07 Aug तमिलनाडु विधानसभा में शराब बिक्री पर पर्यावरण एवं कल्याण उपकर विधेयक पेश

✎ उपकर एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला कर है, जिसका उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जाता है, और तमिलनाडु का नया विधेयक शराब की बिक्री पर ऐसा ही एक उपकर लगाने का प्रस्ताव करता है ताकि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजव्यवस्था और शासन (Polity and Governance), सामाजिक न्याय (Social Justice) | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology), भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy)
- Prelims: उपकर (Cess), राज्य वित्त (State Finance), शराब पर कर (Tax on Liquor), पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection), सामाजिक कल्याण (Social Welfare), तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम (Tamil Nadu VAT Act)
- Essay: शराबबंदी और सामाजिक कल्याण: राज्यों की भूमिका, पर्यावरण संरक्षण में वित्तीय साधनों का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: उपकर एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला कर है, जिसका उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जाता है, और तमिलनाडु का नया विधेयक शराब की बिक्री पर ऐसा ही एक उपकर लगाने का प्रस्ताव करता है ताकि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2006 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया है, जिसमें शराब की बिक्री पर पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर (Environmental and Social Welfare Cess) लगाने का प्रस्ताव है। यह उपकर शराब के सेवन से उत्पन्न होने वाले सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों, विशेष रूप से छोड़ी गई बोतलों और कंटेनरों से होने वाले कचरे से निपटने के लिए धन जुटाएगा।
पृष्ठभूमि
- शराब की बिक्री राज्यों के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इसके सामाजिक और पर्यावरणीय दुष्प्रभाव भी होते हैं।
- शराब के अत्यधिक सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, पारिवारिक कलह और सड़क दुर्घटनाएं जैसी सामाजिक बुराइयां उत्पन्न होती हैं।
- शराब की बोतलों और कंटेनरों का अनुचित निपटान पारिस्थितिक क्षरण का कारण बनता है, जिससे वन्यजीवों और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा होता है।
- भारत के संविधान के तहत, शराब पर कर लगाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है।
- उपकर एक प्रकार का कर है जो किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाता है और उसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है, न कि सामान्य राजस्व में मिलाया जाता है।
- कई राज्यों ने शराब के सेवन को हतोत्साहित करने और संबंधित समस्याओं से निपटने के लिए विभिन्न नीतियां और कर उपाय अपनाए हैं।
उपकर (Cess) क्या है?
- उपकर एक अतिरिक्त कर है जो किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाता है।
- यह केंद्र या राज्य सरकार द्वारा लगाया जा सकता है।
- उपकर से प्राप्त आय को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) या राज्य की संचित निधि में जमा नहीं किया जाता है, बल्कि इसे एक अलग फंड में रखा जाता है।
- इस फंड का उपयोग केवल उस विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जा सकता है जिसके लिए उपकर लगाया गया था।
- उदाहरण के लिए, शिक्षा उपकर (Education Cess) शिक्षा के वित्तपोषण के लिए लगाया जाता है, और स्वच्छ भारत उपकर (Swachh Bharat Cess) स्वच्छता अभियानों के लिए।
- उपकर की प्रकृति यह सुनिश्चित करती है कि एकत्रित धन का उपयोग उसके इच्छित उद्देश्य से भटकाया न जाए।
- यह सरकारों को विशिष्ट सामाजिक या पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए लक्षित धन जुटाने में सक्षम बनाता है।
- तमिलनाडु का यह विधेयक पर्यावरण संरक्षण, शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण, नशामुक्ति कार्यक्रमों और शराब से प्रभावित परिवारों के कल्याण के लिए धन जुटाने का प्रस्ताव करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पर्यावरणीय और सामाजिक कल्याण उपकर (Cess) | शराब की बिक्री पर अतिरिक्त कर, जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय क्षरण और सामाजिक समस्याओं का समाधान करना है। |
| निधियों का उपयोग | शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण, सुरक्षित निपटान और पुन: उपयोग के साथ-साथ शराब की लत से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों के लिए। |
| पारिवारिक सहायता | शराब की लत से प्रभावित परिवारों के लिए कल्याणकारी उपायों और आजीविका सहायता प्रदान करना। |
| जन जागरूकता अभियान | शराब के हानिकारक प्रभावों और शराब के कंटेनरों के अनुचित निपटान से होने वाले पर्यावरणीय खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना। |
| पारिस्थितिकी संरक्षण | वन, वन्यजीव और व्यापक पारिस्थितिकी के संरक्षण और बहाली के लिए उपकर की आय का उपयोग। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह विधेयक शराब की लत से उत्पन्न सामाजिक समस्याओं को सीधे संबोधित करता है, जिसमें पुनर्वास और नशामुक्ति कार्यक्रमों के लिए धन उपलब्ध कराना शामिल है।
