तमिलनाडु की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए केर्नी रिपोर्ट के प्रमुख सुझाव

Kearney study recommends measures to improve Tamil Nadu’s fiscal capacity — labelled illustration

तमिलनाडु की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए केर्नी रिपोर्ट के प्रमुख सुझाव

✎ राजकोषीय क्षमता में सुधार के लिए राजस्व संग्रह दक्षता बढ़ाना और व्यय प्रबंधन में अनुशासन लाना महत्वपूर्ण है, जिससे राज्यों को अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था, शासन और सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था एवं विकास
  • Prelims: राजकोषीय क्षमता, राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा, GST, GSDP, स्टांप शुल्क, पंजीकरण शुल्क, उत्पाद शुल्क, कराधान
  • Essay: राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघवाद, आर्थिक विकास और सुशासन में राजकोषीय प्रबंधन की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: राजकोषीय क्षमता में सुधार के लिए राजस्व संग्रह दक्षता बढ़ाना और व्यय प्रबंधन में अनुशासन लाना महत्वपूर्ण है, जिससे राज्यों को अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में जारी केर्नी (Kearney) रिपोर्ट ‘तमिलनाडु के राजकोषीय चौराहे’ ने राज्य की राजकोषीय क्षमता में सुधार के लिए कई उपायों की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु की मुख्य चुनौती अत्यधिक उधार लेना नहीं है, बल्कि यह है कि वह तुलनात्मक रूप से बड़े राज्यों की तुलना में राजस्व संग्रह और व्यय को कम कुशलता से प्रबंधित करता है। यह रिपोर्ट राज्य के राजस्व घाटे, बकाया ऋण और GSDP (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के अनुपात में अपने स्वयं के करों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • तमिलनाडु का राजस्व घाटा ₹78,324 करोड़ है और बकाया ऋण ₹10 लाख करोड़ से अधिक है।
  • राज्य का अपना-कर-से-GSDP अनुपात (own-tax-to-GSDP ratio) 5.45% है, जो अन्य बड़े राज्यों की तुलना में कम है।
  • केर्नी रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर अनुपालन, मूल्यांकन, निगरानी और परियोजना अनुशासन के माध्यम से ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक की वार्षिक राजकोषीय क्षमता जोड़ी जा सकती है, बिना नए करों या अतिरिक्त उधार के।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि अवसर केवल घाटे को कम करने का नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे, मानव विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता में आत्मविश्वास से निवेश करने की राज्य की क्षमता को बहाल करना है, जिसकी उसके अगले चरण के विकास को आवश्यकता है।
  • CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के ऋण में एक दशक में 309% की वृद्धि हुई है, जिससे पुनर्भुगतान का दबाव और नए उधार बढ़ गए हैं।

राजकोषीय क्षमता क्या है और इसे कैसे सुधारा जा सकता है?

