तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटों की संख्या स्थिर रखने का प्रस्ताव पेश करेगी सरकार

CM Vijay likely to move resolution in Assembly seeking freeze on Lok Sabha seats at 543 — concept mind map

तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटों की संख्या स्थिर रखने का प्रस्ताव पेश करेगी सरकार

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लोकसभा सीट स्थिरीकरण प्रस्ताव

✎ परिसीमन आयोग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करता है, और वर्तमान में लोकसभा सीटों की संख्या 2026 तक 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर है, जिससे आगामी परिसीमन को लेकर संघीय चिंताएँ बढ़ रही हैं।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना  |  GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ
  • Prelims: परिसीमन आयोग (Delimitation Commission), अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 170, लोकसभा सीटों की संख्या, जनसंख्या जनगणना, संविधान संशोधन, संघवाद, महिला आरक्षण
  • Essay: भारत में संघवाद की चुनौतियाँ और भविष्य, जनसंख्या नियंत्रण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: परिसीमन आयोग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करता है, और वर्तमान में लोकसभा सीटों की संख्या 2026 तक 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर है, जिससे आगामी परिसीमन को लेकर संघीय चिंताएँ बढ़ रही हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करने की संभावना व्यक्त की है, जिसमें केंद्र सरकार से लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बनाए रखने और राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा वितरण को अपरिवर्तित रखने का आग्रह किया जाएगा। यह कदम प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास (Delimitation Exercise) के संबंध में दक्षिणी राज्यों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय वाले निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करना।
  • भारत में, परिसीमन का कार्य एक उच्च-शक्ति निकाय, परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है, जिसके आदेशों को कानून का बल प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत, प्रत्येक जनगणना के बाद संसद एक परिसीमन अधिनियम बनाती है। अनुच्छेद 170 राज्यों की विधानसभा सीटों के परिसीमन से संबंधित है।
  • पिछला बड़ा परिसीमन 2002 में हुआ था, लेकिन लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को 1971 की जनगणना के आधार पर 2026 तक के लिए स्थिर कर दिया गया था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को दंडित न किया जा सके।
  • जनसंख्या वृद्धि में क्षेत्रीय असमानताओं के कारण, दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि अगला परिसीमन उनकी राजनीतिक शक्ति को कम कर सकता है, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
  • प्रस्ताव में 2029 के लोकसभा चुनावों और उसके बाद के विधानसभा चुनावों में मौजूदा 543 सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू करने पर भी जोर दिया जा सकता है।

परिसीमन आयोग क्या है?

  • परिसीमन आयोग का गठन भारत सरकार द्वारा संसद के एक अधिनियम के तहत किया जाता है।
  • इसका मुख्य कार्य निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना है ताकि जनसंख्या में बदलाव को दर्शाया जा सके और ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को सुनिश्चित किया जा सके।
  • आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश अध्यक्ष के रूप में, मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित कोई चुनाव आयुक्त, और संबंधित राज्य चुनाव आयुक्त पदेन सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
  • आयोग अपने निर्णयों में जनसंख्या, भौगोलिक विशेषताओं, प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं और संचार की सुविधा जैसे कारकों पर विचार करता है।
  • आयोग के आदेश अंतिम होते हैं और किसी भी न्यायालय में उन पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता, जिससे इसके निर्णयों की वैधता और अंतिम प्रकृति सुनिश्चित होती है।
  • भारत में अब तक चार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है – 1952, 1963, 1973 और 2002 में।
  • संविधान के 84वें संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को 2026 तक के लिए स्थिर कर दिया गया है, जिसका आधार 1971 की जनगणना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान में 543 सीटों को बनाए रखने का प्रस्ताव, परिसीमन (Delimitation) के बाद संभावित वृद्धि को रोकने हेतु।
अंतर-राज्यीय सीट वितरण राज्यों के बीच मौजूदा सीट वितरण को बनाए रखने की मांग, ताकि दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी न आए।
लोकसभा-राज्यसभा अनुपात वर्तमान 2.2:1 के अनुपात को बनाए रखने पर जोर, जो दोनों सदनों के बीच संतुलन सुनिश्चित करता है।
महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों से मौजूदा 543 सीटों पर 33% महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू करने की वकालत।
संघीय ढांचा राज्यों के अधिकारों और संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों की रक्षा के लिए एक राज्य विधानसभा द्वारा प्रस्ताव।

