एनएचआरसी ने राजस्थान के सरकारी स्कूल में छत गिरने से तीन बच्चों के घायल होने पर लिया स्वतः संज्ञान

एनएचआरसी ने राजस्थान के सरकारी स्कूल में छत गिरने से तीन बच्चों के घायल होने पर लिया स्वतः संज्ञान

एनएचआरसी ने राजस्थान के सरकारी स्कूल में छत गिरने से तीन बच्चों के घायल होने पर लिया स्वतः संज्ञान

स्कूल भवन दुर्घटना से कार्रवाई तकघटनाछत गिरने से 3 बच्चे घायलNHRC संज्ञानस्वतः मामला लियानोटिस जारीजिला मजिस्ट्रेट कोरिपोर्ट माँग2 सप्ताह मेंविद्यालय बंदअस्थायी व्यवस्था
स्कूल भवन दुर्घटना से कार्रवाई तक

✎ NHRC का स्वतः संज्ञान मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 से आता है, जबकि बच्चों के लिए सुरक्षित विद्यालय-भवन के न्यूनतम मानदंड RTE अधिनियम, 2009 की धारा 19 और अनुसूची से तय होते हैं, और आयोग की सिफारिशें गैर-बाध्यकारी…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था और शासन (मानवाधिकार संस्थाएँ, संविधान के मौलिक अधिकार और राज्य के नीति-निदेशक तत्व)  |  GS Paper II — सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा का अधिकार, बाल कल्याण और सार्वजनिक सेवाओं की जवाबदेही)
  • Prelims: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission, NHRC) की संरचना और शक्तियाँ, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 (स्वतः संज्ञान की शक्ति), स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) और शिकायत-आधारित जाँच में अंतर, अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार), अनुच्छेद 21A (86वाँ संविधान संशोधन, 2002; 6 से 14 वर्ष के बच्चों की निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा), निःशुल्क और अनिवार्य बालक शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 19 और अनुसूची (विद्यालय के न्यूनतम मानदंड), शिक्षा का सातवीं अनुसूची में स्थान (समवर्ती सूची, प्रविष्टि 25), NHRC की सिफारिशों की बाध्यकारी प्रकृति (गैर-बाध्यकारी)
  • Essay: मानवाधिकार की संस्थागत सुरक्षा: स्वतः संज्ञान की भूमिका और सीमाएँ, बच्चों का सुरक्षित बचपन: शिक्षा के अधिकार में भौतिक अवसंरचना का स्थान

त्वरित पुनरावृत्ति: NHRC का स्वतः संज्ञान मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 से आता है, जबकि बच्चों के लिए सुरक्षित विद्यालय-भवन के न्यूनतम मानदंड RTE अधिनियम, 2009 की धारा 19 और अनुसूची से तय होते हैं, और आयोग की सिफारिशें गैर-बाध्यकारी होती हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission, NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के उदयपुर जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की जर्जर इमारत की कक्षा में छत का प्लास्टर गिरा, जिससे 7 से 8 वर्ष की आयु के तीन छात्र घायल हो गए। बताया गया है कि इन छात्रों के सिर पर चोट आई और घटना के समय विद्यालय में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। आयोग ने कहा कि यदि समाचार में दी गई जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मामला है। इसी आधार पर उसने उदयपुर के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है, जिसमें घायल छात्रों के स्वास्थ्य की स्थिति भी शामिल हो। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना के बाद विद्यालय को बंद करने का आदेश दिया गया है और प्रशासन कक्षाएँ चलाने के वैकल्पिक इंतजाम कर रहा है। भवन की अंतिम मरम्मत 2020 में होने की बात कही गई है।

