एसजीबी 2018-19 सीरीज़ VI की premature redemption: 12 अगस्त 2026 को मिलेगा ₹15,102 प्रति यूनिट

Premature redemption under Sovereign Gold Bond (SGB) Scheme - Redemption Price for premature redemption of SGB 2018-19 S — concept mind map

एसजीबी 2018-19 सीरीज़ VI की premature redemption: 12 अगस्त 2026 को मिलेगा ₹15,102 प्रति यूनिट

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SGB Scheme Flow

✎ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना भौतिक सोने की मांग को कम करने और घरेलू बचत को वित्तीय बचत में बदलने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है और इसमें समयपूर्व मोचन का विकल्प भी…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।  |  GS Paper III — सरकारी बजटिंग।
  • Prelims: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारत सरकार, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA), सोने की शुद्धता, समयपूर्व मोचन, ब्याज भुगतान, राजकोषीय घाटा
  • Essay: भारत में निवेश के बदलते स्वरूप और सरकारी योजनाओं की भूमिका, स्वर्ण बाज़ार का विनियमन और अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव

त्वरित पुनरावृत्ति: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना भौतिक सोने की मांग को कम करने और घरेलू बचत को वित्तीय बचत में बदलने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है और इसमें समयपूर्व मोचन का विकल्प भी उपलब्ध है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना 2018-19 सीरीज़ VI के समयपूर्व मोचन (premature redemption) के लिए मोचन मूल्य (redemption price) की घोषणा की है, जो 12 अगस्त, 2026 को देय होगा। यह घोषणा योजना के तहत निवेशकों को समयपूर्व निकासी का विकल्प प्रदान करती है, जो जारी होने की तारीख से पांच साल पूरे होने के बाद उपलब्ध होता है। मोचन मूल्य इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) द्वारा प्रकाशित पिछले तीन व्यावसायिक दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित है।

पृष्ठभूमि

  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना नवंबर 2015 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई थी।
  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य भौतिक सोने की मांग को कम करना और घरेलू बचत के एक हिस्से को वित्तीय बचत में बदलना है।
  • यह योजना भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी की जाती है।
  • बॉन्ड की अवधि 8 वर्ष होती है, जिसमें 5वें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तारीखों पर समयपूर्व मोचन का विकल्प उपलब्ध होता है।
  • निवेशकों को प्रति वर्ष 2.50 प्रतिशत की निश्चित दर से ब्याज मिलता है, जिसका भुगतान अर्ध-वार्षिक रूप से किया जाता है।
  • मोचन मूल्य (परिपक्वता पर या समयपूर्व मोचन पर) इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) द्वारा प्रकाशित पिछले तीन व्यावसायिक दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित होता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना क्या है?

