केरल सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए उठाए बड़े कदम

Kerala government to promote crop patterns, expedite surveys to curb human-wildlife conflict — concept mind map

केरल सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए उठाए बड़े कदम

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Human-Wildlife Conflict Cycle

✎ मानव-वन्यजीव संघर्ष एक जटिल समस्या है जिसके समाधान के लिए आवास संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी नीतिगत उपायों का एक एकीकृत दृष्टिकोण आवश्यक है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता  |  GS Paper II — शासन और लोक प्रशासन
  • Prelims: मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, वन अधिकार अधिनियम, पारिस्थितिक गलियारे, फसल पैटर्न, वन्यजीव क्षतिपूर्ति
  • Essay: मानव और प्रकृति का सह-अस्तित्व, विकास बनाम संरक्षण: एक संतुलन की तलाश

त्वरित पुनरावृत्ति: मानव-वन्यजीव संघर्ष एक जटिल समस्या है जिसके समाधान के लिए आवास संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और प्रभावी नीतिगत उपायों का एक एकीकृत दृष्टिकोण आवश्यक है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केरल सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें वन-सीमावर्ती क्षेत्रों में उपयुक्त फसल पैटर्न को बढ़ावा देना, डिजिटल सर्वेक्षणों में तेजी लाना और वन्यजीवों द्वारा फसल क्षति के आकलन तथा मुआवजे के लिए कृषि विभाग को जिम्मेदारी सौंपना शामिल है। इन कदमों का उद्देश्य अंतर-विभागीय समन्वय में सुधार करना और संघर्ष से संबंधित प्रक्रियाओं को गति देना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बढ़ती हुई समस्या है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ मानव बस्तियाँ वनों के करीब हैं।
  • इस संघर्ष के परिणामस्वरूप फसलों को नुकसान, पशुधन की हानि, मानव जीवन का नुकसान और वन्यजीवों की मृत्यु होती है।
  • वन्यजीवों के आवासों का अतिक्रमण, वनों की कटाई, कृषि विस्तार और शहरीकरण इसके प्रमुख कारण हैं।
  • जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाएँ भी वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवासों से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर रही हैं।
  • सरकार द्वारा वन्यजीवों से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन अक्सर इसकी प्रक्रिया धीमी और जटिल होती है।
  • स्थानीय समुदायों, विशेषकर जनजातीय समुदायों, का इस संघर्ष से सीधा सामना होता है, जिससे उनकी आजीविका और सुरक्षा प्रभावित होती है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष क्या है?

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष तब होता है जब वन्यजीवों की उपस्थिति मानव हितों के लिए खतरा बन जाती है, या जब मानव गतिविधियाँ वन्यजीवों और उनके आवासों के लिए खतरा बन जाती हैं।
  • इसमें वन्यजीवों द्वारा फसलों को नुकसान पहुँचाना, पशुधन का शिकार करना, संपत्ति को क्षति पहुँचाना और मनुष्यों पर हमला करना शामिल है।
  • मानवीय गतिविधियों में वनों की कटाई, आवासों का विखंडन, अवैध शिकार और वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) में बाधा डालना शामिल है।
  • यह संघर्ष अक्सर भोजन, पानी और स्थान जैसे साझा संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न होता है।
  • इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों में किसानों की आजीविका का नुकसान, खाद्य असुरक्षा और गरीबी में वृद्धि शामिल है।
  • पारिस्थितिकीय प्रभावों में वन्यजीवों की आबादी में कमी, स्थानीय विलुप्ति और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में गड़बड़ी शामिल है।
  • संघर्ष को कम करने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी, जागरूकता और नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता होती है।
  • उपयुक्त फसल पैटर्न को बढ़ावा देना, जैसे कि ऐसे फसलें उगाना जो वन्यजीवों के लिए कम आकर्षक हों, एक प्रभावी शमन रणनीति हो सकती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
फसल पैटर्न को बढ़ावा देना मानव बस्तियों से जंगली जानवरों को दूर रखने के लिए वन-सीमांत क्षेत्रों में उपयुक्त कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना।
डिजिटल सर्वेक्षण में तेजी लाना वनों से सटे आबादी वाले क्षेत्रों की सीमाओं का सटीक निर्धारण करना, जिससे संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
फसल क्षति का आकलन कृषि विभाग द्वारा वन्यजीव हमलों से होने वाले फसल नुकसान का आकलन, बीमा कवरेज और मुआवजे का प्रावधान सुनिश्चित करना।
राजस्व विभाग की भागीदारी वन-सीमांत क्षेत्रों के निवासियों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने और वन्यजीव हमलों से संबंधित अदालतों में सहायता।
भूमि अधिकार प्रदान करना वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को भूमि का स्वामित्व प्रदान करना, जैसे अरिप्पा भूमि संघर्ष से जुड़े परिवारों को।
बुनियादी ढांचा प्रदान करना वन क्षेत्रों के निवासियों को सड़क, पेयजल और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने से जैव विविधता (Biodiversity) का संरक्षण होता है और पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बना रहता है।
  • वन-सीमांत क्षेत्रों में उपयुक्त फसल पैटर्न को बढ़ावा देने से वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता में सुधार हो सकता है, जिससे वे मानव बस्तियों में प्रवेश करने से हतोत्साहित होंगे।

सामाजिक और आर्थिक

  • फसल क्षति के लिए मुआवजे और बीमा कवरेज से किसानों की आजीविका सुरक्षित होती है और उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को भूमि अधिकार और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने से उनका सामाजिक-आर्थिक उत्थान होता है और वे मुख्यधारा में शामिल होते हैं।

शासन और प्रशासन

  • विभिन्न विभागों (वन, राजस्व, कृषि, अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण) के बीच समन्वय से नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
  • डिजिटल सर्वेक्षण और अदालतों के माध्यम से प्रक्रियाओं में तेजी लाने से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है, जिससे नागरिकों को लाभ होता है।

चुनौतियाँ

1. मानव-वन्यजीव संघर्ष

  • वन्यजीवों द्वारा फसलों को नुकसान और मानव बस्तियों पर हमले, जिससे जान-माल का नुकसान होता है।
  • वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का अतिक्रमण और विखंडन, जिससे वे भोजन और पानी की तलाश में मानव क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं।

2. भूमि अधिकार और सर्वेक्षण

  • वन क्षेत्रों के आसपास की भूमि का सटीक सीमांकन न होने से स्वामित्व विवाद और अतिक्रमण की समस्या।
  • आदिवासी और वनवासी समुदायों को भूमि अधिकार प्रदान करने में देरी, जिससे उनकी आजीविका और सुरक्षा प्रभावित होती है।

3. अंतर-विभागीय समन्वय

  • वन, राजस्व, कृषि और कल्याण विभागों के बीच समन्वय की कमी से नीतियों के कार्यान्वयन में बाधाएं।
  • जटिल प्रक्रियाओं और नौकरशाही की देरी के कारण योजनाओं का समय पर लाभ लाभार्थियों तक न पहुंचना।

4. बुनियादी ढांचा और विकास

  • वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी।
  • विकास परियोजनाओं और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
फसल पैटर्न का चुनाव वन्यजीवों को आकर्षित न करने वाली फसलों का चयन और किसानों को इसके लिए राजी करना।
डिजिटल सर्वेक्षण की सटीकता वन-सीमांत क्षेत्रों की जटिल स्थलाकृति में सटीक सीमांकन सुनिश्चित करना।
मुआवजा और बीमा फसल क्षति के आकलन में निष्पक्षता और मुआवजे के वितरण में तेजी सुनिश्चित करना।
भूमि अधिकार वितरण अरिप्पा भूमि संघर्ष जैसे मामलों में भूमि का स्वामित्व प्रदान करने में कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव दूरस्थ वन क्षेत्रों में सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं को पहुंचाना।
वन्यजीवों का व्यवहार मानव हस्तक्षेप के कारण वन्यजीवों के व्यवहार में परिवर्तन और संघर्ष की आवृत्ति में वृद्धि।

आगे की राह

  • वन-सीमांत क्षेत्रों में वन्यजीवों को आकर्षित न करने वाली वैकल्पिक फसल पैटर्न को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • वनों और आबादी वाले क्षेत्रों के बीच बफर जोन (Buffer Zone) विकसित करना, जिसमें वन्यजीवों के लिए भोजन और पानी के स्रोत उपलब्ध हों।
  • वन्यजीवों द्वारा फसल क्षति के लिए मुआवजे की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाना, साथ ही बीमा कवरेज को प्रभावी ढंग से लागू करना।
  • वन-सीमांत क्षेत्रों के निवासियों के लिए डिजिटल सर्वेक्षण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना और भूमि अधिकारों का शीघ्र वितरण सुनिश्चित करना।
  • वन, राजस्व, कृषि और कल्याण विभागों के बीच एक स्थायी समन्वय तंत्र स्थापित करना ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष से संबंधित मुद्दों का समग्र समाधान हो सके।
  • वन्यजीवों के व्यवहार और मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों पर वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देना ताकि प्रभावी शमन रणनीतियाँ विकसित की जा सकें।
  • वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए विशेष परियोजनाएं शुरू करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानव-वन्यजीव संघर्ष · फसल पैटर्न · वन्यजीव संरक्षण · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 · पारिस्थितिक संतुलन · राजस्व विभाग · कृषि विभाग · डिजिटल सर्वेक्षण · आदिवासी कल्याण · अंतर-विभागीय समन्वय · जलवायु परिवर्तन · सतत विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियां, अधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियां, अधिकार और उत्तरदायित्व’}

अवधारणा प्रवाह

मानव बस्तियों का विस्तार और वन क्षेत्रों में अतिक्रमण।  →  वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का सिकुड़ना और भोजन की कमी।  →  वन्यजीवों का मानव बस्तियों में प्रवेश और फसलों को नुकसान।  →  मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि और जान-माल का नुकसान।  →  सरकार द्वारा फसल पैटर्न, सर्वेक्षण और मुआवजे जैसे उपाय।  →  अंतर-विभागीय समन्वय और सामुदायिक भागीदारी।  →  मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी और सह-अस्तित्व को बढ़ावा।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए फसल पैटर्न को बढ़ावा देना एक प्रभावी रणनीति हो सकती है।
2. वन्यजीवों द्वारा फसलों को हुए नुकसान के लिए मुआवजा प्रदान करना मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों में से एक है।
3. भारत में वन्यजीव संरक्षण मुख्य रूप से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 द्वारा शासित होता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि जंगली जानवरों को मानव बस्तियों से दूर रखने के लिए उपयुक्त फसल पैटर्न को बढ़ावा देना संघर्ष को कम करने में मदद कर सकता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि फसल क्षति के लिए मुआवजा किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करके संघर्ष को कम करने में सहायक होता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।

Q2. अभिकथन (A): मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन सीमावर्ती क्षेत्रों में डिजिटल सर्वेक्षण महत्वपूर्ण हैं।
कारण (R): डिजिटल सर्वेक्षण वन और मानव बस्तियों के बीच की सीमाओं को सटीक रूप से निर्धारित करने में मदद करते हैं, जिससे अतिक्रमण और संघर्ष की संभावना कम होती है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सटीक सीमा निर्धारण संघर्ष को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। कारण (R) भी सही है और A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि सटीक सीमाएं मानव अतिक्रमण को रोकती हैं और वन्यजीवों के लिए स्पष्ट गलियारे सुनिश्चित करती हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों का विश्लेषण कीजिए और इसके शमन के लिए केरल सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के संदर्भ में अंतर-विभागीय समन्वय के महत्व पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** मानव-वन्यजीव संघर्ष की संक्षिप्त परिभाषा और इसकी बढ़ती प्रवृत्ति का उल्लेख।
2. **मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण:**
* वन्यजीव आवासों का विखंडन और अतिक्रमण।
* फसल पैटर्न में बदलाव और मानव बस्तियों का विस्तार।
* वन्यजीव गलियारों का अवरोध।
* वन्यजीवों के शिकार आधार में कमी।
* जलवायु परिवर्तन के प्रभाव।
* मानव आबादी में वृद्धि।
3. **केरल सरकार द्वारा उठाए गए कदम (संदर्भित):**
* वन सीमावर्ती क्षेत्रों में उपयुक्त फसल पैटर्न को बढ़ावा देना।
* डिजिटल सर्वेक्षणों के माध्यम से वन और मानव बस्तियों की सीमाओं का सटीक निर्धारण।
* फसल क्षति के आकलन और मुआवजे के लिए कृषि विभाग को जिम्मेदारी सौंपना।
* वन क्षेत्र के निवासियों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने हेतु अदालतों का आयोजन।
* आदिवासी बस्तियों में भूमि संबंधी मुद्दों का समाधान (जैसे अरिप्पा भूमि संघर्ष)।
* वन क्षेत्रों में सड़कों, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान।
4. **अंतर-विभागीय समन्वय का महत्व:**
* **समग्र दृष्टिकोण:** वन, राजस्व, कृषि और अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभागों के बीच समन्वय से समस्या का व्यापक समाधान।
* **संसाधनों का प्रभावी उपयोग:** विभिन्न विभागों के संसाधनों और विशेषज्ञता का एक साथ उपयोग।
* **नीतिगत सामंजस्य:** नीतियों और कार्यक्रमों में विरोधाभास से बचना।
* **त्वरित कार्यान्वयन:** प्रक्रियाओं को गति देना और नौकरशाही बाधाओं को कम करना।
* **स्थानीय भागीदारी:** स्थानीय समुदायों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच विश्वास का निर्माण।
5. **निष्कर्ष:** मानव-वन्यजीव संघर्ष के दीर्घकालिक समाधान के लिए सतत विकास, सामुदायिक भागीदारी और मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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