा
  • Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा: नवीकरणीय ऊर्जा का मार्ग, आत्मनिर्भर भारत की ओर: घरेलू विनिर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: ALMM नीति भारत को सौर ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसे सीमित छूट के साथ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु डिज़ाइन किया गया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने हाल ही में घोषणा की है कि अनुमोदित मॉडल एवं निर्माता सूची (ALMM) सूची-II की नीति में कोई व्यापक बदलाव नहीं होगा। हालाँकि, नेट-मीटरिंग और ओपन एक्सेस नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ALMM सूची-II से सीमित छूट को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यह निर्णय सौर उद्योग के हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और सौर ऊर्जा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने सौर ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने के लिए प्रतिबद्धता जताई है।
  • ALMM सूची-II को घरेलू सौर पीवी सेल और मॉड्यूल निर्माताओं को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया था, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
  • पहले, नेट-मीटरिंग और ओपन एक्सेस नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ALMM सूची-II से छूट 31 मई 2026 तक उपलब्ध थी।
  • इस छूट के विस्तार का उद्देश्य स्वतंत्र सौर पीवी मॉड्यूल निर्माताओं को अतिरिक्त मांग पैदा करके और उनकी इन्वेंट्री में किए गए निवेश की सुरक्षा करके सहायता प्रदान करना है।
  • यह कदम निर्माताओं को ALMM सूची-II में सूचीबद्ध सौर सेल निर्माताओं से सौर सेल की सोर्सिंग बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय भी देगा, क्योंकि घरेलू क्षमता लगातार बढ़ रही है।
  • यह नीतिगत निर्णय सौर ऊर्जा क्षेत्र में सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करने और घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

अनुमोदित मॉडल एवं निर्माता सूची (ALMM) क्या है?

  • ALMM, जिसका पूर्ण रूप ‘अनुमोदित मॉडल एवं निर्माता सूची’ है, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा जारी एक सूची है।
  • यह सूची भारत में सरकारी परियोजनाओं और सरकारी सहायता प्राप्त परियोजनाओं में उपयोग किए जाने वाले सौर पीवी मॉड्यूल और सेल के अनुमोदित मॉडल और निर्माताओं को सूचीबद्ध करती है।
  • ALMM का मुख्य उद्देश्य भारत में सौर पीवी मॉड्यूल और सेल के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
  • यह सूची दो भागों में विभाजित है: ALMM सूची-I (सौर पीवी मॉड्यूल के लिए) और ALMM सूची-II (सौर पीवी सेल के लिए)।
  • ALMM सूची-II में शामिल होने के लिए निर्माताओं को MNRE द्वारा निर्धारित कड़े गुणवत्ता और प्रदर्शन मानकों को पूरा करना होता है।
  • इस नीति के तहत, सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त सौर परियोजनाओं के लिए केवल ALMM सूची में सूचीबद्ध उत्पादों का उपयोग अनिवार्य है।
  • यह नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • इसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करना भी है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ALMM नीति में कोई व्यापक बदलाव नहीं घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नेट-मीटरिंग और ओपन एक्सेस परियोजनाओं के लिए छूट इन विशिष्ट परियोजनाओं को घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के पूरी तरह से विकसित होने तक लचीलापन प्रदान करता है।
छूट की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक स्वतंत्र सौर पीवी मॉड्यूल निर्माताओं को इन्वेंट्री निवेश की सुरक्षा और घरेलू सेल सोर्सिंग बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय देता है।
घरेलू सौर सेल क्षमता में वृद्धि यह दर्शाता है कि भारत में सौर सेल विनिर्माण क्षमता बढ़ रही है, जिससे भविष्य में आयात पर निर्भरता कम होगी।
हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श नीति निर्माण में समावेशिता और उद्योग की वास्तविकताओं को ध्यान में रखने की सरकार की प्रक्रिया को उजागर करता है।
आत्मनिर्भरता और वैश्विक मूल्य श्रृंखला पर जोर भारत को सौर ऊर्जा उत्पादन में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा: ALMM नीति घरेलू सौर पीवी सेल और मॉड्यूल निर्माताओं को प्रोत्साहित करती है, जिससे भारत में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास होता है।
  • आयात पर निर्भरता में कमी: घरेलू उत्पादन बढ़ने से सौर ऊर्जा उपकरणों के आयात पर भारत की निर्भरता कम होती है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
  • निवेश सुरक्षा: छूट की अवधि बढ़ाने से स्वतंत्र मॉड्यूल निर्माताओं को अपनी इन्वेंट्री में किए गए निवेश की सुरक्षा मिलती है, जिससे व्यापारिक जोखिम कम होता है।
  • तकनीकी उन्नति: घरेलू प्रतिस्पर्धा और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलने से सौर प्रौद्योगिकी में नवाचार और उन्नति होती है।

सामरिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: सौर ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है और बाहरी भू-राजनीतिक कारकों पर निर्भरता कम करती है।
  • वैश्विक नेतृत्व: भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इसकी स्थिति मजबूत होती है।
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान: यह नीति ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के निर्माण पर जोर देती है।
  • जलवायु परिवर्तन से मुकाबला: नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर भारत अपने जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में योगदान देता है।

पर्यावरण महत्व

  • कार्बन उत्सर्जन में कमी: सौर ऊर्जा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: यह नीति भारत को स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में आगे बढ़ाती है, जिससे वायु प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय समस्याओं में कमी आती है।
  • सतत विकास: नवीकरणीय ऊर्जा का विकास संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेष रूप से SDG 7 (किफायती और स्वच्छ ऊर्जा) और SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) को प्राप्त करने में सहायक है।

चुनौतियाँ

1. घरेलू विनिर्माण क्षमता की कमी

  • भारत में सौर पीवी सेल और मॉड्यूल के लिए अभी भी पर्याप्त विनिर्माण क्षमता का अभाव है, खासकर उच्च दक्षता वाले सेल के लिए।
  • यह कमी ALMM नीति के पूर्ण कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न करती है और आयात पर निर्भरता बनाए रखती है।

2. कच्चे माल की उपलब्धता

  • सौर पीवी सेल और मॉड्यूल के निर्माण के लिए आवश्यक कई महत्वपूर्ण कच्चे माल (जैसे पॉलीसिलिकॉन) के लिए भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।
  • यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के प्रति भेद्यता पैदा करता है।

3. प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास

  • घरेलू निर्माताओं को उन्नत सौर प्रौद्योगिकियों (जैसे पेरोव्स्काइट सेल, टैंडम सेल) में अनुसंधान और विकास में निवेश करने की आवश्यकता है ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।
  • वर्तमान में, इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार की गति धीमी है।

4. वित्तपोषण और लागत

  • सौर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है। उच्च वित्तपोषण लागत और लंबी वापसी अवधि घरेलू निर्माताओं के लिए चुनौती है।
  • घरेलू उत्पादों की लागत कभी-कभी आयातित उत्पादों की तुलना में अधिक हो सकती है, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।

5. गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणन

  • घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा कर सकें और उपभोक्ताओं का विश्वास जीत सकें।
  • प्रमाणन प्रक्रियाओं में लगने वाला समय और लागत भी एक चुनौती हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
घरेलू विनिर्माण क्षमता उच्च मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त क्षमता, विशेषकर उच्च दक्षता वाले सेल के लिए।
कच्चे माल की निर्भरता पॉलीसिलिकॉन जैसे प्रमुख कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता, जिससे आपूर्ति श्रृंखला जोखिम बढ़ता है।
प्रौद्योगिकी अंतराल उन्नत सौर प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास में निवेश की कमी, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने का डर।
उच्च वित्तपोषण लागत नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए भारी पूंजी निवेश और उच्च ब्याज दरें।
उत्पाद की लागत घरेलू उत्पादों की लागत कभी-कभी आयातित उत्पादों से अधिक होती है, जिससे मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।
गुणवत्ता और प्रमाणन अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय सौर मिशन (NSM)
  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना – उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल
  • पीएम-कुसुम योजना
  • रूफटॉप सौर कार्यक्रम चरण-II
  • सौर पार्कों का विकास कार्यक्रम
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
  • हरित ऊर्जा गलियारा परियोजना
  • स्ट्रेटेजिक इंटरवेंशन इन ग्रीन एंड एफिशिएंट हाइड्रोजन (SIGHT) कार्यक्रम

