09 Aug तमिलनाडु सरकार ने संघ राज्य संबंध रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया
✎ केंद्र-राज्य संबंधों पर तमिलनाडु सरकार की उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट का सार्वजनिक होना भारतीय संघवाद में पारदर्शिता और राज्यों की स्वायत्तता के महत्व को रेखांकित करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध | GS Paper II — शासन व्यवस्था, पारदर्शिता एवं जवाबदेही
- Prelims: केंद्र-राज्य संबंध, संघवाद, उच्च-स्तरीय समिति, न्यायिक समीक्षा, अनुच्छेद 245-255, राज्यों की स्वायत्तता
- Essay: भारतीय संघवाद: चुनौतियाँ और समाधान, पारदर्शिता और सुशासन: लोकतंत्र के आधार स्तंभ
त्वरित पुनरावृत्ति: केंद्र-राज्य संबंधों पर तमिलनाडु सरकार की उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट का सार्वजनिक होना भारतीय संघवाद में पारदर्शिता और राज्यों की स्वायत्तता के महत्व को रेखांकित करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित अपनी उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के भाग-I के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में जारी करने का निर्देश दिया है। यह कदम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिपोर्ट तक आम जनता की पहुंच बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही, सरकार ने रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण के विशेष कॉपीराइट को भी रद्द करने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि
- पिछली DMK सरकार ने सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता में केंद्र-राज्य संबंधों पर एक उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee on Union-State Relations) का गठन किया था।
- इस समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु राज्य योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन सदस्य के रूप में शामिल थे।
- समिति ने अपनी रिपोर्ट का भाग-I तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को 16 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत किया था।
- मुख्यमंत्री ने 18 फरवरी, 2026 को इस रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत किया था।
- यह समिति केंद्र और राज्यों के बीच मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों, प्रशासनिक प्रथाओं और वित्तीय संबंधों की समीक्षा करने तथा सुधारों का सुझाव देने के लिए गठित की गई थी।
- केंद्र-राज्य संबंधों का मुद्दा भारतीय राजनीति में हमेशा से एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय रहा है, जिस पर समय-समय पर विभिन्न आयोगों और समितियों ने अपनी सिफारिशें दी हैं।
भारत में केंद्र-राज्य संबंध
- भारतीय संविधान के भाग XI और XII में केंद्र और राज्यों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का विस्तृत वर्णन किया गया है।
- विधायी संबंध (अनुच्छेद 245-255) केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित हैं, जिसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं।
- प्रशासनिक संबंध (अनुच्छेद 256-263) केंद्र और राज्यों के बीच कार्यकारी शक्तियों के समन्वय और सहयोग को दर्शाते हैं, जैसे अखिल भारतीय सेवाएं और अंतर-राज्यीय परिषदें।
- वित्तीय संबंध (अनुच्छेद 268-293) केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण, अनुदान और ऋण से संबंधित हैं, जिसमें वित्त आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- भारतीय संविधान में एक मजबूत केंद्र की अवधारणा को अपनाया गया है, लेकिन साथ ही राज्यों को भी पर्याप्त स्वायत्तता प्रदान की गई है, जिससे यह एक संघीय व्यवस्था (Federal System) का उदाहरण है।
- समय-समय पर केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए विभिन्न आयोगों का गठन किया गया है, जिनमें सरकारीया आयोग (Sarkaria Commission) और पुंछी आयोग (Punchhi Commission) प्रमुख हैं।
- राज्यों द्वारा अधिक स्वायत्तता और वित्तीय संसाधनों की मांग अक्सर केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव का कारण बनती है, जिससे संघवाद की भावना प्रभावित होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संघ-राज्य संबंध पर उच्च-स्तरीय समिति का गठन | केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा और सुधार हेतु तमिलनाडु सरकार की पहल। |
| रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक करना | रिपोर्ट की पारदर्शिता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना, विशेषकर गैर-तमिल भाषी हितधारकों के लिए। |