- शराब की लत से प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करके, यह सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करने का प्रयास करता है।
- जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से, यह शराब के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जनता को शिक्षित करने में मदद करेगा, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक सुधार हो सकते हैं।
पर्यावरणीय महत्व
- यह पहल शराब की बोतलों और कंटेनरों के अनुचित निपटान से होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने पर केंद्रित है।
- पुनर्चक्रण, सुरक्षित निपटान और पुन: उपयोग के लिए धन उपलब्ध कराकर, यह अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करेगा और पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव कम करेगा।
- वन, वन्यजीव और व्यापक पारिस्थितिकी के संरक्षण और बहाली के लिए धन का उपयोग करके, यह जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में योगदान देगा।
राजकोषीय महत्व
- उपकर (Cess) लगाने से राज्य सरकार के लिए एक नया राजस्व स्रोत उत्पन्न होगा, जिसका उपयोग विशिष्ट सामाजिक और पर्यावरणीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
- यह एक ‘उपयोगकर्ता भुगतान’ सिद्धांत को दर्शाता है, जहां शराब के उपभोक्ता उन सामाजिक और पर्यावरणीय लागतों में योगदान करते हैं जो उनके उपभोग से उत्पन्न होती हैं।
- यह राज्य के राजकोषीय विवेक को दर्शाता है, जो विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए लक्षित कर उपायों का उपयोग करता है।
चुनौतियाँ
1. राजस्व का प्रभावी उपयोग
- यह सुनिश्चित करना कि उपकर से प्राप्त राजस्व का उपयोग वास्तव में उन उद्देश्यों के लिए किया जाए जिनके लिए इसे एकत्र किया गया है।
- निधियों के दुरुपयोग या अन्य मदों में विचलन को रोकना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. प्रशासनिक चुनौतियाँ
- उपकर के संग्रह और उसके बाद विभिन्न कार्यक्रमों में वितरण के लिए एक कुशल और पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र स्थापित करना।
- पुनर्चक्रण, नशामुक्ति और पर्यावरणीय संरक्षण कार्यक्रमों के समन्वय में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन और प्रशासन
3. शराब उद्योग पर प्रभाव
- उपकर से शराब की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे अवैध शराब के व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना हो सकती है।
- उद्योग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ से उत्पादन और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन
4. सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन
- केवल उपकर लगाने से शराब के सेवन और उसके निपटान से संबंधित सामाजिक व्यवहार में तत्काल और महत्वपूर्ण परिवर्तन लाना मुश्किल हो सकता है।
- इसके लिए व्यापक सामाजिक जागरूकता और शिक्षा अभियानों की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय और विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| निधियों का विचलन | उपकर से प्राप्त राजस्व का उपयोग अन्य सरकारी खर्चों के लिए किया जा सकता है, जिससे मूल उद्देश्य विफल हो सकता है। |
| अवैध शराब व्यापार | शराब की कीमतों में वृद्धि से अवैध शराब के उत्पादन और बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं। |
| प्रशासनिक लागत | उपकर के संग्रह और प्रबंधन की लागत इतनी अधिक हो सकती है कि शुद्ध राजस्व लाभ कम हो जाए। |
| प्रभावी निगरानी का अभाव | पुनर्चक्रण, नशामुक्ति और पर्यावरणीय कार्यक्रमों की प्रगति और प्रभावशीलता की निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र की कमी। |
| जनता का प्रतिरोध | शराब की कीमतों में वृद्धि के कारण उपभोक्ताओं से संभावित विरोध या असंतोष। |
आगे की राह
- उपकर से प्राप्त राजस्व के उपयोग के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी ढांचा स्थापित किया जाए, जिसमें नियमित ऑडिट और सार्वजनिक रिपोर्टिंग शामिल हो।
- अवैध शराब के व्यापार को रोकने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत किया जाए और सीमा पार तस्करी पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
- नशामुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित कर्मियों का प्रावधान किया जाए।
- शराब के हानिकारक प्रभावों और पर्यावरणीय खतरों के बारे में व्यापक और निरंतर जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- शराब के कंटेनरों के पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए, जिसमें स्थानीय निकायों और निजी क्षेत्र की भागीदारी शामिल हो।
- उपकर के प्रभावों का नियमित मूल्यांकन किया जाए, जिसमें सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं को शामिल किया जाए, ताकि आवश्यकतानुसार नीति में संशोधन किया जा सके।
- शराब उद्योग के साथ रचनात्मक संवाद स्थापित किया जाए ताकि उनके सहयोग से प्रभावी समाधान खोजे जा सकें और अवैध व्यापार को रोका जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर · शराब की बिक्री पर उपकर · राजकोषीय संघवाद · राज्य वित्त · पर्यावरण संरक्षण · सामाजिक कल्याण पहल · नशा मुक्ति कार्यक्रम · अपशिष्ट प्रबंधन · कर और उपकर · राजकोषीय नीति · सार्वजनिक स्वास्थ्य · राज्य सूची के विषय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से व्यय’}
