26 Sep केरलम में महिला सशक्तीकरण के लिए अमित शाह ने ‘शी मार्ट’ का शुभारंभ किया, जानिए पूरा विवरण
✎ ‘सहकार से समृद्धि’ विजन के तहत सहकारिता मंत्रालय महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को 'शी मार्ट' जैसी पहलों के माध्यम से सशक्त कर रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: सहकारिता मंत्रालय, सहकार से समृद्धि, महिला स्वयं सहायता समूह (SHG), NCCF, NAFED, शी मार्ट, ब्लू इकोनॉमी, आत्मनिर्भर दलहन मिशन
- Essay: महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास में सहकारिता की भूमिका, भारत की आर्थिक संवृद्धि में महिलाओं का योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: ‘सहकार से समृद्धि’ विजन के तहत सहकारिता मंत्रालय महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को ‘शी मार्ट’ जैसी पहलों के माध्यम से सशक्त कर रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने केरलम के कोल्लम में महिला सशक्तीकरण और सहकारिता से जुड़ी विभिन्न पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों में ‘वनिथम शी मार्ट शॉप्स’ का लोकार्पण और NCCF के ‘जनः’ उत्पादों की बिक्री का शुभारंभ शामिल है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और महिला-नेतृत्व वाले विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- भारत में सहकारिता आंदोलन का एक लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है, जिसमें केरलम जैसे राज्यों में स्वतंत्रता-पूर्व काल से ही यह सुव्यवस्थित रूप से मौजूद है।
- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2021 में एक अलग सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य देश में सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा और गति प्रदान करना है।
- सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के साथ काम कर रही है, जिसका लक्ष्य सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण और गरीब आबादी, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
- महिला सशक्तीकरण सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है, जिसके तहत महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
- केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट में ‘शी मार्ट’ जैसी पहलों की घोषणा की थी, जिनका उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups – SHG) और ग्रामीण महिला उद्यमियों को बाजार से जोड़ना है।
- भारत सरकार विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से किसानों और आम लोगों को किफायती खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
‘सहकार से समृद्धि’ और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी प्रमुख पहलें
- **सहकारिता मंत्रालय का गठन:** वर्ष 2021 में एक अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करना और ग्रामीण विकास, कृषि विकास तथा महिला सशक्तीकरण में इसकी भूमिका का विस्तार करना है।
- **‘सहकार से समृद्धि’:** यह प्रधानमंत्री का एक विजन है, जिसका लक्ष्य सहकारिता मॉडल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और समाज के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं और किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध करना है।
- **‘वनिथम शी मार्ट शॉप्स’:** ये दुकानें महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों को सीधे बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। इसका उद्देश्य बिचौलियों को समाप्त कर उत्पादकों को बेहतर मूल्य दिलाना है।
- **NCCF के ‘जनः’ उत्पाद:** राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (National Cooperative Consumers’ Federation of India – NCCF) के ‘जनः’ उत्पादों की बिक्री का शुभारंभ भी किया गया है, जो सहकारिता क्षेत्र के उत्पादों को बढ़ावा देगा।
- **NAFED की पहलें:** राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India Ltd – NAFED) द्वारा मोबाइल वैन के माध्यम से प्याज, भारत आटा और भारत चावल जैसी किफायती खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- **ब्लू इकोनॉमी में सहकारिता:** केरलम जैसे तटीय राज्यों में ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) की अपार संभावनाओं को देखते हुए, सरकार सहकारिता के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूत करने की योजनाएं लेकर आई है।
- **महिला नेतृत्व को बढ़ावा:** सरकार महिला नेतृत्व को निरंतर बढ़ावा दे रही है, जिसके परिणामस्वरूप श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, 36 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खुले हैं, और ‘लखपति दीदी’ जैसी पहलें महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महिला सशक्तीकरण और सहकारिता पहल | ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और महिला-नेतृत्व वाले विकास को गति देने का प्रयास। |
| वनिथम शी मार्ट शॉप्स का लोकार्पण | महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीण महिला उद्यमियों को सीधा बाज़ार उपलब्ध कराना। |
| NCCF के ‘जनः’ उत्पादों की बिक्री का शुभारंभ | स्थानीय महिला उद्यमियों और किसानों के उत्पादों को व्यापक बाज़ार तक पहुँचाना। |
| प्रोक्योरमेंट से लेकर सीधे रिटेल मार्केट तक पहुँच | किसानों और महिला उद्यमियों को मूल्य श्रृंखला (value chain) में अधिक लाभ सुनिश्चित करना। |
| केरलम में 300 से अधिक ‘शी मार्ट’ का लक्ष्य | केरलम, तमिलनाडु और कर्नाटक में महिला उद्यमियों के लिए बाज़ार पहुँच का विस्तार। |
