तेलंगाना सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के फंड के दुरुपयोग का आरोप निराधार: पंचायत राज विभाग

तेलंगाना सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के फंड के दुरुपयोग का आरोप निराधार: पंचायत राज विभाग

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघवाद, स्थानीय स्वशासन, वित्त आयोग की भूमिका  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: सरकारी बजट, राजकोषीय संघवाद, स्थानीय निकायों का वित्तपोषण
  • Prelims: 15वां वित्त आयोग, स्थानीय स्वशासन, ग्राम पंचायत, अनुच्छेद 280, ग्यारहवीं अनुसूची, राजकोषीय संघवाद, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, तेलंगाना पंचायत राज अधिनियम, 2018, बंधे और अबंधे अनुदान, पंचायती राज
  • Essay: भारत में राजकोषीय संघवाद और स्थानीय स्वशासन का सशक्तिकरण, पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्वायत्तता: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: 15वें वित्त आयोग के अनुदान सीधे स्थानीय निकायों को जारी किए जाते हैं और इन्हें बंधे (विशिष्ट उद्देश्यों के लिए) तथा अबंधे (स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार) घटकों में विभाजित किया जाता है, जिनका उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों के लिए किया जा सकता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

तेलंगाना पंचायत राज और ग्रामीण विकास विभाग ने उन आरोपों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि राज्य सरकार ने विकास कार्यों के लिए 15वें वित्त आयोग (Finance Commission) के अनुदानों को बिजली बिलों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए ‘मोड़’ दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव ग्राम पंचायतों की एक वैधानिक जिम्मेदारी है और पेयजल आपूर्ति प्रणालियों का रखरखाव 15वें वित्त आयोग के बंधे (Tied) हुए अनुदानों के उद्देश्यों में से एक है। इसके अतिरिक्त, अबंधे (Untied) अनुदानों का उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची (Eleventh Schedule) में सूचीबद्ध 29 विषयों में से किसी के लिए भी किया जा सकता है, जिसमें सामुदायिक संपत्तियों का रखरखाव और पेयजल वितरण शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में, वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 (Article 280) के तहत किया जाता है। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण के लिए सिफारिशें करना है।
  • 15वें वित्त आयोग का गठन नवंबर 2017 में एन.के. सिंह की अध्यक्षता में किया गया था। इसकी सिफारिशें 2020-21 से 2025-26 तक की अवधि के लिए लागू हैं।
  • वित्त आयोग स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगर पालिकाओं) को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए भी सिफारिशें करता है, ताकि वे अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा कर सकें।
  • पंचायती राज संस्थाओं (Panchayati Raj Institutions – PRIs) को दिए जाने वाले अनुदान दो घटकों में विभाजित होते हैं: बंधे हुए अनुदान (जो विशिष्ट उद्देश्यों के लिए होते हैं, जैसे स्वच्छता और पेयजल) और अबंधे हुए अनुदान (जो स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उपयोग किए जा सकते हैं)।
  • ग्यारहवीं अनुसूची भारतीय संविधान में 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ी गई थी। इसमें 29 विषय सूचीबद्ध हैं जिन पर पंचायतों को शक्तियाँ और जिम्मेदारियाँ दी जा सकती हैं, जैसे कृषि, ग्रामीण आवास, पेयजल, सड़कें, स्ट्रीट लाइटिंग आदि।
  • तेलंगाना पंचायत राज अधिनियम, 2018 की धारा 52 के तहत, स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव ग्राम पंचायतों की वैधानिक जिम्मेदारी है, और उनके बिजली शुल्कों का भुगतान प्राथमिक दायित्वों में से एक है।
  • राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) भारत की संघीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राजस्व और व्यय की जिम्मेदारियों के वितरण से संबंधित है। इसमें स्थानीय निकायों का वित्तपोषण भी शामिल है।