- {‘article’: ‘राज्य सूची (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘शराब पर कर लगाने की राज्य की शक्ति’}
अवधारणा प्रवाह
शराब की बिक्री में वृद्धि → सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याएँ (लत, अपशिष्ट) → राज्य सरकार द्वारा उपकर (Cess) का प्रस्ताव → उपकर से राजस्व संग्रह → पुनर्चक्रण, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण में निवेश → सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपकर (Cess) किसी विशेष उद्देश्य के लिए लगाए गए कर होते हैं और इनकी आय भारत की संचित निधि का हिस्सा नहीं होती है।
2. राज्य सरकारें केवल उन वस्तुओं और सेवाओं पर उपकर लगा सकती हैं जो राज्य सूची के अंतर्गत आती हैं।
3. तमिलनाडु द्वारा प्रस्तावित पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर का उद्देश्य शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण और नशा मुक्ति कार्यक्रमों को वित्तपोषित करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। उपकर की आय भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) का हिस्सा होती है, लेकिन इसे एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए अलग रखा जाता है। कथन 2 गलत है। राज्य सरकारें संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची के तहत आने वाले विषयों पर कर और उपकर लगा सकती हैं, लेकिन उपकर लगाने की शक्ति केंद्र और राज्य दोनों के पास होती है, बशर्ते वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो। कथन 3 सही है। तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रस्तावित उपकर का मुख्य उद्देश्य शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण, सुरक्षित निपटान और नशा मुक्ति कार्यक्रमों के लिए धन जुटाना है।
Q2. अभिकथन (A): भारत में उपकर लगाने का उद्देश्य अक्सर विशिष्ट सार्वजनिक सेवाओं या विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाना होता है।
कारण (R): उपकर की आय को भारत की संचित निधि से अलग रखा जाता है और इसे केवल उसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है जिसके लिए इसे लगाया गया है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A सत्य है, लेकिन R असत्य है। — अभिकथन (A) सत्य है। उपकर वास्तव में विशिष्ट उद्देश्यों के लिए धन जुटाने हेतु लगाए जाते हैं। कारण (R) असत्य है। उपकर की आय भारत की संचित निधि का हिस्सा होती है, लेकिन इसे एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए अलग रखा जाता है। यह संचित निधि से अलग नहीं रखी जाती है, बल्कि इसका उपयोग विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में उपकर (Cess) की अवधारणा की व्याख्या कीजिए और इसके संवैधानिक आधारों पर प्रकाश डालिए। क्या तमिलनाडु द्वारा शराब की बिक्री पर पर्यावरण और सामाजिक कल्याण उपकर लगाने का निर्णय राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) के सिद्धांतों के अनुरूप है? विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** उपकर की परिभाषा और सामान्य उद्देश्य (विशिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया गया कर) का उल्लेख करें।
2. **संवैधानिक आधार:**
* संविधान के अनुच्छेद 265 (कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जाएगा) का उल्लेख।
* संविधान की सातवीं अनुसूची (संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची) और कर लगाने की शक्तियों का वितरण।
* उपकर लगाने की शक्ति केंद्र और राज्यों दोनों के पास हो सकती है, बशर्ते वह संबंधित सूची के तहत हो।
* शराब (मादक पेय) राज्य सूची (प्रविष्टि 51) का विषय है, जिस पर राज्य कर लगा सकते हैं।
3. **राजकोषीय संघवाद:**
* राजकोषीय संघवाद की अवधारणा (केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों का वितरण)।
* राज्यों को अपने राजस्व स्रोतों (जैसे शराब पर कर) के माध्यम से स्वायत्तता प्रदान करना।
* तमिलनाडु के उपकर का विश्लेषण:
* **अनुरूपता:** शराब राज्य सूची का विषय है, इसलिए राज्य को इस पर कर/उपकर लगाने का अधिकार है। यह राज्य की वित्तीय स्वायत्तता को दर्शाता है।
* **उद्देश्य:** पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण (नशा मुक्ति) जैसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए धन जुटाना, जो राज्य के कल्याणकारी दायित्वों के अनुरूप है।
* **लाभ:** राजस्व सृजन, पर्यावरणीय क्षति को कम करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार।
* **संभावित चुनौतियाँ/चिंताएँ (यदि कोई हों):** पड़ोसी राज्यों के साथ कर दरों में अंतर से व्यापार पर प्रभाव, उपकर के उपयोग में पारदर्शिता।
4. **निष्कर्ष:** तमिलनाडु का यह कदम राजकोषीय संघवाद के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो राज्यों को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषयों पर विशिष्ट उद्देश्यों के लिए राजस्व जुटाने की शक्ति देता है, साथ ही सामाजिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करता है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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