जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र ने 6,155 करोड़ रुपये जारी किए, जानिए राज्यवार विवरण

जल जीवन मिशन 2.0 में और गति आई: — concept mind map

जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र ने 6,155 करोड़ रुपये जारी किए, जानिए राज्यवार विवरण

✎ जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को नल से जल उपलब्ध कराना है, जिसमें संचालन एवं रखरखाव, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर दिया गया है।

JJM 2.0 Fund FlowCentral Fund₹3.59L crApproved 2026State Funds₹5.06L crUtilized 2024-27SNA Sparsh₹865.87crMonitoringVillage O&MCommunity-ledPost-2028
JJM 2.0 Fund Flow

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन  |  GS Paper III — आधारभूत संरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि
  • Prelims: जल जीवन मिशन (JJM), जल शक्ति मंत्रालय, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, SNA स्पर्श प्लेटफॉर्म, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSC), सुजलम भारत आईडी, पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म, डिजिटल गवर्नेंस, सामुदायिक स्वामित्व, सेवा वितरण मॉडल
  • Essay: ग्रामीण भारत में जल सुरक्षा और सतत विकास: चुनौतियाँ एवं समाधान, सहकारी संघवाद और जन-भागीदारी के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को नल से जल उपलब्ध कराना है, जिसमें संचालन एवं रखरखाव, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस पर विशेष जोर दिया गया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान राज्यों को कुल 6,154.96 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इसमें 10 राज्यों को केंद्रीय हिस्से के तौर पर 5,289.09 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति और 13 राज्यों को ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से 865.87 करोड़ रुपये जारी करना शामिल है। यह कदम ग्रामीण परिवारों को भरोसेमंद, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराने के मिशन को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पृष्ठभूमि

  • मिशन का उद्देश्य केवल बुनियादी ढाँचा तैयार करना नहीं, बल्कि कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से नियमित और दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को मंजूरी दी, जिसके तहत मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है।
  • JJM 2.0 का कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है।
  • पुराने JJM 1.0 और JJM 2.0 के बीच की अवधि में कई राज्यों ने अपने वित्तीय संसाधनों का उपयोग करके ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को जारी रखा, जिसके लिए अब केंद्र सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति की गई है।
  • यह मिशन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को सभी के लिए सुरक्षित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करता है, जिससे ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
  • JJM 2.0 बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर, जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करने, स्रोत की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी, सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सेवाओं की भरोसेमंद आपूर्ति पर केंद्रित है।

जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 क्या है?

  • जल जीवन मिशन 2.0, जल जीवन मिशन का एक विस्तारित और सुधारित चरण है, जिसे दिसंबर 2028 तक सभी ग्रामीण परिवारों को भरोसेमंद, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं प्रदान करने के लक्ष्य के साथ अनुमोदित किया गया है।
  • यह मिशन बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़कर, जलापूर्ति प्रणालियों के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करने पर विशेष जोर देता है।
  • JJM 2.0 में स्रोत की स्थिरता (source sustainability), पानी की गुणवत्ता की निगरानी (water quality monitoring), सामुदायिक स्वामित्व (community ownership) और डिजिटल गवर्नेंस (digital governance) के माध्यम से सेवाओं की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • ‘एसएनए स्पर्श’ (SNA Sparsh) प्लेटफॉर्म के माध्यम से योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करना एक प्रमुख सुधार है, जो योजना स्तर पर फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी की सुविधा देता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अवधि विस्तार मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया, जिससे ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा सके।
कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये का कुल परिव्यय, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है, जो सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान करता है।
संचालन एवं रखरखाव पर जोर बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर ग्राम पंचायत के नेतृत्व में जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (O&M) को मजबूत करना।
स्रोत स्थिरता और जल गुणवत्ता निगरानी जल स्रोतों की स्थिरता और पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी पर ध्यान केंद्रित करना, जिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देना और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सेवाओं की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना।
SNA स्पर्श प्लेटफॉर्म योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने के लिए ‘SNA स्पर्श’ प्लेटफॉर्म का उपयोग, जो फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी की सुविधा देता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराकर सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार।
  • महिलाओं और लड़कियों पर पानी लाने के बोझ को कम करके उनके समय की बचत और सशक्तिकरण।
  • जल जनित बीमारियों में कमी लाकर स्वास्थ्य देखभाल व्यय में कमी।

आर्थिक महत्व

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे में निवेश।
  • जल क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करना।
  • कृषि और अन्य ग्रामीण उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके उत्पादकता बढ़ाना।

शासन और पारदर्शिता

  • ‘SNA स्पर्श’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से फंड के उपयोग में जवाबदेही, पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि।
  • डिजिटल गवर्नेंस और जियो-टैगिंग के माध्यम से परियोजनाओं की बेहतर निगरानी और प्रबंधन।
  • ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को योजनाओं का औपचारिक हस्तांतरण करके सामुदायिक स्वामित्व और स्थानीय शासन को मजबूत करना।

पर्यावरणीय महत्व

  • जल स्रोतों की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करके जल संरक्षण को बढ़ावा देना।
  • पानी की गुणवत्ता की निगरानी से प्रदूषण नियंत्रण में सहायता।
  • दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतत जल प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना।

चुनौतियाँ

1. फंड का प्रभावी उपयोग

  • राज्यों द्वारा जारी किए गए केंद्रीय फंड का समय पर और प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित करना।
  • फंड के दुरुपयोग और लीकेज को रोकना, विशेषकर बड़े परिव्यय वाले मिशन में।

2. संचालन एवं रखरखाव (O&M) की चुनौतियाँ

  • ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की O&M क्षमताओं का निर्माण और उन्हें सशक्त बनाना।
  • जलापूर्ति प्रणालियों के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।

3. जल गुणवत्ता निगरानी

  • ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और उनका प्रभावी संचालन।
  • प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना और उन्हें नियंत्रित करने के लिए उपाय करना।

4. सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व

  • परियोजनाओं में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करना।
  • ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए प्रशिक्षित और सशक्त करना।

5. भूजल स्तर में गिरावट

  • बढ़ती मांग के कारण भूजल स्तर में गिरावट को रोकना।
  • वर्षा जल संचयन और अन्य जल संरक्षण उपायों को बढ़ावा देना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
फंड का वितरण और उपयोग राज्यों द्वारा केंद्रीय फंड के उपयोग में असमानता और देरी।
बुनियादी ढांचे का रखरखाव निर्मित जल आपूर्ति प्रणालियों का दीर्घकालिक और प्रभावी रखरखाव सुनिश्चित करना।
जल गुणवत्ता मानक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना और निगरानी करना।
स्थानीय क्षमता निर्माण ग्राम पंचायतों और समुदायों में जल प्रबंधन और O&M के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान की कमी।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बदलते मौसम पैटर्न और सूखे के कारण जल स्रोतों की उपलब्धता पर पड़ने वाला प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • जल जीवन मिशन (JJM) 2.0