15वां वित्त आयोग और स्थानीय निकायों को अनुदान

  • 15वां वित्त आयोग (15th Finance Commission) एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों को विनियमित करने के लिए स्थापित किया गया है।
  • आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय निकायों (ग्राम पंचायतों, मंडल प्रजा परिषदों और जिला प्रजा परिषदों) को कुल 4.36 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है, जो 2021-26 की अवधि के लिए है।
  • ये अनुदान सीधे ग्राम पंचायतों को जारी किए जाते हैं, जिससे वित्तीय स्वायत्तता बढ़ती है और राज्य सरकारों द्वारा धन के विचलन की संभावना कम होती है।
  • अनुदानों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है: बंधे हुए अनुदान और अबंधे हुए अनुदान।
  • बंधे हुए अनुदान (Tied Grants) विशिष्ट सेवाओं जैसे स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति और वर्षा जल संचयन के लिए आवंटित किए जाते हैं। इनका उपयोग केवल इन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
  • अबंधे हुए अनुदान (Untied Grants) स्थानीय निकायों को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार उपयोग करने की स्वतंत्रता देते हैं। इन निधियों का उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में से किसी के लिए भी किया जा सकता है।
  • ग्यारहवीं अनुसूची में ग्रामीण विकास से संबंधित महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं, जैसे सड़क रखरखाव, सामुदायिक संपत्ति का रखरखाव, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और ग्रामीण विद्युतीकरण।
  • वित्त आयोग के अनुदान पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने और जमीनी स्तर पर विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
15वें वित्त आयोग के अनुदान स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (ग्राम पंचायत, मंडल प्रजा परिषद, जिला प्रजा परिषद) को सीधे जारी किए जाते हैं, जिससे वित्तीय स्वायत्तता बढ़ती है।
निधि का उपयोग बंधे हुए (Tied) घटक का उपयोग पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के रखरखाव जैसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए होता है, जबकि बिना बंधे हुए (Untied) घटक का उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में से किसी के लिए भी किया जा सकता है।
तेलंगाना पंचायती राज अधिनियम, 2018 की धारा 52 ग्राम पंचायतों के लिए स्ट्रीट लाइट का रखरखाव एक वैधानिक जिम्मेदारी बनाती है, और बिजली बिलों का भुगतान उनकी प्राथमिकता वाले दायित्वों में से एक है।
स्थानीय निकायों की भूमिका सामुदायिक संपत्तियों के रखरखाव, बिजली वितरण और पेयजल जैसी बुनियादी सेवाओं को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण।

महत्व

शासन और विकेंद्रीकरण

  • यह घटना केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय संबंधों तथा स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (Local Self-Government Institutions) की स्वायत्तता पर प्रकाश डालती है।
  • वित्त आयोग के अनुदानों का सीधा हस्तांतरण जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करता है और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार धन के उपयोग की अनुमति देता है।

वित्तीय जवाबदेही

  • निधियों के कथित दुरुपयोग के आरोप वित्तीय जवाबदेही (Financial Accountability) और पारदर्शिता (Transparency) के महत्व को रेखांकित करते हैं।
  • स्थानीय निकायों द्वारा धन के उचित उपयोग से सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है और नागरिकों का विश्वास बढ़ता है।

संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध

  • यह मुद्दा भारतीय संघवाद (Indian Federalism) की जटिलताओं को दर्शाता है, जहाँ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय हस्तांतरण और उनके उपयोग को लेकर अक्सर विवाद उत्पन्न होते हैं।
  • वित्त आयोग की सिफारिशें केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

चुनौतियाँ

1. निधियों का दुरुपयोग और जवाबदेही

  • स्थानीय निकायों को प्राप्त निधियों के कथित दुरुपयोग से सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
  • जवाबदेही तंत्र की कमी या कमजोर प्रवर्तन से भ्रष्टाचार और अक्षमता बढ़ सकती है।

2. केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध

  • केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय हस्तांतरणों के उपयोग को लेकर विवाद संघवाद की भावना को कमजोर कर सकते हैं।
  • राज्यों द्वारा केंद्रीय निधियों के कथित ‘डायवर्जन’ से केंद्र और राज्यों के बीच अविश्वास पैदा हो सकता है।

3. स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति

  • कई ग्राम पंचायतें और अन्य स्थानीय निकाय अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केंद्रीय और राज्य अनुदानों पर अत्यधिक निर्भर रहते हैं।
  • स्वयं के राजस्व स्रोतों की कमी या अक्षमता उनकी स्वायत्तता और विकास क्षमता को बाधित करती है।

4. सेवा वितरण में बाधाएँ

  • यदि धन का उपयोग उसके इच्छित उद्देश्य के लिए नहीं किया जाता है, तो पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइटिंग और सामुदायिक संपत्ति के रखरखाव जैसी आवश्यक सेवाओं का वितरण प्रभावित होता है।
  • यह नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
निधियों का कथित डायवर्जन स्थानीय विकास कार्यों और आवश्यक सेवाओं (जैसे स्ट्रीट लाइट, पेयजल) के लिए आवंटित धन का अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग।
वित्तीय जवाबदेही की कमी स्थानीय निकायों द्वारा प्राप्त अनुदानों के उपयोग में पारदर्शिता और उचित लेखा-जोखा का अभाव।
केंद्र-राज्य विवाद केंद्रीय अनुदानों के उपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप, जो सहकारी संघवाद को प्रभावित करता है।
स्थानीय निकायों की वित्तीय निर्भरता ग्राम पंचायतों की अपनी आय के स्रोतों की कमी और केंद्रीय/राज्य अनुदानों पर अत्यधिक निर्भरता।

