जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र ने राज्यों को 6,154 करोड़ रुपये जारी किए, जानिए पूरा विवरण

जल जीवन मिशन 2.0 में और गति आई: — concept mind map

जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र ने राज्यों को 6,154 करोड़ रुपये जारी किए, जानिए पूरा विवरण

✎ जल जीवन मिशन 2.0 ग्रामीण भारत में हर घर नल से जल सुनिश्चित करने, संचालन एवं रखरखाव को मजबूत करने और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्राप्त करने की एक महत्वाकांक्षी पहल है।

JJM 2.0 कार्यान्वयन ढांचाकेंद्रीय सहायता5,289.09 करोड़ रुपयेSNA स्पर्श प्लेटफॉर्म865.87 करोड़ रुपयेराज्य कार्यान्वयनजल आपूर्ति योजनाएंग्रामीण घरों तक जलभरोसेमंद सेवासामुदायिक स्वामित्वडिजिटल गवर्नेंसलाभस्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था
JJM 2.0 कार्यान्वयन ढांचा

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय  |  GS Paper III — बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि
  • Prelims: जल जीवन मिशन 2.0, जल शक्ति मंत्रालय, हर घर जल, SNA स्पर्श प्लेटफॉर्म, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSC), सुजलम भारत आईडी
  • Essay: ग्रामीण भारत का कायाकल्प: जल सुरक्षा से आत्मनिर्भरता तक, सहकारी संघवाद और जनभागीदारी के माध्यम से विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन 2.0 ग्रामीण भारत में हर घर नल से जल सुनिश्चित करने, संचालन एवं रखरखाव को मजबूत करने और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्राप्त करने की एक महत्वाकांक्षी पहल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्यों को कुल 6,154.96 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इसमें 10 राज्यों को केंद्रीय हिस्से के तौर पर 5,289.09 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति और 13 राज्यों को ‘SNA स्पर्श’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से 865.87 करोड़ रुपये जारी करना शामिल है। यह कदम ग्रामीण परिवारों को भरोसेमंद, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराने के मिशन की गति को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पृष्ठभूमि

  • मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ सुनिश्चित करना है, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
  • JJM 1.0 के तहत, बुनियादी ढांचे के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रणालियों का विस्तार हुआ।
  • 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को मंजूरी दी, जिसकी अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है।
  • JJM 2.0 का कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है।
  • JJM 2.0 बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर, जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को मजबूत करने और सेवाओं की भरोसेमंद आपूर्ति पर केंद्रित है।

जल जीवन मिशन 2.0 क्या है?

  • जल जीवन मिशन 2.0, जल जीवन मिशन का एक विस्तारित और संशोधित चरण है, जिसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराना है।
  • यह मिशन केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित न होकर, जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करने पर विशेष जोर देता है।
  • मिशन में स्रोत की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सेवाओं की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • ‘SNA स्पर्श’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करना एक प्रमुख सुधार है, जो योजना स्तर पर फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी की सुविधा देता है।
  • इसका उद्देश्य देश भर के ग्रामीण परिवारों के लिए भरोसेमंद सेवा आपूर्ति, डिजिटल गवर्नेंस, सामुदायिक स्वामित्व और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अवधि विस्तार मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाई गई, जिससे ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा सके।
कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये का कुल परिव्यय, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुरक्षित पेयजल सुविधा सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करेगा।
बुनियादी ढांचे से सेवा वितरण पर ध्यान जेजेएम 2.0 बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करने, स्रोत की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और सामुदायिक स्वामित्व पर केंद्रित है।
SNA स्पर्श प्लेटफॉर्म योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने की सुविधा देता है, जिससे फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी करने में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है।
डिजिटल गवर्नेंस और सामुदायिक स्वामित्व पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग, ‘जल सेवा आकलन’ के जरिए समुदाय के नेतृत्व में मूल्यांकन, और दीर्घकालिक सेवा प्रदान करने पर जोर।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, जिससे जल-जनित बीमारियों में कमी आएगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा।
  • महिलाओं और लड़कियों पर पानी लाने के बोझ को कम करना, जिससे उन्हें शिक्षा और अन्य उत्पादक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
  • सामुदायिक स्वामित्व और भागीदारी को बढ़ावा देना, जिससे जल आपूर्ति प्रणालियों का बेहतर संचालन और रखरखाव सुनिश्चित होगा।

