08 Aug केरल सीएम पर केंद्र का आरोप: पीएम श्री योजना लागू नहीं हुई, सिर्फ एमओयू पर हस्ताक्षर

✎ पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर के स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड करना है, और यह केंद्र-राज्य संबंधों में समन्वय और चुनौतियों को दर्शाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ। | GS Paper II — केंद्र एवं राज्यों के बीच विवाद निवारण तंत्र।
- Prelims: पीएम श्री योजना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), समग्र शिक्षा अभियान, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ, मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU), संघवाद, शिक्षा समवर्ती सूची
- Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और सहकारी संघवाद का भविष्य, शिक्षा क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप देश भर के स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड करना है, और यह केंद्र-राज्य संबंधों में समन्वय और चुनौतियों को दर्शाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इंडियन नेशनल लीग (INL) ने केरल के मुख्यमंत्री से पीएम श्री योजना (PM SHRI scheme) के संबंध में सवाल किया है। यह मुद्दा तब उठा जब केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि केरल में पीएम श्री योजना लागू नहीं की गई है, और राज्य ने केवल एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। INL का दावा है कि यह स्पष्टीकरण मुख्यमंत्री के इस बार-बार के दावे का खंडन करता है कि राज्य इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य था क्योंकि पिछली सरकार ने MoU पर हस्ताक्षर किए थे। INL ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy – NEP) को लागू करने का प्रयास कर रही है, जो एक विशेष विचारधारा को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- पीएम श्री योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है जिसका उद्देश्य देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को ‘पीएम श्री’ स्कूलों के रूप में अपग्रेड और विकसित करना है।
- इन स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप बनाया जाएगा और ये मॉडल स्कूलों के रूप में कार्य करेंगे।
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत, केंद्र सरकार राज्यों को इन योजनाओं को लागू करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, लेकिन राज्यों को अक्सर कुछ शर्तों और दिशानिर्देशों का पालन करना होता है।
- केरल सरकार ने पहले दावा किया था कि वह पीएम श्री योजना को लागू करने के लिए बाध्य है क्योंकि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने इस संबंध में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।
- INL ने आरोप लगाया है कि केरल में पीएम श्री योजना के तहत एक भी सरकारी स्कूल शामिल नहीं किया गया है, और केवल समग्र शिक्षा केरल (Samagra Shiksha Kerala – SSK) कार्यक्रम ही लागू किया गया है, जिसके तहत राज्य को ₹99.27 करोड़ प्राप्त हुए हैं।
- शिक्षा भारतीय संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, जिसका अर्थ है कि केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं। हालांकि, केंद्र और राज्यों के बीच अक्सर नीतियों और कार्यान्वयन को लेकर मतभेद होते रहते हैं।
पीएम श्री योजना क्या है?
- पीएम श्री योजना का पूरा नाम ‘प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया’ (PM Schools for Rising India) है।
- यह केंद्र प्रायोजित योजना है।
- इस योजना का उद्देश्य देश भर में 14,500 से अधिक मौजूदा स्कूलों (जो केंद्र/राज्य/स्थानीय निकायों द्वारा प्रबंधित हैं) को अपग्रेड और विकसित करना है।
- इन स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सिद्धांतों के अनुरूप ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
- इन स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एक समग्र, न्यायसंगत और समावेशी वातावरण होगा, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि के बच्चों को शामिल किया जाएगा।
- योजना का उद्देश्य छात्रों को 21वीं सदी के कौशल से लैस करना है, जिसमें अनुभवात्मक शिक्षा, समग्र दृष्टिकोण और खेल-आधारित शिक्षा पर जोर दिया जाएगा।
- इन स्कूलों में आधुनिक बुनियादी ढाँचा, जैसे स्मार्ट क्लासरूम, खेल और कला कक्ष, और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएँ होंगी।
- यह योजना केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच एक निश्चित लागत-साझाकरण पैटर्न पर आधारित है, जिसमें केंद्र सरकार अधिकांश वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| PM SHRI योजना | केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक योजना जिसका उद्देश्य मौजूदा स्कूलों को उन्नत करना है ताकि वे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप हों और आधुनिक, समग्र तथा परिवर्तनकारी शिक्षा प्रदान कर सकें। |
| समझौता ज्ञापन (MoU) | केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक औपचारिक समझौता जो किसी योजना या कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए शर्तों और जिम्मेदारियों को रेखांकित करता है। यह अक्सर योजना के लिए धन जारी करने की पूर्व शर्त होती है। |
| समग्र शिक्षा केरल (SSK) | केरल में समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha Abhiyan) के तहत एक कार्यक्रम, जिसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करना है। यह केंद्र प्रायोजित योजना है। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) | भारत सरकार द्वारा 2020 में शुरू की गई एक व्यापक नीति जिसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधार लाना है, जिसमें स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों शामिल हैं। |
| संघवाद | भारत की शासन प्रणाली जहां केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन होता है, जिससे दोनों अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वायत्त रूप से कार्य कर सकें। शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है। |
महत्व
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- यह घटना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नीतिगत कार्यान्वयन में समन्वय और स्वायत्तता के मुद्दों को उजागर करती है।
- समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद भी राज्य द्वारा योजना को लागू न करने का निर्णय राज्यों के नीतिगत विकल्पों में स्वायत्तता को दर्शाता है।
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) के कार्यान्वयन में राज्यों की भूमिका और उनके लिए केंद्र से धन प्राप्त करने के तरीके पर प्रकाश डालता है।
शिक्षा नीति का कार्यान्वयन
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन में राज्यों के बीच भिन्न दृष्टिकोण को दर्शाता है, कुछ राज्य इसके कुछ पहलुओं को अपनाने में हिचकिचा रहे हैं।
- PM SHRI जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा के बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता में सुधार के केंद्र के प्रयासों को दर्शाता है।
- राज्य सरकारों द्वारा अपनी विशिष्ट क्षेत्रीय आवश्यकताओं और वैचारिक दृष्टिकोण के अनुसार शिक्षा नीतियों को अनुकूलित करने के महत्व को रेखांकित करता है।
राजनीतिक जवाबदेही और पारदर्शिता
- यह घटना राज्य के मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की सार्वजनिक बयानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को दर्शाती है।
- विपक्षी दलों द्वारा सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाने और सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को उजागर करता है।
- केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी का उपयोग राज्य स्तर पर राजनीतिक बहस को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
चुनौतियाँ
1. केंद्र-राज्य समन्वय का अभाव
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की अनिच्छा या भिन्न दृष्टिकोण से समन्वय में कमी आ सकती है।
- नीतिगत मतभेदों के कारण केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास की कमी उत्पन्न हो सकती है, जिससे विकास परियोजनाओं में बाधा आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्वयन