  • राजकोषीय क्षमता (Fiscal Capacity) एक सरकार की अपनी राजस्व धाराओं से धन जुटाने और अपने नागरिकों को सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने की क्षमता को संदर्भित करती है।
  • यह राज्य की वित्तीय स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक है और यह निर्धारित करती है कि राज्य अपने विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों को कितनी अच्छी तरह वित्तपोषित कर सकता है।
  • राजस्व संग्रह में सुधार: इसमें GST अनुपालन बढ़ाना, स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क के लिए दिशानिर्देश मूल्यों को संशोधित करना, खनन रॉयल्टी और प्राप्तियों का बेहतर प्रबंधन शामिल है।
  • व्यय दक्षता बढ़ाना: परियोजनाओं के निष्पादन में अनुशासन लाना, खरीद प्रक्रियाओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और पूंजीगत परियोजनाओं की तैयारी में सुधार करना।
  • GST संग्रह में सुधार: तमिलनाडु का GST-से-GSDP अनुपात महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक की तुलना में सबसे कम है। आर्थिक गतिविधियों को औपचारिक GST-अनुपालक दायरे में लाकर और मौजूदा लीकेज के खिलाफ प्रवर्तन को मजबूत करके संग्रह बढ़ाया जा सकता है।
  • स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क: दिशानिर्देश मूल्यों का आवधिक संशोधन, भौगोलिक विवरण में वृद्धि और वास्तविक पंजीकृत लेनदेन डेटा का उपयोग करके स्टांप शुल्क-से-GSDP अनुपात को स्थिर किया जा सकता है।
  • उत्पाद शुल्क (Excise Revenue): प्रीमियम और सेमी-प्रीमियम शराब उत्पादों की व्यापक उपलब्धता को सक्षम करना और उन श्रेणियों के लिए एक विशिष्ट, उच्च उत्पाद शुल्क दर निर्धारित करना राजस्व बढ़ा सकता है।
  • अनुदान का प्रभावी उपयोग: केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदानों का समय पर और प्रभावी ढंग से उपयोग करना भी राजकोषीय क्षमता को बढ़ाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राजस्व घाटा तमिलनाडु का राजस्व घाटा ₹78,324 करोड़ है, जो राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
बकाया ऋण राज्य पर ₹10 लाख करोड़ से अधिक का बकाया ऋण है, जिससे ऋण चुकाने का दबाव बढ़ रहा है।
स्वयं के कर-से-GSDP अनुपात यह अनुपात 5.45% है, जो महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों की तुलना में कम है, जिससे राजस्व संग्रह में अक्षमता का पता चलता है।
GST संग्रह तमिलनाडु का GST-से-GSDP अनुपात तुलनात्मक राज्यों में सबसे कम है, जो संग्रह में सुधार की बड़ी गुंजाइश दर्शाता है।
गाइडलाइन मूल्य संशोधन राज्य में संपत्ति के गाइडलाइन मूल्य का संशोधन अनियमित रहा है, जिससे स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क से राजस्व संग्रह प्रभावित होता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • राज्य की वित्तीय क्षमता में सुधार से अधोसंरचना (Infrastructure), मानव विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता में निवेश करने की क्षमता बहाल होगी, जो राज्य के अगले चरण के विकास के लिए आवश्यक है।
  • राजस्व संग्रह में दक्षता और व्यय में अनुशासन से राज्य को अपनी वृद्धि, कल्याणकारी योजनाओं और राजकोषीय विवेक को वित्तपोषित करने के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।

शासनिक महत्व

  • रिपोर्ट की सिफारिशें GST अनुपालन, गाइडलाइन मूल्य संशोधन, अनुदान वितरण, खनन सामंजस्य और पूंजीगत परियोजना तत्परता जैसे क्षेत्रों में विभागीय जवाबदेही को बढ़ावा देंगी।
  • बेहतर वित्तीय प्रबंधन से राज्य सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी, जिससे नागरिकों को बेहतर सेवाएँ मिलेंगी।

राजकोषीय स्थिरता

  • राजस्व घाटे को कम करने और ऋण के बोझ को प्रबंधित करने से राज्य की दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित होगी, जिससे भविष्य की पीढ़ियों पर वित्तीय बोझ कम होगा।
  • राजस्व संग्रह में वृद्धि और व्यय में दक्षता से राज्य को बिना अतिरिक्त उधार लिए या नए कर लगाए अपनी वार्षिक राजकोषीय क्षमता में ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक की वृद्धि करने का अवसर मिलेगा।

चुनौतियाँ

1. राजस्व संग्रह में अक्षमता

  • तमिलनाडु का स्वयं के कर-से-GSDP अनुपात तुलनात्मक राज्यों की तुलना में कम है, जो राजस्व संग्रह में अंतर्निहित अक्षमताओं को दर्शाता है।
  • GST संग्रह में कमजोरी और गाइडलाइन मूल्य संशोधन में अनियमितताएँ राजस्व वृद्धि में बाधा डालती हैं।

2. बढ़ता ऋण बोझ

  • राज्य पर ₹10 लाख करोड़ से अधिक का बकाया ऋण है, जिससे ऋण चुकाने का दबाव बढ़ रहा है और नए उधार लेने की आवश्यकता पड़ रही है।
  • CAG रिपोर्ट के अनुसार, एक दशक में ऋण में 309% की वृद्धि हुई है, जो वित्तीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।

3. व्यय दक्षता की कमी

  • रिपोर्ट बताती है कि राज्य तुलनात्मक बड़े राज्यों की तुलना में कम कुशलता से खर्च करता है, जिससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग नहीं हो पाता।
  • परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनुशासन की कमी और खरीद में प्रतिस्पर्धा की कमी व्यय दक्षता को प्रभावित करती है।