आगे की राह

  • स्थानीय निकायों के लिए एक मजबूत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना, जिसमें स्पष्ट व्यय दिशानिर्देश और लेखा-जोखा प्रक्रियाएं शामिल हों।
  • केंद्रीय अनुदानों के उपयोग की निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करना, जिसमें स्वतंत्र ऑडिट और समय-समय पर रिपोर्टिंग शामिल हो।
  • ग्राम पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों के लिए अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों (जैसे संपत्ति कर, उपयोगकर्ता शुल्क) को मजबूत करने के उपाय करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संवाद और समन्वय को बढ़ाना ताकि वित्तीय हस्तांतरणों के उपयोग से संबंधित विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल किया जा सके।
  • स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए वित्तीय प्रबंधन, परियोजना नियोजन और कार्यान्वयन पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • नागरिकों को स्थानीय निकायों के वित्तीय निर्णयों और व्यय के बारे में जानकारी तक पहुंच प्रदान करके सामाजिक ऑडिट (Social Audit) को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

15वें वित्त आयोग · स्थानीय स्वशासन · ग्राम पंचायत · पंचायती राज संस्थाएँ · अनुच्छेद 280 · ग्यारहवीं अनुसूची · निधियों का विचलन · राज्यों और स्थानीय निकायों को अनुदान · संघवाद · वित्तीय विकेंद्रीकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन और कार्य’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘ग्यारहवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में 29 विषय’}

अवधारणा प्रवाह

15वें वित्त आयोग द्वारा स्थानीय निकायों को अनुदान की सिफारिश।  →  केंद्र सरकार द्वारा सीधे ग्राम पंचायतों को अनुदान जारी करना।  →  ग्राम पंचायतों द्वारा इन निधियों का उपयोग (बंधे हुए/बिना बंधे हुए)।  →  स्ट्रीट लाइट के रखरखाव और बिजली बिलों का भुगतान (तेलंगाना अधिनियम के तहत)।  →  निधियों के कथित दुरुपयोग पर विवाद और स्पष्टीकरण।  →  वित्तीय जवाबदेही और संघवाद पर बहस।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. 15वें वित्त आयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक की अवधि के लिए लागू हैं।
2. यह केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को हस्तांतरित किए जाने वाले करों के हिस्से और स्थानीय निकायों को दिए जाने वाले अनुदानों पर सिफारिशें करता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग का गठन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है: 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें 2020-21 से 2025-26 तक की अवधि के लिए हैं।
कथन 2 सही है: वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच करों के बँटवारे और स्थानीय निकायों को अनुदान पर सिफारिशें करता है।
कथन 3 सही है: संविधान का अनुच्छेद 280 राष्ट्रपति को प्रत्येक पाँच वर्ष में वित्त आयोग का गठन करने का अधिकार देता है।

Q2. भारतीय संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा विषय ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में आता है?
1. पेयजल
2. सड़कों, पुलियों, घाटों, जलमार्गों और अन्य संचार साधनों का रखरखाव
3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली
4. लघु वन उपज
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1, 2 और 3
  3. केवल 1, 2 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय सूचीबद्ध हैं जिन पर पंचायतों को शक्तियाँ और उत्तरदायित्व दिए गए हैं। पेयजल, सड़कों का रखरखाव और लघु वन उपज इन विषयों में शामिल हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी ग्यारहवीं अनुसूची का विषय है, इसलिए सभी विकल्प सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आलोक में, स्थानीय स्वशासन के वित्तीय सशक्तिकरण में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अनुदानों की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। क्या आपको लगता है कि राज्यों द्वारा इन निधियों का विचलन पंचायती राज संस्थाओं के प्रभावी कामकाज में बाधा डालता है? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, 15वें वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशों का उल्लेख करते हुए स्थानीय स्वशासन (विशेषकर पंचायती राज संस्थाओं) के वित्तीय सशक्तिकरण में केंद्रीय अनुदानों की भूमिका को समझाना चाहिए। इसमें अनुदानों के प्रकार (बद्ध और अबद्ध) और उनके उद्देश्यों पर प्रकाश डालना चाहिए। दूसरे भाग में, राज्यों द्वारा इन निधियों के कथित विचलन के प्रभावों का विश्लेषण करना चाहिए, यह बताते हुए कि यह पंचायती राज संस्थाओं की स्वायत्तता, विकास कार्यों और संवैधानिक जनादेश को कैसे बाधित करता है। अंत में, प्रभावी वित्तीय विकेंद्रीकरण और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संभावित समाधानों पर संक्षिप्त टिप्पणी की जा सकती है।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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