| रिपोर्ट के कॉपीराइट का निरस्तीकरण | ज्ञान के मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देना और रिपोर्ट के उपयोग पर प्रतिबंध हटाना। |
| न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता | समिति की विश्वसनीयता और विशेषज्ञता को दर्शाता है, जो सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हैं। |
| समिति द्वारा रिपोर्ट का भाग-I प्रस्तुत करना | संघवाद (Federalism) के मुद्दों पर विचार-विमर्श और नीति निर्माण के लिए आधार प्रदान करता है। |
महत्व
शासन और पारदर्शिता
- रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का निर्णय सरकारी कामकाज में पारदर्शिता (Transparency) के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह विभिन्न हितधारकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को केंद्र-राज्य संबंधों पर समिति के निष्कर्षों और सिफारिशों तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा, जिससे सूचित बहस को बढ़ावा मिलेगा।
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- यह कदम भारत के संघीय ढांचे में राज्यों की भूमिका और अधिकारों पर चल रही बहस को रेखांकित करता है।
- रिपोर्ट केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति के वितरण, वित्तीय संबंधों और प्रशासनिक सहयोग से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाल सकती है, जो भारतीय संघवाद के लिए प्रासंगिक हैं।
सूचना तक पहुंच
- रिपोर्ट के कॉपीराइट को रद्द करने से सूचना तक पहुंच (Access to Information) के सिद्धांत को मजबूती मिलती है, जिससे ज्ञान का मुक्त प्रसार सुनिश्चित होता है।
- यह अन्य राज्यों और केंद्र सरकार को भी इसी तरह की रिपोर्टों को सार्वजनिक करने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे शासन में अधिक खुलापन आएगा।
चुनौतियाँ
1. केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव
- केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न मुद्दों पर अक्सर तनाव देखा जाता है, जैसे कि वित्तीय हस्तांतरण, विधायी शक्तियों का विभाजन और प्रशासनिक नियंत्रण।
- यह रिपोर्ट इन तनावों को और उजागर कर सकती है या उनके समाधान के लिए नए दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकती है, जिन्हें लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान-संघीय ढांचा, केंद्र-राज्य संबंध
2. सिफारिशों का कार्यान्वयन
- समिति द्वारा की गई सिफारिशों को केंद्र सरकार और अन्य राज्यों द्वारा स्वीकार और कार्यान्वित किया जाना एक बड़ी चुनौती होगी।
- राजनीतिक इच्छाशक्ति और आम सहमति की कमी कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है, भले ही सिफारिशें कितनी भी अच्छी क्यों न हों।
यूपीएससी लिंक: नीति निर्माण और कार्यान्वयन
3. भाषा और पहुंच
- हालांकि अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक किया गया है, फिर भी देश के विभिन्न भाषाई क्षेत्रों में रिपोर्ट की पहुंच और समझ सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद की आवश्यकता हो सकती है ताकि व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
यूपीएससी लिंक: सूचना का अधिकार, भाषाई विविधता
4. संघीय संतुलन बनाए रखना
- सिफारिशों को लागू करते समय केंद्र और राज्यों के बीच नाजुक संघीय संतुलन (Federal Balance) को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
- किसी भी पक्ष के अत्यधिक झुकाव से संघीय ढांचे में असंतुलन पैदा हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान-संघीय प्रणाली
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| रिपोर्ट की सिफारिशों का स्वीकार्यता | केंद्र सरकार और अन्य राज्यों द्वारा समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने में संभावित प्रतिरोध। |
| राजनीतिक ध्रुवीकरण | केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के कारण सिफारिशों पर आम सहमति बनाने में कठिनाई। |
| संसाधनों का आवंटन | राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने की सिफारिशों के कारण केंद्र के संसाधनों पर संभावित प्रभाव। |
| विधायी शक्तियों का विभाजन | समवर्ती सूची (Concurrent List) और अवशिष्ट शक्तियों (Residuary Powers) से संबंधित सिफारिशों पर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद। |
आगे की राह
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सार्थक संवाद और परामर्श को बढ़ावा देना ताकि समिति की सिफारिशों पर आम सहमति बन सके।
- रिपोर्ट की सिफारिशों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना और उन्हें भारतीय संविधान के संघीय सिद्धांतों के अनुरूप लागू करना।
- केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित करना, जिसमें नियमित अंतराल पर समीक्षा और सुधार शामिल हों।
- राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करने के तरीकों का पता लगाना, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके।
- रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सार्वजनिक बहस और चर्चा को प्रोत्साहित करना, जिससे विभिन्न दृष्टिकोणों को शामिल किया जा सके।
- अन्य राज्यों को भी इसी तरह की समितियों का गठन करने और केंद्र-राज्य संबंधों पर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- संघीय ढांचे के भीतर सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) के बीच संतुलन बनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्र-राज्य संबंध · संघवाद · राज्यों की स्वायत्तता · सरकारी आयोग · पुंछी आयोग · न्यायिक समीक्षा · अनुच्छेद 246 · सातवीं अनुसूची · सहकारी संघवाद · राजकोषीय संघवाद · प्रशासनिक संबंध · विधायी संबंध
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 245’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों का विस्तार।’}
- {‘अनुच्छेद 246’: ‘संसद और राज्य विधानमंडलों की विधायी शक्तियों का विभाजन।’}
- {‘अनुच्छेद 263’: ‘अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) के संबंध में प्रावधान।’}
- {‘अनुच्छेद 280’: ‘वित्त आयोग (Finance Commission) के गठन से संबंधित।’}
- {‘सातवीं अनुसूची’: ‘संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में शक्तियों का विभाजन।’}
अवधारणा प्रवाह
तमिलनाडु सरकार द्वारा उच्च-स्तरीय समिति का गठन → समिति द्वारा केंद्र-राज्य संबंधों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना → रिपोर्ट के अंग्रेजी संस्करण को सार्वजनिक डोमेन में रखने का आदेश → रिपोर्ट के कॉपीराइट का निरस्तीकरण → केंद्र-राज्य संबंधों पर सार्वजनिक बहस और नीतिगत चर्चा को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. भारत का संविधान संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों को सातवीं अनुसूची के तहत तीन सूचियों में विभाजित करता है। 2. अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary powers) राज्यों के पास निहित हैं। 3. समवर्ती सूची (Concurrent List) पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन टकराव की स्थिति में राज्य का कानून प्रभावी होगा। उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची का उल्लेख है। कथन 2 गलत है। अनुच्छेद 248 के अनुसार, अवशिष्ट शक्तियाँ संसद (केंद्र) के पास निहित हैं। कथन 3 गलत है। समवर्ती सूची पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन टकराव की स्थिति में केंद्र का कानून प्रभावी होगा (अनुच्छेद 254)।
Q2. कथन (A): भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न आयोगों का गठन किया गया है। कारण (R): भारतीय संविधान की संघीय प्रकृति के कारण केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के वितरण में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — कथन (A) सही है क्योंकि सरकारी आयोग और पुंछी आयोग जैसे कई आयोगों का गठन किया गया है। कारण (R) भी सही है क्योंकि भारत एक संघीय देश है और शक्तियों का संतुलन महत्वपूर्ण है। कारण (R) कथन (A) का सही स्पष्टीकरण भी है, क्योंकि इसी आवश्यकता के कारण आयोगों का गठन किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, राज्यों की स्वायत्तता से संबंधित मांगों और उनके संवैधानिक निहितार्थों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की संघीय प्रकृति का संक्षिप्त परिचय। मुख्य भाग: 1. केंद्र-राज्य संबंधों के विभिन्न आयाम: विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय संबंधों का उल्लेख। 2. वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक परीक्षण: केंद्र की ओर झुकाव, समवर्ती सूची का बढ़ता उपयोग, राज्यपाल की भूमिका, केंद्रीय योजनाओं का प्रभुत्व, राजकोषीय असंतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा। 3. राज्यों की स्वायत्तता की मांगें: इन मांगों के पीछे के कारणों (जैसे क्षेत्रीय आकांक्षाएं, वित्तीय स्वतंत्रता की इच्छा, सांस्कृतिक पहचान) का विश्लेषण। 4. संवैधानिक निहितार्थ: अनुच्छेद 246, सातवीं अनुसूची, अनुच्छेद 356, अंतर-राज्यीय परिषद जैसे प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख। सरकारी आयोग, पुंछी आयोग जैसे प्रमुख आयोगों की सिफारिशों का संदर्भ। हाल के न्यायिक निर्णयों (यदि कोई प्रासंगिक हो) का उल्लेख। निष्कर्ष: सहकारी संघवाद को मजबूत करने और केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन बनाए रखने के लिए आगे का रास्ता सुझाना।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments