केंद्रीय सूचना आयोग ने लॉन्च किया ‘सेकंड अपील और शिकायत पोर्टल’: जानिए पूरी जानकारी

17 अगस्त 2026 को केंद्रीय सूचना आयोग ने 'सेकंड अपील और शिकायत पोर्टल' का शुभारंभ किया — diagram

केंद्रीय सूचना आयोग ने लॉन्च किया ‘सेकंड अपील और शिकायत पोर्टल’: जानिए पूरी जानकारी

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✎ AppCoMS 2.0 केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपीलों और शिकायतों के ऑनलाइन प्रबंधन के लिए एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो पारदर्शिता और नागरिक सुविधा को बढ़ाता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं  |  GS Paper II — सूचना का अधिकार
  • Prelims: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005), AppCoMS 2.0, ई-गवर्नेंस, डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC), केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO)
  • Essay: डिजिटल इंडिया और सुशासन की दिशा में चुनौतियाँ एवं अवसर, सूचना का अधिकार: लोकतंत्र में पारदर्शिता और नागरिक सशक्तिकरण का आधार

त्वरित पुनरावृत्ति: AppCoMS 2.0 केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपीलों और शिकायतों के ऑनलाइन प्रबंधन के लिए एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो पारदर्शिता और नागरिक सुविधा को बढ़ाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

17 अगस्त 2026 को केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने अपनी उन्नत ‘अपील एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली (AppCoMS 2.0)’ का शुभारंभ किया। इस अपग्रेडेड पोर्टल का उद्देश्य आयोग के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपील तथा शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित एवं नागरिक-केंद्रित बनाना है।

पृष्ठभूमि

  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 भारत में नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
  • केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) इस अधिनियम के तहत स्थापित एक शीर्ष निकाय है, जो सूचना के अधिकार से संबंधित दूसरी अपीलों और शिकायतों की सुनवाई करता है।
  • सितंबर 2016 में, CIC ने पहली बार ‘अपील एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली (AppCoMS)’ नामक एक ऑनलाइन वेब एप्लिकेशन पोर्टल लॉन्च किया था, ताकि ऑनलाइन अपील और शिकायतें दर्ज करने की सुविधा मिल सके।
  • यह प्रणाली मामलों के पंजीकरण, सुनवाई की तिथि निर्धारित करने, निर्णय जारी करने और अपलोड करने जैसी प्रक्रियाओं के डिजिटल प्रबंधन को सक्षम बनाती है।
  • भारत सरकार डिजिटल परिवर्तन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करना है।
  • AppCoMS 2.0 का शुभारंभ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रौद्योगिकी के माध्यम से शासन को अधिक सुलभ और कुशल बनाता है।

AppCoMS 2.0 क्या है?

  • AppCoMS 2.0 केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा विकसित एक उन्नत ऑनलाइन वेब एप्लिकेशन पोर्टल है, जिसे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपीलों और शिकायतों के प्रबंधन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • यह AppCoMS का एक अपग्रेडेड संस्करण है, जिसे बेहतर सुरक्षा मानकों, उन्नत सुविधाओं और अधिक सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली के साथ विकसित किया गया है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य अपील और शिकायत निस्तारण प्रक्रिया को सरल बनाना तथा आवेदकों एवं अन्य हितधारकों को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल अनुभव प्रदान करना है।
  • पोर्टल आवेदकों, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारियों (CPIO) और अन्य हितधारकों के लिए ई-मेल आईडी तथा मोबाइल नंबर से जुड़े उपयोगकर्ता खाते बनाने की सुविधा प्रदान करता है।
  • आवेदक अपने खातों के माध्यम से दूसरी अपील और शिकायत दर्ज कर सकते हैं, मामले की समय-सीमा देख सकते हैं, दस्तावेजों तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं और सुनवाई संबंधी नोटिस तथा निर्णयों की प्रतियां डाउनलोड कर सकते हैं।
  • यह प्रणाली आयोग द्वारा जारी नोटिस और आदेशों पर डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC) के उपयोग की सुविधा भी देती है, जिससे उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है।
  • CPIOs के लिए भी उपयोगकर्ता खाते बनाए जाएंगे, जिससे वे अपीलों और शिकायतों का विवरण देख सकेंगे तथा पोर्टल के माध्यम से संबंधित दस्तावेज जमा कर सकेंगे।
  • यह पहल प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अपग्रेडेड अपील एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली (AppCoMS 2.0) केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपील और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना।
उपयोगकर्ता खाते (ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर से जुड़े) आवेदकों, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारियों (CPIO) और अन्य हितधारकों के लिए ऑनलाइन अपील/शिकायत दर्ज करने और संबंधित प्रक्रियाओं को ट्रैक करने की सुविधा।
आवेदकों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं मामले की समय-सीमा देखना, दस्तावेजों तक पहुंच, सुनवाई संबंधी नोटिस डाउनलोड करना, निर्णयों और आदेशों की प्रतियां प्राप्त करना।
डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC) का उपयोग आयोग द्वारा जारी नोटिस और आदेशों की प्रामाणिकता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
CPIO के लिए उपयोगकर्ता खाते दूसरी अपीलों और शिकायतों का विवरण देखने तथा पोर्टल के माध्यम से मामलों से संबंधित दस्तावेज जमा करने की सुविधा।

