तीन वर्षों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 19,216 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत 1 — concept mind map

तीन वर्षों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 19,216 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति: केंद्र सरकार

तीन वर्षों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 19,216 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति: केंद्र सरकार — तीन वर्षों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों हेतु छात्रवृत्त
आरेख: तीन वर्षों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों हेतु छात्रवृत्ति वितरण (करोड़ रुपये)

✎ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएँ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती हैं, जो शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करके उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और DBT के…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, कमजोर वर्गों का उत्थान  |  GS Paper III — मानव संसाधन विकास, समावेशी विकास
  • Prelims: अनुसूचित जाति के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना, अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, उच्च स्तरीय शिक्षा योजना (टीसीएस), राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (एनओएस) योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), केंद्र प्रायोजित योजनाएँ, केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएँ
  • Essay: भारत में समावेशी शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में छात्रवृत्तियों की भूमिका, कमजोर वर्गों के उत्थान में सरकारी योजनाओं का प्रभाव और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएँ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती हैं, जो शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करके उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और DBT के माध्यम से वितरण में पारदर्शिता व दक्षता लाई गई है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान अनुसूचित जाति (SC) के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत कुल 19,216.46 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी। इन योजनाओं में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, उच्च स्तरीय शिक्षा योजना और राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजनाएँ शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों के सामाजिक और शैक्षिक उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
  • अनुच्छेद 46 राज्य को समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को विशेष सावधानी से बढ़ावा देने का निर्देश देता है।
  • शिक्षा, विशेषकर उच्च शिक्षा तक पहुँच, सामाजिक और आर्थिक गतिशीलता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • छात्रवृत्ति योजनाएँ वित्तीय बाधाओं को दूर कर अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने में सहायता करती हैं।
  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) अनुसूचित जातियों सहित विभिन्न कमजोर वर्गों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) प्रणाली ने छात्रवृत्ति वितरण को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में धनराशि प्राप्त होती है।

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाएँ

  • **अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना:** यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य मैट्रिक के बाद की शिक्षा (कक्षा 11 से पीएचडी तक) प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित अनुपात में धन का योगदान किया जाता है।
  • **अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना:** यह योजना कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है ताकि वे अपनी शिक्षा जारी रख सकें और ड्रॉपआउट दर को कम किया जा सके। यह भी एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
  • **उच्च स्तरीय शिक्षा योजना (Top Class Education Scheme – TCS):** यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो अनुसूचित जाति के उन विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों (जैसे IIT, IIM, NIT, AIIMS आदि) में अध्ययन कर रहे हैं। इस योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे धनराशि जारी की जाती है।
  • **राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (National Overseas Scholarship – NOS) योजना:** यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो अनुसूचित जाति, विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश जनजातियों, भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगरों से संबंधित पात्र विद्यार्थियों को विदेशों में मास्टर डिग्री और पीएचडी पाठ्यक्रमों का अध्ययन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना के अंतर्गत भारतीय मिशनों को प्राधिकरण पत्र (LOA) के माध्यम से अग्रिम रूप से धनराशि जारी की जाती है।
  • **योजनाओं का क्रियान्वयन:** केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्रीय हिस्सा संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपना हिस्सा जारी किए जाने के बाद केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाता है। केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं में धनराशि सीधे लाभार्थियों को या संबंधित संस्थानों/मिशनों को जारी की जाती है।
  • **वितरण में सुधार:** छात्रवृत्ति जारी करने में होने वाले विलंब को कम करने के लिए विभाग नियमित रूप से योजनाओं की समीक्षा करता है। क्षमता निर्माण कार्यक्रम, तकनीकी सहायता और हितधारकों के साथ कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं। आधार से जुड़े बैंक खातों में DBT ने भुगतान प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है और पारदर्शिता बढ़ाई है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
वितरित राशि पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023-24 से 2025-26) में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत कुल 19,216.46 करोड़ रुपये वितरित किए गए।
योजनाओं का विस्तार इसमें मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, उच्च स्तरीय शिक्षा योजना (TCS) और राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (NOS) जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं।
मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति इस योजना के तहत 17,224.63 करोड़ रुपये वितरित किए गए, जो कुल वितरित राशि का एक बड़ा हिस्सा है।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) DBT के माध्यम से लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे भुगतान से प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया है और विलंब कम हुआ है।
नियमित समीक्षा विभाग छात्रवृत्ति योजनाओं की नियमित समीक्षा करता है, जिसमें क्षमता निर्माण कार्यक्रम और तकनीकी सहायता शामिल है, ताकि वितरण में आने वाली समस्याओं का समाधान किया जा सके।