आर्थिक महत्व

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, क्योंकि सुरक्षित जल की उपलब्धता से कृषि और अन्य स्थानीय उद्योगों को लाभ होगा।
  • जल आपूर्ति परियोजनाओं में निवेश से रोजगार के अवसर सृजित होंगे, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • जल प्रबंधन में दक्षता और पारदर्शिता से सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

शासन और प्रशासनिक महत्व

  • SNA स्पर्श जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से फंड के वितरण और उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को मजबूत करना, जिससे मिशन का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
  • ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को सशक्त करना, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और कार्यान्वयन की क्षमता बढ़ेगी।

चुनौतियाँ

1. जल गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव

  • दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और दूषित जल के उपचार के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे का अभाव।
  • जल परीक्षण प्रयोगशालाओं की कमी और प्रशिक्षित कर्मियों की अनुपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।

2. सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व

  • ग्रामीण समुदायों में जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लेने के लिए जागरूकता और क्षमता निर्माण की कमी।
  • जल शुल्क के संग्रह और उसके उचित उपयोग को सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।

3. वित्तीय स्थिरता और फंड का उपयोग

  • राज्यों द्वारा केंद्रीय फंड के समय पर और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना।
  • जल आपूर्ति प्रणालियों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना।

4. बुनियादी ढांचे का निर्माण और रखरखाव

  • पाइपलाइन, पंप और उपचार संयंत्रों जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण और उनके नियमित रखरखाव के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल श्रम की कमी।
  • पुराने बुनियादी ढांचे का नवीनीकरण और नए का निर्माण, विशेषकर कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्रोत स्थिरता भूजल स्तर में गिरावट और जलवायु परिवर्तन के कारण जल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना।
मानव संसाधन जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन, रखरखाव और निगरानी के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की कमी।
तकनीकी चुनौतियाँ दूरदराज के क्षेत्रों में आधुनिक जल शोधन तकनीकों को लागू करना और उनका रखरखाव करना।
अंतर-राज्यीय जल विवाद जल संसाधनों के बंटवारे से संबंधित अंतर-राज्यीय विवादों का मिशन के कार्यान्वयन पर संभावित प्रभाव।
डिजिटल साक्षरता SNA स्पर्श जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए ग्रामीण समुदायों और स्थानीय अधिकारियों में डिजिटल साक्षरता का अभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • जल जीवन मिशन (JJM) 2.0

आगे की राह

  • जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करना: नियमित जल परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तर पर जल परीक्षण किट और मोबाइल प्रयोगशालाओं की उपलब्धता बढ़ाना तथा प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करना।
  • सामुदायिक क्षमता निर्माण: ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को सशक्त बनाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, जिसमें संचालन, रखरखाव और वित्तीय प्रबंधन शामिल हो।
  • स्थानीय स्वामित्व को बढ़ावा देना: जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करना।
  • डिजिटल गवर्नेंस का विस्तार: SNA स्पर्श जैसे प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान चलाना और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • अंतर-मंत्रालयी समन्वय: जल शक्ति मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि मिशन के लक्ष्यों को समग्र रूप से प्राप्त किया जा सके।
  • दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता: जल शुल्क संग्रह प्रणाली को सुदृढ़ करना और जल आपूर्ति प्रणालियों के रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर राजस्व सृजन के मॉडल विकसित करना।
  • अनुसंधान और विकास: जल संरक्षण, पुनर्चक्रण और कम लागत वाली जल शोधन तकनीकों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन: जल स्रोतों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करना और तदनुसार अनुकूलन रणनीतियों को लागू करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जल जीवन मिशन 2.0 · हर घर जल · पेयजल सुरक्षा · ग्राम पंचायत सशक्तिकरण · डिजिटल गवर्नेंस · सामुदायिक स्वामित्व · एसएनए स्पर्श · जल गुणवत्ता निगरानी · दीर्घकालिक जल सुरक्षा · केन्द्रीय सहायता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकारों और उत्तरदायित्वों’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार का एक पहलू’}

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल की आवश्यकता  →  जल जीवन मिशन 2.0 की मंजूरी और अवधि विस्तार  →  केंद्रीय सहायता और SNA स्पर्श के माध्यम से फंड जारी  →  राज्यों द्वारा जल आपूर्ति योजनाओं का कार्यान्वयन  →  डिजिटल गवर्नेंस और सामुदायिक स्वामित्व पर जोर  →  प्रत्येक ग्रामीण घर तक भरोसेमंद जल सेवा की उपलब्धता  →  सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. जल जीवन मिशन 2.0 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस मिशन का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
2. ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने की सुविधा प्रदान करता है।
3. मिशन के तहत जल अर्पण, सुजलम भारत आईडी और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर जियो-टैगिंग जैसे सुधार शामिल हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
कथन 2 सही है। ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने की सुविधा देता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है।
कथन 3 सही है। जल अर्पण, सुजलम भारत आईडी और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर जियो-टैगिंग जल जीवन मिशन 2.0 के प्रमुख सुधारों में से हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा जल जीवन मिशन 2.0 का एक प्रमुख उद्देश्य नहीं है?

  1. ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना।
  2. शहरी क्षेत्रों में सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण करना।
  3. ग्राम पंचायत के नेतृत्व में जलापूर्ति प्रणाली का संचालन एवं रखरखाव मजबूत करना।
  4. पानी की गुणवत्ता की निगरानी और सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देना।

उत्तर: शहरी क्षेत्रों में सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण करना। — जल जीवन मिशन 2.0 मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पर केंद्रित है। शहरी क्षेत्रों में सीवेज उपचार संयंत्रों का निर्माण इसके प्रत्यक्ष उद्देश्यों में शामिल नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जल जीवन मिशन 2.0, ग्रामीण भारत में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल है। इस कथन के आलोक में, मिशन के प्रमुख उद्देश्यों और कार्यान्वयन में डिजिटल गवर्नेंस तथा सामुदायिक स्वामित्व की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** जल जीवन मिशन 2.0 का संक्षिप्त परिचय दें, इसके लक्ष्य (दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को सुरक्षित पेयजल) और कुल परिव्यय (8.69 लाख करोड़ रुपये) का उल्लेख करें।
2. **प्रमुख उद्देश्य:** मिशन के मुख्य उद्देश्यों को विस्तार से बताएं, जैसे:
* हर ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) प्रदान करना।
* बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर सेवा वितरण पर ध्यान केंद्रित करना।
* स्रोत स्थिरता सुनिश्चित करना।
* पानी की गुणवत्ता की निगरानी।
* दीर्घकालिक जल सुरक्षा।
3. **डिजिटल गवर्नेंस की भूमिका:** ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म, पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर जियो-टैगिंग, सुजलम भारत आईडी और जल सेवा आकलन जैसे पहलुओं पर प्रकाश डालें। बताएं कि ये कैसे पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाते हैं।
4. **सामुदायिक स्वामित्व की भूमिका:** ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) के सशक्तिकरण, जल अर्पण, और समुदाय के नेतृत्व में संचालन एवं रखरखाव (O&M) पर जोर दें। बताएं कि यह कैसे योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।
5. **आलोचनात्मक परीक्षण:** मिशन की सफलताओं (जैसे राज्यों को जारी फंड, कार्यान्वयन की गति) के साथ-साथ संभावित चुनौतियों या सुधार के क्षेत्रों पर भी चर्चा करें, जैसे:
* सभी राज्यों में समान गति से कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
* पानी की गुणवत्ता के मुद्दों का स्थायी समाधान।
* ग्रामीण स्तर पर क्षमता निर्माण और जागरूकता।
* वित्तीय प्रबंधन और फंड के सदुपयोग की निगरानी।
6. **निष्कर्ष:** मिशन के महत्व और ग्रामीण भारत में सामाजिक-आर्थिक विकास पर इसके संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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