30 Jul जल जीवन मिशन: जल गुणवत्ता प्रबंधन में राज्य सरकारों की भूमिका


मानचित्र व माइंड-मैप: Jal Jeevan Mission Water Quality Management
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
- Prelims: जल जीवन मिशन (JJM), पेयजल गुणवत्ता मानक, BIS:10500, जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS), सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP), राज्य सूची विषय, जल शक्ति मंत्रालय, आर्सेनिक एवं फ्लोराइड प्रदूषण
- Essay: ग्रामीण विकास में पेयजल की भूमिका, भारत में जल सुरक्षा की चुनौतियाँ और समाधान, सहकारी संघवाद और सामाजिक कल्याण
त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से पर्याप्त, सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है, जिसमें BIS:10500 मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत जल गुणवत्ता प्रबंधन पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि JJM के तहत पेयजल आपूर्ति योजनाओं में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS):10500 मानकों का पालन किया जा रहा है और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जल गुणवत्ता निगरानी, परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना तथा सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- पेयजल (Drinking Water) राज्य सूची का विषय है, इसलिए पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन और रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।
- भारत सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता, नीतिगत मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान करके उनके प्रयासों में सहयोग करती है।
- अगस्त 2019 से ‘हर घर जल’ के लक्ष्य के साथ जल जीवन मिशन (JJM) का कार्यान्वयन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराना है।
- JJM के अंतर्गत, पाइप द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता के लिए BIS:10500 मानकों को अपनाया गया है।
- रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित बस्तियों को जल आपूर्ति योजनाओं की योजना बनाते समय प्राथमिकता दी जाती है, और ऐसे क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित जल स्रोतों पर आधारित योजनाएं बनाने की सलाह दी गई है।
- आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP) स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है ताकि पाइपयुक्त आपूर्ति शुरू होने तक पीने और खाना पकाने के लिए सुरक्षित पानी मिल सके।
जल जीवन मिशन (JJM) क्या है?
- जल जीवन मिशन (JJM) जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे अगस्त 2019 में शुरू किया गया था।
- मिशन का दृष्टिकोण ‘हर घर जल’ है, जिसका अर्थ है प्रत्येक ग्रामीण घर में नल का पानी सुनिश्चित करना।
- यह मिशन जल गुणवत्ता निगरानी और सर्वेक्षण (WQMS) गतिविधियों पर विशेष ध्यान देता है, जिसमें जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण शामिल है।
- JJM निधि का उपयोग जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए उपकरण, रसायन, कुशल जनशक्ति की भर्ती और फील्ड टेस्ट किट (FTK) के माध्यम से समुदाय द्वारा निगरानी के लिए किया जा सकता है।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जल गुणवत्ता परीक्षण हेतु नमूनों की जांच करने और डेटा संग्रह के लिए एक ऑनलाइन JJM – जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (JJM-WQMIS) पोर्टल विकसित किया गया है।
- दिसंबर 2024 में ‘ग्रामीण परिवारों को पाइप से आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता निगरानी के लिए संक्षिप्त पुस्तिका’ जारी की गई, जो विभिन्न परीक्षण बिंदुओं पर व्यापक परीक्षण की सिफारिश करती है।
- मार्च 2023 में पेयजल उपचार प्रौद्योगिकियों पर एक पुस्तिका जारी की गई थी, जिसका उद्देश्य जल गुणवत्ता प्रभावित गांवों में स्थानीय मुद्दों के समाधान के लिए उपलब्ध प्रौद्योगिकियों की जानकारी का प्रसार करना था।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| पेयजल राज्य का विषय | राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्राथमिक जिम्मेदारी, केंद्र सरकार की सहायक भूमिका। |
| BIS:10500 मानक | जल गुणवत्ता के लिए राष्ट्रीय मानक, सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण। |
| रासायनिक प्रदूषण प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता | सर्वाधिक आवश्यकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना, स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना। |
| सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP) | पाइपयुक्त आपूर्ति चालू होने तक अंतरिम समाधान, तत्काल सुरक्षित पेयजल उपलब्धता। |
| जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS) गतिविधियाँ | गुणवत्ता नियंत्रण, प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना। |
