14 Sep गुजरात में स्थापित होंगे भारत के 12 सेमीकंडक्टर संयंत्रों में से 6, जानिए कैसे?
✎ गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के एक साक्षात्कार के अनुसार, भारत में स्थापित होने वाली कुल 12 सेमीकंडक्टर (Semiconductor) विनिर्माण सुविधाओं में से छह गुजरात में होंगी। इनमें से तीन इकाइयाँ पहले ही…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper I — भूगोल (औद्योगिक अवस्थिति)
- Prelims: सेमीकंडक्टर, फैब्रिकेशन यूनिट, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, Dholera SIR, PLI योजना, चिप्स से जुड़ी योजनाएँ
- Essay: आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी संप्रभुता, भारत में विनिर्माण क्षेत्र का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर
यह खबर चर्चा में क्यों?
गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के एक साक्षात्कार के अनुसार, भारत में स्थापित होने वाली कुल 12 सेमीकंडक्टर (Semiconductor) विनिर्माण सुविधाओं में से छह गुजरात में होंगी। इनमें से तीन इकाइयाँ पहले ही विनिर्माण चरण में हैं, और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) जैसी प्रमुख कंपनियाँ राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। यह खबर भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में गुजरात की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक घटक हैं, जिनका उपयोग स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल और विभिन्न औद्योगिक उपकरणों में होता है।
- कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण भारत सहित दुनिया भर में कई उद्योगों को भारी नुकसान हुआ, जिससे घरेलू विनिर्माण की आवश्यकता महसूस हुई।
- भारत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए ‘सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए कार्यक्रम’ (Programme for Development of Semiconductors and Display Manufacturing Ecosystem) जैसी विभिन्न पहलें शुरू की हैं।
- इस कार्यक्रम के तहत, सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और अन्य सहायता प्रदान करने की घोषणा की है।
- राज्य में उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स (Logistics), बंदरगाहों, राजमार्गों और हवाई अड्डों के माध्यम से कनेक्टिविटी, तथा उच्च गुणवत्ता वाली बिजली अवसंरचना सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण लाभ है।
सेमीकंडक्टर विनिर्माण और भारत की पहलें
- सेमीकंडक्टर वे पदार्थ हैं जिनकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। इनका उपयोग एकीकृत परिपथ (Integrated Circuits) या चिप्स बनाने में होता है।
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक जटिल और पूंजी-गहन प्रक्रिया है जिसमें अत्यधिक शुद्ध सामग्री और उन्नत प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है। ‘फैब्रिकेशन यूनिट’ (Fabrication Unit) या ‘फैब’ (Fab) वह सुविधा है जहाँ ये चिप्स बनाए जाते हैं।
- गुजरात में धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (Dholera Special Investment Region – SIR) और सानंद जैसे स्थान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए ‘प्लग-एंड-प्ले’ (Plug-and-Play) औद्योगिक गलियारे प्रदान करते हैं, जो निवेशकों को आकर्षित करने में सहायक हैं।
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन (PSMC) के सहयोग से धोलेरा में देश की पहली वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा स्थापित की जा रही है।
- भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक कौशल विकास हेतु युवाओं को ताइवान, चेन्नई और बेंगलुरु में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय समुदायों के लोग भी शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधाएँ | भारत में कुल 12 में से 6 सेमीकंडक्टर सुविधाएँ गुजरात में स्थापित होंगी, जिनकी परियोजना लागत ₹1.28 लाख करोड़ से अधिक है। |
| प्रमुख निवेशक | टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, CG सेमी, Kaynes Semicon, Suchi Semicon और Crystal Matrix जैसी कंपनियाँ निवेश कर रही हैं। |
| टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का निवेश | धोलेरा में देश की पहली वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ₹91,000 करोड़ का निवेश कर रहा है, जिसमें ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation (PSMC) भागीदार है। |
| स्थानिक लाभ | उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स, बंदरगाहों, राजमार्गों और हवाई अड्डों के माध्यम से कनेक्टिविटी, तथा Dholera और Sanand में प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक गलियारे। |
| उच्च गुणवत्ता वाली बिजली अवसंरचना | सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण उच्च गुणवत्ता और लचीली बिजली अवसंरचना की उपलब्धता। |
| कौशल विकास | ताइवान, चेन्नई और बेंगलुरु में युवाओं, जिनमें जनजातीय समुदायों के लोग भी शामिल हैं, को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- उच्च-तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और रोजगार सृजन होगा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों के लिए एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का निर्माण होगा, जिससे वैश्विक झटकों के प्रति लचीलापन बढ़ेगा।
सामरिक महत्व
- सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक रक्षा प्रणालियों, संचार और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के लिए आवश्यक हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
- यह पहल भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी, जिससे भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ेगा।
- तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty) सुनिश्चित होगी, जिससे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुँच के लिए बाहरी निर्भरता कम होगी।
