30 Jul एनजीटी ने फोर्ट कोच्चि तट प्रदूषण पर एलएसजीडी की रिपोर्ट से असंतोष व्यक्त किया
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष; विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय। | GS Paper III — पर्यावरण प्रदूषण और अवक्रमण; पर्यावरण प्रभाव आकलन। | GS Paper I — भूगोल: भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल।
- Prelims: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ), स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD), फोर्ट कोच्चि
- Essay: पर्यावरण संरक्षण में न्यायिक सक्रियता की भूमिका, सतत विकास और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, भारत में शहरीकरण और अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटान के लिए स्थापित एक सांविधिक निकाय है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर कार्य करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने केरल के फोर्ट कोच्चि के तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण के संबंध में स्थानीय स्वशासन विभाग (Local Self-Government Department – LSGD) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया है। अधिकरण ने कहा है कि रिपोर्ट में प्रत्येक संबंधित प्राधिकरण के लिए विशिष्ट कार्य योजना और कार्यान्वित किए जा रहे उपायों का विवरण नहीं है। NGT ने विभाग को इस मामले में की गई कार्रवाई और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसमें दीर्घकालिक कायाकल्प और सौंदर्यीकरण योजना भी शामिल हो।
पृष्ठभूमि
- फोर्ट कोच्चि, केरल का एक ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र है, जो अपने बैकवाटर और समुद्र तटों के लिए जाना जाता है।
- तटीय क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण, विशेषकर समुद्री कचरा, शैवाल जमाव और मिश्रित मलबे के कारण पर्यटन क्षमता और पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- NGT ने पहले स्थानीय स्वशासन विभाग, केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एर्नाकुलम जिला कलेक्टर को बैकवाटर और तटीय जल से तैरते मलबे को हटाने के लिए आधुनिक उपकरणों की तैनाती की संभावना पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
- विभाग ने फोर्ट कोच्चि समुद्र तट के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के लिए एक दीर्घकालिक योजना पर विचार करने की बात कही है, जिसमें सतत पर्यटन सिद्धांतों को शामिल किया जाएगा।
- कचरा प्रबंधन और स्वच्छता सुविधाओं के अंतराल मूल्यांकन के साथ-साथ अंतर-विभागीय समन्वय में सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है।
- IITs/NITs के विशेषज्ञों और कोचीन पोर्ट ट्रस्ट, केरल पर्यटन विकास निगम जैसे निकायों के अधिकारियों के साथ तकनीकी समन्वय बैठकें आयोजित करने की योजना है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT) क्या है?
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है।
- इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और शीघ्र निपटान करना है।
- यह पर्यावरण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और क्षतिग्रस्त व्यक्तियों या संपत्ति के लिए राहत एवं मुआवजा प्रदान करने का भी कार्य करता है।
- NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होता है।
- इसके पास जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974, वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 सहित विभिन्न पर्यावरण कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र है।
- अधिकरण का मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसकी चार क्षेत्रीय पीठें भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई में स्थित हैं।
- यह पर्यावरण संबंधी विवादों के त्वरित समाधान के माध्यम से देश में सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- इसके निर्णयों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| तटीय प्रदूषण | फोर्ट कोच्चि के बैकवाटर और तटीय क्षेत्रों में अपशिष्ट पदार्थों का जमाव पर्यटन और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। |
| NGT की असंतुष्टि | राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD) की रिपोर्ट को अपूर्ण पाया, जो समस्या के समाधान में सरकारी एजेंसियों की अक्षमता को दर्शाता है। |
| कार्य योजना का अभाव | विभाग की रिपोर्ट में प्रत्येक संबंधित प्राधिकरण के लिए विशिष्ट कार्य योजना और कार्यान्वित किए जा रहे उपायों का विवरण नहीं था। |
| दीर्घकालिक योजना | फोर्ट कोच्चि समुद्र तट के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण की दीर्घकालिक योजना पर विचार किया जा रहा है, जिसमें सतत पर्यटन के सिद्धांतों को शामिल किया जाएगा। |
| आधुनिक उपकरण | समुद्र से बहकर आने वाले कचरे और गाद को हटाने के लिए मशीनीकृत और हस्त-संचालित रेत सफाई मशीनों तथा समुद्री डिब्बे (sea bins) जैसे आधुनिक उपकरणों के उपयोग की संभावना तलाशी जा रही है। |
| अंतर-विभागीय समन्वय | प्रदूषण से निपटने और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार के लिए विभिन्न विभागों और हितधारकों के बीच समन्वय बैठकों पर जोर दिया गया है। |
महत्व
पर्यावरण
- फोर्ट कोच्चि के तटीय क्षेत्रों में बढ़ता प्रदूषण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (marine ecosystem) और जैव विविधता (biodiversity) के लिए गंभीर खतरा है।
- यह प्रदूषण जल गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जिससे जलीय जीवन और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था
- फोर्ट कोच्चि एक प्रमुख पर्यटन स्थल है; प्रदूषण इसकी पर्यटन क्षमता को कम करता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाता है।
- स्वच्छ समुद्र तट और बैकवाटर पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों के लिए आय के स्रोत बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
शासन और जवाबदेही
- NGT की असंतुष्टि सरकारी विभागों की पर्यावरणीय नियमों के प्रति जवाबदेही और उनके कार्यान्वयन की क्षमता पर सवाल उठाती है।
- यह घटना प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन (waste management) नीतियों और उनके कुशल कार्यान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
सतत विकास
- यह मामला सतत विकास (sustainable development) लक्ष्यों, विशेष रूप से स्वच्छ जल और स्वच्छता, और स्थायी शहरों और समुदायों से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने की चुनौती को दर्शाता है।
- तटीय क्षेत्रों का सतत प्रबंधन भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. अपशिष्ट प्रबंधन का अभाव
- तटीय क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट (solid waste) और प्लास्टिक कचरे का अनुचित निपटान एक बड़ी समस्या है।
- अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण (segregation) और प्रसंस्करण (processing) के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे और प्रणालियों की कमी है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
2. अंतर-विभागीय समन्वय की कमी
- विभिन्न सरकारी विभागों (स्थानीय स्वशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यटन विभाग) के बीच प्रभावी समन्वय का अभाव है।
- यह समस्या के समाधान के लिए एक एकीकृत और समग्र दृष्टिकोण (holistic approach) अपनाने में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: शासन के महत्वपूर्ण पहलू
3. तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ
- आधुनिक अपशिष्ट हटाने वाले उपकरणों (जैसे समुद्री डिब्बे, उभयचर अपशिष्ट हटाने वाली प्रणालियाँ) को तैनात करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- इन प्रौद्योगिकियों के रखरखाव और संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास
4. जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन
- स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के बीच अपशिष्ट निपटान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता की कमी है।
- समुद्र तटों और बैकवाटर में कचरा फेंकने की आदत को बदलना एक बड़ी सामाजिक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण
5. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- मानसून के दौरान समुद्री कचरा और शैवाल जमाव (algal deposits) की समस्या बढ़ जाती है, जो जलवायु परिवर्तन और समुद्र के स्तर में वृद्धि से और अधिक गंभीर हो सकती है।
- तटीय कटाव (coastal erosion) और तूफान भी प्रदूषण की समस्या को बढ़ा सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तटीय प्रदूषण | समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को खतरा; पर्यटन क्षमता में कमी। |
| अपूर्ण कार्य योजना | प्रदूषण से निपटने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के बीच स्पष्ट दिशा और जवाबदेही का अभाव। |
| अपर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन | अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण और निपटान के लिए आधुनिक प्रणालियों और बुनियादी ढांचे की कमी। |
| समन्वय की कमी | विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी हितधारकों के बीच प्रभावी सहयोग का अभाव। |
| दीर्घकालिक योजना का कार्यान्वयन | सतत पर्यटन और समुद्र तट के कायाकल्प के लिए प्रस्तावित योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन में चुनौतियाँ। |
| तकनीकी और वित्तीय संसाधन | आधुनिक सफाई उपकरणों को खरीदने, स्थापित करने और बनाए रखने के लिए आवश्यक धन और विशेषज्ञता की कमी। |
आगे की राह
- एक विस्तृत और समयबद्ध कार्य योजना तैयार की जाए, जिसमें प्रत्येक संबंधित प्राधिकरण की विशिष्ट भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से परिभाषित हों।
- आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकों, जैसे समुद्री डिब्बे, उभयचर अपशिष्ट हटाने वाली प्रणालियाँ और मशीनीकृत समुद्र तट सफाई मशीनों को तैनात किया जाए।
- स्थानीय स्वशासन विभाग, केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यटन विभाग और अन्य हितधारकों के बीच प्रभावी अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित किया जाए।
- समुद्र तटों और बैकवाटर में अपशिष्ट निपटान के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचा, जैसे स्टील के डिब्बे और बोतल बूथ, स्थापित किए जाएँ।
- अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं में सुधार और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में स्थानीय समुदायों और पर्यटकों के बीच जन जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