4. GST अनुपालन और प्रवर्तन

  • बड़े उपभोग आधार के बावजूद, तमिलनाडु में GST का सबसे कमजोर संग्रह है, जो औपचारिक अर्थव्यवस्था में अधिक आर्थिक गतिविधियों को लाने और मौजूदा लीकेज के खिलाफ प्रवर्तन को मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कम स्वयं का कर-से-GSDP अनुपात राज्य की राजस्व जुटाने की क्षमता में कमी और अन्य राज्यों से तुलना में पिछड़ना।
उच्च राजस्व घाटा राजस्व व्यय को पूरा करने के लिए उधार पर बढ़ती निर्भरता, जो दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को कमजोर करती है।
बढ़ता बकाया ऋण बढ़ता ऋण चुकाने का दबाव और भविष्य के विकास निवेश के लिए सीमित राजकोषीय स्थान।
GST संग्रह में अक्षमता बड़े उपभोग आधार के बावजूद कम GST राजस्व, जो अनुपालन और प्रवर्तन में कमजोरियों का संकेत है।
गाइडलाइन मूल्य संशोधन में अनियमितता स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क से राजस्व संग्रह पर नकारात्मक प्रभाव, जिससे संपत्ति बाजार में पारदर्शिता की कमी होती है।

आगे की राह

  • GST अनुपालन में सुधार के लिए लक्षित प्रयास किए जाएँ, जिसमें अधिक आर्थिक गतिविधियों को औपचारिक दायरे में लाना और मौजूदा लीकेज के खिलाफ प्रवर्तन को मजबूत करना शामिल है।
  • संपत्ति के गाइडलाइन मूल्य का नियमित और सूक्ष्म भौगोलिक स्तर पर संशोधन किया जाए, जिसमें वास्तविक पंजीकृत लेनदेन डेटा का उपयोग किया जाए।
  • विभागों के लिए GST अनुपालन, गाइडलाइन मूल्य संशोधन, अनुदान वितरण, खनन सामंजस्य, खरीद प्रतिस्पर्धा और पूंजीगत परियोजना तत्परता के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएँ और जवाबदेही तय की जाए।
  • राजस्व और पूंजीगत व्यय दोनों में दक्षता और अनुशासन को बढ़ावा दिया जाए, जिसमें परियोजनाओं के प्राथमिकताकरण और क्रियान्वयन में सुधार शामिल है।
  • प्रीमियम और सेमी-प्रीमियम शराब उत्पादों की व्यापक उपलब्धता को सक्षम किया जाए, साथ ही इन श्रेणियों के लिए एक अलग, उच्च उत्पाद शुल्क दर निर्धारित की जाए।
  • राजकोषीय घाटे को कम करने और ऋण-से-GSDP अनुपात को स्थायी स्तर पर लाने के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राजकोषीय क्षमता · राजस्व घाटा · राजकोषीय विवेक · GST संग्रह · स्टाम्प शुल्क · पंजीकरण शुल्क · खनन रॉयल्टी · राजस्व दक्षता · पूंजीगत व्यय · राजकोषीय समेकन · राजकोषीय संघवाद · राज्य वित्त

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246A’, ‘note’: ‘GST से संबंधित प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 268’, ‘note’: ‘केंद्र द्वारा लगाए गए किंतु राज्यों द्वारा संगृहीत कर’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग की भूमिका’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 293’, ‘note’: ‘राज्यों द्वारा उधार लेना’}

अवधारणा प्रवाह

कम राजस्व संग्रह और अक्षम व्यय  →  राजस्व घाटा और बढ़ता ऋण  →  राजकोषीय क्षमता पर दबाव  →  विकास निवेश में कमी  →  आर्थिक संवृद्धि और मानव विकास पर नकारात्मक प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राज्य सरकारों का राजस्व घाटा (Revenue Deficit) उनके कुल राजस्व प्राप्तियों से कुल राजस्व व्यय का अधिक होना दर्शाता है।
2. GST-से-GSDP अनुपात किसी राज्य की आर्थिक गतिविधियों को औपचारिक GST-अनुपालक दायरे में लाने की क्षमता का संकेतक है।
3. स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क राज्य सरकारों के लिए गैर-कर राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। राजस्व घाटा तब होता है जब राजस्व व्यय राजस्व प्राप्तियों से अधिक हो जाता है। कथन 2 सही है। उच्च GST-से-GSDP अनुपात बेहतर अनुपालन और औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार को दर्शाता है। कथन 3 गलत है। स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क राज्य सरकारों के लिए कर राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, न कि गैर-कर राजस्व के।

