केरल उच्च न्यायालय का बड़ा निर्देश: सड़क सुरक्षा में कमी से हो रही मौतें, जानिए पूरा मामला

Systemic deficiencies on roads costing lives, says Kerala High Court — labelled illustration

केरल उच्च न्यायालय का बड़ा निर्देश: सड़क सुरक्षा में कमी से हो रही मौतें, जानिए पूरा मामला

✎ केरल उच्च न्यायालय ने सड़क दुर्घटनाओं में प्रणालीगत कमियों पर चिंता व्यक्त की और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न अधिकारियों को जवाबदेह ठहराते हुए एक अंतर-विषयक अनुसंधान समिति और जिला-स्तरीय निगरानी समितियों के गठन का…

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन
  • Prelims: सड़क सुरक्षा, केरल उच्च न्यायालय, जनहित याचिका, मोटर वाहन अधिनियम, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य सड़क सुरक्षा परिषद
  • Essay: सड़क सुरक्षा: एक सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता, न्यायपालिका की भूमिका: शासन में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना

त्वरित पुनरावृत्ति: केरल उच्च न्यायालय ने सड़क दुर्घटनाओं में प्रणालीगत कमियों पर चिंता व्यक्त की और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न अधिकारियों को जवाबदेह ठहराते हुए एक अंतर-विषयक अनुसंधान समिति और जिला-स्तरीय निगरानी समितियों के गठन का निर्देश दिया।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल उच्च न्यायालय ने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी उपायों की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) पर सुनवाई करते हुए सड़कों पर प्रणालीगत कमियों के कारण होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने विभिन्न अधिकारियों, जैसे लोक निर्माण विभाग (PWD), जिला कलेक्टरों, स्थानीय स्व-सरकारी संस्थाओं, परिवहन आयुक्त, पुलिस, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India) और केरल सड़क सुरक्षा प्राधिकरण (Kerala Road Safety Authority) को दुर्घटनाओं का कारण बनने वाली प्रणालीगत कमियों की पहचान करने का निर्देश दिया है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2025 में, केरल में 49,889 दुर्घटनाएँ और 3,733 मौतें दर्ज की गईं, जिसमें अत्यधिक गति (overspeeding) को दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताया गया।
  • न्यायालय ने सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभिन्न अधिकारियों के बीच जवाबदेही की कमी पर ध्यान दिया, विशेष रूप से गड्ढों, ब्लैक स्पॉट (black spots) या दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों पर कार्रवाई न होने के संबंध में।
  • घातक दुर्घटनाओं के बार-बार होने वाले कारणों में अत्यधिक गति, लापरवाही से गाड़ी चलाना, ओवरलोडिंग, अवैध पार्किंग, सड़क किनारे वेंडिंग, राजमार्ग निर्माण में समस्याएँ, उपयोगिता कार्यों के कारण नई सड़कों को नुकसान और सार्वजनिक परिवहन में अपर्याप्त चालक प्रोफाइलिंग शामिल हैं।
  • न्यायालय ने सड़क सुरक्षा जोखिमों की पहचान, जवाबदेही, उपचारात्मक कार्रवाई और अनुपालन की निगरानी के लिए एक एंड-टू-एंड तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।
  • न्यायालय ने यातायात मनोवैज्ञानिकों, व्यवहार वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और अन्य विशेषज्ञों से युक्त एक अंतर-विषयक सड़क सुरक्षा अनुसंधान समिति (interdisciplinary road safety research committee) के गठन का भी आह्वान किया, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में योगदान देने वाले व्यवहारिक कारकों का अध्ययन किया जा सके।
  • जिला-स्तरीय समन्वय के लिए, न्यायालय ने लंबित शिकायतों की समीक्षा करने और न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए 15 दिनों के भीतर एक जिला सड़क सुरक्षा निगरानी समिति (district road safety monitoring committee) के गठन का आदेश दिया।

