चीते की मौत: केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में उच्च-स्तरीय जांच टीम गठित की

चीते की मौत: केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में उच्च-स्तरीय जांच टीम गठित की

चीते की मौत: केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में उच्च-स्तरीय जांच टीम गठित की

✎ चीता वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में है और IUCN में संकटग्रस्त (Vulnerable) है; प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की पुनःस्थापना की सुरक्षा का दायित्व राज्य वन विभाग और NTCA/WCCB वाली…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — पर्यावरण और जैव विविधता (लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण विधि, संरक्षित क्षेत्र)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (केंद्र-राज्य समन्वय, संस्थागत तंत्र, सहकारी संघवाद)
  • Prelims: प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah), कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park), मध्य प्रदेश, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 — अनुसूची I, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), IUCN लाल सूची (Red List) में चीते की श्रेणी, CITES परिशिष्ट I
  • Essay: लुप्त प्रजातियों की पुनःस्थापना: अवसर और जोखिम, मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीव सुरक्षा की चुनौती

त्वरित पुनरावृत्ति: चीता वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में है और IUCN में संकटग्रस्त (Vulnerable) है; प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की पुनःस्थापना की सुरक्षा का दायित्व राज्य वन विभाग और NTCA/WCCB वाली केंद्रीय टीम के समन्वय से निभाया जाता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में 19 महीने के नर चीते (केएनजी22) की बंदूक के छर्रे लगने से हुई मौत की ज़मीनी जांच के लिए उच्च-स्तरीय केंद्रीय टीम गठित की है। यह चीता चीता निरवा का बच्चा था, जो 25 अक्टूबर 2026 को कुनो के सुरक्षित क्षेत्र के बाहर मुरैना के जंगलों में घायल मिला था। उसे श्योपुर प्रादेशिक वन मंडल से बचाकर जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहाँ इमरजेंसी सर्जरी में उसके शरीर से बंदूक के पाँच छर्रे निकाले गए। इलाज के बावजूद 27 अक्टूबर 2026 को उसकी मृत्यु हो गई। केंद्रीय टीम में वन महानिरीक्षक, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उप निदेशक शामिल हैं। यह टीम राज्य सरकार द्वारा पहले से गठित विशेष कार्यबल (STF) के साथ मिलकर घटना के साक्ष्यों की जांच करेगी, सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के उपायों पर सुझाव देगी। इस प्रकरण को प्रोजेक्ट चीता की सफलता और पुनः बसाई गई चीता आबादी की सुरक्षा के संदर्भ में देखा जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • चीता भारत से 1952 तक विलुप्त घोषित हो चुका था। प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत अफ्रीकी देशों (नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका) से चीते लाकर उन्हें भारत में पुनः बसाया गया, जिसे विश्व में बड़े मांसाहारी जीव की अंतर-महाद्वीपीय पुनःस्थापना का पहला प्रयास माना जाता है।
  • कुनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना जिलों में स्थित है और प्रोजेक्ट चीता का प्रमुख केंद्र है। इसके सुरक्षित क्षेत्र के बाहर विचरण करने वाले चीते खुले वन क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों के संपर्क में आते हैं, जिससे निगरानी की चुनौती बढ़ जाती है।
  • भारत में बाघ जैसी प्रमुख प्रजातियों के संरक्षण के लिए NTCA की स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में 2006 के संशोधन के बाद हुई। वन्यजीव अपराधों की जांच और समन्वय के लिए WCCB की स्थापना MoEFCC के अधीन की गई।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत चीता अनुसूची I में शामिल है, जिसे सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। अनुसूची I की प्रजातियों के शिकार पर कठोर दंड का प्रावधान है।
  • राज्य सरकार और केंद्र के बीच वन्यजीव संरक्षण में समन्वय सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण है, क्योंकि वन और वन्यजीव विषय संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं।

प्रोजेक्ट चीता क्या है?