Q2. राजकोषीय क्षमता (Fiscal Capacity) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा उपाय राज्य के राजस्व संग्रह को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है?
(A) केवल नए कर लगाकर
(B) GST अनुपालन में सुधार, दिशानिर्देश मूल्यों का संशोधन और खनन रॉयल्टी का बेहतर प्रबंधन
(C) केवल केंद्र सरकार से अधिक अनुदान प्राप्त करके
(D) केवल सार्वजनिक ऋण बढ़ाकर

  1. (A)
  2. (B)
  3. (C)
  4. (D)

उत्तर: (B) — विकल्प (B) सबसे उपयुक्त है। GST अनुपालन में सुधार, संपत्ति के दिशानिर्देश मूल्यों का नियमित संशोधन और खनन रॉयल्टी का प्रभावी प्रबंधन राज्य की आंतरिक राजस्व क्षमता को बढ़ाता है। नए कर लगाना, केवल केंद्र से अनुदान पर निर्भर रहना या ऋण बढ़ाना स्थायी समाधान नहीं हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राज्यों की राजकोषीय क्षमता को बढ़ाने में राजस्व संग्रह दक्षता और व्यय अनुशासन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, तमिलनाडु के हालिया अनुभव से क्या सबक सीखे जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: राजकोषीय क्षमता की परिभाषा और इसके महत्व का संक्षिप्त परिचय। (20-30 शब्द)
2. राजस्व संग्रह दक्षता की भूमिका:
– GST अनुपालन में सुधार (उदाहरण: तमिलनाडु में GST-से-GSDP अनुपात का कम होना)।
– स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क का प्रभावी प्रबंधन (दिशानिर्देश मूल्यों का नियमित संशोधन, भौगोलिक सटीकता)।
– खनन रॉयल्टी और अन्य गैर-कर राजस्व स्रोतों का अनुकूलन।
– कर आधार का विस्तार और लीकेज को रोकना। (80-100 शब्द)
3. व्यय अनुशासन की भूमिका:
– पूंजीगत व्यय की प्राथमिकता और परियोजना अनुशासन।
– अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण।
– अनुदानों का प्रभावी उपयोग और समय पर आहरण।
– खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा। (80-100 शब्द)
4. तमिलनाडु के अनुभव से सबक:
– राजस्व घाटा और बढ़ते ऋण की चुनौती।
– ‘कम उधार लेने’ के बजाय ‘कम कुशल संग्रह और व्यय’ की मूल समस्या।
– बिना नए करों या अतिरिक्त उधार के राजकोषीय क्षमता बढ़ाने की संभावना (₹1.2 लाख करोड़ का अनुमानित अंतर)।
– बुनियादी ढांचे, मानव विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता में निवेश की क्षमता बहाल करने का अवसर। (70-80 शब्द)
5. निष्कर्ष: राजकोषीय विवेक और संवृद्धि के लिए राजस्व दक्षता और व्यय अनुशासन के महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष। (20-30 शब्द)

स्रोत: The Hindu

Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: केर्नी अध्ययन के अनुसार, तमिलनाडु की राजकोषीय क्षमता में सुधार के लिए निम्नलिखित में से कौन सा उपाय सबसे प्रभावी माना गया है?

  1. राजस्व संग्रहण प्रणाली में सुधार
  2. राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण
  3. राज्य सरकार द्वारा विदेशी ऋण लेना
  4. राज्य में नए कर लगाना

उत्तर: राजस्व संग्रहण प्रणाली में सुधार — केर्नी अध्ययन में राजस्व संग्रहण प्रणाली में सुधार को तमिलनाडु की राजकोषीय क्षमता बढ़ाने के लिए सर्वाधिक प्रभावी उपाय बताया गया है।

Mains: तमिलनाडु सरकार द्वारा राजकोषीय क्षमता में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का मूल्यांकन करते हुए, राज्य की आर्थिक स्थिरता और विकास पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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