11 Aug तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटें स्थिर रखने का प्रस्ताव पेश करेगा मुख्यमंत्री विजय

✎ परिसीमन का उद्देश्य 'एक व्यक्ति, एक वोट' के सिद्धांत को सुनिश्चित करना है, लेकिन 2026 के बाद प्रस्तावित परिसीमन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है, जिससे संघीय ढाँचे में चिंताएँ बढ़ रही हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना | GS Paper II — संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ | GS Paper II — संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय
- Prelims: परिसीमन आयोग, अनुच्छेद 82, अनुच्छेद 170, 42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 84वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, लोकसभा सीटों का स्थगन, जनसंख्या अनुपात, महिला आरक्षण विधेयक
- Essay: भारत में संघवाद की बदलती प्रकृति और क्षेत्रीय आकांक्षाएँ, संवैधानिक संशोधन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व: चुनौतियाँ एवं समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: परिसीमन का उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को सुनिश्चित करना है, लेकिन 2026 के बाद प्रस्तावित परिसीमन जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है, जिससे संघीय ढाँचे में चिंताएँ बढ़ रही हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश करने की संभावना है, जिसमें केंद्र सरकार से लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 को स्थायी रूप से बनाए रखने और सीटों के वर्तमान अंतर-राज्य वितरण को अपरिवर्तित रखने का आग्रह किया जाएगा। यह कदम आगामी परिसीमन (Delimitation) अभ्यास की पृष्ठभूमि में आया है, जिससे दक्षिणी राज्यों के अधिकारों की रक्षा करने और जनसंख्या वृद्धि के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से उत्पन्न होने वाली संभावित असमानताओं को दूर करने का लक्ष्य है।
पृष्ठभूमि
- भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का परिसीमन प्रत्येक जनगणना के बाद किया जाता है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना है।
- संविधान के अनुच्छेद 82 (लोकसभा के लिए) और अनुच्छेद 170 (राज्य विधानसभाओं के लिए) परिसीमन का प्रावधान करते हैं।
- 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों की संख्या को 2001 की जनगणना तक के लिए स्थिर कर दिया था, ताकि परिवार नियोजन कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा सके और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को दंडित न किया जा सके।
- 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने इस स्थगन को 2026 तक बढ़ा दिया, जिससे 1971 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर सीटों की संख्या अपरिवर्तित रही।
- 2026 के बाद परिसीमन होने की उम्मीद है, जो 2021 की जनगणना (या उसके बाद की पहली प्रकाशित जनगणना) के आँकड़ों पर आधारित होगा, जिससे दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
परिसीमन क्या है?
- परिसीमन का अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय वाले निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण या पुनः निर्धारण करना।
- इसका मुख्य उद्देश्य ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को सुनिश्चित करना है, जिससे सभी निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या का अनुपात लगभग समान रहे।
- भारत में, परिसीमन का कार्य एक उच्च-शक्ति वाले निकाय, परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसके आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- परिसीमन आयोग के आदेश राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित होने के बाद कानून का बल रखते हैं और संसद द्वारा उनमें कोई संशोधन नहीं किया जा सकता।
- परिसीमन आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner) और संबंधित राज्य के निर्वाचन आयुक्त पदेन सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।
- भारत में अब तक चार बार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है – 1952, 1963, 1973 और 2002 में।
- परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या परिवर्तन के कारण निर्वाचन क्षेत्रों के बीच प्रतिनिधित्व में असमानता को दूर करना है, लेकिन यह अक्सर संघीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| लोकसभा सीटों की संख्या | वर्तमान में 543 सीटें हैं, जिन्हें स्थायी रूप से बनाए रखने का प्रस्ताव है। |
| अंतर-राज्यीय सीट वितरण | राज्यों के बीच मौजूदा सीट वितरण को बनाए रखने पर जोर। |
| परिसीमन (Delimitation) अभ्यास | प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के संदर्भ में यह प्रस्ताव लाया जा रहा है। |
| लोकसभा-राज्यसभा अनुपात | वर्तमान 2.2:1 के अनुपात को बनाए रखने का भी प्रस्ताव है। |
| महिला आरक्षण | मौजूदा 543 सीटों के आधार पर 2029 के लोकसभा और बाद के विधानसभा चुनावों में 33% महिला आरक्षण लागू करने की मांग। |
| दक्षिणी राज्यों के अधिकार | तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के अधिकारों की रक्षा करना मुख्य उद्देश्य है। |
महत्व
संघवाद और प्रतिनिधित्व (Federalism and Representation)
- यह प्रस्ताव संघवाद के सिद्धांत और राज्यों के प्रतिनिधित्व के अधिकार से जुड़ा है। दक्षिणी राज्य जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के कारण अपनी लोकसभा सीटों में कमी की आशंका को लेकर चिंतित हैं, जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कम प्रतिनिधित्व देगा।
जनसंख्या नियंत्रण प्रोत्साहन (Population Control Incentive)
- यदि लोकसभा सीटें जनसंख्या के आधार पर बढ़ती हैं, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्हें दंडित किया जाएगा, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। यह जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को हतोत्साहित कर सकता है।
राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन (Political and Regional Balance)
- सीटों को स्थिर रखने से देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। सीटों में बदलाव से उत्तर और दक्षिण के बीच शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।
चुनौतियाँ
1. जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व का सिद्धांत
- संविधान में लोकसभा सीटों का आवंटन जनसंख्या के आधार पर करने का प्रावधान है (अनुच्छेद 81)। सीटों को स्थायी रूप से स्थिर करना इस संवैधानिक सिद्धांत के विरुद्ध हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: अनुच्छेद 81, प्रतिनिधित्व
2. परिसीमन आयोग का कार्य
- परिसीमन आयोग का मुख्य कार्य जनसंख्या परिवर्तनों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या को समायोजित करना है। सीटों को स्थिर करने से आयोग के कार्य पर प्रभाव पड़ेगा।
यूपीएससी लिंक: संवैधानिक निकाय: परिसीमन आयोग
3. संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता
- लोकसभा सीटों की संख्या को स्थायी रूप से स्थिर करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी, जिसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान: संशोधन प्रक्रिया
4. राज्यों के बीच असंतोष
- यदि सीटों को स्थिर किया जाता है, तो अधिक जनसंख्या वाले राज्य, जिन्हें वर्तमान में कम प्रतिनिधित्व मिलता है, असंतोष व्यक्त कर सकते हैं, जिससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव आ सकता है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद: केंद्र-राज्य संबंध, अंतर-राज्यीय विवाद
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जनसंख्या वृद्धि का असमान पैटर्न | उत्तरी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर दक्षिणी राज्यों की तुलना में अधिक है, जिससे भविष्य में सीटों के पुनर्वितरण पर विवाद हो सकता है। |
| संवैधानिक अधिदेश | संविधान जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व का अधिदेश देता है, जिसे स्थिर करने से संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन हो सकता है। |
| लोकतांत्रिक वैधता | यदि सीटों को स्थिर किया जाता है, तो भविष्य में बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जिससे लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल उठ सकते हैं। |
| संघीय संतुलन | सीटों को स्थिर करने या बदलने से संघीय संतुलन और राज्यों के बीच शक्ति समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। |
| महिला आरक्षण का कार्यान्वयन | मौजूदा 543 सीटों पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग, जो सीटों की संख्या में वृद्धि के बिना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगी। |
आगे की राह
- राज्यों के बीच आम सहमति बनाने के लिए व्यापक विचार-विमर्श और संवाद आयोजित किया जाना चाहिए, जिसमें सभी राज्यों की चिंताओं को सुना जाए।
- जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए वैकल्पिक तंत्र विकसित किए जा सकते हैं, जैसे कि वित्तीय हस्तांतरण में विशेष भत्ते या अन्य प्रोत्साहन।
- एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सकता है जो लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण के विभिन्न मॉडलों और उनके प्रभावों का अध्ययन करे।
- संवैधानिक सिद्धांतों और संघीय ढांचे को ध्यान में रखते हुए, जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व और जनसंख्या नियंत्रण के प्रोत्साहन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
- महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों पर लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन और प्रक्रियागत बदलावों पर विचार किया जाना चाहिए।
- दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए, एक ऐसी नीति तैयार की जानी चाहिए जो सभी क्षेत्रों के लिए न्यायसंगत हो और संघवाद को मजबूत करे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
परिसीमन · लोकसभा सीटें · संवैधानिक प्रावधान · जनसंख्या अनुपात · संघवाद · राज्यों के अधिकार · महिला आरक्षण · समान प्रतिनिधित्व · अनुच्छेद 82 · अनुच्छेद 330 · अनुच्छेद 332 · प्रतिनिधित्व का सिद्धांत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 81: लोकसभा की संरचना और सीटों का आवंटन जनसंख्या के आधार पर।
- अनुच्छेद 82: प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों के पुनर्समायोजन (परिसीमन) का प्रावधान।
- अनुच्छेद 170: विधानसभाओं की संरचना और सीटों का आवंटन।
- अनुच्छेद 330: लोकसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 368: संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और प्रक्रिया।
अवधारणा प्रवाह
जनसंख्या वृद्धि में क्षेत्रीय असमानता → परिसीमन अभ्यास का प्रस्ताव → दक्षिणी राज्यों की सीटों में कमी की आशंका → प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन पर चिंता → लोकसभा सीटों को स्थिर करने का प्रस्ताव → संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के परिसीमन को 2001 की जनगणना तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।
3. 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के परिसीमन पर लगे प्रतिबंध को 2026 तक बढ़ा दिया।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 82 संसद को प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 गलत है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा सीटों के परिसीमन को 2001 की जनगणना तक के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन यह 1971 की जनगणना के आधार पर था, न कि 2001 की। कथन 3 सही है। 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 ने सीटों के परिसीमन पर लगे प्रतिबंध को 2026 तक बढ़ा दिया, जिसका आधार 1971 की जनगणना ही रही।
Q2. परिसीमन आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अध्यक्ष: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त
2. सदस्य: संबंधित राज्य के चुनाव आयुक्त
3. सदस्य: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
उपरोक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — परिसीमन आयोग की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाती है, न कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा। इसके पदेन सदस्य संबंधित राज्य के चुनाव आयुक्त होते हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश इसके सदस्य नहीं होते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ परिसीमन के संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या कीजिए। क्या लोकसभा सीटों की संख्या को 543 पर स्थायी रूप से बनाए रखने का प्रस्ताव भारत में संघवाद और समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों के अनुरूप है? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिसीमन के संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 82, 170, 330, 332) का उल्लेख करें। परिसीमन आयोग की संरचना और कार्यों पर प्रकाश डालें। लोकसभा सीटों की संख्या को 543 पर बनाए रखने के प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करें। पक्ष में – दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या नियंत्रण में सफलता, प्रतिनिधित्व में कमी का डर, संघवाद पर प्रभाव। विपक्ष में – जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व का सिद्धांत, ‘एक व्यक्ति एक वोट’ का सिद्धांत, उत्तर भारतीय राज्यों की बढ़ती जनसंख्या। महिला आरक्षण के साथ इसके संबंध पर भी विचार करें। अंत में, संघवाद और समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों पर इसके समग्र प्रभाव का समालोचनात्मक मूल्यांकन करें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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