आगे की राह

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय फंड के समय पर और प्रभावी उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करना।
  • ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को संचालन एवं रखरखाव (O&M) के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं का विस्तार करना और नियमित निगरानी सुनिश्चित करना।
  • समुदाय के नेतृत्व वाले मूल्यांकन और ‘जल सेवा आकलन’ जैसे तंत्रों को मजबूत करके सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • PM गति शक्ति प्लेटफॉर्म का उपयोग करके ग्रामीण जलापूर्ति बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग को व्यापक बनाना।
  • दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों पर अधिक जोर देना।
  • डिजिटल गवर्नेंस उपकरणों का लाभ उठाकर मिशन के कार्यान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जल जीवन मिशन 2.0 · हर घर जल · ग्रामीण जलापूर्ति · डिजिटल गवर्नेंस · सामुदायिक स्वामित्व · पेयजल सुरक्षा · ग्राम पंचायत · SNA स्पर्श · केन्द्रीय सहायता · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, अधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन का अधिकार (स्वच्छ पानी इसमें निहित)’}
  • {‘article’: ‘राज्य सूची (सूची II) की प्रविष्टि 17’, ‘note’: ‘जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें, जल निकासी’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी और फंड जारी करना।  →  राज्यों द्वारा केंद्रीय फंड का उपयोग करके ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं का कार्यान्वयन।  →  SNA स्पर्श प्लेटफॉर्म के माध्यम से फंड के उपयोग की निगरानी और पारदर्शिता।  →  ग्राम पंचायतों और समुदायों द्वारा जल आपूर्ति प्रणालियों का संचालन एवं रखरखाव।  →  ग्रामीण परिवारों को विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता।  →  सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. जल जीवन मिशन 2.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस मिशन का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
2. ‘SNA स्पर्श’ प्लेटफॉर्म योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने की सुविधा देता है, जिससे वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी होती है।
3. जल जीवन मिशन 2.0 का कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता शामिल है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1: जल जीवन मिशन 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। यह कथन सही है।
कथन 2: ‘SNA स्पर्श’ प्लेटफॉर्म योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करने की सुविधा देता है, जिससे वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी होती है। यह कथन सही है।
कथन 3: मिशन का कुल परिव्यय 8.69 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता शामिल है। यह कथन सही है।

Q2. जल जीवन मिशन 2.0 के तहत किए जा रहे ‘परिवर्तनकारी सुधारों’ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से शामिल है/हैं?
1. जल अर्पण: पूरी हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों को सौंपना।
2. पेयजल परिसंपत्तियों के लिए ‘सुजलम भारत आईडी’ बनाना।
3. पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण जलापूर्ति बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग।
4. ‘जल सेवा आकलन’ के जरिए समुदाय के नेतृत्व में मूल्यांकन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प जल जीवन मिशन 2.0 के तहत किए जा रहे परिवर्तनकारी सुधारों में शामिल हैं। ‘जल अर्पण’, ‘सुजलम भारत आईडी’, ‘जियो-टैगिंग’ और ‘जल सेवा आकलन’ ये सभी मिशन के प्रमुख घटक हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जल जीवन मिशन 2.0 ग्रामीण भारत में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन के प्रमुख उद्देश्यों और परिवर्तनकारी सुधारों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 का संक्षिप्त परिचय, इसके लक्ष्य और ग्रामीण भारत के लिए इसकी प्रासंगिकता। (लगभग 20 शब्द)
2. प्रमुख उद्देश्य: मिशन के मुख्य उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे ‘हर घर जल’ सुनिश्चित करना, विश्वसनीय, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, और अवधि विस्तार (दिसंबर 2028 तक)। (लगभग 50 शब्द)
3. परिवर्तनकारी सुधार: JJM 2.0 के तहत लाए गए विशिष्ट सुधारों पर विस्तृत चर्चा करें:
a. संचालन एवं रखरखाव (O&M) पर जोर: ग्राम पंचायत के नेतृत्व में प्रणाली को मजबूत करना।
b. स्रोत की स्थिरता और पानी की गुणवत्ता की निगरानी।
c. सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस।
d. ‘SNA स्पर्श’ प्लेटफॉर्म: योजना-आधारित भुगतान, फंड जारी करना, वास्तविक समय की निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता।
e. ‘जल अर्पण’: पूरी हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को सौंपना।
f. ‘सुजलम भारत आईडी’: पेयजल परिसंपत्तियों के लिए विशिष्ट पहचान।
g. पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग।
h. ‘जल सेवा आकलन’: समुदाय के नेतृत्व में मूल्यांकन।
i. दीर्घकालिक व्यवस्था और सेवा प्रदान करने पर अधिक जोर। (लगभग 120 शब्द)
4. वित्तीय पहलू: कुल परिव्यय (8.69 लाख करोड़ रुपये) और केन्द्रीय सहायता (3.59 लाख करोड़ रुपये) का उल्लेख। (लगभग 20 शब्द)
5. निष्कर्ष: मिशन के समग्र प्रभाव और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता पर इसके संभावित सकारात्मक परिणामों पर संक्षिप्त टिप्पणी। (लगभग 20 शब्द)

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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