- कुछ राज्यों द्वारा NEP के कुछ पहलुओं को ‘वैचारिक’ मानने के कारण इसके देशव्यापी और समान कार्यान्वयन में चुनौतियाँ आ रही हैं।
- शिक्षा समवर्ती सूची में होने के कारण, केंद्र और राज्य दोनों के पास कानून बनाने की शक्ति है, जिससे नीतियों में भिन्नता आ सकती है।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा नीति, सामाजिक क्षेत्र में विकास
3. राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक विश्वास
- मुख्यमंत्री के दावों और केंद्र की स्पष्टीकरण के बीच विरोधाभास से सार्वजनिक विश्वास में कमी आ सकती है।
- राजनीतिक दल अक्सर योजनाओं के कार्यान्वयन पर वैचारिक आधार पर सवाल उठाते हैं, जिससे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटक सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
4. वित्तीय निहितार्थ और योजना का लाभ
- यदि राज्य PM SHRI जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लागू नहीं करते हैं, तो वे उन निधियों और लाभों से वंचित रह सकते हैं जो इन योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध होते हैं।
- SSK जैसे कार्यक्रमों के लिए धन प्राप्त करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर करना, लेकिन मुख्य योजना को लागू न करना, वित्तीय संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठाता है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट, केंद्र प्रायोजित योजनाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| PM SHRI योजना का कार्यान्वयन | केरल में योजना लागू न होने से राज्य के स्कूलों को आधुनिक शिक्षा और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। |
| मुख्यमंत्री के बयान की सत्यता | केंद्र के स्पष्टीकरण ने मुख्यमंत्री के इस दावे पर सवाल उठाया है कि राज्य MoU के कारण योजना को लागू करने के लिए बाध्य था, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा है। |
| राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का विरोध | INL का आरोप है कि UDF सरकार NEP को लागू करने का प्रयास कर रही है, जिसे वे एक विशेष विचारधारा से प्रेरित मानते हैं, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। |
| समग्र शिक्षा केरल (SSK) निधि का उपयोग | राज्य ने SSK के लिए ₹99.27 करोड़ प्राप्त किए हैं, लेकिन PM SHRI योजना के तहत कोई स्कूल शामिल नहीं किया गया है, जिससे इन निधियों के उपयोग और उद्देश्य पर स्पष्टता की आवश्यकता है। |
| संघीय ढांचे में राज्यों की स्वायत्तता | यह घटना केंद्र प्रायोजित योजनाओं के संबंध में राज्यों की स्वायत्तता और केंद्र के साथ उनके सहयोग की सीमा को दर्शाती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- PM SHRI योजना (PM Schools for Rising India)
- समग्र शिक्षा केरल (Samagra Shiksha Kerala)
आगे की राह
- केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत संवाद को मजबूत करना ताकि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन में आम सहमति बन सके।
- राज्य सरकारों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र प्रायोजित योजनाओं को अनुकूलित करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान किया जाना चाहिए।
- सार्वजनिक बयानों में राजनीतिक नेताओं द्वारा अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, विशेषकर योजनाओं के कार्यान्वयन के संबंध में।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के विभिन्न पहलुओं पर राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श और सहमति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
- केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक साझा मंच विकसित करना चाहिए, जिससे सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान हो सके।
- योजनाओं के वित्तीय निहितार्थों और लाभों के बारे में जनता को स्पष्ट और सटीक जानकारी प्रदान की जानी चाहिए।
- विपक्षी दलों को रचनात्मक आलोचना और नीतिगत बहस में भाग लेना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए आरोप-प्रत्यारोप में शामिल होना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पीएम श्री योजना · राष्ट्रीय शिक्षा नीति · संघवाद · केंद्र-राज्य संबंध · शिक्षा का अधिकार · समग्र शिक्षा अभियान · स्मृति पत्र (MoU) · राज्य नीति की स्वायत्तता · शिक्षा क्षेत्र में सुधार · वित्तीय हस्तांतरण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची का निर्धारण’}