रोजगार और कौशल विकास
- सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- युवाओं को उन्नत विनिर्माण तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे देश की मानव पूंजी (Human Capital) में वृद्धि होगी।
- यह पहल ‘स्किल इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो कार्यबल की दक्षता को बढ़ाता है।
क्षेत्रीय विकास
- गुजरात जैसे राज्यों में औद्योगिक गलियारों और डेटा केंद्रों का विकास होगा, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- बुनियादी ढाँचे के विकास में तेजी आएगी, जिसमें बिजली, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं, जिससे अन्य उद्योगों को भी लाभ होगा।
चुनौतियाँ
1. उच्च पूंजीगत निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए भारी पूंजी निवेश और अत्यधिक विशिष्ट तकनीकी जानकारी की आवश्यकता होती है।
- भारत में इस क्षेत्र में विशेषज्ञता और अनुभव की कमी एक चुनौती रही है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति, निवेश मॉडल
2. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
- COVID-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता को उजागर किया, जिससे सेमीकंडक्टर आपूर्ति बाधित हुई।
- भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार युद्ध भी आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
3. आत्मविश्वास और निवेशक आकर्षण
- शुरुआत में भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की सफलता को लेकर निवेशकों में आत्मविश्वास की कमी थी।
- निवेशकों को आकर्षित करने और उन्हें सफल होने का विश्वास दिलाने के लिए प्रोत्साहन और एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण महत्वपूर्ण था।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश, औद्योगिक विकास
4. कौशल विकास और मानव संसाधन
- सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक विशिष्ट कौशल वाले कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- युवाओं को प्रशिक्षित करना और उन्हें इस उच्च-तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के लिए तैयार करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: कौशल विकास, शिक्षा
5. बुनियादी ढाँचा और पारिस्थितिकी तंत्र
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए उच्च गुणवत्ता वाली बिजली, पानी और अन्य बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होती है।
- एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना, जिसमें अनुसंधान एवं विकास (R&D), डिजाइन और सहायक उद्योग शामिल हों, महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बुनियादी ढाँचा, औद्योगिक गलियारे
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च तकनीकी जटिलता | सेमीकंडक्टर विनिर्माण में अत्यधिक परिष्कृत प्रक्रियाएँ और प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं, जिनके लिए निरंतर नवाचार और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | सेमीकंडक्टर निर्माण में बड़ी मात्रा में पानी और ऊर्जा का उपयोग होता है, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है, जिसमें कुछ स्थापित खिलाड़ी हावी हैं, जिससे नए प्रवेशकों के लिए चुनौती बढ़ जाती है। |
| अनुसंधान एवं विकास का अभाव | भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास में निवेश की कमी रही है, जो आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। |
| भू-राजनीतिक जोखिम | वैश्विक व्यापार तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान इस संवेदनशील उद्योग को प्रभावित कर सकते हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission)
आगे की राह
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए आवश्यक कौशल वाले कार्यबल को विकसित करने हेतु व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू करना।
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना और घरेलू डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करना ताकि नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
- सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक मजबूत और लचीली आपूर्ति श्रृंखला बनाने हेतु घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना।
- पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना।
- निवेशकों को आकर्षित करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक स्थिर और अनुकूल नीतिगत ढाँचा बनाए रखना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सेमीकंडक्टर विनिर्माण · भारत सेमीकंडक्टर मिशन · इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · राजकोषीय प्रोत्साहन · विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र · उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योग · आर्थिक संवृद्धि · रोजगार सृजन · भू-रणनीतिक महत्व · डेटा सेंटर नीति
अवधारणा प्रवाह
वैश्विक चिप की कमी → घरेलू विनिर्माण की आवश्यकता → इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन → राज्य सरकारों द्वारा प्रोत्साहन → सेमीकंडक्टर सुविधाओं की स्थापना → आर्थिक संवृद्धि और आत्मनिर्भरता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक विशेष और स्वतंत्र व्यापार प्रभाग है।
3. यह सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि भारत सेमीकंडक्टर मिशन का प्राथमिक लक्ष्य भारत को सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। कथन 2 सही है क्योंकि यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक विशेष और स्वतंत्र व्यापार प्रभाग के रूप में कार्य करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह मिशन सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन और नीतियां प्रदान करता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई (फैब) स्थापित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है?
- सस्ते श्रम की उपलब्धता
- उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीय विद्युत अवसंरचना
- समुद्र तट से निकटता
- पर्यटन स्थलों की उपलब्धता
उत्तर: उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीय विद्युत अवसंरचना — सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीय विद्युत अवसंरचना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस प्रक्रिया में बिजली की निरंतर और स्थिर आपूर्ति आवश्यक होती है। अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन विद्युत अवसंरचना सबसे महत्वपूर्ण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में सहायक कारकों का विश्लेषण कीजिए। इस क्षेत्र में गुजरात की भूमिका का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण के महत्व और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल से इसके जुड़ाव का संक्षिप्त परिचय।
2. **सहायक कारक:** उन प्रमुख कारकों की पहचान और विश्लेषण करें जो भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
* **सरकारी नीतियां और प्रोत्साहन:** भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, राजकोषीय प्रोत्साहन, आदि।
* **घरेलू मांग:** इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और अन्य उद्योगों में सेमीकंडक्टर की बढ़ती मांग।
* **कुशल कार्यबल:** इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता, साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विकास।
* **लॉजिस्टिक्स और अवसंरचना:** बेहतर कनेक्टिविटी (बंदरगाह, राजमार्ग, हवाई अड्डे), औद्योगिक गलियारे, और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति।
* **भू-रणनीतिक महत्व:** वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की आवश्यकता।
3. **गुजरात की भूमिका का मूल्यांकन:**
* गुजरात द्वारा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम।
* राज्य के विशिष्ट लाभ: उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स, प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक गलियारे (धोलेरा, सानंद), उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत अवसंरचना।
* राज्य में स्थापित की जा रही प्रमुख सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों का उल्लेख (जैसे टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, CG सेमी, Kaynes Semicon)।
* राज्य की डेटा सेंटर नीति (Viksit Gujarat Data Centre Policy 2026-29) और इसका सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** संक्षेप में कुछ चुनौतियों (जैसे उच्च पूंजी निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी, वैश्विक प्रतिस्पर्धा) और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदमों का उल्लेख करें।
5. **निष्कर्ष:** भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने में गुजरात जैसे राज्यों के योगदान और देश की आर्थिक संवृद्धि तथा तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए इस क्षेत्र के महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष दें।
स्रोत: The Indian Express
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: गुजरात सरकार द्वारा प्रस्तावित 12 सेमीकंडक्टर सुविधाओं में से कितनी गुजरात में स्थापित होने की संभावना है, जैसा कि अरुण मोढवाडिया के हालिया साक्षात्कार में बताया गया है?
- 6
- 8
- 10
- 12
उत्तर: 6 — अरुण मोढवाडिया के अनुसार, गुजरात में कुल 12 में से 6 सेमीकंडक्टर सुविधाएं स्थापित होने की संभावना है।
Mains: गुजरात में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों का वर्णन कीजिए तथा इसके आर्थिक एवं तकनीकी प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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