| NAFED की मोबाइल वैन द्वारा किफायती खाद्य वस्तुएँ | आम लोगों और किसानों को सस्ती दरों पर प्याज, भारत आटा और भारत चावल उपलब्ध कराना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह पहल महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को सीधे बाज़ार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देगी।
- ‘शी मार्ट’ के माध्यम से उत्पादों की खरीद से लेकर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और खुदरा बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित होगी, जिससे किसानों और महिला उद्यमियों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में नए व्यावसायिक अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और आय के स्रोत बढ़ेंगे।
सामाजिक महत्व
- महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
- सहकारिता आंदोलन के माध्यम से महिलाएं संगठित होकर सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन कर सकेंगी, जिससे सामाजिक एकजुटता मजबूत होगी।
- ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार होगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
शासनिक महत्व
- केंद्र में एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन ग्रामीण विकास, कृषि विकास और महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और गरीब महिलाओं तक सहकारिता का लाभ पहुँचाना है।
- विभिन्न सरकारी एजेंसियों (जैसे NAFED, NCCF) के समन्वय से योजनाएं लागू की जा रही हैं, जो प्रभावी शासन का उदाहरण है।
चुनौतियाँ
1. बाज़ार पहुँच और प्रतिस्पर्धा
- ग्रामीण महिला उद्यमियों के उत्पादों को बड़े बाज़ारों में स्थापित करना और स्थापित ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा करना एक चुनौती हो सकती है।
- उत्पादों की गुणवत्ता, मानकीकरण और पैकेजिंग को बाज़ार की मांग के अनुरूप बनाए रखना आवश्यक होगा।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों का जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार।
2. वित्तीय समावेशन और ऋण तक पहुँच
- महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए पर्याप्त और समय पर ऋण उपलब्ध कराना एक चुनौती हो सकती है।
- वित्तीय साक्षरता की कमी भी उनके लिए वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाने में बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
3. क्षमता निर्माण और कौशल विकास
- महिलाओं को प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में आवश्यक कौशल प्रदान करना महत्वपूर्ण है।
- तकनीकी जानकारी और डिजिटल साक्षरता की कमी भी उनके व्यवसाय के विस्तार में बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: मानव संसाधनों का विकास।
4. बुनियादी ढाँचा और लॉजिस्टिक्स
- ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादों के संग्रहण, परिवहन और वितरण के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचे का अभाव एक चुनौती हो सकता है।
- शीघ्र खराब होने वाले उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज और कुशल आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: अवसंरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
5. सहकारी समितियों का सुशासन
- सहकारी समितियों के भीतर पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- राजनीतिक हस्तक्षेप और आंतरिक गुटबाजी सहकारी आंदोलन की प्रभावशीलता को कम कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही।
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बाज़ार की प्रतिस्पर्धा | स्थानीय उत्पादों को बड़े बाज़ार में स्थापित करना और गुणवत्ता बनाए रखना। |
| वित्तीय सहायता का अभाव | महिलाओं के लिए पर्याप्त और समय पर ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करना। |
| कौशल और प्रशिक्षण की कमी | आधुनिक व्यावसायिक तकनीकों में महिलाओं को प्रशिक्षित करना। |
| बुनियादी ढाँचे की समस्या | ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादों के परिवहन और भंडारण के लिए सुविधाओं का अभाव। |
| प्रशासनिक चुनौतियाँ | सहकारी समितियों के कुशल प्रबंधन और पारदर्शिता को बनाए रखना। |
आगे की राह
- महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को बाज़ार की मांग के अनुरूप उत्पादों की गुणवत्ता और मानकीकरण के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
- वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर महिलाओं के लिए आसान और रियायती दरों पर ऋण तक पहुँच सुनिश्चित की जाए।
- डिजिटल साक्षरता और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए ताकि महिलाएं अपने उत्पादों को व्यापक ऑनलाइन बाज़ार में बेच सकें।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज, परिवहन और प्रसंस्करण इकाइयों जैसे आवश्यक बुनियादी ढाँचे का विकास किया जाए।
- सहकारी समितियों के भीतर सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) से जुड़ी महिलाओं को विशेष सहायता और प्रशिक्षण प्रदान किया जाए ताकि वे समुद्री संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
- सरकारी खरीद में महिला स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