| JJएम-जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (JJएम-WQMIS) | ऑनलाइन डेटा संग्रह, रिपोर्टिंग और सार्वजनिक पारदर्शिता, जवाबदेही में वृद्धि। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य में सुधार: सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से जल-जनित बीमारियों में कमी आती है, जिससे विशेषकर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि: स्वच्छ पेयजल तक पहुंच से ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में समग्र सुधार होता है, जिससे उन्हें अन्य विकासात्मक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है।
- महिला सशक्तिकरण: पानी लाने के बोझ को कम करके महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सामुदायिक भागीदारी के लिए अधिक समय मिलता है।
आर्थिक महत्व
- स्वास्थ्य व्यय में कमी: बीमारियों की रोकथाम से परिवारों और सरकार दोनों के स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में कमी आती है।
- उत्पादकता में वृद्धि: स्वस्थ कार्यबल और छात्र अधिक उत्पादक होते हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
- पर्यटन और निवेश को बढ़ावा: स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता वाले क्षेत्र पर्यटन और अन्य निवेशों के लिए अधिक आकर्षक बन सकते हैं।
शासनिक महत्व
- संघवाद का सुदृढ़ीकरण: केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण, जहाँ केंद्र वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है जबकि राज्य कार्यान्वयन की जिम्मेदारी निभाते हैं।
- डेटा-आधारित नीति निर्माण: JJM-WQMIS जैसे पोर्टल के माध्यम से प्राप्त डेटा नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने और संसाधनों का प्रभावी ढंग से आवंटन करने में सहायता करता है।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जल गुणवत्ता डेटा सरकार की जवाबदेही बढ़ाता है और नागरिकों को अपनी सरकारों से गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की मांग करने में सक्षम बनाता है।
चुनौतियाँ
1. जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की कमी
- ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त और सुसज्जित प्रयोगशालाओं की अनुपलब्धता जल नमूनों के समय पर और सटीक परीक्षण में बाधा डालती है।
- कुशल जनशक्ति की कमी भी प्रयोगशालाओं के प्रभावी संचालन में एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन में चुनौतियाँ, स्वास्थ्य अवसंरचना
2. रासायनिक संदूषण का स्थायी समाधान
- आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे रासायनिक प्रदूषकों का स्थायी और बड़े पैमाने पर समाधान खोजना एक जटिल इंजीनियरिंग और वित्तीय चुनौती है।
- अक्सर वैकल्पिक सुरक्षित स्रोतों की पहचान और उनका दोहन महंगा और समय लेने वाला होता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण, जल संसाधन प्रबंधन
3. सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता
- जल गुणवत्ता निगरानी में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें जल के सुरक्षित उपयोग के बारे में शिक्षित करना एक सतत चुनौती है।
- फील्ड टेस्ट किट (FTK) के उपयोग और रखरखाव के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक सशक्तिकरण, जन जागरूकता
4. बुनियादी ढाँचे का संचालन और रखरखाव
- स्थापित जल आपूर्ति योजनाओं और शोधन संयंत्रों का दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव (O&M) सुनिश्चित करना राज्यों के लिए एक बड़ी चुनौती है, खासकर वित्तीय संसाधनों की कमी वाले राज्यों में।
- तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी भी इसमें बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा विकास, स्थानीय स्वशासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| जल गुणवत्ता परीक्षण की विश्वसनीयता | प्रयोगशालाओं की कमी, कुशल कर्मियों का अभाव और उपकरणों का पुराना होना सटीक परीक्षण परिणामों को प्रभावित करता है। |
| रासायनिक प्रदूषकों का दीर्घकालिक प्रबंधन | आर्सेनिक, फ्लोराइड जैसे प्रदूषकों के लिए स्थायी और लागत प्रभावी समाधानों को लागू करने में चुनौतियाँ। |
| सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और भागीदारी | ग्रामीण समुदायों को जल गुणवत्ता निगरानी और सुरक्षित पेयजल प्रथाओं के बारे में शिक्षित करने में कठिनाई। |
| बुनियादी ढाँचे का संचालन और रखरखाव | जल आपूर्ति प्रणालियों और शोधन संयंत्रों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की कमी। |
| अंतर-राज्यीय जल विवाद | सुरक्षित जल स्रोतों के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग और समझौतों में चुनौतियाँ, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में। |
| जलवायु परिवर्तन का प्रभाव | बदलते मौसम पैटर्न और भूजल स्तर में गिरावट से जल स्रोतों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- जल जीवन मिशन (JJM)
आगे की राह
- जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या और क्षमता में वृद्धि करना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- जल गुणवत्ता निगरानी के लिए कुशल जनशक्ति का प्रशिक्षण और भर्ती सुनिश्चित करना, जिसमें प्रयोगशाला तकनीशियन और फील्ड कार्यकर्ता शामिल हों।
- रासायनिक संदूषण से प्रभावित क्षेत्रों के लिए नवीन और लागत प्रभावी जल शोधन प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
- सामुदायिक स्तर पर जल गुणवत्ता निगरानी के लिए फील्ड टेस्ट किट (FTK) के उपयोग को बढ़ावा देना और नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- जल आपूर्ति योजनाओं और शोधन संयंत्रों के संचालन और रखरखाव के लिए स्थानीय समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना।
- JJएम-WQMIS पोर्टल पर डेटा की सटीकता और समयबद्धता सुनिश्चित करना, ताकि नीति निर्माण और हस्तक्षेपों को प्रभावी ढंग से निर्देशित किया जा सके।
- पेयजल उपचार प्रौद्योगिकियों पर जारी पुस्तिकाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करना और राज्यों को उनके कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243G: पंचायती राज संस्थाओं को शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं को शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व
- राज्य सूची (प्रविष्टि 17): जल आपूर्ति का राज्य सरकारों का विषय
अवधारणा प्रवाह
पेयजल राज्य का विषय है, केंद्र सहायता करता है। → जल जीवन मिशन (JJM) अगस्त 2019 से लागू। → BIS:10500 मानक जल गुणवत्ता के लिए अपनाए गए। → रासायनिक प्रदूषण प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता दी जाती है। → जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS) गतिविधियाँ संचालित होती हैं। → JJएम-WQMIS पोर्टल डेटा संग्रह और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। → सुरक्षित पेयजल से ग्रामीण स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. जल जीवन मिशन (JJM) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को अगस्त 2019 से नल का पानी उपलब्ध कराना है।
2. पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना, अनुमोदन और कार्यान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
3. जल की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS): 10500 मानकों को JJM के अंतर्गत अपनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। जल जीवन मिशन अगस्त 2019 से प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू है। कथन 2 गलत है। पेयजल राज्य का विषय होने के कारण, पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है। कथन 3 सही है। JJM के अंतर्गत, BIS: 10500 मानकों को जल की गुणवत्ता के लिए अपनाया गया है।
Q2. जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल गुणवत्ता प्रबंधन के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित बस्तियों को जल आपूर्ति योजनाओं की योजना बनाते समय प्राथमिकता दी जाती है।
2. आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP) स्थापित करने की सलाह दी गई है।
3. जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण के लिए JJM निधि का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। JJM योजना के अंतर्गत, रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता दी जाती है। कथन 2 सही है। आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों में CWPP स्थापित करने की सलाह दी गई है। कथन 3 गलत है। परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण के लिए JJM निधि का उपयोग कर सकते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में राज्यों के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में जल जीवन मिशन के उद्देश्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता प्रबंधन के लिए अपनाई गई रणनीतियों का विस्तृत विवरण शामिल होना चाहिए। इसमें BIS: 10500 मानकों का पालन, रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता, सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों (CWPP) की स्थापना, जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS) गतिविधियों के लिए JJM निधि का उपयोग, JJM-जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (WQMIS) पोर्टल, तथा पेयजल उपचार प्रौद्योगिकियों पर जारी पुस्तिकाओं जैसे प्रयासों का उल्लेख करना होगा। इसके बाद, राज्यों के समक्ष आने वाली चुनौतियों जैसे वित्तीय संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी, मानव संसाधन की उपलब्धता, जल स्रोतों का प्रदूषण, रखरखाव और संचालन की समस्याएँ, तथा सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने में कठिनाइयों पर चर्चा की जानी चाहिए। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए आगे की राह सुझाई जा सकती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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