महत्व

सामाजिक सशक्तिकरण

  • छात्रवृत्ति योजनाओं से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे सामाजिक समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
  • उच्च शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करके, ये योजनाएँ अनुसूचित जाति समुदाय के समग्र विकास और मुख्यधारा में उनके समावेशन में योगदान करती हैं।

आर्थिक समावेशन

  • शिक्षा के माध्यम से बेहतर रोज़गार के अवसर प्राप्त होते हैं, जिससे अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और गरीबी कम होती है।
  • वित्तीय सहायता से शिक्षा पर होने वाले व्यय का बोझ कम होता है, जिससे परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिलती है।

मानव संसाधन विकास

  • शिक्षित और कुशल कार्यबल का निर्माण होता है, जो देश के समग्र मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • उच्च शिक्षा और विशेष कौशल प्राप्त करने से नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है।

शासन में पारदर्शिता

  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली से छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
  • नियमित समीक्षा और तकनीकी सहायता से योजना के कार्यान्वयन में दक्षता आती है और लाभार्थियों तक समय पर लाभ पहुँचता है।

चुनौतियाँ

1. योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने हिस्से का समय पर जारी न करना केंद्रीय सहायता के वितरण में विलंब का कारण बन सकता है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और आवेदन प्रक्रिया की जटिलता पात्र लाभार्थियों तक पहुँच को बाधित कर सकती है।

2. वित्तीय प्रबंधन और निगरानी

  • छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग या गलत लाभार्थियों तक पहुँचने की संभावना को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
  • योजनाओं के वित्तीय बोझ को वहन करने और निरंतरता बनाए रखने के लिए स्थायी वित्तपोषण मॉडल की चुनौती।

3. तकनीकी और डिजिटल साक्षरता

  • DBT और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रियाओं के लिए लाभार्थियों और अधिकारियों में पर्याप्त डिजिटल साक्षरता और तकनीकी पहुँच सुनिश्चित करना।
  • तकनीकी बुनियादी ढाँचे की कमी, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, ऑनलाइन आवेदन और भुगतान में बाधाएँ उत्पन्न कर सकती है।

4. शैक्षिक असमानताएँ

  • छात्रवृत्ति योजनाओं के बावजूद, शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच में क्षेत्रीय और सामाजिक असमानताएँ बनी हुई हैं।
  • उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के ड्रॉपआउट दर को कम करने और उन्हें सफलतापूर्वक पाठ्यक्रम पूरा करने में सहायता प्रदान करने की चुनौती।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राज्य के हिस्से का विलंब केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों द्वारा अपने हिस्से के समय पर जारी न करने से छात्रवृत्ति वितरण में देरी होती है।
जागरूकता की कमी ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी का अभाव।
तकनीकी पहुँच ऑनलाइन आवेदन और DBT के लिए आवश्यक डिजिटल बुनियादी ढाँचे और साक्षरता की कमी।
ड्रॉपआउट दर उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के बीच ड्रॉपआउट दर को कम करना एक सतत चुनौती है।
निगरानी और मूल्यांकन छात्रवृत्ति के प्रभावी उपयोग और वांछित परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना
  • उच्च स्तरीय शिक्षा योजना (TCS)
  • अनुसूचित जाति और अन्य पात्र अभ्यर्थियों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (NOS) योजना

