10 Sep कर्नाटक मॉडल: मुख्यमंत्री शिवकुमार ने 100 दिन पूरे होने पर उठाए बड़े कदम
✎ कर्नाटक मॉडल सुशासन, डिजिटल सेवाओं के विस्तार, निवेश प्रोत्साहन और समावेशी क्षेत्रीय विकास के माध्यम से राज्य को एक अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करने का एक व्यापक प्रयास है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजव्यवस्था और शासन | GS Paper III — अर्थव्यवस्था और विकास
- Prelims: सुशासन, ई-गवर्नेंस, डिजिटल नागरिक सेवाएँ, निवेश प्रोत्साहन, क्षेत्रीय विकास, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ
- Essay: सुशासन के माध्यम से समावेशी विकास: राज्यों की भूमिका, डिजिटल परिवर्तन और नागरिक-केंद्रित शासन
त्वरित पुनरावृत्ति: कर्नाटक मॉडल सुशासन, डिजिटल सेवाओं के विस्तार, निवेश प्रोत्साहन और समावेशी क्षेत्रीय विकास के माध्यम से राज्य को एक अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करने का एक व्यापक प्रयास है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर ‘दृढ़ कर्नाटक संकल्प’ टैगलाइन के तहत ‘कर्नाटक मॉडल’ का अनावरण किया। इस मॉडल में सुशासन, डिजिटल सेवाओं के विस्तार, निवेश प्रोत्साहन और क्षेत्रीय विकास पर केंद्रित कई नई पहलें और योजनाएँ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य राज्य को एक ‘मॉडल राज्य’ के रूप में स्थापित करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में राज्य सरकारें अक्सर अपने कार्यकाल के महत्वपूर्ण पड़ावों पर नई नीतियों और योजनाओं की घोषणा करती हैं, जो उनके शासन के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
- सुशासन (Good Governance) और नागरिक-केंद्रित सेवाएँ (Citizen-Centric Services) आधुनिक शासन व्यवस्था के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारें ध्यान केंद्रित करती हैं।
- डिजिटल इंडिया (Digital India) पहल के तहत, विभिन्न राज्यों ने नागरिकों को सरकारी सेवाएँ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं।
- निवेश आकर्षित करना और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना राज्यों के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियाँ हैं।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ (Social Security Schemes) कमजोर वर्गों के उत्थान और समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कर्नाटक मॉडल की प्रमुख पहलें
- सेवा वन डिजिटल नागरिक सेवा प्लेटफॉर्म: यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा।
- भूमिहीन गरीबों को आवास स्थल: चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) में ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन लोगों को पाँच लाख आवास स्थल वितरित करने की योजना को मंजूरी दी गई है।
- वैश्विक निवेशक विभाग और NRI विभाग: राज्य में अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए इन विभागों की स्थापना की जाएगी।
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पोर्टल: CSR पहलों के माध्यम से 1,000 सरकारी स्कूलों के विकास की सुविधा प्रदान करने के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया गया।
- मुख्यमंत्री रैथा चैतन्य योजना: किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है।
- महिला सुरक्षा पहल: गिरोहों, जबरन वसूली करने वालों और आदतन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रत्येक पुलिस सर्कल और स्टेशन में विशेष दस्ते स्थापित किए जाएंगे।
- बियॉन्ड बेंगलुरु पहल: बेंगलुरु से परे विकास केंद्रों को विकसित किया जाएगा।
- तंगभद्रा बांध पर अंतर-राज्यीय सहयोग: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों ने पहली बार नदी से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए एक मंच साझा किया, जिससे लगभग 12 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को लाभ होगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सेवा वन डिजिटल नागरिक सेवा मंच | शासन और सार्वजनिक सेवाओं को लोगों के करीब लाना, ‘एक सरकार, एक डिजिटल’ के सिद्धांत पर आधारित। |
