केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्नाटक-आंध्र प्रदेश में रेल नेटवर्क विस्तार को दी मंजूरी

Map of Karnataka, Andhra Pradesh highlighted on the map of India — रेल नेटवर्क विस्तार परियोजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्नाटक-आंध्र प्रदेश में रेल नेटवर्क विस्तार को दी मंजूरी

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आधारभूत संरचना (रेलवे), आर्थिक विकास  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन)  |  GS Paper II — सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप (प्रधानमंत्री गति शक्ति)
  • Prelims: मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना, बल्लारी-गुंटकल रेलखंड, प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA), लॉजिस्टिक्स दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी
  • Essay: भारत के आर्थिक विकास में आधारभूत संरचना की भूमिका, सतत विकास और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के माध्यम

त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना को मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य रेल नेटवर्क का विस्तार, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य इन राज्यों के तीन जिलों में रेल नेटवर्क का विस्तार करना, कनेक्टिविटी बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार करना है। लगभग 1,264 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना वर्ष 2028-29 तक पूरी होने का लक्ष्य है और इससे भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय रेल देश की जीवन रेखा है, जो यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन माध्यम प्रदान करती है।
  • बढ़ती जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियों के कारण मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
  • प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti National Master Plan) का उद्देश्य समन्वित योजना और सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना तथा लॉजिस्टिक क्षमता को बढ़ाना है।
  • लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, लोहा एवं इस्पात, कोयला, उर्वरक और अनाज जैसे महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिए बल्लारी-गुंटकल रेलखंड एक प्रमुख मार्ग है।
  • रेल परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल माध्यम माना जाता है, जो देश के जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक है।
  • भारत सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक लागत को कम करना है, जिसमें रेल नेटवर्क का विस्तार और दक्षता में सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएँ क्या हैं?

  • मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएँ मौजूदा रेलमार्गों पर अतिरिक्त रेल लाइनें (जैसे तीसरी या चौथी लाइन) बिछाने को संदर्भित करती हैं।
  • इन परियोजनाओं का प्राथमिक उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाना और भीड़भाड़ को कम करना है।
  • अतिरिक्त लाइनें ट्रेनों के परिचालन को अधिक सुचारु बनाती हैं, जिससे यात्रा का समय कम होता है और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होता है।
  • क्षमता में वृद्धि से माल ढुलाई की मात्रा बढ़ाई जा सकती है, जिससे औद्योगिक और कृषि उत्पादों का परिवहन अधिक कुशल हो जाता है।
  • ये परियोजनाएँ अक्सर प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान जैसे बड़े राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों का हिस्सा होती हैं, जो समग्र लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी में सुधार पर केंद्रित हैं।
  • मल्टी-ट्रैकिंग से न केवल आर्थिक लाभ होते हैं, बल्कि यह पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है, क्योंकि रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करता है。
  • यह परियोजना लगभग 99 गांवों की रेल संपर्क सुविधा को बेहतर बनाएगी और लगभग सात लाख लोगों को लाभान्वित करेगी।
  • इस परियोजना के पूर्ण होने से प्रतिवर्ष लगभग 16.22 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
परियोजना स्थान कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बल्लारी-गुंटकल रेलखंड पर
परियोजना का प्रकार तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना
अनुमानित लागत 1,264 करोड़ रुपये
पूरा होने का लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक
नेटवर्क में वृद्धि लगभग 46 किलोमीटर
लाभान्वित गांव/लोग लगभग 99 गांव और लगभग सात लाख लोग

महत्व

आर्थिक महत्व

  • माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि: प्रतिवर्ष लगभग 16.22 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी, जिससे लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर, लोहा एवं इस्पात, कोयला, उर्वरक तथा अनाज जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई सुगम होगी।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: रेल एक पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में सहायक होगा।
  • रोजगार सृजन: परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

पर्यावरण संबंधी लाभ

  • कार्बन उत्सर्जन में कमी: अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाने से लगभग 1.32 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी तथा 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 0.27 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।
  • जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति: यह पहल देश के जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगी, क्योंकि रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है।

सामाजिक एवं पर्यटन महत्व

  • बेहतर रेल संपर्क: लगभग 99 गांवों की रेल संपर्क सुविधा बेहतर होगी, जिससे लोगों का आवागमन अधिक सुगम होगा।
  • पर्यटन को बढ़ावा: बल्लारी किला, श्री कुमार स्वामी मंदिर सहित देश के अनेक प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर बनेगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
  • जीवन की सुगमता: रेल परिचालन अधिक सुचारु होने से यात्रा सुविधाजनक बनेगी और भारतीय रेल परिचालन दक्षता तथा सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।

रणनीतिक महत्व

  • प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का क्रियान्वयन: यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti National Master Plan) के तहत तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य समन्वित योजना और बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
  • क्षेत्रीय विकास: ‘नए भारत’ के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप, यह पहल क्षेत्र के समग्र विकास द्वारा लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
  • भीड़भाड़ कम करना: मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना रेल संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने और भीड़भाड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि अधिग्रहण परियोजना के लिए आवश्यक भूमि के अधिग्रहण में देरी या स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
पर्यावरणीय प्रभाव आकलन परियोजना के निर्माण से स्थानीय पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों का उचित आकलन और शमन आवश्यक है।
वित्तीय प्रबंधन 1,264 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के प्रभावी प्रबंधन और समय पर धन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
तकनीकी चुनौतियाँ मौजूदा रेल नेटवर्क के साथ नई लाइनों को एकीकृत करने में तकनीकी जटिलताएँ आ सकती हैं।
परियोजना का समय पर पूरा होना वर्ष 2028-29 तक परियोजना को पूरा करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुशल योजना और निष्पादन की आवश्यकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM Gati Shakti National Master Plan)

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और त्वरित किया जाए ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
  • परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का गहन मूल्यांकन किया जाए और शमन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • परियोजना के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, साथ ही लागत प्रभावी निर्माण तकनीकों का उपयोग किया जाए।
  • परियोजना के विभिन्न चरणों की निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाए।
  • स्थानीय समुदायों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित किया जाए ताकि उनकी चिंताओं का समाधान किया जा सके और उन्हें परियोजना का हिस्सा बनाया जा सके।
  • रेलवे के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया जाए ताकि परिचालन दक्षता और सुरक्षा में सुधार हो सके।
  • परियोजना के पूरा होने के बाद इसके रखरखाव और संचालन के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ विकसित की जाएँ।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रेल नेटवर्क विस्तार · मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना · प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान · बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था · लॉजिस्टिक्स क्षमता · आर्थिक विकास · पर्यावरण-अनुकूल परिवहन · कार्बन उत्सर्जन में कमी · क्षेत्रीय विकास · आत्मनिर्भर भारत

अवधारणा प्रवाह

रेल नेटवर्क का विस्तार (मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना)  →  रेल मार्ग क्षमता में वृद्धि  →  माल ढुलाई और यात्री आवागमन में सुगमता  →  लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और आर्थिक संवृद्धि  →  पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन  →  क्षेत्रीय विकास और आत्मनिर्भरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा अनुमोदित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह परियोजना केवल कर्नाटक राज्य में रेल नेटवर्क के विस्तार से संबंधित है।
2. इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ाना है।
3. यह परियोजना भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर की वृद्धि करेगी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि परियोजना कर्नाटक और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों के तीन जिलों में फैली हुई है। कथन 2 सही है क्योंकि परियोजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बहु-माध्यमीय संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाना है। कथन 3 सही है क्योंकि परियोजना पूरी होने पर भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 46 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

Q2. मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के संभावित लाभों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह लौह अयस्क, डोलोमाइट और चूना पत्थर जैसे महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई क्षमता में वृद्धि करेगा।
2. यह रेल को एक पर्यावरण-अनुकूल परिवहन माध्यम के रूप में बढ़ावा देगा और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करेगा।
3. यह क्षेत्र में पर्यटन स्थलों तक बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनें:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। परियोजना से लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर आदि की ढुलाई क्षमता में वृद्धि होगी। रेल एक पर्यावरण-अनुकूल माध्यम होने के कारण कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। साथ ही, यह बल्लारी किला और श्री कुमार स्वामी मंदिर जैसे पर्यटन स्थलों तक बेहतर संपर्क प्रदान करेगा।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उद्देश्यों को प्राप्त करने में रेलवे नेटवर्क विस्तार परियोजनाओं की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। हाल ही में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के संदर्भ में, इसके आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा करें।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के प्रमुख उद्देश्यों का संक्षिप्त परिचय दें, जैसे कि समन्वित योजना, बहु-माध्यमीय संपर्क और लॉजिस्टिक्स क्षमता में वृद्धि। फिर बताएं कि कैसे रेलवे विस्तार परियोजनाएं इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दूसरे भाग में, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना का उदाहरण लेते हुए, इसके विशिष्ट आर्थिक लाभों (माल ढुलाई क्षमता, रोजगार), सामाजिक लाभों (गांवों तक पहुंच, पर्यटन) और पर्यावरणीय लाभों (कार्बन उत्सर्जन में कमी, तेल की बचत) पर विस्तार से चर्चा करें। अंत में, इन परियोजनाओं के समग्र महत्व और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य में उनके योगदान पर निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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