  • प्रोजेक्ट चीता भारत सरकार की एक संरक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य अफ्रीका से चीते लाकर भारत के उपयुक्त आवास में उनकी आबादी स्थापित करना है।
  • इसका नोडल तंत्र पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) इसके तकनीकी और निगरानी पक्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • चीता (Acinonyx jubatus) विश्व का सबसे तेज़ स्थलचर जीव है। इसे IUCN की लाल सूची में संकटग्रस्त (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है और यह CITES के परिशिष्ट I में सूचीबद्ध है।
  • कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पुनः बसाए गए चीतों की निगरानी में रेडियो कॉलर, नियमित पशु चिकित्सा जांच और क्षेत्र-स्तरीय गश्त जैसे उपाय शामिल हैं।
  • पुनःस्थापना के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियाँ आवास की उपयुक्तता, शिकार की उपलब्धता, मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन्यजीव अपराध से सुरक्षा हैं।
  • वन्यजीव अपराध के मामलों में WCCB और राज्य वन विभाग मिलकर साक्ष्य संग्रह और कानूनी कार्रवाई करते हैं। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत ऐसे अपराधों के लिए दंड का प्रावधान है।
  • जब किसी संरक्षित प्रजाति की मृत्यु मानवीय कारणों से होती है, तो केंद्र अक्सर उच्च-स्तरीय टीम गठित कर घटना की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराता है ताकि भविष्य के लिए प्रोटोकॉल सुधारे जा सकें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
घटना का स्वरूप कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) के 19 महीने के नर चीते (KNG22) की शरीर से पांच फायरआर्म पैलेट (Firearm Pellet) के छर्रे निकले और आंतरिक चोटों के कारण 27 अक्टूबर 2026 को उसकी मृत्यु हुई
प्रभावित क्षेत्र घायल अवस्था में चीता कुनो के सुरक्षित क्षेत्र के बाहर मुरैना के वनों में मिला। उसे श्योपुर प्रादेशिक वन मंडल से बचाकर जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र ले जाया गया
जांच की संरचना केंद्रीय उच्च-स्तरीय टीम में वन महानिरीक्षक, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उप निदेशक शामिल हैं। राज्य सरकार ने वन और पुलिस अधिकारियों का विशेष कार्यबल (STF) पहले ही बनाया है
नीतिगत संदर्भ प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) के अंतर्गत दोबारा बसाई गई आबादी की सुरक्षा के सर्वोच्च मानक सुनिश्चित करना और भविष्य की घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करना

महत्व

पारिस्थितिक महत्व

  • चीता घास के मैदानों और खुले वन-क्षेत्रों का शीर्ष मांसाहारी जीव है, जो शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित रखने में भूमिका निभाता है
  • भारत में चीता 1952 में विलुप्त घोषित किया गया था, इसलिए पुनर्स्थापन (Reintroduction) की सफलता का आकलन सीधे पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के परिणामों से जुड़ा है
  • दोबारा बसाई गई छोटी आबादी में हर मृत्यु का प्रभाव अधिक होता है, क्योंकि इससे आबादी की वृद्धि-दर और आनुवंशिक विविधता पर असर पड़ता है

वैधानिक और प्रशासनिक महत्व

  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत चीते का संरक्षण सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य, दोनों की साझा जिम्मेदारी है
  • NTCA और WCCB जैसी संस्थाओं की भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि वन्यजीव अपराध की जांच में समन्वित संस्थागत तंत्र किस प्रकार काम करता है
  • साक्ष्यों की जांच और उत्तरदायित्व तय करने की प्रक्रिया से वन्यजीव अपराध के विरुद्ध दंडात्मक निवारण को बल मिलता है

अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक महत्व

  • प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों का स्थानांतरण हुआ था, इसलिए इस परियोजना की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी जुड़ी है
  • इस तरह की घटनाओं पर पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई भारत की जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं की छवि को प्रभावित करती है

चुनौतियाँ

1. अवैध या अनियंत्रित हथियार उपयोग

  • घटना में फायरआर्म पैलेट का प्रयोग सामने आया है, जिससे यह प्रश्न उठता है कि हथियारों के लाइसेंस, भंडारण और उपयोग पर नियंत्रण कितना प्रभावी है
  • शस्त्र अधिनियम, 1959 (Arms Act, 1959) के प्रावधानों का वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में प्रवर्तन एक चुनौती है
  • बरामद छर्रों का फॉरेंसिक मिलान करके हथियार और व्यक्ति की पहचान करना जांच का केंद्रीय बिंदु होगा

2. संरक्षित क्षेत्र के बाहर मानव-वन्यजीव संघर्ष

  • चीता संरक्षित क्षेत्र की सीमा के बाहर घायल मिला, जिससे बफर क्षेत्र और गलियारों (Corridors) की सुरक्षा का प्रश्न सामने आता है
  • खुले वन और कृषि-भूमि के मिश्रित क्षेत्रों में वन्यजीवों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की संभावना बढ़ती है

3. छोटी आबादी में आनुवंशिक जोखिम

  • प्रारंभिक स्थानांतरित आबादी सीमित होने के कारण हर जीव का जीवित रहना आनुवंशिक विविधता के लिए महत्वपूर्ण है
  • आबादी का स्थिर होना तभी संभव है जब मृत्यु-दर नियंत्रित रहे और प्रजनन दर अपेक्षित स्तर पर हो

4. बहु-एजेंसी समन्वय

  • जांच में केंद्रीय टीम, राज्य वन विभाग, STF और पुलिस का साथ काम करना आवश्यक है, जिससे अधिकार-क्षेत्र और सूचना-प्रवाह की स्पष्टता जरूरी हो जाती है
  • केंद्र और राज्य के बीच प्रशासनिक समन्वय की सफलता पर ही जांच की गति और निष्कर्ष की विश्वसनीयता निर्भर करती है

5. आपातकालीन वन्यजीव चिकित्सा की क्षमता

  • घायल जीव को बचाने के बावजूद आंतरिक चोटों के कारण उपचार सफल नहीं हो सका, जो आपातकालीन पशु चिकित्सा ढांचे की चुनौतियों को दर्शाता है
  • घायल वन्यजीवों के लिए सूचना, परिवहन और विशेषज्ञ उपचार की समयबद्ध व्यवस्था आवश्यक है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
हथियार नियंत्रण लाइसेंसशुदा और अवैध हथियारों के दुरुपयोग पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना
बफर और गलियारे संरक्षित क्षेत्र के बाहर चीतों के आवागमन के लिए सुरक्षित मार्गों का अभाव
आनुवंशिक विविधता सीमित आबादी में हर मृत्यु से दीर्घकालिक स्थिरता पर असर
संस्थागत समन्वय केंद्र, राज्य वन विभाग, पुलिस और STF के बीच भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन
आपातकालीन उपचार घायल जीवों के लिए त्वरित परिवहन और विशेषज्ञ सर्जरी की उपलब्धता

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah)

आगे की राह

  • केंद्रीय उच्च-स्तरीय टीम की जांच को समयसीमा के भीतर पूरा कर निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं, ताकि जवाबदेही तय हो सके
  • बरामद फायरआर्म पैलेट का फॉरेंसिक विश्लेषण कर हथियार और स्रोत की पहचान सुनिश्चित की जाए
  • कुनो और आसपास के क्षेत्रों में गश्त, निगरानी और कैमरा-ट्रैप के माध्यम से चीतों की गतिविधि पर नियमित नजर रखी जाए
  • शस्त्र लाइसेंस की समीक्षा और अवैध हथियारों की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं
  • स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाकर घायल या संकटग्रस्त वन्यजीव की सूचना देने की व्यवस्था मजबूत की जाए
  • घायल वन्यजीवों के लिए आपातकालीन परिवहन, प्रशिक्षित दल और विशेष पशु चिकित्सा केंद्रों के बीच स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाया जाए
  • आनुवंशिक निगरानी और आबादी-आकलन के आधार पर पुनर्स्थापित आबादी के प्रबंधन की नीति को परिष्कृत किया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) · वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) · अनुच्छेद 48A और मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(g)) · पुनःस्थापन (Reintroduction) और IUCN दिशा-निर्देश · मानव-वन्यजीव संघर्ष · जैव विविधता संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय दायित्व (CITES) · वन्यजीव अपराध और प्रवर्तन तंत्र · सह-अस्तित्व और स्थानीय समुदाय की भागीदारी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A (DPSP): पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(छ): प्राणियों के प्रति करुणा का मौलिक कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

25 अक्टूबर 2026 को कुनो के सुरक्षित क्षेत्र के बाहर मुरैना के वन में चीता घायल अवस्था में मिला  →  श्योपुर प्रादेशिक वन मंडल से बचाव कर जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र में आपातकालीन सर्जरी की गई  →  सर्जरी में पांच फायरआर्म पैलेट के छर्रे निकले और आंतरिक चोटों की पुष्टि हुई  →  27 अक्टूबर 2026 को उपचार के बावजूद चीते की मृत्यु हो गई  →  राज्य सरकार ने STF गठित की और केंद्र ने NTCA, WCCB सहित उच्च-स्तरीय टीम भेजी  →  संयुक्त ज़मीनी जांच, साक्ष्य परीक्षण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के बाद सुझाव मंत्रालय को सौंपे जाएंगे

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मध्य प्रदेश का कुनो राष्ट्रीय उद्यान प्रोजेक्ट चीता से जुड़ा प्रमुख स्थल है।
2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है।
3. चीता वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II में सूचीबद्ध है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: कुनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में है और चीता पुनःस्थापन का मुख्य केंद्र है। कथन 2 सही है: NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के 2006 के संशोधन के बाद गठित वैधानिक निकाय है। कथन 3 गलत है: चीता अनुसूची I में आता है, जो सर्वोच्च संरक्षण स्तर है।

Q2. निम्नलिखित सुमेलन (Match) पर विचार कीजिए:
स्तंभ I: A. प्रोजेक्ट चीता B. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण C. वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो D. अनुच्छेद 48A
स्तंभ II: 1. वन्यजीव अपराधों के प्रवर्तन हेतु नोडल निकाय 2. भारत में चीतों की पुनःस्थापना का कार्यक्रम 3. बाघ परियोजना और बाघ संरक्षित क्षेत्रों का नियामक वैधानिक निकाय 4. पर्यावरण, वनों और वन्यजीवों की रक्षा का राज्य का नीति-निर्देश

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-3, B-2, C-1, D-4
  3. A-2, B-3, C-1, D-4
  4. A-4, B-3, C-1, D-2

उत्तर: A-2, B-3, C-1, D-4 — A-2: प्रोजेक्ट चीता चीतों की पुनःस्थापना का कार्यक्रम है। B-3: NTCA बाघ संरक्षित क्षेत्रों का नियामक वैधानिक निकाय है। C-1: WCCB वन्यजीव अपराधों के प्रवर्तन का नोडल निकाय है। D-4: अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का नीति-निर्देश देता है।

Q3. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) देश में वन्यजीवों से जुड़े अंतरराज्यीय अवैध व्यापार के विरुद्ध कार्रवाई का नोडल निकाय है।
कारण (R): WCCB की स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा द्वारा एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) सही है, परंतु (R) गलत है। — (A) सही है: WCCB वन्यजीव अपराधों के प्रवर्तन और अंतरराज्यीय व्यापार पर नज़र रखने का नोडल निकाय है। (R) गलत है: WCCB की स्थापना 2007 में MoEFCC के अधीन एक प्रशासनिक/प्रवर्तन इकाई के रूप में हुई थी, न कि वैधानिक निकाय के रूप में। वैधानिक निकाय का उदाहरण NTCA है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत चीतों की पुनःस्थापना को जैव विविधता संरक्षण की महत्वाकांक्षी पहल माना जाता है, किंतु कुनो राष्ट्रीय उद्यान में एक शावक की गोली के छर्रों से हुई मौत ने संरक्षण-प्रवर्तन की कमियों को उजागर किया है। इस संदर्भ में वन्यजीव संरक्षण के वैधानिक, संस्थागत और नीतिगत ढाँचे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि पुनःस्थापित प्रजाति की सुरक्षा सुनिश्चित न हो सके, तो स्थानीय समुदायों के साथ सह-अस्तित्व की नीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
(1) भूमिका: प्रोजेक्ट चीता (2022 में नामीबिया और 2023 में दक्षिण अफ्रीका से चीते लाकर कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पुनःस्थापन); भारत में चीता 1952 में विलुप्त घोषित हुआ था; घटना का संक्षिप्त तथ्य (KNG22 की मृत्यु, केंद्रीय टीम का गठन)।
(2) वैधानिक ढाँचा: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में चीते का संरक्षण; धारा 9 (शिकार पर प्रतिबंध) और दंड प्रावधान; अनुच्छेद 48A (राज्य का नीति-निर्देश) और अनुच्छेद 51A(g) (मूल कर्तव्य), दोनों 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए; CITES में सूचीकरण।
(3) संस्थागत ढाँचा: NTCA (वैधानिक निकाय, 2006 संशोधन के बाद, बाघ परियोजना और संरक्षित क्षेत्रों का नियामक); WCCB (प्रवर्तन और अवैध व्यापार पर नज़र, प्रशासनिक इकाई); राज्य वन विभाग और विशेष कार्यबल (STF) की भूमिका; केंद्र-राज्य समन्वय और सहकारी संघवाद।
(4) पुनःस्थापन विज्ञान: IUCN SSC Cat Specialist Group के दिशा-निर्देश (2013) के अनुसार व्यवहार्य आवास, शिकार-आधार, अनुवर्ती निगरानी और आनुवंशिक विविधता का महत्व; कुनो का सीमित क्षेत्र और आबादी प्रबंधन की चुनौती।
(5) समालोचनात्मक विश्लेषण: प्रवर्तन की कमियाँ (गश्त, खुफिया तंत्र, सीमावर्ती गाँवों में जागरूकता); मानव-वन्यजीव संघर्ष और स्थानीय समुदायों की आजीविका (वन अधिकार अधिनियम, 2006 की प्रासंगिकता); संरक्षण बनाम विकास का संतुलन।
(6) परिणाम उप-प्रश्न: यदि सुरक्षा विफल हो तो पुनःस्थापन की विश्वसनीयता घटती है, स्थानीय समुदायों में असंतोष और प्रतिरोध बढ़ता है, तथा सह-अस्तित्व की नीति को क्षति पहुँचती है; सुझाव: बहु-एजेंसी समन्वय, मुआवज़ा और भागीदारी आधारित निगरानी, स्थानीय युवाओं को इको-गार्ड के रूप में शामिल करना।
(7) निष्कर्ष: संरक्षण को कानूनी दंड, संस्थागत समन्वय और सामुदायिक सहभागिता के संयोजन से ही टिकाऊ बनाया जा सकता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Madhya Pradesh PCS (MPPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा मध्य प्रदेश में फायरआर्म पैलेट से हुई चीते की मौत की जांच के लिए गठित उच्च-स्तरीय केंद्रीय टीम में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?

  1. वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी
  2. राज्य वन विभाग के अधिकारी
  3. वन्यजीव विशेषज्ञ
  4. मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारी

उत्तर: मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारी — उच्च-स्तरीय केंद्रीय टीम में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राज्य वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल थे, जबकि मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारी शामिल नहीं थे।

Mains: मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के संदर्भ में, फायरआर्म पैलेट से हुई चीते की मौत के कारणों की जांच हेतु केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय टीम की भूमिका एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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