| भूमिहीन लोगों को 5 लाख आवास स्थल | ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन लोगों को आवास सुरक्षा प्रदान करना, सामाजिक समानता को बढ़ावा देना। |
| वैश्विक निवेशक विभाग और एनआरआई विभाग की स्थापना | राज्य में अधिक निवेश आकर्षित करना, आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देना। |
| कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पोर्टल | CSR पहल के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विकास को सुगम बनाना, शिक्षा के बुनियादी ढांचे में सुधार। |
| ‘बियॉन्ड बेंगलुरु’ पहल | बेंगलुरु से परे पांच शहरों को विकास केंद्रों के रूप में विकसित करना, क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना। |
| पुलिस सर्किलों और स्टेशनों में महिला सुरक्षा दस्ते | महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अपराधों के खिलाफ ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए वैश्विक निवेशक विभाग और एनआरआई विभाग की स्थापना से आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
- बियॉन्ड बेंगलुरु पहल के तहत अन्य शहरों के विकास से क्षेत्रीय आर्थिक असमानता कम होगी और संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।
सामाजिक महत्व
- भूमिहीन लोगों को आवास स्थल वितरित करने की योजना से सामाजिक सुरक्षा और समानता को बढ़ावा मिलेगा, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- CSR पोर्टल के माध्यम से सरकारी स्कूलों का विकास शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाएगा।
- महिला सुरक्षा दस्ते की स्थापना से महिलाओं के प्रति अपराधों में कमी आएगी और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
शासन और प्रशासनिक महत्व
- सेवा वन डिजिटल नागरिक सेवा मंच ‘एक सरकार, एक डिजिटल’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिससे नागरिक सेवाओं की दक्षता और पहुंच में सुधार होगा।
- मुख्यमंत्री रायता चैतन्य योजना और BMTC 2.0 मोबाइल एप्लिकेशन जैसी पहल शासन को लोगों के करीब लाएंगी।
- तुंगभद्रा बांध पर 33 गेटों की स्थापना और अंतर-राज्यीय सहयोग से जल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार होगा।
चुनौतियाँ
1. योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
- विभिन्न नई योजनाओं और पहलों का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी।
- वित्तीय संसाधनों का कुशल उपयोग और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. वित्तीय स्थिरता
- पांच गारंटी योजनाओं पर पहले ही 1.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, जिससे राज्य के वित्त पर दबाव पड़ सकता है।
- राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करते हुए विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाना महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, राजकोषीय नीति
3. क्षेत्रीय असमानताएँ
- बियॉन्ड बेंगलुरु पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना है, लेकिन इसका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा।
- राज्य के सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: क्षेत्रीय असंतुलन, समावेशी विकास
4. निवेश आकर्षित करना
- वैश्विक और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल कारोबारी माहौल बनाना और नियामक बाधाओं को दूर करना आवश्यक है।
- अन्य राज्यों और देशों से प्रतिस्पर्धा के बीच निवेश आकर्षित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: निवेश मॉडल, आर्थिक सुधार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| योजनाओं का क्रियान्वयन | बड़ी संख्या में घोषित योजनाओं का कुशल और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। |
| राजकोषीय दबाव | गारंटी योजनाओं पर भारी व्यय के कारण राज्य के वित्त पर संभावित दबाव और राजकोषीय स्थिरता बनाए रखना। |
| निवेश का माहौल | वैश्विक और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी और अनुकूल कारोबारी माहौल बनाए रखना। |
| क्षेत्रीय विकास | बेंगलुरु से परे अन्य शहरों और तटीय क्षेत्रों के पर्यटन क्षमता का पूर्ण दोहन सुनिश्चित करना। |
| अंतर-राज्यीय जल विवाद | तुंगभद्रा जैसे नदी जल बंटवारे के मुद्दों पर पड़ोसी राज्यों के साथ सतत सहयोग बनाए रखना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सेवा वन डिजिटल नागरिक सेवा मंच
- मुख्यमंत्री रायता चैतन्य योजना
- BMTC 2.0 मोबाइल एप्लिकेशन
- भूमिहीन लोगों को आवास स्थल वितरण योजना
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पोर्टल
आगे की राह
- सभी घोषित योजनाओं और पहलों के लिए एक स्पष्ट क्रियान्वयन रोडमैप और निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।
- राज्य के वित्तीय संसाधनों का विवेकपूर्ण प्रबंधन किया जाए ताकि राजकोषीय स्थिरता बनी रहे और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध हो।
- निवेशकों के लिए ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ प्रणाली को और मजबूत किया जाए और व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार किया जाए।
- बेंगलुरु से परे अन्य विकास केंद्रों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
- डिजिटल सेवाओं की पहुंच और उपयोग को बढ़ाने के लिए ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) को बढ़ावा दिया जाए।
- महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बलों को आधुनिक प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान किए जाएं तथा सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
- अंतर-राज्यीय मुद्दों, विशेषकर जल बंटवारे पर, पड़ोसी राज्यों के साथ रचनात्मक संवाद और सहयोग जारी रखा जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।
- अनुच्छेद 39: राज्य अपनी नीति का विशेषतया यह निर्देश देगा कि पुरुष और स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त हों।
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि।
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाओं को तैयार करने और क्रियान्वित करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 262: अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए संसद कानून द्वारा प्रावधान कर सकती है।
अवधारणा प्रवाह
नई सरकार का गठन और 100 दिन पूरे करना → मुख्यमंत्री द्वारा ‘कर्नाटक मॉडल’ का अनावरण → डिजिटल सेवाओं, आवास और निवेश पर केंद्रित पहलें → आर्थिक संवृद्धि, सामाजिक न्याय और सुशासन का लक्ष्य → राज्य के विकास और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘सेवा वन’ प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ‘एक सरकार, एक डिजिटल’ दृष्टिकोण के तहत नागरिक सेवाओं को एकीकृत करना है।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का संबंध कर्नाटक मॉडल से है।
3. कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility – CSR) पोर्टल का उपयोग केवल निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा ही किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि ‘सेवा वन’ प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ‘एक सरकार, एक डिजिटल’ दृष्टिकोण के तहत नागरिक सेवाओं को एकीकृत करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का संबंध कर्नाटक मॉडल से नहीं है, यह एक राष्ट्रीय पहल है। कथन 3 गलत है क्योंकि CSR पोर्टल का उपयोग CSR पहलों के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विकास के लिए किया जा रहा है, जो निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी शामिल करता है लेकिन ‘केवल’ निजी क्षेत्र के लिए नहीं है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘कर्नाटक मॉडल’ के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है/हैं?
1. भूमिहीन लोगों को आवासीय भूखंडों का वितरण।
2. वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक नए विभाग की स्थापना।
3. महिला सुरक्षा के लिए पुलिस हलकों में विशेष दस्ते का गठन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कर्नाटक मॉडल के तहत भूमिहीन लोगों को आवासीय भूखंडों का वितरण, वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए वैश्विक निवेशक विभाग और एनआरआई विभाग की स्थापना, तथा महिला सुरक्षा के लिए पुलिस हलकों और थानों में विशेष दस्ते का गठन जैसे कई उद्देश्यों की घोषणा की गई है। अतः तीनों कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सुशासन और समावेशी विकास सुनिश्चित करने में डिजिटल नागरिक सेवाओं तथा निवेश प्रोत्साहन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। कर्नाटक मॉडल इस दिशा में क्या प्रयास कर रहा है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सुशासन (Good Governance) और समावेशी विकास (Inclusive Development) की संक्षिप्त परिभाषा दें और इन दोनों के बीच संबंध स्थापित करें। डिजिटल नागरिक सेवाओं (Digital Citizen Services) और निवेश प्रोत्साहन (Investment Promotion) को इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के महत्वपूर्ण साधन के रूप में प्रस्तुत करें।
2. **डिजिटल नागरिक सेवाओं की भूमिका:**
* **पारदर्शिता और जवाबदेही:** भ्रष्टाचार कम करना, सूचना तक पहुँच बढ़ाना।
* **दक्षता और पहुँच:** सेवाओं की त्वरित डिलीवरी, दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच।
* **नागरिक सशक्तिकरण:** ‘एक सरकार, एक डिजिटल’ जैसे प्लेटफॉर्म (जैसे ‘सेवा वन’) के माध्यम से सेवाओं का एकीकरण।
* **चुनौतियाँ:** डिजिटल डिवाइड, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, तकनीकी साक्षरता की कमी।
3. **निवेश प्रोत्साहन की भूमिका:**
* **आर्थिक संवृद्धि:** रोजगार सृजन, आय में वृद्धि, औद्योगिक विकास।
* **आधारभूत संरचना विकास:** निजी निवेश के माध्यम से सड़क, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स का विस्तार।
* **तकनीकी उन्नयन:** नई प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का आगमन।
* **चुनौतियाँ:** नियामक बाधाएँ, भूमि अधिग्रहण के मुद्दे, राजनीतिक अस्थिरता, स्थानीय विरोध।
4. **कर्नाटक मॉडल के प्रयास:**
* **डिजिटल सेवाएँ:** ‘सेवा वन’ प्लेटफॉर्म, BMTC 2.0 मोबाइल एप्लिकेशन, वन कर्नाटक मोबिलिटी ऐप, KSRTC अवतारा 2.0 जैसे पहल।
* **निवेश प्रोत्साहन:** वैश्विक निवेशक विभाग (Global Investors Department) और एनआरआई विभाग (NRI Department) की स्थापना, ‘बियॉन्ड बेंगलुरु’ पहल के तहत पाँच शहरों को विकास केंद्र के रूप में विकसित करना।
* **अन्य संबंधित पहलें:** भूमिहीन लोगों को आवासीय भूखंडों का वितरण, महिला सुरक्षा दस्ते, CSR पोर्टल के माध्यम से सरकारी स्कूलों का विकास।
5. **समालोचनात्मक विश्लेषण:** कर्नाटक मॉडल की पहलों की क्षमता और सीमाओं का मूल्यांकन करें। क्या ये पहलें वास्तव में समावेशी विकास और सुशासन के सभी पहलुओं को संबोधित करती हैं? क्या इन पहलों के कार्यान्वयन में कोई संभावित चुनौतियाँ हैं? (जैसे वित्तीय व्यवहार्यता, क्षेत्रीय असमानताएँ, प्रभावी निगरानी)।
6. **निष्कर्ष:** एक संतुलित निष्कर्ष दें जो डिजिटल सेवाओं और निवेश प्रोत्साहन के महत्व को दोहराए, साथ ही कर्नाटक मॉडल की पहलों की सराहना करे और भविष्य की राह के लिए सुझाव दे (जैसे अंतर-विभागीय समन्वय, जनभागीदारी, सतत निगरानी)।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा ‘कर्नाटक मॉडल’ के अनावरण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. ‘कर्नाटक मॉडल’ का उद्देश्य राज्य में केवल औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।
- B. ‘कर्नाटक मॉडल’ राज्य में सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करने का प्रयास करता है।
- C. ‘कर्नाटक मॉडल’ का मुख्य उद्देश्य राज्य में विदेशी निवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना है।
- D. ‘कर्नाटक मॉडल’ केवल कृषि क्षेत्र के विकास पर केंद्रित है।
उत्तर: B. ‘कर्नाटक मॉडल’ राज्य में सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करने का प्रयास करता है। — ‘कर्नाटक मॉडल’ राज्य में सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलित विकास पर जोर देता है।
Mains: वर्तमान में ‘कर्नाटक मॉडल’ की अवधारणा राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई है। इस मॉडल के प्रमुख घटकों का विश्लेषण करते हुए, राज्य के विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने में इसकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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