  • यह भारत सरकार की एक पहल है जो भौतिक सोने के विकल्प के रूप में कागजी सोना (paper gold) खरीदने का अवसर प्रदान करती है।
  • बॉन्ड भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए जाते हैं।
  • निवेशक को बॉन्ड जारी होने पर एक प्रमाण पत्र मिलता है, जो सोने के ग्राम में अंकित होता है।
  • यह योजना सोने में निवेश के लिए एक सुरक्षित विकल्प है क्योंकि यह चोरी या भंडारण की लागत जैसे जोखिमों को समाप्त करती है।
  • निवेशकों को पूंजीगत लाभ कर (capital gains tax) से छूट मिलती है यदि वे परिपक्वता तक बॉन्ड रखते हैं।
  • बॉन्ड को स्टॉक एक्सचेंजों पर भी ट्रेड किया जा सकता है, जिससे तरलता (liquidity) का एक स्तर मिलता है।
  • न्यूनतम निवेश 1 ग्राम सोना होता है, जबकि व्यक्तियों के लिए अधिकतम निवेश सीमा 4 किलोग्राम, HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) के लिए 4 किलोग्राम और ट्रस्टों के लिए 20 किलोग्राम प्रति वित्तीय वर्ष है।
  • इस योजना से देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को कम करने में भी मदद मिलती है, क्योंकि यह सोने के आयात को कम करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सोने का भौतिक विकल्प यह भौतिक सोने को रखने की आवश्यकता के बिना सोने में निवेश का अवसर प्रदान करता है, जिससे भंडारण और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ समाप्त हो जाती हैं।
सरकारी प्रतिभूति भारत सरकार द्वारा समर्थित होने के कारण, यह निवेश सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है।
ब्याज भुगतान निवेशकों को प्रारंभिक निवेश राशि पर एक निश्चित वार्षिक ब्याज दर प्राप्त होती है, जो सोने की कीमतों में वृद्धि के अतिरिक्त लाभ है।
पूंजीगत लाभ कर छूट परिपक्वता पर भुनाने पर होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर छूट मिलती है, जिससे यह एक आकर्षक निवेश विकल्प बन जाता है।
समयपूर्व मोचन पांचवें वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तारीखों पर समयपूर्व मोचन की अनुमति है, जिससे निवेशकों को तरलता (Liquidity) का विकल्प मिलता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना सोने के आयात को कम करने में मदद करती है, जिससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) नियंत्रित रहता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होता है।
  • यह घरेलू बचत को वित्तीय बाजारों में चैनलाइज़ करने में मदद करता है, जिससे उत्पादक निवेश को बढ़ावा मिलता है।
  • यह निवेशकों को सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से लाभ उठाने का अवसर प्रदान करता है, साथ ही एक निश्चित ब्याज आय भी सुनिश्चित करता है।

निवेशकों के लिए

  • यह भौतिक सोने से जुड़े जोखिमों जैसे चोरी, भंडारण लागत और शुद्धता की चिंता से मुक्ति दिलाता है।
  • यह एक सुरक्षित निवेश विकल्प है क्योंकि यह सरकार द्वारा समर्थित है और RBI द्वारा जारी किया जाता है।
  • यह निवेशकों को तरलता प्रदान करता है क्योंकि इसे स्टॉक एक्सचेंजों पर व्यापार किया जा सकता है और समयपूर्व मोचन का विकल्प भी उपलब्ध है।

नीतिगत निहितार्थ

  • यह भारत सरकार की ‘सोने के मुद्रीकरण’ की नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को उत्पादक उपयोग में लाना है।
  • यह वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देता है क्योंकि यह छोटे निवेशकों को भी सोने में निवेश का अवसर प्रदान करता है।

चुनौतियाँ

1. बाजार जोखिम

  • सोने की कीमतों में गिरावट की स्थिति में निवेशकों को पूंजीगत नुकसान हो सकता है, हालांकि ब्याज आय कुछ हद तक इसकी भरपाई करती है।

2. जागरूकता का अभाव

  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में योजना के बारे में जागरूकता की कमी के कारण इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता है।

3. तरलता की सीमाएँ

  • यद्यपि यह स्टॉक एक्सचेंजों पर व्यापार योग्य है, द्वितीयक बाजार में तरलता हमेशा उतनी अधिक नहीं हो सकती जितनी भौतिक सोने या अन्य वित्तीय साधनों में होती है।

4. निवेश सीमा

  • योजना में निवेश की ऊपरी सीमा निर्धारित है, जो बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए एक बाधा हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव बाजार की अस्थिरता के कारण मोचन मूल्य में अनिश्चितता।
निवेशकों की समझ भौतिक सोने के बजाय डिजिटल/कागजी सोने में निवेश के प्रति पारंपरिक मानसिकता।
वित्तीय साक्षरता योजना के लाभों और जोखिमों को समझने में आम जनता की कमी।
द्वितीयक बाजार की तरलता स्टॉक एक्सचेंजों पर SGB के व्यापार में अपेक्षित तरलता का अभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना (Sovereign Gold Bond Scheme)

आगे की राह

  • योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएँ, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म और फिनटेक कंपनियों के माध्यम से SGB में निवेश को और अधिक सुलभ बनाया जाए।
  • द्वितीयक बाजार में SGB की तरलता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन और बाजार निर्माताओं को बढ़ावा दिया जाए।
  • निवेशकों के लिए शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ ताकि वे सोने में निवेश के विभिन्न विकल्पों और SGB के विशिष्ट लाभों को समझ सकें।
  • सोने के मुद्रीकरण के अन्य पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाए ताकि घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को अर्थव्यवस्था में लाया जा सके।
  • SGB को अन्य वित्तीय उत्पादों के साथ एकीकृत करने की संभावनाओं का पता लगाया जाए ताकि यह निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बन सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना · अकाल मोचन · भारतीय रिज़र्व बैंक · मुद्रास्फीति · राजकोषीय घाटा · सोने का आयात · चालू खाता घाटा · सरकारी प्रतिभूतियाँ · निवेश विकल्प · पूंजी बाजार

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना की शुरुआत  →  निवेशकों द्वारा भौतिक सोने के बजाय SGB में निवेश  →  RBI द्वारा SGB का जारी किया जाना और प्रबंधन  →  निवेशकों को वार्षिक ब्याज भुगतान और सोने की कीमत में वृद्धि का लाभ  →  परिपक्वता या समयपूर्व मोचन पर सोने की तत्कालीन कीमत पर भुगतान

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. SGB को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी किया जाता है।
2. SGB में निवेश करने पर पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) से छूट मिलती है यदि बॉन्ड को परिपक्वता तक रखा जाता है।
3. SGB की परिपक्वता अवधि 8 वर्ष होती है, जिसमें 5 वर्ष के बाद अकाल मोचन (Premature Redemption) का विकल्प उपलब्ध होता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। SGB को RBI द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी किया जाता है। कथन 2 सही है। SGB को परिपक्वता तक रखने पर पूंजीगत लाभ कर से छूट मिलती है। कथन 3 सही है। SGB की परिपक्वता अवधि 8 वर्ष होती है, जिसमें 5 वर्ष के बाद ब्याज भुगतान की तारीखों पर अकाल मोचन का विकल्प उपलब्ध होता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा/से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना का/के उद्देश्य है/हैं?
1. भौतिक सोने की मांग को कम करना।
2. भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को कम करना।
3. घरेलू बचत को वित्तीय साधनों में स्थानांतरित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — SGB योजना का मुख्य उद्देश्य भौतिक सोने की मांग को कम करना है, जिससे सोने के आयात पर निर्भरता कम हो और भारत का चालू खाता घाटा नियंत्रित हो सके। साथ ही, यह योजना घरेलू बचत को भौतिक सोने के बजाय वित्तीय साधनों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना क्या है? भारत में भौतिक सोने की मांग को कम करने और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने में यह योजना कितनी सफल रही है, समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की परिभाषा और इसके मुख्य उद्देश्यों का संक्षिप्त परिचय।
मुख्य भाग:
1. SGB की विशेषताएं: योजना की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें (जैसे जारीकर्ता, परिपक्वता अवधि, ब्याज दर, मूल्य निर्धारण, कर लाभ, अकाल मोचन)।
2. भौतिक सोने की मांग कम करने में सफलता: इस बात का विश्लेषण करें कि SGB ने भौतिक सोने की खरीद को किस हद तक कम किया है। इसमें योजना के लाभों (सुरक्षा, भंडारण लागत नहीं, ब्याज आय) और चुनौतियों (सोने के प्रति सांस्कृतिक लगाव, तरलता की धारणा) दोनों पर चर्चा करें।
3. चालू खाता घाटे (CAD) पर प्रभाव: सोने के आयात को कम करने और CAD को नियंत्रित करने में योजना की भूमिका का मूल्यांकन करें। संबंधित डेटा या रुझानों का उल्लेख किया जा सकता है।
4. समालोचनात्मक परीक्षण: योजना की सीमाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डालें, जैसे कि बाजार में जागरूकता की कमी, छोटे निवेशकों तक पहुंच, और भौतिक सोने के निवेश के विकल्प के रूप में इसकी स्वीकार्यता।
निष्कर्ष: योजना की समग्र प्रभावशीलता का सारांश प्रस्तुत करें और भविष्य के लिए सुझाव दें।

स्रोत: RBI


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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