महत्व

शासन और पारदर्शिता

  • सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपीलों और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करके शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना।
  • नागरिकों को सूचना प्राप्त करने के उनके संवैधानिक अधिकार को प्रभावी ढंग से प्रयोग करने में सहायता करना, जिससे सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है।

डिजिटल सशक्तिकरण

  • प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सूचना आयोग की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना, जिससे मामलों का पंजीकरण, सुनवाई और निर्णय जारी करने की प्रक्रिया अधिक कुशल और समयबद्ध हो सके।
  • नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन अपील और शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करके डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए।

प्रशासनिक दक्षता

  • आयोग के भीतर कागजी कार्रवाई को कम करना और मैन्युअल प्रक्रियाओं को डिजिटल करना, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और प्रशासनिक लागत कम हो।
  • मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटान में सहायता करना, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आ सके और न्यायिक प्रक्रिया पर बोझ कम हो।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल साक्षरता और पहुंच

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण पोर्टल का उपयोग करने में कठिनाई।
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी और आवश्यक उपकरणों की अनुपलब्धता, जिससे सभी नागरिकों तक इसकी पहुंच सीमित हो सकती है।

2. डेटा सुरक्षा और गोपनीयता

  • पोर्टल पर संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी और सरकारी दस्तावेजों के अपलोड होने के कारण डेटा उल्लंघनों का जोखिम।
  • साइबर हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करना और उपयोगकर्ता डेटा की गोपनीयता बनाए रखना एक सतत चुनौती।

3. पोर्टल का प्रभावी उपयोग

  • यह सुनिश्चित करना कि CPIO और अन्य हितधारक पोर्टल का नियमित और प्रभावी ढंग से उपयोग करें।
  • तकनीकी समस्याओं और उपयोगकर्ता त्रुटियों को दूर करने के लिए निरंतर सहायता और प्रशिक्षण की आवश्यकता।

4. तकनीकी रखरखाव और उन्नयन

  • पोर्टल को नवीनतम तकनीकी मानकों के अनुरूप बनाए रखने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार इसे उन्नत करने के लिए निरंतर निवेश।
  • तकनीकी खराबी या डाउनटाइम की स्थिति में सेवा में व्यवधान से बचना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डिजिटल डिवाइड ग्रामीण-शहरी और साक्षर-निरक्षर आबादी के बीच डिजिटल पहुंच और उपयोग में असमानता।
तकनीकी जटिलता पोर्टल की कार्यप्रणाली को समझने और उसका प्रभावी ढंग से उपयोग करने में कुछ उपयोगकर्ताओं को कठिनाई।
प्रतिक्रिया समय तकनीकी सहायता और शिकायतों के समाधान में देरी, जिससे उपयोगकर्ता अनुभव प्रभावित हो सकता है।
प्रणाली का दुरुपयोग तुच्छ या दुर्भावनापूर्ण अपीलों/शिकायतों के लिए पोर्टल का दुरुपयोग, जिससे आयोग पर अनावश्यक बोझ पड़ सकता है।