भारत में सड़क सुरक्षा और संबंधित कानून

  • भारत में सड़क सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय है, जहाँ हर साल लाखों दुर्घटनाएँ होती हैं और हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दुनिया के केवल 1% वाहन हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में इसकी हिस्सेदारी 11% है।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) सड़क सुरक्षा से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) भारत में सड़क परिवहन से संबंधित मुख्य कानून है, जिसमें मोटर वाहनों के पंजीकरण, चालकों के लाइसेंस, वाहनों के बीमा और सड़क सुरक्षा के प्रावधान शामिल हैं।
  • सड़क सुरक्षा के लिए ‘4E’ दृष्टिकोण (Engineering, Education, Enforcement, Emergency Care) व्यापक समाधान प्रदान करने पर केंद्रित है।
  • भारत सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए विभिन्न पहलें की हैं, जैसे ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार, सड़क सुरक्षा ऑडिट, और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (Intelligent Transport Systems) का उपयोग।
  • उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने समय-समय पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जो न्यायिक सक्रियता (judicial activism) का एक उदाहरण है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सड़क सुरक्षा अनुसंधान समिति का गठन सड़क दुर्घटनाओं के व्यवहारिक कारकों का अध्ययन करने और साक्ष्य-आधारित समाधान सुझाने के लिए बहु-विषयक दृष्टिकोण
जिला सड़क सुरक्षा निगरानी समिति स्थानीय स्तर पर शिकायतों की समीक्षा और अदालती आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए विकेन्द्रीकृत समन्वय
जवाबदेही तंत्र विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच जवाबदेही तय करना और सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना
एकीकृत कमान और निगरानी ढाँचा सड़क सुरक्षा से संबंधित विभिन्न प्रणालियों को एक साथ लाना ताकि जोखिमों की पहचान, कार्रवाई और अनुपालन की निगरानी हो सके
प्रणालीगत कमियों की पहचान सड़क दुर्घटनाओं के मूल कारणों, जैसे खराब सड़क डिजाइन, अपर्याप्त रखरखाव और यातायात नियमों के उल्लंघन, को उजागर करना

महत्व

सामाजिक महत्व

  • सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों और चोटों को कम करके मानव जीवन की सुरक्षा करना।
  • दुर्घटनाओं के कारण होने वाले शारीरिक और मानसिक आघात को कम करके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना।
  • सड़क सुरक्षा के प्रति सार्वजनिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना।

आर्थिक महत्व

  • दुर्घटनाओं के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान (चिकित्सा व्यय, संपत्ति का नुकसान, उत्पादकता में कमी) को कम करना।
  • सड़क नेटवर्क की दक्षता और सुरक्षा में सुधार करके आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
  • परिवहन लागत को कम करके और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुव्यवस्थित करके व्यापार और वाणिज्य को सुविधाजनक बनाना।

शासन और प्रशासनिक महत्व

  • सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और सहयोग में सुधार करना।
  • जवाबदेही तय करके और सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करके सार्वजनिक सेवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाना।
  • न्यायपालिका की भूमिका को मजबूत करना और सार्वजनिक हित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से शासन में सुधार करना।

चुनौतियाँ

1. बहु-एजेंसी समन्वय का अभाव

  • सड़क सुरक्षा में कई विभाग (लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, पुलिस, स्थानीय निकाय) शामिल होते हैं, जिनके बीच समन्वय की कमी अक्सर देखी जाती है।
  • प्रत्येक एजेंसी की अपनी प्राथमिकताएं और कार्यप्रणाली होती है, जिससे एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना मुश्किल हो जाता है।

2. जवाबदेही की कमी

  • सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों में जवाबदेही का अभाव है, जिसके कारण कमियों पर कार्रवाई नहीं होती।
  • खराब सड़कों, ब्लैक स्पॉट या दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की शिकायतें अक्सर अनसुनी रह जाती हैं।

3. व्यवहारिक कारक

  • तेज गति, लापरवाही से गाड़ी चलाना, ओवरलोडिंग और अवैध पार्किंग जैसे मानवीय व्यवहार सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
  • सार्वजनिक परिवहन में चालकों की अपर्याप्त प्रोफाइलिंग और निजी बस संचालन के अवैज्ञानिक कार्यक्रम भी समस्या को बढ़ाते हैं।

4. बुनियादी ढाँचे की कमियाँ

  • खराब सड़क निर्माण गुणवत्ता, दोषपूर्ण डिवाइडर, अनुचित लेन मार्किंग, खतरनाक बिजली लाइनें और सड़क किनारे अतिक्रमण दुर्घटनाओं में योगदान करते हैं।
  • नए बने सड़कों को उपयोगिता कार्यों के कारण होने वाले नुकसान और दुर्घटना के बाद की आघात प्रतिक्रिया की कमी भी एक चुनौती है।

5. डेटा एकीकरण और निगरानी

  • विभिन्न एजेंसियों के मौजूदा डेटा सिस्टम को एक एकीकृत कमान और निगरानी ढाँचे में एकीकृत करने की चुनौती।
  • सड़क सुरक्षा जोखिमों की पहचान, सुधारात्मक कार्रवाई और अनुपालन की प्रभावी निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र का अभाव।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तेज गति और लापरवाही से गाड़ी चलाना सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण, मानवीय व्यवहार में बदलाव की आवश्यकता
सड़क पर गड्ढे और ब्लैक स्पॉट बुनियादी ढाँचे की कमी जो सीधे दुर्घटनाओं का कारण बनती है, रखरखाव में लापरवाही
जवाबदेही का अभाव विभिन्न अधिकारियों और विभागों द्वारा कार्रवाई न करना, जिससे समस्याएँ बनी रहती हैं
अवैध पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण यातायात प्रवाह में बाधा और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाना
खराब सड़क निर्माण और रखरखाव सड़क सुरक्षा मानकों का उल्लंघन, जिससे सड़कें असुरक्षित हो जाती हैं
दुर्घटना के बाद की प्रतिक्रिया की कमी घायलों को समय पर सहायता न मिलना, जिससे मृत्यु दर बढ़ जाती है

आगे की राह

  • एक मजबूत और एकीकृत सड़क सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना जो विभिन्न एजेंसियों को एक साथ लाए।
  • सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों के लिए स्पष्ट जवाबदेही तंत्र स्थापित करना।
  • सड़क सुरक्षा अनुसंधान समिति की सिफारिशों के आधार पर व्यवहारिक हस्तक्षेप और जागरूकता अभियान चलाना।
  • सड़क बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता में सुधार करना, जिसमें वैज्ञानिक सड़क डिजाइन, उचित रखरखाव और ब्लैक स्पॉट का उन्मूलन शामिल है।
  • यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए कठोर प्रवर्तन और प्रभावी दंड सुनिश्चित करना।
  • दुर्घटना के बाद की प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करना, जिसमें आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ और आघात देखभाल शामिल हैं।
  • सार्वजनिक परिवहन चालकों की प्रोफाइलिंग में सुधार करना और निजी बस संचालन के लिए वैज्ञानिक कार्यक्रम लागू करना।
  • जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा निगरानी समितियों को सशक्त बनाना और उनके कामकाज की नियमित समीक्षा करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सड़क सुरक्षा · प्रणालीगत कमियाँ · न्यायिक सक्रियता · जनहित याचिका · अंतर-अनुशासनात्मक समिति · जवाबदेही · सड़क दुर्घटनाएँ · राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत · बुनियादी ढाँचा · समन्वय तंत्र

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार का संरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 32’, ‘note’: ‘मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 226’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘राज्य सूची (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘सड़कें, पुल, यातायात नियंत्रण’}

अवधारणा प्रवाह

प्रणालीगत कमियाँ (खराब सड़कें, लापरवाही)  →  सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि  →  मानव जीवन और संपत्ति का नुकसान  →  उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका पर संज्ञान  →  अदालत द्वारा जवाबदेही तय करने और सुधार के निर्देश  →  सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सड़क सुरक्षा का अधिकार एक निहित अधिकार है।
2. केरल उच्च न्यायालय ने सड़क सुरक्षा के लिए एक अंतर-अनुशासनात्मक अनुसंधान समिति के गठन का निर्देश दिया है।
3. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) भारत में सभी सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार एकमात्र निकाय है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) में सुरक्षित वातावरण और बुनियादी ढाँचा शामिल है, जिसमें सुरक्षित सड़कें भी शामिल हैं।
कथन 2 सही है। केरल उच्च न्यायालय ने यातायात मनोवैज्ञानिकों, व्यवहार वैज्ञानिकों और इंजीनियरों सहित एक अंतर-अनुशासनात्मक सड़क सुरक्षा अनुसंधान समिति के गठन का निर्देश दिया है।
कथन 3 गलत है। NHAI केवल राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए जिम्मेदार है, जबकि राज्य राजमार्गों, जिला सड़कों और ग्रामीण सड़कों के लिए विभिन्न राज्य सरकार के विभाग और स्थानीय निकाय जिम्मेदार होते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक सड़क दुर्घटनाओं में योगदान दे सकता है, जैसा कि केरल उच्च न्यायालय ने इंगित किया है?
1. अत्यधिक गति
2. लापरवाही से गाड़ी चलाना
3. अवैध पार्किंग
4. खराब सड़क निर्माण गुणवत्ता
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — केरल उच्च न्यायालय ने अत्यधिक गति, लापरवाही से गाड़ी चलाना, ओवरलोडिंग, अवैध पार्किंग, सड़क किनारे वेंडिंग, राजमार्ग निर्माण में मुद्दे, उपयोगिता कार्यों के कारण नई निर्मित सड़कों को नुकसान, सार्वजनिक परिवहन में अपर्याप्त चालक प्रोफाइलिंग, दोषपूर्ण डिवाइडर, अनुचित लेन मार्किंग, खतरनाक बिजली लाइनें, दुर्घटना के बाद अपर्याप्त आघात प्रतिक्रिया, खराब गुणवत्ता वाले सड़क निर्माण और निजी बस संचालन के अवैज्ञानिक कार्यक्रम जैसे कई कारकों को सड़क दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इसलिए, दिए गए सभी विकल्प सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में प्रणालीगत कमियों को दूर करने में न्यायिक सक्रियता की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच जवाबदेही और समन्वय के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: सड़क दुर्घटनाओं की गंभीर समस्या और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) से इसका संबंध बताते हुए शुरुआत करें। केरल उच्च न्यायालय के हालिया फैसले का संदर्भ दें।
2. न्यायिक सक्रियता की भूमिका:
• जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डालें।
• न्यायालय द्वारा दिए गए विशिष्ट निर्देशों का उल्लेख करें (जैसे अंतर-अनुशासनात्मक समिति, जिला सड़क सुरक्षा निगरानी समिति का गठन, जवाबदेही तय करना)।
• न्यायिक सक्रियता के सकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करें (जैसे निष्क्रिय कार्यकारी को कार्रवाई के लिए प्रेरित करना, नागरिक अधिकारों की रक्षा करना)।
• न्यायिक सक्रियता की सीमाओं का समालोचनात्मक विश्लेषण करें (जैसे नीति निर्माण में हस्तक्षेप, विशेषज्ञता की कमी, कार्यान्वयन की निगरानी में चुनौतियाँ)।
3. प्रणालीगत कमियाँ:
• न्यायालय द्वारा इंगित की गई प्रमुख प्रणालीगत कमियों को सूचीबद्ध करें (जैसे गड्ढे, ब्लैक स्पॉट, अनुचित लेन मार्किंग, खराब निर्माण गुणवत्ता, लापरवाह ड्राइविंग पर कार्रवाई की कमी)।
• इन कमियों के मूल कारणों पर चर्चा करें (जैसे धन की कमी, भ्रष्टाचार, तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव)।
4. जवाबदेही और समन्वय का महत्व:
• विभिन्न सरकारी एजेंसियों (PWD, मोटर वाहन विभाग, पुलिस, स्थानीय निकाय, NHAI) के बीच जवाबदेही की कमी को उजागर करें।
• एक ‘एंड-टू-एंड’ तंत्र की आवश्यकता पर जोर दें जो जोखिमों की पहचान करे, जवाबदेही तय करे, उपचारात्मक कार्रवाई करे और अनुपालन की निगरानी करे।
• प्रभावी समन्वय के लिए एक एकीकृत कमांड और निगरानी ढांचे के लाभों पर चर्चा करें।
• सड़क सुरक्षा को एक बहु-आयामी समस्या के रूप में प्रस्तुत करें जिसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
5. निष्कर्ष: सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी समाधान के रूप में विधायी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी नवाचारों को अपनाने और जन जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ न्यायिक हस्तक्षेप के महत्व को दोहराते हुए निष्कर्ष निकालें।

स्रोत: The Hindu

Kerala PCS (Kerala PSC (KAS)) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: केरल उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में दिए गए निर्णय के अनुसार, सड़कों पर प्रणालीगत कमियों के कारण होने वाली मौतों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सड़कों की सुरक्षा में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है।
  2. केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सड़कों पर प्रणालीगत कमियों को दूर करने के लिए 6 महीने में कार्ययोजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
  3. केरल उच्च न्यायालय ने राज्य में सड़कों पर होने वाली मौतों के लिए पुलिस विभाग को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया है।
  4. केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सड़कों पर प्रणालीगत कमियों के कारण होने वाली मौतों के मामलों में मुआवजा देने का आदेश दिया है।

उत्तर: केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सड़कों पर प्रणालीगत कमियों को दूर करने के लिए 6 महीने में कार्ययोजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। — केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सड़कों पर प्रणालीगत कमियों को दूर करने के लिए 6 महीने में कार्ययोजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

Mains: केरल उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में दिए गए निर्णय के आलोक में, राज्य में सड़कों पर प्रणालीगत कमियों के कारण होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करते हुए, इन समस्याओं के निराकरण हेतु सरकार द्वारा उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों पर चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment