26 Sep ट्रम्प ने ईरान के होर्मुज स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव को किया खारिज, जानिए क्यों है महत्वपूर्ण
✎ होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, और इस क्षेत्र में कोई भी भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था
- Prelims: होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान, अमेरिकी प्रतिबंध, वैश्विक तेल व्यापार, सामरिक चोकपॉइंट, खाड़ी क्षेत्र
- Essay: वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में मध्य पूर्व की भूमिका, भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर उनके प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, और इस क्षेत्र में कोई भी भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता फिर से शुरू करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। ईरान ने यह प्रस्ताव अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरानी तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट देने और लेबनान सहित युद्धविराम का पालन करने की शर्त पर दिया था। यह घटनाक्रम क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए इसके महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं।
पृष्ठभूमि
- होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) के बीच स्थित एक संकीर्ण मार्ग है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंध कई वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर।
- अमेरिका ने ईरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें उसके तेल निर्यात पर प्रतिबंध भी शामिल है, जिसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालना है।
- ईरान ने अतीत में कई बार होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है, यदि उस पर लगाए गए प्रतिबंधों को नहीं हटाया जाता है।
- यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट्स’ (Chokepoints) में से एक है, जहाँ से बड़ी मात्रा में समुद्री व्यापार गुजरता है।
- किसी भी प्रकार की बाधा या अस्थिरता वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है?
- होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
- यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक चोकपॉइंट्स में से एक है, जिसकी चौड़ाई लगभग 39 किलोमीटर (21 समुद्री मील) है।
- वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक-चौथाई हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- यह सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के लिए एकमात्र समुद्री मार्ग है।
- इसकी सामरिक स्थिति इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
- जलडमरूमध्य के उत्तरी तट पर ईरान स्थित है, जबकि दक्षिणी तट पर संयुक्त अरब अमीरात और ओमान का मुसंदम प्रायद्वीप (Musandam Peninsula) स्थित है।
- किसी भी प्रकार की नाकेबंदी या सैन्य संघर्ष से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) | यह फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और अरब सागर (Arabian Sea) से जोड़ता है। |
| वैश्विक तेल व्यापार का प्रवेश द्वार | विश्व के समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। |
| ईरान की रणनीतिक स्थिति | ईरान इस जलडमरूमध्य के उत्तरी तट पर स्थित है, जिससे उसे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर रणनीतिक नियंत्रण प्राप्त होता है। |
| भू-राजनीतिक संवेदनशीलता | यह क्षेत्र ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख बिंदु रहा है, विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों के कारण। |
| ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव | इस जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट (Chokepoint) है।
- इसके बंद होने या बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमारी ऊर्जा आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा इस मार्ग से पूरा होता है।
रणनीतिक महत्व
- यह क्षेत्र मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- ईरान की इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की क्षमता उसे अंतर्राष्ट्रीय वार्ता में एक महत्वपूर्ण लाभ देती है।
- अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और ईरान के प्रस्ताव से पता चलता है कि यह क्षेत्र वैश्विक शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र है।
भारत के लिए निहितार्थ
- भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 80% आयात करता है, जिसमें से अधिकांश मध्य पूर्व से आता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- इस क्षेत्र में अस्थिरता से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने और वैकल्पिक व्यापार मार्गों की खोज करने की आवश्यकता पर बल मिलता है।
चुनौतियाँ
1. भू-राजनीतिक तनाव
- ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच चल रहा तनाव इस क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण है।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर मतभेद लगातार बने हुए हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत पर वैश्विक शक्तियों का प्रभाव
2. ऊर्जा सुरक्षा
- होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना या बाधित होना वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
- इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ उत्पन्न होंगी, विशेषकर भारत जैसे आयातक देशों के लिए।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
3. समुद्री व्यापार मार्ग की सुरक्षा
- यह जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और इसकी सुरक्षा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है।
- किसी भी सैन्य टकराव या नाकाबंदी से समुद्री नौवहन और व्यापार बाधित हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: भूगोल, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, समुद्री सुरक्षा