- {‘article’: ‘समवर्ती सूची (शिक्षा)’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्य दोनों शिक्षा पर कानून बना सकते हैं’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार PM SHRI योजना शुरू करती है। → केरल सरकार समग्र शिक्षा केरल (SSK) के लिए धन प्राप्त करने हेतु MoU पर हस्ताक्षर करती है। → केरल के मुख्यमंत्री दावा करते हैं कि राज्य MoU के कारण योजना लागू करने को बाध्य है। → केंद्रीय मंत्री संसद में स्पष्ट करते हैं कि केरल में PM SHRI लागू नहीं हुई है। → INL मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाता है और NEP के कार्यान्वयन पर चिंता व्यक्त करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. पीएम श्री योजना (PM SHRI Scheme) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केंद्र प्रायोजित है जिसका उद्देश्य मौजूदा स्कूलों को मॉडल स्कूलों में अपग्रेड करना है।
2. इस योजना के तहत, केंद्र सरकार 100% वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों को प्राप्त करने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। पीएम श्री योजना केंद्र प्रायोजित है और इसका लक्ष्य मौजूदा स्कूलों को ‘पीएम श्री’ स्कूलों के रूप में अपग्रेड करना है। कथन 2 गलत है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका अर्थ है कि केंद्र और राज्य सरकारें एक निश्चित अनुपात में लागत साझा करती हैं (आमतौर पर 60:40)। कथन 3 सही है। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास शामिल है।
Q2. अभिकथन (A): केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए राज्यों द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करना आवश्यक हो सकता है।
कारण (R): ये समझौता ज्ञापन केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय और कार्यान्वयन संबंधी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए अक्सर राज्यों को MoU पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है ताकि वे योजना के दिशानिर्देशों और शर्तों का पालन करने के लिए सहमत हों। कारण (R) भी सत्य है और A की सही व्याख्या करता है। MoU योजना के कार्यान्वयन में दोनों स्तरों पर सरकारों की भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और वित्तीय प्रतिबद्धताओं को स्पष्ट करते हैं, जिससे सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पीएम श्री योजना जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाएं भारत में संघवाद की भावना को किस हद तक प्रभावित करती हैं? केंद्र और राज्यों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और स्वायत्तता के मुद्दों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पीएम श्री योजना का संक्षिप्त परिचय और यह कैसे केंद्र प्रायोजित योजना है। भारत में शिक्षा की समवर्ती सूची स्थिति का उल्लेख।
2. **संघवाद पर प्रभाव (सकारात्मक):**
* **राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति:** राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 जैसे बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता।
* **मानकीकरण और गुणवत्ता:** देश भर में शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों में एकरूपता लाने में मदद।
* **संसाधन जुटाना:** राज्यों के पास सीमित संसाधनों को पूरक करना, विशेषकर पिछड़े क्षेत्रों में।
* **सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रसार:** केंद्र द्वारा विकसित सफल मॉडलों को राज्यों में दोहराना।
3. **संघवाद पर प्रभाव (नकारात्मक/चुनौतियां):**
* **राज्य की स्वायत्तता का क्षरण:** राज्यों को केंद्र के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करना, भले ही वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप न हों।
* **वित्तीय बोझ:** राज्यों पर योजना के हिस्से के रूप में अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना।
* **राजनीतिकरण:** योजनाओं के कार्यान्वयन में राजनीतिक मतभेद और खींचतान (जैसा कि केरल के मामले में देखा गया)।
* **’वन-साइज़-फिट्स-ऑल’ दृष्टिकोण:** विभिन्न राज्यों की विविध शैक्षिक आवश्यकताओं को अनदेखा करना।
4. **शिक्षा में सहयोग और स्वायत्तता:**
* **समवर्ती सूची की भूमिका:** संविधान के अनुच्छेद 42 के तहत शिक्षा का समवर्ती सूची में होना, केंद्र और राज्य दोनों को कानून बनाने की शक्ति देता है।
* **सहयोग के उदाहरण:** समग्र शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण (राज्यों के परामर्श से)।
* **स्वायत्तता के मुद्दे:** राज्यों को अपने पाठ्यक्रम, भाषा नीति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रणाली को अनुकूलित करने की स्वतंत्रता।
* **MoU की भूमिका:** MoU कैसे सहयोग का एक उपकरण हो सकता है, लेकिन साथ ही राज्यों पर कुछ शर्तों को स्वीकार करने का दबाव भी डाल सकता है।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें कि कैसे केंद्र प्रायोजित योजनाएं संघवाद को मजबूत और कमजोर दोनों कर सकती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी संवाद, लचीलापन और स्थानीय आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता के महत्व पर जोर दें ताकि वास्तविक ‘सहकारी संघवाद’ सुनिश्चित हो सके।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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