26 Sep कर्नाटक उच्च न्यायालय में तीन नए न्यायाधीशों ने ली शपथ, राज्यपाल ने दिलाई शपथ
✎ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा कॉलेजियम की सिफारिश पर की जाती है, जबकि उन्हें शपथ संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा दिलाई जाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – महत्वपूर्ण प्रावधान, नियुक्तियाँ, विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्तियाँ, शक्तियों का पृथक्करण, न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली
- Prelims: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, राज्यपाल की शपथ, अनुच्छेद 217, कॉलेजियम प्रणाली, न्यायिक नियुक्तियाँ, भारत के मुख्य न्यायाधीश, संवैधानिक पद
- Essay: भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही, भारत में न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया का विकास और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा कॉलेजियम की सिफारिश पर की जाती है, जबकि उन्हें शपथ संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा दिलाई जाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक उच्च न्यायालय में तीन नए न्यायाधीशों को राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा शपथ दिलाई गई है। इन न्यायिक अधिकारियों को जिला न्यायपालिका से पदोन्नत किया गया है। यह घटना उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया और इसमें शामिल विभिन्न हितधारकों की भूमिका को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय संविधान के तहत, उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करती है।
- संविधान का अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है। इसके अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), संबंधित राज्य के राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के अलावा किसी अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती है।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System) का विकास हुआ है, जहाँ सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के वरिष्ठतम न्यायाधीशों का एक समूह नियुक्तियों पर निर्णय लेता है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शपथ संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा दिलाई जाती है, जबकि उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए, व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए, भारत में कम से कम दस वर्षों तक न्यायिक पद धारण किया हो, या किसी उच्च न्यायालय का या दो या अधिक ऐसे न्यायालयों का लगातार कम से कम दस वर्षों तक अधिवक्ता रहा हो।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद धारण करते हैं।
उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), संबंधित राज्य के राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में) से परामर्श करते हैं।
- कॉलेजियम प्रणाली, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, उच्च न्यायालयों में नियुक्तियों के लिए नामों की सिफारिश करती है।
- उच्च न्यायालय के कॉलेजियम, जिसमें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, संबंधित उच्च न्यायालय के लिए नामों की सिफारिश करते हैं।
- इन सिफारिशों को राज्य सरकार और राज्यपाल के माध्यम से केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेजा जाता है, जो उन्हें सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम के पास भेजता है।
- सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम इन सिफारिशों की समीक्षा करता है और राष्ट्रपति को अंतिम सिफारिशें भेजता है।
- राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति वारंट जारी होने के बाद, संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा नए न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है।
- यह प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने और योग्य व्यक्तियों को न्यायिक पदों पर लाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति | यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया है। |
| राज्यपाल द्वारा शपथ ग्रहण | राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाते हैं, जो न्यायपालिका के प्रति राज्य के सम्मान को दर्शाता है। |
| न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति | जिला न्यायपालिका से उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की पदोन्नति न्यायिक सेवा में अनुभव और योग्यता को महत्व देती है। |
| न्यायाधीशों की योग्यता | उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए निर्धारित योग्यताएँ (जैसे विधि स्नातक, अधिवक्ता के रूप में अनुभव या न्यायिक सेवा) न्यायिक प्रणाली की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती हैं। |
महत्व
शासन और न्यायपालिका
- यह उच्च न्यायालय में रिक्तियों को भरने और न्यायिक कार्यभार को कम करने में मदद करता है, जिससे न्याय वितरण प्रणाली की दक्षता बढ़ती है।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को बनाए रखने और सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है।
संवैधानिक प्रक्रिया
- यह प्रक्रिया भारतीय संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत को दर्शाती है, जहाँ कार्यपालिका (राज्यपाल) न्यायिक नियुक्तियों में भूमिका निभाती है।
- यह न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि न्यायपालिका में योग्य व्यक्तियों को नियुक्त किया जाए।
सामाजिक और प्रशासनिक
- महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका में लैंगिक विविधता को बढ़ावा देती है, जो समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व के लिए महत्वपूर्ण है।
- अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति न्यायिक सेवा में करियर की प्रगति और प्रेरणा को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. न्यायिक रिक्तियाँ
- उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के स्वीकृत पदों के मुकाबले वास्तविक नियुक्तियों में अक्सर कमी रहती है, जिससे मामलों के निपटान में देरी होती है।
- रिक्तियों के कारण न्यायिक कार्यभार बढ़ता है, जिससे न्यायाधीशों पर दबाव आता है और न्याय वितरण की गति धीमी होती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय न्यायपालिका; न्यायिक सुधार
2. नियुक्ति प्रक्रिया में देरी
- उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया (कॉलेजियम प्रणाली) में अक्सर लंबा समय लगता है, जिससे रिक्तियाँ बनी रहती हैं।
- सरकार और न्यायपालिका के बीच परामर्श और अनुमोदन की प्रक्रिया में लगने वाला समय भी देरी का एक कारण है।
यूपीएससी लिंक: न्यायिक नियुक्तियाँ; कॉलेजियम प्रणाली
3. न्यायिक स्वतंत्रता बनाम जवाबदेही
- न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका की भूमिका और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना एक चुनौती है।
- नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
यूपीएससी लिंक: न्यायिक स्वतंत्रता; शक्तियों का पृथक्करण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| न्यायाधीशों की रिक्तियाँ | न्याय में देरी, न्यायिक कार्यभार में वृद्धि, न्यायपालिका पर जनता के विश्वास में कमी। |
| नियुक्ति प्रक्रिया की जटिलता | प्रक्रिया में लगने वाला समय, पारदर्शिता की कमी के आरोप, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संभावित गतिरोध। |
| न्यायिक विविधता का अभाव | न्यायपालिका में विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि और लैंगिक प्रतिनिधित्व की कमी, जिससे न्याय प्रणाली की समावेशिता प्रभावित होती है। |
| न्यायाधीशों के प्रदर्शन का मूल्यांकन | नियुक्ति के बाद न्यायाधीशों के प्रदर्शन और जवाबदेही के लिए स्पष्ट तंत्र का अभाव। |
आगे की राह
- न्यायिक रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी नियुक्ति कैलेंडर विकसित किया जाना चाहिए।
- कॉलेजियम प्रणाली में सुधार कर इसे और अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाया जाना चाहिए, जिसमें कार्यपालिका की भूमिका को स्पष्ट किया जाए।
- न्यायपालिका में लैंगिक और सामाजिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय उपाय किए जाने चाहिए।
- न्यायाधीशों के प्रदर्शन मूल्यांकन और जवाबदेही के लिए एक प्रभावी तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
- न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि न्यायाधीशों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।
- न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर निरंतर ध्यान दिया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश · नियुक्ति प्रक्रिया · राज्यपाल की भूमिका · न्यायिक स्वतंत्रता · कॉलेजियम प्रणाली · संविधान का अनुच्छेद 217 · न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका · न्यायपालिका की स्वतंत्रता · न्यायिक जवाबदेही · संघवाद
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 217’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 219’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा शपथ’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 233’, ‘note’: ‘जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति’}
अवधारणा प्रवाह
उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के पद रिक्त होते हैं। → उच्च न्यायालय कॉलेजियम नामों की सिफारिश करता है। → सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम नामों का अनुमोदन करता है। → केंद्र सरकार नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करती है। → राज्यपाल नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाते हैं। → उच्च न्यायालय में न्यायिक कार्यभार कम होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को केवल महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया द्वारा ही पद से हटाया जा सकता है, जो संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होता है।
3. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की शपथ राज्यपाल द्वारा दिलाई जाती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश, संबंधित राज्य के राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती है। कथन 2 सही है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान है, जिसमें संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित महाभियोग प्रस्ताव शामिल है। कथन 3 भी सही है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा शपथ दिलाई जाती है।
Q2. अभिकथन (A): उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में राज्यपाल की भूमिका औपचारिक होती है।
कारण (R): उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में कॉलेजियम प्रणाली का प्रभाव अधिक होता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है। राज्यपाल उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शपथ दिलाते हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में उनकी भूमिका मुख्य रूप से औपचारिक होती है, क्योंकि वास्तविक निर्णय कॉलेजियम प्रणाली और राष्ट्रपति द्वारा लिए जाते हैं। कारण (R) भी सही है। न्यायिक नियुक्तियों में कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System) का प्रभाव अत्यधिक होता है, जो राज्यपाल की भूमिका को सीमित करता है। इसलिए, R, A का सही स्पष्टीकरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 217 का उल्लेख हो।
2. नियुक्ति प्रक्रिया का आलोचनात्मक परीक्षण:
क. कॉलेजियम प्रणाली: इसकी संरचना, कार्यप्रणाली और इसके पक्ष तथा विपक्ष में तर्क (जैसे पारदर्शिता की कमी, भाई-भतीजावाद के आरोप, न्यायिक स्वतंत्रता का तर्क)।
ख. कार्यपालिका की भूमिका: राष्ट्रपति, राज्यपाल और विधि मंत्रालय की भूमिका का उल्लेख करें और बताएं कि यह कैसे सीमित हो गई है।
ग. न्यायिक सक्रियता: न्यायिक नियुक्तियों पर सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों (जैसे तीन न्यायाधीशों के मामले) का प्रभाव।
3. कार्यपालिका की भूमिका को प्रभावी बनाने पर चर्चा:
क. पक्ष में तर्क: जवाबदेही में वृद्धि, लोकतांत्रिक वैधता, कार्यपालिका के पास व्यापक जानकारी, न्यायिक ओवररीच पर नियंत्रण।
ख. विपक्ष में तर्क: न्यायिक स्वतंत्रता पर संभावित खतरा, राजनीतिकरण का जोखिम, न्यायपालिका पर कार्यपालिका का अनुचित प्रभाव।
ग. संभावित सुधार: राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) जैसे प्रयासों का उल्लेख और उसके विफल होने के कारण।
4. निष्कर्ष: न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दें और आगे के मार्ग पर सुझाव दें।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक उच्च न्यायालय में हाल ही में तीन नए न्यायाधीशों की शपथ ग्रहण किसके द्वारा कराई गई?
- A. मुख्यमंत्री
- B. राज्यपाल
- C. मुख्य न्यायाधीश
- D. राष्ट्रपति
उत्तर: B. राज्यपाल — राज्यपाल द्वारा ही उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शपथ ग्रहण कराई जाती है।
Mains: कर्नाटक उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में राज्यपाल की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए 1,158 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहण करेगी - October 3, 2026
- Wildlife Corridors: Key to Survival for UPSC & State PCS Aspirants - October 3, 2026
- अमित शाह भोपाल में गौपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे, न्याय संहिता प्रदर्शनी का उद्घाटन - October 3, 2026

No Comments