महिला सशक्तीकरण · सहकारिता आंदोलन · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · आत्मनिर्भर भारत · शी मार्ट · राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) · राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) · ब्लू इकोनॉमी · लखपति दीदी योजना · वित्तीय समावेशन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(a)’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मज़दूरी आदि’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक, आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243ZH से 243ZT’, ‘note’: ‘सहकारी समितियों से संबंधित प्रावधान’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र में सहकारिता मंत्रालय का गठन → प्रधानमंत्री का ‘सहकार से समृद्धि’ विजन → महिला सशक्तीकरण और सहकारिता पहल का शुभारंभ → ‘वनिथम शी मार्ट’ और ‘जनः’ उत्पादों की बिक्री → महिला स्वयं सहायता समूहों को बाज़ार पहुँच → ग्रामीण महिला उद्यमियों की आर्थिक स्वतंत्रता → ग्रामीण अर्थव्यवस्था का समग्र विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में सहकारिता आंदोलन का इतिहास स्वतंत्रता-पूर्व काल से जुड़ा है, विशेषकर त्रावणकोर, कोच्चि और मालाबार जैसे क्षेत्रों में।
2. ‘शी मार्ट’ पहल का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को सीधे बाजार से जोड़ना है।
3. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का संबंध महिला सशक्तीकरण और सहकारिता से है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत में सहकारिता आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसमें स्वतंत्रता-पूर्व काल के कई उदाहरण मिलते हैं। ‘शी मार्ट’ पहल का मुख्य उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को बाजार तक सीधी पहुँच प्रदान करना है। कथन 3 गलत है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का संबंध हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने से है, न कि सीधे महिला सशक्तीकरण या सहकारिता से।
Q2. कथन (A): ‘सहकार से समृद्धि’ का दृष्टिकोण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला-नेतृत्व वाले विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): सहकारिता मंत्रालय का गठन ग्रामीण विकास, कृषि विकास और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
- कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
- कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
उत्तर: कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। — कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। ‘सहकार से समृद्धि’ का दृष्टिकोण सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। सहकारिता मंत्रालय का गठन इसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए किया गया है, जिससे ग्रामीण विकास, कृषि और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिल सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सहकारिता आंदोलन महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में ‘शी मार्ट’ जैसी पहलों के योगदान का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में सहकारिता आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भ और ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण का संक्षिप्त परिचय।
2. सहकारिता आंदोलन की भूमिका: महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में सहकारिता की भूमिका पर प्रकाश डालें। इसमें वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, रोजगार सृजन और बाजार तक पहुँच जैसे बिंदुओं को शामिल करें।
3. ‘शी मार्ट’ पहल का मूल्यांकन: ‘शी मार्ट’ जैसी पहलों के विशिष्ट योगदान का विश्लेषण करें। इसमें महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीण महिला उद्यमियों को सीधे बाजार से जोड़ने, बिचौलियों को समाप्त करने, आय बढ़ाने और उत्पादों के प्रसंस्करण, ब्रांडिंग व पैकेजिंग में सहायता प्रदान करने जैसे पहलुओं को शामिल करें। राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) की भूमिका का उल्लेख करें।
4. अन्य संबंधित पहलें: आत्मनिर्भर दलहन मिशन, NAFED-कल्याण छात्रवृत्ति योजना और लखपति दीदी योजना जैसी अन्य सरकारी पहलों का उल्लेख करें जो सहकारिता और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देती हैं।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: सहकारिता आंदोलन के सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे वित्तीय कमी, प्रबंधन संबंधी मुद्दे, जागरूकता की कमी) का संक्षिप्त उल्लेख करें और उन्हें दूर करने के लिए सुझाव दें।
6. निष्कर्ष: सहकारिता के माध्यम से समावेशी विकास और महिला-नेतृत्व वाले विकास के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: केरल राज्य में महिला सशक्तीकरण और सहकारिता से संबंधित हाल ही में शुरू की गई पहलों के शुभारंभ के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा कोल्लम में उद्घाटन किया गया प्रमुख कार्यक्रम कौन सा था?
- A. राष्ट्रीय महिला सहकारी संघ (NWCS) की स्थापना
- B. महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए ‘मिशन शक्ति’ कार्यक्रम
- C. केरल राज्य सहकारी बैंक (KSCB) की महिला शाखाओं का उद्घाटन
- D. महिला उद्यमिता विकास के लिए ‘समृद्धि योजना’
उत्तर: B. महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए ‘मिशन शक्ति’ कार्यक्रम — अमित शाह ने कोल्लम में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए ‘मिशन शक्ति’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है।
Mains: केरल राज्य में महिला सशक्तीकरण और सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई पहलों का वर्णन करें। इन पहलों के माध्यम से राज्य में महिला उद्यमिता और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित रणनीतियों का भी उल्लेख करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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