06 Aug केन-बेतवा लिंक परियोजना: जनजातीय पुनर्वास की चुनौतियाँ और समाधान
✎ केन-बेतवा लिंक परियोजना में जनजातीय पुनर्वास और वन अधिकार अधिनियम, 2006 का अनुपालन सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसकी निगरानी जनजातीय कार्य मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की जा रही है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (नदी-जोड़ो परियोजनाएँ) | GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय (जनजातीय अधिकार, पुनर्वास) | GS Paper III — पर्यावरण (वन संरक्षण, पारिस्थितिकी)
- Prelims: केन-बेतवा लिंक परियोजना, जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA), वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA), राष्ट्रीय पुनर्वासन और पुर्नस्थापन नीति, राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (NWDA), वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023
- Essay: विकास बनाम विस्थापन: भारत में बड़ी परियोजनाओं का सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभाव, जनजातीय अधिकारों का संरक्षण और समावेशी विकास की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: केन-बेतवा लिंक परियोजना में जनजातीय पुनर्वास और वन अधिकार अधिनियम, 2006 का अनुपालन सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसकी निगरानी जनजातीय कार्य मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा की जा रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
जनजातीय कार्य राज्यमंत्री ने लोकसभा में बताया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित जनजातीय परिवारों के पुनर्वासन और पुर्नस्थापन (Rehabilitation and Resettlement) की गतिविधियाँ राज्य सरकारों द्वारा की जा रही हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय इस परियोजना की संचालन और निगरानी समितियों का सदस्य है तथा उसने अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वासन योजना को मंजूरी दी थी। मंत्रालय को सीधे तौर पर राशि संवितरण से संबंधित कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन विस्थापन के मुद्दों पर विभिन्न अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें संबंधित राज्य सरकारों को भेजा गया है।
पृष्ठभूमि
- केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली नदी-जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित करना है।
- इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी को दूर करने, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और पनबिजली उत्पादन में मदद मिलेगी।
- परियोजना के चरण-I में कुल 1,913 परियोजना प्रभावित परिवारों (PAF) का विस्थापन शामिल है, जिनमें से 648 परिवार अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं।
- जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन और पुर्नस्थापन की कार्य योजना के कार्यान्वयन की प्रगति की निगरानी करता है।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने परियोजना के चरण-II के प्रस्तावों को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है, जिनमें राष्ट्रीय पुनर्वासन और पुर्नस्थापन नीति तथा वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act, 2006) का अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल है।
- वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 के अनुसार, राज्य सरकारें वन भूमि के विपथन (Diversion) का आदेश तभी जारी कर सकती हैं जब केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिल जाए और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अधिकारों का निपटारा सुनिश्चित हो जाए।
वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) और पुनर्वासन
- वन अधिकार अधिनियम, 2006 (अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006) वन में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के वन अधिकारों को मान्यता देता है।
- यह अधिनियम उन्हें वन भूमि पर व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों के साथ-साथ वन संसाधनों के उपयोग, प्रबंधन और संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है।
- अधिनियम की धारा 4(5) के तहत प्रावधान है कि जब तक अधिकारों को मान्यता देने और उनके सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक दावेदारों को उनके कब्जे वाली वन भूमि से बेदखल या हटाया नहीं जा सकता।
- पुनर्वासन और पुर्नस्थापन का अर्थ है किसी विकास परियोजना के कारण विस्थापित हुए व्यक्तियों को वैकल्पिक भूमि, आवास, आजीविका और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करना ताकि वे अपना जीवन फिर से स्थापित कर सकें।
- राष्ट्रीय पुनर्वासन और पुर्नस्थापन नीति, भारत सरकार द्वारा विस्थापित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मानजनक पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करती है।
- जनजातीय कार्य मंत्रालय राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करता है कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 4(5) का पालन किया जाए और किसी भी हकदार लाभार्थी को उसके वन अधिकारों से वंचित न किया जाए।
- वन अधिकार अधिनियम का कार्यान्वयन राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के पास है, इसलिए इससे संबंधित डेटा केंद्रीय रूप से जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा नहीं रखा जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| केन-बेतवा लिंक परियोजना | यह भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य जल अधिशेष (water surplus) केन नदी के पानी को जल-कमी वाले बेतवा बेसिन में स्थानांतरित करना है। |
| जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) | परियोजना की संचालन और निगरानी समितियों का सदस्य है, जो परियोजना प्रभावित परिवारों (PAF) के पुनर्वासन और पुनर्स्थापन (R&R) की प्रगति की निगरानी करता है। |
| वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) | यह अधिनियम अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के वन अधिकारों को मान्यता देता है। परियोजना से प्रभावित जनजातीय समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। |
| राष्ट्रीय पुनर्वासन और पुनर्स्थापन नीति | यह नीति विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वासन और पुनर्स्थापन के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है, जिसमें मुआवजा, आजीविका पुनर्स्थापन और सामाजिक एकीकरण शामिल हैं। |
| पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) | परियोजना के पर्यावरणीय पहलुओं की निगरानी करता है और वन भूमि के डायवर्जन के लिए अनुमोदन प्रदान करता है, जिसमें वन अधिकार अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल है। |
महत्व
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी को दूर करके कृषि उत्पादकता बढ़ाएगी और पेयजल उपलब्ध कराएगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
- सिंचाई सुविधाओं में सुधार से किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र में गरीबी कम करने में मदद मिलेगी।
- परियोजना से प्रभावित जनजातीय समुदायों के पुनर्वासन और पुनर्स्थापन से उनके जीवन स्तर में सुधार हो सकता है, यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
पर्यावरण और पारिस्थितिक महत्व
- नदी जोड़ो परियोजनाएँ जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकती हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ मौसमी जल की कमी होती है।
- हालांकि, परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) के एक हिस्से का डूबना पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह परियोजना विभिन्न मंत्रालयों (जल शक्ति, जनजातीय कार्य, पर्यावरण) और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की आवश्यकता को दर्शाती है।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA) और राष्ट्रीय पुनर्वासन और पुनर्स्थापन नीति का प्रभावी कार्यान्वयन सुशासन और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. जनजातीय विस्थापन और पुनर्वासन
- परियोजना से बड़ी संख्या में जनजातीय परिवार विस्थापित होंगे, जिनके पुनर्वासन और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया जटिल और संवेदनशील है।
- भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना एक चुनौती है, ताकि लाभार्थियों तक सहायता पहुँच सके।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, जनजातीय विकास
2. वन अधिकारों का कार्यान्वयन
- वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) के तहत जनजातीय समुदायों के अधिकारों को मान्यता देना और उनका सत्यापन करना राज्य सरकारों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है।
- अधिकारों के निपटारे से पहले वन भूमि के डायवर्जन पर रोक का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन, जनजातीय अधिकार
3. पर्यावरणीय प्रभाव
- पन्ना टाइगर रिजर्व के एक हिस्से का डूबना जैव विविधता और वन्यजीवों पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
- पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों का कड़ाई से पालन और सतत निगरानी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता
4. अंतर-राज्यीय समन्वय
- परियोजना में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों का हित शामिल है, जिससे जल-साझाकरण और कार्यान्वयन में समन्वय की आवश्यकता होती है।
- विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, अंतर-राज्यीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| पुनर्वासन राशि का संवितरण | शिकायतों की अनुपस्थिति के बावजूद, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि राशि वास्तव में लाभार्थियों तक पहुँचे और उसका सही उपयोग हो। |
| वन अधिकार अधिनियम (FRA) का कार्यान्वयन | राज्य सरकारों द्वारा FRA के तहत अधिकारों का निपटारा सुनिश्चित करने में देरी या कमी से जनजातीय समुदायों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा सकता है। |
| परियोजना प्रभावित परिवारों (PAF) की पहचान | सभी वास्तविक प्रभावित परिवारों, विशेषकर अनुसूचित जनजाति (ST) के परिवारों की सटीक पहचान और उनका समावेश सुनिश्चित करना। |
| आजीविका पुनर्स्थापन | विस्थापित परिवारों के लिए केवल मौद्रिक मुआवजा पर्याप्त नहीं है; उनकी आजीविका के स्थायी विकल्पों का सृजन भी आवश्यक है। |
| निगरानी और जवाबदेही | पुनर्वासन और पुनर्स्थापन योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी और किसी भी शिकायत का त्वरित निवारण सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय पुनर्वासन और पुनर्स्थापन नीति
- अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006
आगे की राह
- जनजातीय कार्य मंत्रालय और राज्य सरकारों द्वारा पुनर्वासन और पुनर्स्थापन (R&R) योजनाओं का पारदर्शी और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
- वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) के तहत सभी पात्र जनजातीय परिवारों के वन अधिकारों को मान्यता देने और उनका सत्यापन करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए।
- विस्थापित परिवारों के लिए केवल मौद्रिक मुआवजे के बजाय स्थायी आजीविका के अवसर और कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान किए जाएँ।
- परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, विशेषकर पुनर्वासन और पुनर्स्थापन योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन में।
- पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों का कड़ाई से पालन किया जाए और पन्ना टाइगर रिजर्व पर परियोजना के प्रभावों को कम करने के लिए प्रभावी शमन उपाय लागू किए जाएँ।
- विभिन्न मंत्रालयों (जल शक्ति, जनजातीय कार्य, पर्यावरण) और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना साझाकरण तंत्र स्थापित किया जाए।
- शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाए ताकि परियोजना प्रभावित परिवारों की चिंताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केन-बेतवा लिंक परियोजना · जनजातीय पुनर्वास · वन अधिकार अधिनियम, 2006 · परियोजना प्रभावित परिवार (PAF) · राष्ट्रीय पुनर्वासन और पुर्नस्थापन नीति · जनजातीय कार्य मंत्रालय · पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय · संघवाद · सतत विकास · सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 244’, ‘note’: ‘अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘अनुसूचित जातियों, जनजातियों के शैक्षिक, आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
केन-बेतवा लिंक परियोजना का प्रस्ताव → परियोजना से जनजातीय समुदायों का विस्थापन → वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत अधिकारों का दावा → पुनर्वासन और पुनर्स्थापन (R&R) योजना का अनुमोदन → राज्य सरकारों द्वारा भूमि अधिग्रहण और R&R का कार्यान्वयन → जनजातीय कार्य मंत्रालय और MoEFCC द्वारा निगरानी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. केन-बेतवा लिंक परियोजना जल शक्ति मंत्रालय के तहत आती है।
2. वन अधिकार अधिनियम, 2006 का कार्यान्वयन राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के पास है।
3. जनजातीय कार्य मंत्रालय परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन और पुर्नस्थापन की निगरानी समितियों का सदस्य नहीं है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि केन-बेतवा लिंक परियोजना जल शक्ति मंत्रालय के तहत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा संचालित है। कथन 2 भी सही है क्योंकि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों की है। कथन 3 गलत है क्योंकि जनजातीय कार्य मंत्रालय केन-बेतवा लिंक परियोजना की संचालन और निगरानी समितियों का सदस्य है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. केन-बेतवा लिंक परियोजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा मंत्रालय अनुसूचित जनजाति परियोजना प्रभावित परिवारों (ST-PAF) के लिए पुनर्वासन और पुर्नस्थापन योजना को मंजूरी देता है?
- जल शक्ति मंत्रालय
- जनजातीय कार्य मंत्रालय
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- ग्रामीण विकास मंत्रालय
उत्तर: जनजातीय कार्य मंत्रालय — जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) ने केन-बेतवा लिंक परियोजना, चरण-I के अनुसूचित जनजाति परियोजना प्रभावित परिवारों (ST-PAF) के लिए पुनर्वासन और पुर्नस्थापन योजना को मंजूरी दी थी।
Q3. अभिकथन (A): वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 के तहत, राज्य सरकार या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन वन भूमि के विपथन का आदेश तभी जारी कर सकता है जब उसे केंद्र सरकार से ‘अंतिम’ मंजूरी मिल जाए।
कारण (R): यह प्रावधान अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत अधिकारों का निपटारा सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं। वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 का नियम 11 (7) स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य सरकार या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन तभी विपथन का आदेश जारी कर सकता है जब उसे केंद्र सरकार से ‘अंतिम’ मंजूरी मिले और साथ ही, वन अधिकार अधिनियम, 2006 सहित अन्य सभी लागू अधिनियमों का पालन किया जाए। यह प्रावधान वनवासियों के अधिकारों की सुरक्षा और निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए ही किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं में जनजातीय समुदायों के पुनर्वासन और वन अधिकारों के संरक्षण से संबंधित चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन चुनौतियों के समाधान में विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: केन-बेतवा लिंक परियोजना का संक्षिप्त उल्लेख और जनजातीय समुदायों पर इसके संभावित प्रभाव।
2. पुनर्वासन और वन अधिकारों से संबंधित चुनौतियाँ:
क. विस्थापन और आजीविका का नुकसान: परियोजना प्रभावित परिवारों (PAF) का आंकड़ा (जैसे 1,913 PAF, जिनमें से 648 ST-PAF)।
ख. वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 का कार्यान्वयन: अधिनियम की धारा 4(5) का पालन न होना, जिसमें अधिकारों की मान्यता और सत्यापन तक बेदखली पर रोक है।
ग. मुआवज़े और पुनर्वास योजनाओं का अपर्याप्त या विलंबित वितरण।
घ. सांस्कृतिक और सामाजिक विघटन: जनजातीय समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली पर प्रभाव।
ङ. पर्यावरणीय प्रभाव: वन भूमि का विपथन और जैव विविधता का नुकसान।
3. विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की भूमिका:
क. जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA): पुनर्वासन और पुर्नस्थापन योजनाओं की मंजूरी, निगरानी समितियों में सदस्यता, FRA के कार्यान्वयन हेतु राज्यों को प्रोत्साहित करना।
ख. जल शक्ति मंत्रालय (MoJS): परियोजना का समग्र निष्पादन, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वासन गतिविधियों का समन्वय।
ग. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): वन भूमि के विपथन की मंजूरी, वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना, FRA के अनुपालन की शर्त लगाना।
घ. राज्य सरकारें: भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुर्नस्थापन नीतियों का कार्यान्वयन, FRA का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन, शिकायतों का निवारण, MoEFCC द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन।
4. समाधान और आगे की राह: सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA), सहभागी दृष्टिकोण, समयबद्ध और पारदर्शी पुनर्वास, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना, संघवाद के सिद्धांतों का पालन।
5. निष्कर्ष: विकास और जनजातीय अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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