महत्व

राजनीतिक और संवैधानिक महत्व

  • यह प्रस्ताव परिसीमन प्रक्रिया के संभावित प्रभावों पर राज्यों की चिंता को दर्शाता है, विशेष रूप से उन राज्यों की जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है।
  • यह संघवाद के सिद्धांत और राज्यों के प्रतिनिधित्व के अधिकार पर बहस को पुनर्जीवित करता है, जो भारतीय संविधान की एक मूलभूत विशेषता है।
  • लोकसभा सीटों को स्थिर रखने की मांग से भविष्य में राज्यों के बीच शक्ति संतुलन और विधायी प्रतिनिधित्व पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन

  • जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को डर है कि परिसीमन से उनकी लोकसभा सीटों में कमी आ सकती है, जिससे उनके राजनीतिक प्रभाव में गिरावट आएगी।
  • यह प्रस्ताव क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और विभिन्न राज्यों की चिंताओं को समायोजित करने के लिए एक राष्ट्रीय सहमति की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों पर लागू करने की मांग लैंगिक समानता और विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शासन और नीति निर्माण

  • परिसीमन पर अनिश्चितता नीति निर्माण और दीर्घकालिक योजना को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि यह राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सीधे प्रभावित करता है।
  • यह केंद्र सरकार पर दबाव डालता है कि वह परिसीमन के मुद्दे पर सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श करे और एक न्यायसंगत समाधान खोजे।
  • लोकसभा सीटों को स्थिर रखने का निर्णय भविष्य में जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण के पैटर्न के आधार पर प्रतिनिधित्व के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता को जन्म दे सकता है।

चुनौतियाँ

1. परिसीमन और जनसंख्या नियंत्रण

  • जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को डर है कि परिसीमन से उनकी लोकसभा सीटों में कमी आएगी, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ेंगी।
  • यह उन राज्यों को दंडित करने जैसा लग सकता है जिन्होंने राष्ट्रीय हित में जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया है।

2. राज्यों का प्रतिनिधित्व

  • लोकसभा सीटों को स्थिर रखने से भविष्य में जनसंख्या वृद्धि के साथ प्रति सांसद जनसंख्या अनुपात में भारी असमानताएँ आ सकती हैं।
  • यह विभिन्न राज्यों के नागरिकों के बीच प्रतिनिधित्व की समानता के सिद्धांत को प्रभावित कर सकता है।

3. संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता

  • लोकसभा सीटों को स्थायी रूप से स्थिर करने के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी, जिसके लिए व्यापक राजनीतिक सहमति की आवश्यकता है।
  • अनुच्छेद 82 और 170 के तहत परिसीमन प्रत्येक जनगणना के बाद अनिवार्य है, जिसे बदलने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।

4. महिला आरक्षण का कार्यान्वयन

  • महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों पर लागू करने की मांग, लेकिन इसके लिए भी संवैधानिक संशोधन और परिसीमन के साथ इसके समन्वय की आवश्यकता होगी।
  • सीटों की संख्या को स्थिर रखते हुए आरक्षण लागू करने से कुल सीटों की संख्या पर प्रभाव पड़ सकता है या मौजूदा सीटों के पुनर्वितरण की आवश्यकता हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परिसीमन का स्थगन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के प्रतिनिधित्व में कमी का डर।
जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व जनसंख्या वृद्धि के साथ प्रति सांसद जनसंख्या अनुपात में असमानताएँ बढ़ने की संभावना।
संघीय संतुलन राज्यों के बीच शक्ति संतुलन और राजनीतिक प्रभाव पर संभावित प्रभाव।
संवैधानिक बाध्यता प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन की संवैधानिक अनिवार्यता का उल्लंघन।
महिला आरक्षण का कार्यान्वयन मौजूदा सीटों पर आरक्षण लागू करने के लिए संवैधानिक और प्रक्रियात्मक चुनौतियाँ।

आगे की राह

  • केंद्र सरकार को परिसीमन के मुद्दे पर सभी राज्यों और राजनीतिक दलों के साथ व्यापक और समावेशी परामर्श प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
  • जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक न्यायसंगत तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो उनके प्रतिनिधित्व को प्रभावित न करे।
  • परिसीमन के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार की जानी चाहिए जो जनसंख्या वृद्धि, क्षेत्रीय संतुलन और संघीय सिद्धांतों को ध्यान में रखे।
  • महिला आरक्षण विधेयक को बिना किसी देरी के लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन और प्रक्रियात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
  • लोकसभा और विधानसभा सीटों के भविष्य के पुनर्गठन के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जो 2026 के बाद की स्थिति पर विचार करे।
  • राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) या विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सकता है, जो इन मुद्दों पर सिफारिशें दे।
  • परिसीमन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए एक स्वतंत्र परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) को पर्याप्त शक्तियाँ और संसाधन प्रदान किए जाने चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

परिसीमन · लोकसभा सीटें · संवैधानिक प्रावधान · जनसंख्या नियंत्रण · संघवाद · राज्यों का प्रतिनिधित्व · महिला आरक्षण · अनुच्छेद 82 · अनुच्छेद 330 · जनप्रतिनिधित्व अधिनियम

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 81: लोकसभा की संरचना
  • अनुच्छेद 82: प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन
  • अनुच्छेद 170: विधानसभाओं की संरचना
  • अनुच्छेद 330: लोकसभा में अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण
  • अनुच्छेद 368: संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति

अवधारणा प्रवाह

राज्य विधानसभा द्वारा लोकसभा सीटों को स्थिर रखने का प्रस्ताव  →  परिसीमन प्रक्रिया और जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों की चिंताएँ  →  राज्यों के प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन पर संभावित प्रभाव  →  संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 82) और संशोधन की आवश्यकता  →  महिला आरक्षण के साथ परिसीमन के मुद्दे का समन्वय  →  राष्ट्रीय सहमति और न्यायसंगत समाधान की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है।
2. 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को वर्ष 2026 तक के लिए स्थिर कर दिया है।
3. परिसीमन आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसके निर्णय अंतिम होते हैं और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 सही है। 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को वर्ष 2026 तक के लिए स्थिर कर दिया है। कथन 3 सही है। परिसीमन आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसके निर्णय अंतिम होते हैं और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।

Q2. परिसीमन आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. परिसीमन आयोग का गठन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
  2. यह भारत के चुनाव आयोग के सहयोग से काम करता है।
  3. इसके निर्णयों को संसद में साधारण बहुमत से बदला जा सकता है।
  4. इसका मुख्य कार्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है।

उत्तर: इसके निर्णयों को संसद में साधारण बहुमत से बदला जा सकता है। — परिसीमन आयोग के निर्णयों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती और न ही संसद में उन्हें बदला जा सकता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ परिसीमन (Delimitation) के संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या कीजिए। क्या लोकसभा सीटों की संख्या को 543 पर स्थायी रूप से बनाए रखने का प्रस्ताव भारत के संघीय ढांचे और जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावित कर सकता है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिसीमन के संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 82, 170, 330, 332) और परिसीमन आयोग के गठन व कार्यों का उल्लेख करें। 84वें और 87वें संविधान संशोधनों पर प्रकाश डालें। लोकसभा सीटों को 543 पर स्थिर रखने के प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में तर्क दें। पक्ष में जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहन, दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व की चिंताएं, संघवाद पर संभावित प्रभाव (राज्यों के बीच असंतुलन) जैसे बिंदुओं को शामिल करें। विपक्ष में बढ़ती जनसंख्या, प्रतिनिधित्व के लोकतांत्रिक सिद्धांत, ‘एक व्यक्ति एक वोट’ के सिद्धांत पर प्रभाव और भविष्य की आवश्यकताओं का उल्लेख करें। अंत में एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: The Hindu


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