आगे की राह

  • डिजिटल साक्षरता अभियान चलाकर नागरिकों को AppCoMS 2.0 के उपयोग के बारे में शिक्षित करना।
  • पोर्टल की पहुंच बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और सामान्य सेवा केंद्रों (CSC) की भूमिका को मजबूत करना।
  • डेटा सुरक्षा मानकों को लगातार अपडेट करना और साइबर सुरक्षा के लिए मजबूत प्रोटोकॉल लागू करना।
  • उपयोगकर्ताओं के लिए एक मजबूत तकनीकी सहायता प्रणाली स्थापित करना, जिसमें हेल्पलाइन और ऑनलाइन ट्यूटोरियल शामिल हों।
  • CPIO और अन्य हितधारकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना ताकि वे पोर्टल का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
  • पोर्टल के प्रदर्शन की नियमित निगरानी करना और उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया के आधार पर आवश्यक सुधार करना।
  • पोर्टल को अन्य सरकारी डिजिटल पहलों के साथ एकीकृत करना ताकि एक सहज नागरिक सेवा अनुभव प्रदान किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

केंद्रीय सूचना आयोग · सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 · AppCoMS 2.0 · डिजिटल शासन · पारदर्शिता · नागरिक-केंद्रित शासन · दूसरी अपील · शिकायत निवारण · ई-गवर्नेंस · डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)’, ‘note’: ‘सूचना का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’}

अवधारणा प्रवाह

नागरिक सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन प्रस्तुत करता है।  →  प्रथम अपील अधिकारी द्वारा सूचना न मिलने या असंतोषजनक जवाब।  →  नागरिक AppCoMS 2.0 पर दूसरी अपील/शिकायत दर्ज करता है।  →  केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) अपील/शिकायत का ऑनलाइन प्रबंधन करता है।  →  CIC सुनवाई करता है और डिजिटल रूप से निर्णय जारी करता है।  →  नागरिक को ऑनलाइन निर्णय और आदेश प्राप्त होते हैं।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्रीय सूचना आयोग एक संवैधानिक निकाय है।
2. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपील और शिकायतों का निस्तारण केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा किया जाता है।
3. AppCoMS 2.0 पोर्टल का उद्देश्य आयोग के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। केंद्रीय सूचना आयोग एक सांविधिक निकाय है, संवैधानिक नहीं। इसका गठन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत किया गया है। कथन 2 सही है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपील और शिकायतों का निस्तारण केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा किया जाता है। कथन 3 सही है। AppCoMS 2.0 पोर्टल का उद्देश्य आयोग के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और प्रक्रियाओं को व्यवस्थित बनाना है।

Q2. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत निम्नलिखित में से कौन-सा प्रावधान केंद्रीय सूचना आयोग से संबंधित है?

  1. सूचना प्राप्त करने का अधिकार
  2. केंद्रीय सूचना आयोग का गठन
  3. लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति
  4. पहली अपील का प्रावधान

उत्तर: केंद्रीय सूचना आयोग का गठन — सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 12 केंद्रीय सूचना आयोग के गठन का प्रावधान करती है। अन्य विकल्प अधिनियम के अन्य पहलुओं से संबंधित हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत केंद्रीय सूचना आयोग की भूमिका का परीक्षण कीजिए। AppCoMS 2.0 जैसे डिजिटल पहलों के माध्यम से आयोग किस प्रकार पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा दे रहा है, चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की स्थापना, संरचना और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत उसकी मुख्य भूमिकाओं (जैसे दूसरी अपील और शिकायतों का निपटान, सूचना के अधिकार के कार्यान्वयन की निगरानी) का उल्लेख करें। इसके बाद, AppCoMS 2.0 पोर्टल की विशेषताओं (ऑनलाइन अपील/शिकायत दर्ज करना, डिजिटल प्रबंधन, उपयोगकर्ता खाते, डिजिटल हस्ताक्षर) और इसके उद्देश्यों (डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना, उपयोगकर्ता-अनुकूल अनुभव) पर प्रकाश डालें। अंत में, यह बताएं कि कैसे ये डिजिटल पहल पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देती हैं, जिससे नागरिकों के लिए सूचना तक पहुंच आसान होती है और शिकायत निवारण तंत्र अधिक प्रभावी बनता है। इसमें भारत सरकार के व्यापक ई-गवर्नेंस प्रयासों के संदर्भ को भी शामिल करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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