4. क्षेत्रीय अस्थिरता
- ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से मध्य पूर्व के अन्य देशों में भी अस्थिरता बढ़ सकती है।
- इससे क्षेत्रीय संघर्षों और प्रॉक्सी युद्धों की संभावना बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, मध्य पूर्व की राजनीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ईरान का परमाणु कार्यक्रम | अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा परमाणु अप्रसार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। |
| अमेरिकी प्रतिबंध | ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करते हैं और तनाव को बढ़ाते हैं, जिससे ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है। |
| होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक उपस्थिति | सैन्य टकराव और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाती है, जिससे समुद्री व्यापार बाधित हो सकता है। |
| वैश्विक तेल आपूर्ति | जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में व्यवधान और कीमतों में वृद्धि हो सकती है। |
| क्षेत्रीय प्रॉक्सी संघर्ष | ईरान और सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के बीच तनाव से मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है। |
आगे की राह
- कूटनीतिक समाधान: ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव कम करने के लिए रचनात्मक कूटनीति और बातचीत को बढ़ावा देना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और समन्वय बढ़ाना।
- ऊर्जा आपूर्ति में विविधता: भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों और मार्गों में विविधता लानी चाहिए।
- संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) का पुनरुद्धार: ईरान परमाणु समझौते को फिर से सक्रिय करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना।
- क्षेत्रीय वार्ता: मध्य पूर्व के देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए संवाद मंच स्थापित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन: सभी संबंधित पक्षों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून और समझौतों का सम्मान सुनिश्चित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
होर्मुज जलडमरूमध्य · ईरान परमाणु समझौता · आर्थिक प्रतिबंध · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार · भू-राजनीतिक तनाव · ऊर्जा सुरक्षा · सामुद्रिक मार्ग · मध्य पूर्व · तेल आपूर्ति · कूटनीति
अवधारणा प्रवाह
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव → अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और प्रतिबंधों में ढील देने की शर्त → अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के प्रस्ताव को अस्वीकार करना → ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का बढ़ना → होर्मुज जलडमरूमध्य में भू-राजनीतिक संवेदनशीलता में वृद्धि → वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल व्यापार पर संभावित प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।
2. यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदुओं में से एक है।
3. ईरान की सीमा होर्मुज जलडमरूमध्य के केवल दक्षिणी तट से लगती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। कथन 3 गलत है क्योंकि ईरान की सीमा जलडमरूमध्य के उत्तरी तट से लगती है, जबकि दक्षिणी तट पर संयुक्त अरब अमीरात और ओमान का मुसंडम प्रायद्वीप है।
Q2. अभिकथन (A): होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक तेल बाजारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
कारण (R): यह जलडमरूमध्य विश्व के एक बड़े हिस्से के कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स में से एक है, जिसके माध्यम से बड़ी मात्रा में तेल और LNG का परिवहन होता है। इसका बंद होना आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकता है और तेल की कीमतों में भारी वृद्धि कर सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ होर्मुज जलडमरूमध्य के भू-राजनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए और चर्चा कीजिए कि ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध इस क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को कैसे प्रभावित करते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** होर्मुज जलडमरूमध्य का संक्षिप्त परिचय, इसकी भौगोलिक स्थिति और वैश्विक व्यापार में इसका महत्व।
2. **भू-राजनीतिक महत्व:**
* **वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति:** विश्व के कच्चे तेल और LNG के एक बड़े हिस्से का पारगमन मार्ग।
* **सामुद्रिक चोकपॉइंट:** अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और नौवहन के लिए इसकी रणनीतिक अनिवार्यता।
* **क्षेत्रीय शक्ति संतुलन:** ईरान, सऊदी अरब, UAE जैसे देशों के लिए इसका महत्व।
* **सैन्य और सुरक्षा:** क्षेत्र में नौसैनिक उपस्थिति और संभावित संघर्षों का केंद्र।
3. **आर्थिक प्रतिबंधों का प्रभाव:**
* **ईरान पर प्रभाव:** तेल निर्यात में कमी, आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी।
* **क्षेत्रीय स्थिरता:** ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव में वृद्धि, प्रॉक्सी संघर्षों की संभावना।
* **वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा:** तेल आपूर्ति में व्यवधान का खतरा, तेल की कीमतों में अस्थिरता, वैकल्पिक मार्गों की तलाश।
* **अंतर्राष्ट्रीय संबंध:** अमेरिका-ईरान तनाव, यूरोपीय देशों की भूमिका, चीन और भारत जैसे प्रमुख तेल आयातकों पर प्रभाव।
4. **निष्कर्ष:** क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल।
स्रोत: orissapost.com
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