आगे की राह

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करना ताकि केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों द्वारा अपने हिस्से का समय पर जारी होना सुनिश्चित हो सके।
  • छात्रवृत्ति योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और तकनीकी बुनियादी ढाँचे में सुधार करना ताकि ऑनलाइन आवेदन और DBT प्रणाली का प्रभावी ढंग से उपयोग हो सके।
  • छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को और सरल बनाना और आवेदन से लेकर भुगतान तक के समय को कम करना।
  • छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभाव का नियमित और कठोर मूल्यांकन करना ताकि उनकी प्रभावशीलता और लक्षित परिणामों को मापा जा सके।
  • अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सहायता और परामर्श सेवाएँ प्रदान करना ताकि ड्रॉपआउट दर को कम किया जा सके और उनकी सफलता सुनिश्चित हो सके।
  • छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए एक स्थायी वित्तपोषण मॉडल विकसित करना ताकि उनकी निरंतरता और पहुँच सुनिश्चित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अनुसूचित जाति छात्रवृत्ति योजनाएँ · सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · केंद्र प्रायोजित योजनाएँ · केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएँ · शैक्षिक सशक्तिकरण · समावेशी विकास · कल्याणकारी राज्य · लक्ष्य समूह · वित्तीय सहायता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 15(4)’, ‘note’: ‘सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 17’, ‘note’: ‘अस्पृश्यता का उन्मूलन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘अनुसूचित जातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 338’, ‘note’: ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा छात्रवृत्ति योजनाओं की घोषणा  →  पात्र अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों द्वारा आवेदन  →  आवेदन पत्रों का सत्यापन और अनुमोदन  →  प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से राशि का वितरण  →  विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने में सहायता  →  सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
2. राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में DBT के माध्यम से जारी की जाती है।
3. केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत पिछले तीन वित्तीय वर्षों में वितरित कुल राशि 19,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है। अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है। कथन 2 गलत है। राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत धनराशि भारतीय मिशनों को प्राधिकरण पत्र (LOA) के माध्यम से अग्रिम रूप से जारी की जाती है। उच्च स्तरीय शिक्षा योजना के अंतर्गत DBT का उपयोग होता है। कथन 3 सही है। केंद्र सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान कुल 19,216.46 करोड़ रुपये वितरित किए हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी योजनाएँ ‘सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय’ द्वारा संचालित अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में शामिल हैं?
1. अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति
2. अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना
3. उच्च स्तरीय शिक्षा योजना (TCS)
4. अनुसूचित जाति और अन्य पात्र अभ्यर्थियों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (NOS) योजना
सही विकल्प का चयन कीजिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — प्रश्न में उल्लिखित सभी चारों योजनाएँ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के शैक्षिक सशक्तिकरण में छात्रवृत्ति योजनाओं की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की महत्ता पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अनुसूचित जाति के शैक्षिक सशक्तिकरण के महत्व और छात्रवृत्ति योजनाओं की भूमिका का संक्षिप्त उल्लेख।
2. छात्रवृत्ति योजनाओं की भूमिका:
क. शैक्षिक पहुँच और समानता: शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना, ड्रॉपआउट दर कम करना।
ख. वित्तीय बाधाओं को दूर करना: शिक्षा के खर्चों (ट्यूशन फीस, किताबें, छात्रावास) में सहायता।
ग. उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन: मैट्रिकोत्तर और उच्च स्तरीय शिक्षा योजनाओं का उल्लेख।
घ. सामाजिक गतिशीलता: शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक उत्थान।
ङ. प्रमुख योजनाएँ: मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, उच्च स्तरीय शिक्षा योजना, राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति का उल्लेख।
3. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की महत्ता:
क. पारदर्शिता और जवाबदेही: बिचौलियों को खत्म करना, भ्रष्टाचार कम करना।
ख. लीकेज में कमी: वास्तविक लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुँचाना।
ग. समय पर भुगतान: छात्रवृत्ति वितरण में विलंब को कम करना।
घ. प्रशासनिक दक्षता: प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, निगरानी में सुधार।
ङ. आधार-सक्षम भुगतान: लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना।
4. चुनौतियाँ और आगे की राह: जागरूकता की कमी, तकनीकी बाधाएँ, राज्यों के हिस्से का समय पर वितरण जैसी चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख और समाधान हेतु सुझाव।
5. निष्कर्ष: समावेशी विकास और सामाजिक न्याय के लक्ष्य को प्राप्त करने में छात्रवृत्ति और DBT के संयुक्त प्रभाव पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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