28 Jul एससी-एसटी उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय हब योजना: विकास और रोजगार की नई कहानी
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, औद्योगिक नीतियां
- Prelims: राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), सार्वजनिक खरीद नीति, एससीएलसीएसएस (SCLCSS), व्यापार त्वरण कार्यक्रम (BAP), उद्यमिता विकास, अनुसूचित जाति/जनजाति सशक्तिकरण
- Essay: समावेशी विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण, भारत में उद्यमिता का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) SC/ST उद्यमियों को तकनीकी उन्नयन, क्षमता निर्माण और बाजार पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाकर समावेशी विकास को बढ़ावा देती है, जिससे वे सार्वजनिक खरीद में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उद्यमियों को आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने, व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाने और सार्वजनिक खरीद में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने में सशक्त बना रही है। हाल ही में, इस योजना के तहत वरुण एंटरप्राइजेज और राजू थंगावेलु जैसे उद्यमियों की सफलता की कहानियों को उजागर किया गया है, जो विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं, रोजगार सृजन और औद्योगिक परिवेश में SC/ST उद्यमियों की भागीदारी में वृद्धि को दर्शाती हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने सार्वजनिक खरीद नीति, 2012 के तहत केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के लिए SC/ST स्वामित्व वाले MSME से कुल वार्षिक खरीद का न्यूनतम 4% लक्ष्य निर्धारित किया है।
- इस लक्ष्य को प्राप्त करने और SC/ST उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) की शुरुआत की गई थी।
- यह योजना SC/ST उद्यमियों को तकनीकी उन्नयन, क्षमता निर्माण, वित्तीय सहायता और बाजार पहुंच प्रदान करके उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर केंद्रित है।
- योजना के तहत विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) और बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (BAP) जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
- SCLCSS आधुनिक तकनीकों को अपनाने और पूंजीगत उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जबकि BAP व्यावसायिक कौशल और बाजार पहुंच में सुधार पर ध्यान केंद्रित करता है।
- योजना का उद्देश्य SC/ST उद्यमियों को सरकारी और संस्थागत खरीदारों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाना है, जिससे उनके लिए बड़े खरीद ऑर्डर हासिल करने के अवसर पैदा हों।
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSH) क्या है?
- राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा 2016 में शुरू की गई एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
- इसका मुख्य उद्देश्य SC/ST उद्यमियों को सार्वजनिक खरीद नीति, 2012 के तहत निर्धारित 4% खरीद लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करना है।
- यह योजना SC/ST उद्यमियों को आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने, व्यावसायिक क्षमताओं को बढ़ाने और बाजार पहुंच में सुधार के लिए व्यापक सहायता प्रदान करती है।
- NSSH के तहत दो प्रमुख घटक हैं: विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) और बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (BAP)।
- SCLCSS SC/ST उद्यमियों को उन्नत मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करता है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार होता है।
- BAP SC/ST उद्यमियों के लिए क्षमता निर्माण, कौशल विकास, परामर्श और बाजार लिंकेज की सुविधा प्रदान करता है।
- यह योजना SC/ST उद्यमियों को सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ व्यापार के अवसर तलाशने में मदद करती है, जिससे समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- NSSH का लक्ष्य SC/ST समुदाय के भीतर उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक अविभाज्य हिस्सा बनाना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उद्यमियों को सशक्त बनाना | आधुनिक प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक क्षमता और बाजार पहुंच को सक्षम करके |
| सार्वजनिक क्रय में भागीदारी | सरकारी और संस्थागत खरीदारों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता |
| क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी | उद्यमों को परिचालन बाधाओं को दूर करने और उन्नत तकनीक अपनाने में मदद |
| व्यवसाय त्वरण कार्यक्रम | उद्यमों को अनुपालन बढ़ाने और बड़े बाजारों तक पहुंचने में सहायता |
| रोजगार सृजन | विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से नए अवसरों का निर्माण |
| औद्योगिक परिवेश में भागीदारी | अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों की भूमिका को बढ़ावा देना |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सशक्त बनाकर समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है।
- उन्नत प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण के माध्यम से इन उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होती है, जिससे वे बड़े बाजारों में प्रवेश कर पाते हैं।
- सार्वजनिक क्रय में भागीदारी बढ़ने से इन उद्यमियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर खुलते हैं और आय में वृद्धि होती है।
- रोजगार सृजन में वृद्धि होती है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ते हैं।
सामाजिक महत्व
- यह योजना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- उद्यमिता को बढ़ावा देकर यह आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की भावना पैदा करती है।
- भेदभाव को कम करने और इन समुदायों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने में मदद करती है।
रणनीतिक महत्व
- यह भारत के औद्योगिक परिवेश में विविधता लाती है और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करती है।
- लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को बढ़ावा देकर यह क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में सहायक है।
- यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान करती है, क्योंकि यह स्वदेशी विनिर्माण और सेवाओं को बढ़ावा देती है।
चुनौतियाँ
1. पूंजी तक पहुंच का अभाव
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को अक्सर पारंपरिक वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
- उच्च ब्याज दरें और जमानत की आवश्यकताएं उनके लिए एक बड़ी बाधा बन जाती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: समावेशी विकास
2. तकनीकी उन्नयन की कमी
- कई अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यम आधुनिक तकनीकों और उपकरणों को अपनाने में पीछे रह जाते हैं।
- तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण की कमी उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: नवाचार और विकास
3. बाजार पहुंच की सीमाएं
- छोटे उद्यमों के लिए बड़े संस्थागत और सरकारी बाजारों तक पहुंच बनाना मुश्किल होता है।
- प्रोक्योरमेंट प्रक्रियाओं की जटिलता और जानकारी का अभाव भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीतियां
4. क्षमता निर्माण की आवश्यकता
- प्रबंधन कौशल, विपणन रणनीतियों और नियामक अनुपालन में कमी अक्सर इन उद्यमियों के विकास को बाधित करती है।
- व्यवसाय त्वरण कार्यक्रमों की आवश्यकता होती है ताकि वे अपनी परिचालन बाधाओं को दूर कर सकें।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पूंजी की कमी | उद्यमों के विस्तार और आधुनिकीकरण में बाधा |
| तकनीकी पिछड़ापन | उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर नकारात्मक प्रभाव |
| बाजार तक सीमित पहुंच | बड़े खरीद आदेश प्राप्त करने में कठिनाई |
| अनुपालन की जटिलता | सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में भागीदारी में बाधा |
| कौशल और क्षमता का अभाव | व्यवसाय प्रबंधन और नवाचार में कमी |
| विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला | गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने में चुनौती |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (National SC-ST Hub Scheme)
- विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (Special Credit Linked Capital Subsidy Scheme – SCLCSS)
- बिजनेस एक्सेलेरेशन प्रोग्राम (Business Acceleration Program – BAP)
आगे की राह
- योजना के तहत वित्तीय सहायता को और अधिक सुलभ और व्यापक बनाया जाए, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में।
- तकनीकी उन्नयन के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाया जाए ताकि उद्यमी आधुनिक तकनीकों को अपना सकें।
- सरकारी खरीद में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।
- क्षमता निर्माण और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए, जिसमें प्रबंधन, विपणन और डिजिटल साक्षरता शामिल हो।
- उद्यमियों के लिए एक मजबूत मेंटरशिप नेटवर्क (Mentorship Network) स्थापित किया जाए ताकि वे अनुभवी पेशेवरों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।
- योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाए और परिणामों के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के उत्पादों और सेवाओं के लिए एक समर्पित ई-कॉमर्स (e-commerce) प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय · सार्वजनिक खरीद नीति · अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमिता · क्षमता निर्माण · प्रौद्योगिकी उन्नयन · रोजगार सृजन · समावेशी विकास · आत्मनिर्भर भारत · सरकारी खरीद
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 46’: ‘राज्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक हितों को बढ़ावा देगा’}
- {‘अनुच्छेद 330’: ‘लोकसभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण’}
- {‘अनुच्छेद 332’: ‘राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण’}
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना का क्रियान्वयन → एससीएलसीएसएस और बीएपी के माध्यम से सहायता → उद्यमों की तकनीकी क्षमता और व्यावसायिक कौशल में वृद्धि → सार्वजनिक क्रय में अधिक भागीदारी → रोजगार सृजन और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास → अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों का सशक्तिकरण और समावेशी विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
2. इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को सार्वजनिक खरीद में अधिक भागीदारी के लिए सशक्त बनाना है।
3. विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (SCLCSS) NSSHS का एक घटक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि NSSHS को MSME मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य SC/ST उद्यमियों की सार्वजनिक खरीद में भागीदारी बढ़ाना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि SCLCSS, NSSHS के तहत उद्यमियों को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।
Q2. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. MSME भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्रोत है।
2. यह क्षेत्र भारत के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
3. MSME को बढ़ावा देने से क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि MSME क्षेत्र भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। कथन 2 सही है क्योंकि MSME भारत के कुल निर्यात में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि MSME का विकास ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना (NSSHS) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में कैसे सहायक है? भारत के औद्योगिक परिवेश में इस योजना के महत्व का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना के उद्देश्यों और प्रमुख घटकों (जैसे SCLCSS, BAP) की व्याख्या करें, यह बताते हुए कि यह SC/ST उद्यमियों को कैसे लाभान्वित करती है (क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी, बाजार पहुंच)। दूसरे भाग में, योजना के महत्व का विश्लेषण करें, जिसमें विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण, रोजगार सृजन, सार्वजनिक खरीद में भागीदारी बढ़ाने और समावेशी औद्योगिक विकास में इसके योगदान पर प्रकाश डालें। आप वरुण एंटरप्राइजेज और राजू थंगावेलु के उदाहरणों का भी उल्लेख कर सकते हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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