- IITs/NITs के विशेषज्ञों और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ तकनीकी समन्वय बैठकें आयोजित की जाएँ ताकि व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत योजना तैयार की जा सके।
- फोर्ट कोच्चि समुद्र तट के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के लिए एक दीर्घकालिक सतत पर्यटन योजना विकसित और कार्यान्वित की जाए।
- प्रदूषण नियंत्रण उपायों के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए ताकि उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय हरित अधिकरण · तटीय प्रदूषण · स्थानीय स्वशासन विभाग · पर्यावरण संरक्षण · सतत पर्यटन · अपशिष्ट प्रबंधन · जल प्रदूषण · न्यायिक सक्रियता · एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन · पर्यावरण प्रभाव आकलन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा करना नागरिक का कर्तव्य’}
अवधारणा प्रवाह
तटीय क्षेत्रों में अपशिष्ट का जमाव → पर्यावरणीय प्रदूषण और पारिस्थितिकी तंत्र को क्षति → पर्यटन क्षमता में कमी और आर्थिक नुकसान → NGT द्वारा सरकारी रिपोर्ट पर असंतुष्टि → प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और समन्वय की आवश्यकता → दीर्घकालिक सतत समाधानों का कार्यान्वयन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. NGT की स्थापना एक संवैधानिक निकाय के रूप में की गई थी, जिसका उल्लेख भारत के संविधान में है।
2. NGT पर्यावरण संरक्षण और वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए स्थापित किया गया था।
3. NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। NGT की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 (National Green Tribunal Act, 2010) के तहत एक वैधानिक निकाय (Statutory body) के रूप में की गई थी, न कि संवैधानिक निकाय के रूप में। कथन 2 सही है। NGT का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों का प्रभावी और शीघ्र निपटान करना है। कथन 3 सही है। NGT को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना होता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि निर्णय निष्पक्ष और न्यायसंगत हों, भले ही वह सिविल प्रक्रिया संहिता से बाध्य न हो।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अधिकार क्षेत्र में आता/आते है/हैं?
1. जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974
2. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
3. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
4. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की अनुसूची I में उन अधिनियमों को सूचीबद्ध किया गया है जिनके तहत NGT के पास अधिकार क्षेत्र है। इनमें जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 शामिल हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस संदर्भ में, फोर्ट कोच्चि तटरेखा पर प्रदूषण के मामले में NGT के हालिया निर्देशों का विश्लेषण कीजिए और भारत में पर्यावरण शासन में इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना और उसके जनादेश का संक्षिप्त परिचय दें। फोर्ट कोच्चि मामले का संदर्भ दें।
2. **फोर्ट कोच्चि मामले का विश्लेषण:**
* NGT द्वारा स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD) की रिपोर्ट पर असंतोष के कारण।
* कार्य योजना की कमी, अधिकारियों की विशिष्ट भूमिकाओं का अभाव, और कार्यान्वित उपायों के विवरण की अनुपस्थिति।
* NGT द्वारा भविष्य की कार्रवाई, दीर्घकालिक योजना (समुद्र तट कायाकल्प, मशीनीकृत सफाई), और अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर।
* IITs/NITs और अन्य हितधारकों के साथ तकनीकी समन्वय बैठकों की आवश्यकता।
3. **भारत में पर्यावरण शासन में NGT की प्रभावशीलता:**
* **सकारात्मक पहलू:**
* **विशेषज्ञता:** पर्यावरण संबंधी मामलों में तकनीकी और वैज्ञानिक विशेषज्ञता प्रदान करना।
* **त्वरित न्याय:** पर्यावरण संबंधी विवादों का शीघ्र निपटान।
* **न्यायिक सक्रियता:** प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना लगाना और उपचारात्मक उपाय लागू करना। (उदाहरण: गंगा/यमुना प्रदूषण, अवैध रेत खनन)।
* **नीति निर्माण पर प्रभाव:** सरकार को पर्यावरण नीतियों को मजबूत करने के लिए प्रेरित करना।
* **जन जागरूकता:** पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
* **चुनौतियाँ/सीमाएँ:**
* **कार्यान्वयन की कमी:** NGT के आदेशों के प्रभावी कार्यान्वयन में राज्यों और स्थानीय निकायों की ओर से देरी या उदासीनता।
* **संसाधनों की कमी:** पर्याप्त कर्मचारियों, विशेषज्ञ सदस्यों और वित्तीय संसाधनों का अभाव।
* **अधिकार क्षेत्र संबंधी विवाद:** कुछ मामलों में NGT के अधिकार क्षेत्र को लेकर अदालतों और अन्य निकायों के साथ टकराव।
* **जन जागरूकता का अभाव:** आम जनता और कुछ अधिकारियों के बीच NGT की भूमिका और शक्तियों के बारे में जानकारी की कमी।
* **अपील प्रक्रिया:** NGT के निर्णयों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की लंबी प्रक्रिया।
4. **निष्कर्ष:** NGT की भूमिका को स्वीकार करते हुए, इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने, संसाधनों को बढ़ाने और अंतर-एजेंसी समन्वय में सुधार की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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