पृष्ठभूमि

  • भवन की रखरखाव-व्यवस्था का प्रश्न: समाचार के अनुसार विद्यालय भवन की अंतिम मरम्मत 2020 में हुई थी, जिससे नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल उठता है।
  • बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा का अधिकार: अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा राज्य का संवैधानिक दायित्व है, और इसे सुरक्षित भौतिक परिवेश के बिना पूरा नहीं माना जा सकता।
  • विद्यालय के न्यूनतम मानदंड: निःशुल्क और अनिवार्य बालक शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत भवन सहित विद्यालय अवसंरचना के न्यूनतम मानदंड निर्धारित हैं, जिनका पालन उपयुक्त सरकार और स्थानीय प्राधिकरण को सुनिश्चित करना होता है।
  • शिक्षक की उपस्थिति और निगरानी: घटना के समय शिक्षक की अनुपस्थिति बताई गई है, जो विद्यालय प्रबंधन और निरीक्षण तंत्र की जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न है।
  • जिला प्रशासन की भूमिका: जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) जिले में प्रशासनिक प्रमुख होता है, इसलिए आयोग ने जाँच-रिपोर्ट इसी स्तर से माँगी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) क्या है?

  • NHRC एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना संविधान संशोधन से नहीं, बल्कि मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत हुई है।
  • इसका कार्य संविधान द्वारा प्रदत्त और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में मान्य मानवाधिकारों की रक्षा तथा संवर्धन करना है।
  • इसकी संरचना में अध्यक्ष और सदस्य होते हैं; अध्यक्ष आम तौर पर भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं।
  • धारा 12 के अंतर्गत आयोग शिकायत मिलने पर भी जाँच कर सकता है और स्वतः संज्ञान लेकर भी कार्यवाही शुरू कर सकता है; स्वतः संज्ञान का आधार समाचार या अन्य विश्वसनीय सूचना हो सकती है।
  • जाँच के दौरान आयोग के पास सिविल न्यायालय की कुछ शक्तियाँ होती हैं, जैसे गवाहों को बुलाना और दस्तावेज़ माँगना।
  • आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं; सरकार या संबंधित प्राधिकारी को उन पर कार्रवाई की सूचना देनी होती है।
  • मानवाधिकार का दायरा केवल नागरिक और राजनीतिक अधिकारों तक सीमित नहीं है; शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित परिवेश जैसे आर्थिक-सामाजिक अधिकार भी इसमें सम्मिलित हैं।
  • नोट: राज्य स्तर पर राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) भी कार्य करते हैं; दोनों के क्षेत्राधिकार का निर्धारण अधिनियम के प्रावधानों से होता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) आयोग ने किसी पीड़ित की शिकायत के बिना, मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मामला उठाया। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत आयोग यह शक्ति रखता है।
घटना का स्वरूप सरकारी प्राथमिक विद्यालय की जर्जर इमारत में कक्षा की छत का प्लास्टर गिरा और 7 से 8 वर्ष की उम्र के तीन छात्र घायल हुए। बच्चों के सिर पर चोट आई।
निगरानी में चूक घटना के समय विद्यालय में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। यह बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न है।
प्रशासनिक कार्रवाई उदयपुर के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट में घायल छात्रों के स्वास्थ्य की स्थिति भी शामिल करने को कहा गया।
मरम्मत का इतिहास विद्यालय भवन की आखिरी मरम्मत 2020 में हुई थी। रखरखाव की नियमित व्यवस्था के अभाव की ओर यह संकेत करता है।
अस्थायी व्यवस्था भवन बंद करने के आदेश के बाद प्रशासन ने कक्षाएं चलाने के वैकल्पिक इंतजाम किए। इससे शिक्षा का अधिकार और सुरक्षित भवन, दोनों के बीच संतुलन का प्रश्न उभरता है।

महत्व

मानवाधिकार और बाल अधिकार

  • बच्चों की शारीरिक सुरक्षा जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न भाग मानी गई है। असुरक्षित भवन में बच्चों को रखना इस अधिकार के उल्लंघन का गंभीर प्रश्न है।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ‘यदि रिपोर्ट सच है’ कहकर जांच की शर्त रखी है। इससे तथ्य-परीक्षण पर आधारित, संतुलित प्रक्रिया का संकेत मिलता है।

शिक्षा और विद्यालय व्यवस्था

  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009) के अंतर्गत विद्यालय को न्यूनतम मानक पूरे करने होते हैं, जिनमें भवन और सुरक्षा से जुड़े मानक शामिल हैं।
  • जर्जर भवन और शिक्षक की अनुपस्थिति दोनों एक साथ होना विद्यालय-स्तरीय निगरानी की कमजोरी दर्शाता है। यह प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता और नामांकित बच्चों के विश्वास पर सीधा असर डालता है।

प्रशासनिक और संस्थागत जवाबदेही

  • जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका समन्वय और रिपोर्टिंग की होती है। आयोग की नोटिस प्रक्रिया से जिला प्रशासन की जवाबदेही तय होती है।
  • मानवाधिकार आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी न्यायिक आदेश नहीं होतीं, फिर भी उनसे नीति-निर्माण और प्रशासनिक सुधार पर दबाव बनता है।

चुनौतियाँ

1. विद्यालय भवनों का जर्जर होना

  • पुराने भवनों की नियमित संरचनात्मक जांच और मरम्मत न होने से छत, दीवार और प्लास्टर जैसे हिस्से कमजोर हो जाते हैं।
  • 2020 के बाद मरम्मत का उल्लेख बताता है कि रखरखाव बजट और उसके उपयोग में निरंतरता की कमी हो सकती है।

2. शिक्षकों की उपस्थिति और निगरानी

  • विद्यालय में शिक्षक की अनुपस्थिति में छोटे बच्चों की देखभाल और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया दोनों प्रभावित होते हैं।
  • शिक्षक उपस्थिति की निगरानी के लिए प्रभावी प्रणाली और जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता बनी रहती है।

3. घायल बच्चों के बाद की व्यवस्था

  • घायल बच्चे स्वयं चलकर घर गए और फिर परिजनों ने अस्पताल पहुंचाया। इससे घटना के तुरंत बाद आपात चिकित्सा और सूचना तंत्र की कमजोरी दिखती है।
  • इलाज, स्वास्थ्य जांच और मनोवैज्ञानिक सहायता की व्यवस्था पर रिपोर्ट में स्पष्टता जरूरी है।

4. शिक्षा के अधिकार और सुरक्षा के बीच तनाव

  • भवन बंद करने से बच्चे विद्यालय से दूर हो सकते हैं, जिससे शिक्षा का अधिकार प्रभावित होता है। सुरक्षा और सुलभता के बीच संतुलन बनाना कठिन है।
  • अस्थायी कक्षाओं की व्यवस्था की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच भी आवश्यक है।

5. मानवाधिकार आयोग की सीमाएं

  • आयोग की सिफारिशें सलाहकारी प्रकृति की होती हैं। कार्रवाई और दोषी की जवाबदेही तय करना राज्य सरकार और प्रशासन का कार्य है।
  • आयोग के पास स्वतः संज्ञान की शक्ति है, परंतु लंबित मामलों के निपटान और क्रियान्वयन की निगरानी अलग चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भवन रखरखाव 2020 के बाद मरम्मत का उल्लेख; नियमित संरचनात्मक जांच का अभाव संभव
शिक्षक उपस्थिति घटना के समय शिक्षक अनुपस्थित; बच्चों की निगरानी कमजोर
आपात प्रतिक्रिया घायल बच्चों का स्वयं घर जाना; विद्यालय स्तर पर प्राथमिक उपचार व्यवस्था पर प्रश्न
शिक्षा तक पहुंच विद्यालय बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित; अस्थायी व्यवस्था की गुणवत्ता जांच आवश्यक
जवाबदेही तय करना नोटिस के बाद रिपोर्ट और कार्रवाई का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha)

आगे की राह

  • सभी सरकारी विद्यालय भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा जांच नियमित अंतराल पर और स्वतंत्र रूप से हो, तथा जर्जर भवनों की सूची सार्वजनिक की जाए।
  • विद्यालय भवन की मरम्मत और रखरखाव के लिए निर्धारित बजट का समय पर उपयोग और उसकी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
  • जर्जर भवनों में कक्षाएं न चलें, इसके लिए स्पष्ट मानक प्रक्रिया बनाई जाए, जिसमें अस्थायी कक्षाओं की सुरक्षा जांच भी शामिल हो।
  • शिक्षक उपस्थिति और विद्यालय में बच्चों की निगरानी के लिए डिजिटल और सामुदायिक निगरानी तंत्र को सशक्त किया जाए।
  • विद्यालय स्तर पर प्राथमिक उपचार किट, प्रशिक्षित कर्मचारी और आपात संपर्क व्यवस्था अनिवार्य की जाए।
  • विद्यालय प्रबंधन समिति की भूमिका बढ़ाई जाए, ताकि स्थानीय अभिभावक और समुदाय भवन की स्थिति पर नियमित नजर रख सकें।
  • आयोग के निर्देशों के क्रियान्वयन की समय-सीमा तय हो और रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।
  • घायल बच्चों के उपचार और स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी हो, ताकि दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Protection of Human Rights Act, 1993) · राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) · स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) · अनुच्छेद 21 (Article 21) · अनुच्छेद 21क (Article 21A) · निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009) · समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) · विद्यालय अवसंरचना (School Infrastructure) · राज्य की सकारात्मक बाध्यता (Positive Obligation of the State) · गैर-बाध्यकारी सिफारिशें (Non-binding Recommendations) · राज्य दायित्व (State Liability) · समवर्ती सूची (Concurrent List)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: बच्चों की शारीरिक सुरक्षा और जीवन का अधिकार
  • अनुच्छेद 21A: छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा
  • अनुच्छेद 39(च): बच्चों को स्वस्थ और गरिमापूर्ण विकास के अवसर

अवधारणा प्रवाह

जर्जर विद्यालय भवन में रखरखाव की कमी और संरचनात्मक कमजोरी।  →  छत का प्लास्टर गिरना और तीन बच्चों का घायल होना, जबकि शिक्षक उपस्थित नहीं थे।  →  मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा स्वतः संज्ञान।  →  जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस और दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट व घायल बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की मांग।  →  भवन बंद होना, अस्थायी कक्षाएं और रिपोर्ट के आधार पर जवाबदेही तथा सुधार का निर्णय।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है।
2. आयोग के अध्यक्ष के लिए भारत का पूर्व मुख्य न्यायाधीश होना अनिवार्य है।
3. आयोग मानवाधिकार उल्लंघन के किसी मामले में स्वतः संज्ञान ले सकता है।
4. आयोग की सिफारिशें सिविल न्यायालय की डिक्री की भाँति सभी पर बाध्यकारी और प्रवर्तनीय होती हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी चार

उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: आयोग की स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत हुई है। कथन 2 सही है: अधिनियम के अनुसार अध्यक्ष भारत का पूर्व मुख्य न्यायाधीश होता है। कथन 3 सही है: धारा 12 के अंतर्गत आयोग स्वतः संज्ञान लेकर जाँच कर सकता है। कथन 4 गलत है: आयोग की सिफारिशें गैर-बाध्यकारी होती हैं; संबंधित प्राधिकारी को कार्रवाई की सूचना देनी होती है, पर उन्हें डिक्री की तरह लागू नहीं किया जा सकता।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक कथन में एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
अभिकथन (A): छह से चौदह वर्ष के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
कारण (R): संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 21क जोड़ा गया, जो भाग III में शामिल है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, परंतु R गलत है।
  4. A गलत है, परंतु R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अनुच्छेद 21क छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाता है। इसे 86वें संशोधन (2002) द्वारा जोड़ा गया और यह भाग III में है। चूँकि यह मौलिक अधिकार है, इसलिए इसका प्रवर्तन अनुच्छेद 32 और 226 के माध्यम से हो सकता है, अतः R, A की सही व्याख्या करता है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक/वैधानिक प्रावधान)
A. अनुच्छेद 21क
B. अनुच्छेद 51क (ट)
C. अनुच्छेद 45 (86वें संशोधन के बाद)

सूची-II (विषय)
1. छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा
2. छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार
3. छह से चौदह वर्ष के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने का माता-पिता/अभिभावक का मूल कर्तव्य

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-2, B-3, C-1
  2. A-1, B-2, C-3
  3. A-3, B-1, C-2
  4. A-2, B-1, C-3

उत्तर: A-2, B-3, C-1 — अनुच्छेद 21क निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार है (2)। अनुच्छेद 51क(ट) माता-पिता/अभिभावक का मूल कर्तव्य है कि वे छह से चौदह वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर दें (3)। अनुच्छेद 45 में 86वें संशोधन के बाद छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का निर्देश है (1)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राज्य के सरकारी विद्यालयों में जर्जर भवनों के कारण बच्चों की सुरक्षा पर होने वाली घटनाएँ शिक्षा के अधिकार और जीवन के अधिकार दोनों को प्रभावित करती हैं। शिक्षा के अधिकार के संवैधानिक और वैधानिक ढाँचे की आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि मानवाधिकार आयोग के स्वतः संज्ञान और जिला प्रशासन की जवाबदेही के बीच किस प्रकार की संस्थागत संगति होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) प्रस्तावना: उदयपुर घटना को बिना दलगत संदर्भ के, सुरक्षित विद्यालय अवसंरचना के प्रश्न के रूप में रखें; रिपोर्ट में बताए तथ्य (सात से आठ वर्ष के तीन बच्चे, छत का प्लास्टर गिरना, घटना के समय शिक्षक अनुपस्थित, 2020 में अंतिम मरम्मत, विद्यालय बंद करने का आदेश, दो सप्ताह में रिपोर्ट) संक्षेप में दें। (2) संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार, सुरक्षित वातावरण सहित) के अंतर्गत Mohini Jain बनाम कर्नाटक राज्य (1992) और Unni Krishnan बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993) का उल्लेख, जिनसे शिक्षा के अधिकार की मान्यता बढ़ी और उसके बाद 86वें संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 21क, अनुच्छेद 45 (संशोधित) और अनुच्छेद 51क(ट) आए; नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 39(च) का उल्लेख। (3) वैधानिक ढाँचा: RTE अधिनियम, 2009 की धारा 19 और अनुसूची में विद्यालय भवन, कक्षा-कक्ष और सुविधाओं के न्यूनतम मानक; धारा 8 और 9 में राज्य सरकार और स्थानीय प्राधिकारी के दायित्व। शिक्षा समवर्ती सूची (प्रविष्टि 25) का विषय होने से केंद्र और राज्य की साझा भूमिका; समग्र शिक्षा के अंतर्गत विद्यालय भवन निर्माण और मरम्मत हेतु वित्तीय सहायता। (4) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका: मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 (स्वतः संज्ञान, जाँच की शक्ति), धारा 18 (सिफारिशें); इन सिफारिशों का गैर-बाध्यकारी स्वरूप और इसके प्रभाव की सीमा; नोटिस और रिपोर्ट-माँग को निवारक और पारदर्शी प्रक्रिया के रूप में देखना। (5) परिणाम पहलू (दूसरा भाग): यदि भवन की जर्जरता की सूचना के बावजूद मरम्मत न हुई हो तो राज्य का दायित्व: Nilabati Behera बनाम उड़ीसा राज्य (1993) में सार्वजनिक विधि के अंतर्गत अनुच्छेद 21 उल्लंघन पर मुआवजा; लापरवाही और उत्तरदायित्व का निर्धारण; निरीक्षण तंत्र, आपदा-सुरक्षा ऑडिट और विद्यालय प्रबंधन समिति की भूमिका। (6) संतुलित दृष्टि: आयोग की भूमिका निगरानी और सिफारिश की है, कार्यकारी और वित्तीय क्षमता का प्रश्न प्रशासन के पास है; दोनों के बीच समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई का सुझाव। (7) निष्कर्ष: सुरक्षित भवन को शिक्षा के अधिकार का अनिवार्य घटक मानकर नियमित निरीक्षण, सार्वजनिक रिपोर्टिंग और जवाबदेही तय करना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा हाल ही में राजस्थान के उदयपुर जिले में एक सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत में छत के प्लास्टर गिरने से तीन छात्रों के घायल होने की घटना पर किस अधिनियम/नियम के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है?

  1. A. राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
  2. B. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009
  3. C. बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2012
  4. D. सार्वजनिक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011

उत्तर: B. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 — शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में सुरक्षित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

Mains: राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी ढांचे की कमी और सुरक्षा मानकों के पालन में कमी के कारण उत्पन्न मानवाधिकार संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। इसके निवारण हेतु राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा सुझाए गए उपायों का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार की भूमिका पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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