आगे की राह

  • घरेलू विनिर्माण क्षमता का विस्तार: PLI योजना जैसे प्रोत्साहन के माध्यम से सौर पीवी सेल और मॉड्यूल के लिए विनिर्माण क्षमता को तेजी से बढ़ाना।
  • अनुसंधान एवं विकास में निवेश: उन्नत सौर प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, जिसमें सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी शामिल हो।
  • कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला का विकास: पॉलीसिलिकॉन जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना और वैकल्पिक स्रोतों की खोज करना।
  • वित्तपोषण तक पहुंच में सुधार: सौर विनिर्माण परियोजनाओं के लिए रियायती वित्तपोषण और आसान ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • कौशल विकास: सौर विनिर्माण और स्थापना के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करना।
  • गुणवत्ता मानकों का सख्त अनुपालन: घरेलू उत्पादों के लिए अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को लागू करना और प्रमाणन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना।
  • निर्यात प्रोत्साहन: घरेलू निर्माताओं को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • नीतिगत स्थिरता: दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित करना ताकि निवेशकों को विश्वास मिल सके और वे बड़े पैमाने पर निवेश कर सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ALMM नीति · सौर ऊर्जा · आत्मनिर्भर भारत · घरेलू विनिर्माण · ऊर्जा सुरक्षा · नवीकरणीय ऊर्जा · वैश्विक मूल्य श्रृंखला · आयात प्रतिस्थापन · उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन · जलवायु परिवर्तन · सतत विकास · हरित अर्थव्यवस्था

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246 (सातवीं अनुसूची): संघ सूची (ऊर्जा), राज्य सूची (विद्युत)
  • राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (DPSP): पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना।
  • विद्युत अधिनियम, 2003: बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और व्यापार को नियंत्रित करता है।
  • राष्ट्रीय सौर मिशन (NSM): भारत की राष्ट्रीय कार्य योजना का हिस्सा।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) फ्रेमवर्क समझौता: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।

अवधारणा प्रवाह

ALMM नीति का कार्यान्वयन  →  घरेलू निर्माताओं को प्रोत्साहन  →  सौर पीवी सेल/मॉड्यूल का घरेलू उत्पादन  →  आयात पर निर्भरता में कमी  →  ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता  →  वैश्विक सौर मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका  →  जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. A. ALMM सूची-II केवल सौर पीवी मॉड्यूल के लिए लागू होती है।
  2. B. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ALMM सूची जारी करता है।
  3. C. नेट-मीटरिंग परियोजनाओं के लिए ALMM सूची-II से छूट 31 मई 2026 को समाप्त हो गई है।
  4. D. ALMM नीति का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा उपकरणों का आयात बढ़ाना है।

उत्तर: B. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ALMM सूची जारी करता है। — कथन A गलत है क्योंकि ALMM सूची-II सौर पीवी सेल के लिए लागू होती है, जबकि सूची-I मॉड्यूल के लिए है। कथन B सही है क्योंकि MNRE ही ALMM सूची जारी करता है। कथन C गलत है क्योंकि छूट को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। कथन D गलत है क्योंकि ALMM नीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात को कम करना है।

Q2. ALMM नीति के संदर्भ में, ‘नेट-मीटरिंग’ और ‘ओपन एक्सेस’ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को दी गई छूट का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. A. आयातित सौर उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देना।
  2. B. घरेलू सौर सेल निर्माताओं को अतिरिक्त मांग पैदा करने के लिए समय देना।
  3. C. सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सरकारी सब्सिडी को कम करना।
  4. D. सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना को पूरी तरह से रोकना।

उत्तर: B. घरेलू सौर सेल निर्माताओं को अतिरिक्त मांग पैदा करने के लिए समय देना। — छूट का प्राथमिक उद्देश्य स्वतंत्र सौर पीवी मॉड्यूल निर्माताओं को अतिरिक्त मांग पैदा करके और उनकी इन्वेंट्री में किए गए निवेश की सुरक्षा करके सहायता प्रदान करना है। साथ ही, यह उन्हें ALMM सूची-II में सूचीबद्ध सौर सेल निर्माताओं से सौर सेल की सोर्सिंग बढ़ाने से पहले पर्याप्त समय भी देता है, क्योंकि घरेलू क्षमता लगातार बढ़ रही है। विकल्प A और C नीति के उद्देश्यों के विपरीत हैं, जबकि विकल्प D पूरी तरह से गलत है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए अनुमोदित मॉडल एवं निर्माता सूची (ALMM) नीति के महत्व का विश्लेषण कीजिए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और आगे की राह पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ALMM नीति के महत्व को समझाते हुए, घरेलू विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा, आयात पर निर्भरता में कमी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों के साथ इसके जुड़ाव पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, घरेलू विनिर्माण क्षमता की कमी, कच्चे माल की निर्भरता, प्रौद्योगिकी अंतराल और वित्तपोषण जैसी प्रमुख चुनौतियों की पहचान करें। अंत में, अनुसंधान एवं विकास में निवेश, PLI योजनाओं का विस्तार, कौशल विकास और नीतिगत स्थिरता जैसे ठोस सुझावों के साथ आगे की राह प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment