थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना: आयात निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम

थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना — diagram

थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना: आयात निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम

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मानचित्र व माइंड-मैप: थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना: राज्यवार स्थिति

✎ थोक औषधियों के लिए PLI योजना का लक्ष्य भारत को महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल अवयवों के घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, स्वास्थ्य  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, विनिर्माण क्षेत्र, निवेश मॉडल
  • Prelims: थोक औषधियाँ (Bulk Drugs), उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI), सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयव (API), औषधि विभाग
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत और भारतीय अर्थव्यवस्था का कायाकल्प, भारत में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में सरकारी नीतियों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: थोक औषधियों के लिए PLI योजना का लक्ष्य भारत को महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल अवयवों के घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत में महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्रियों (KSM)/औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थोक औषधियों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस योजना के लिए 6,940 करोड़ रुपये का स्वीकृत परिव्यय है, जिसमें से मार्च 2026 तक 87.70 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन वितरित किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप, 28 API/KSM/DI के लिए उत्पादन क्षमता सृजित हुई है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के लिए चीन जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भर है।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान ने इस निर्भरता की कमजोरियों को उजागर किया, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता महसूस हुई।
  • सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की शुरुआत की।
  • थोक औषधियों के लिए PLI योजना का उद्देश्य भारत को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में इसकी स्थिति को मजबूत करना है।
  • इस योजना से देश में फार्मास्युटिकल विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और रोजगार सृजन में मदद मिलने की उम्मीद है।

थोक औषधियों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?

  • यह योजना भारत में महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य इन महत्वपूर्ण अवयवों के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और देश को फार्मास्युटिकल विनिर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
  • योजना के तहत, पात्र निर्माताओं को भारत में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन (incentives) प्रदान किया जाता है।
  • यह योजना किण्वन-आधारित (fermentation-based) और रासायनिक संश्लेषण-आधारित (chemical synthesis-based) दोनों प्रकार के KSM/DI/API के उत्पादन को लक्षित करती है।
  • इसके तहत, 41 विशिष्ट उत्पादों को मंजूरी दी गई है, जिनमें पेनिसिलिन जी, क्लैवुलैनिक एसिड, डेक्सामेथासोन, एटोरवास्टेटिन, लेवोफ्लोक्सासिन जैसे महत्वपूर्ण API शामिल हैं।
  • योजना के तहत, अब तक 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे 5,070.45 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है और 28 API/KSM/DI के लिए उत्पादन क्षमता सृजित हुई है।
  • यह योजना फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को भी प्रोत्साहित करती है, जिससे नवाचार और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का विकास होता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
घरेलू उत्पादन को बढ़ावा महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्रियों (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के आयात पर निर्भरता कम करना।
48 परियोजनाओं को मंजूरी देश भर में दवा उत्पादन क्षमता में वृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
6,940 करोड़ रुपये का स्वीकृत परिव्यय योजना के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता, जो विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करती है।
5,070.45 करोड़ रुपये का निवेश प्रतिबद्ध निवेश से अधिक वास्तविक निवेश, जो योजना की सफलता और उद्योग के विश्वास को दर्शाता है।
18 API का उत्पादन शुरू पेनिसिलिन जी, डेक्सामेथासोन, एटोरवास्टेटिन जैसे महत्वपूर्ण API का घरेलू उत्पादन, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) को बढ़ावा, जिससे आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलने से रोजगार सृजन होगा और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
  • फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा, जिससे अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

सामरिक महत्व

  • आवश्यक दवाओं और उनके घटकों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, विशेषकर वैश्विक संकटों के दौरान।
  • भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने और वैश्विक दवा बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सामाजिक महत्व

  • दवाओं की उपलब्धता और पहुंच में सुधार, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मजबूत होगी।
  • गुणवत्तापूर्ण दवाओं की लागत कम होने की संभावना, जिससे आम जनता को लाभ होगा।

चुनौतियाँ

1. अनुसंधान एवं विकास का अभाव

  • भारत में फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर खर्च अपेक्षाकृत कम है, जिससे नए और उन्नत उत्पादों का विकास धीमा है।
  • उन्नत प्रौद्योगिकियों और पेटेंट-संरक्षित उत्पादों के लिए अभी भी विदेशी निर्भरता बनी हुई है।

2. पर्यावरणीय चिंताएँ

  • बल्क ड्रग उत्पादन से जुड़े रासायनिक अपशिष्ट और प्रदूषण का उचित प्रबंधन एक चुनौती है।
  • पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना और सतत विनिर्माण प्रक्रियाओं को अपनाना आवश्यक है।

3. कौशल विकास और मानव संसाधन

  • उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए कुशल कार्यबल की कमी।
  • फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों के साथ तालमेल बिठाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन की आवश्यकता।

4. वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीन जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो लागत-प्रभावी उत्पादन करते हैं।
  • गुणवत्ता मानकों और नियामक आवश्यकताओं का पालन करते हुए लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उच्च प्रारंभिक निवेश नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए बड़े पूंजीगत व्यय की आवश्यकता।
नियामक बाधाएँ दवा अनुमोदन प्रक्रियाओं में जटिलता और समय लगना, जिससे बाजार में उत्पादों की पहुँच में देरी होती है।
गुणवत्ता नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखना और नकली दवाओं की समस्या से निपटना।
बुनियादी ढाँचा पर्याप्त बिजली, पानी और परिवहन सुविधाओं की कमी कुछ क्षेत्रों में उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (बल्क ड्रग्स के लिए)

आगे की राह

  • अनुसंधान एवं विकास में निवेश को बढ़ावा देना और फार्मास्युटिकल नवाचार के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना।
  • पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन और हरित विनिर्माण प्रथाओं को अनिवार्य करना।
  • फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु कौशल विकास कार्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षण को मजबूत करना।
  • नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना ताकि निवेश और उत्पादन को गति मिल सके।
  • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए लागत-प्रभावी उत्पादन तकनीकों को अपनाना।
  • फार्मास्युटिकल क्लस्टर विकसित करना जो साझा बुनियादी ढाँचे और सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

आयात पर निर्भरता  →  PLI योजना का शुभारंभ  →  घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन  →  उत्पादन क्षमता में वृद्धि  →  आत्मनिर्भरता और आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. थोक दवाओं के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (KSM), औषधि मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (API) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
2. योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए कुल स्वीकृत परिव्यय 6,940 करोड़ रुपये है।
3. पेनिसिलिन जी, डेक्सामेथासोन और एटोरवास्टेटिन उन API में से हैं जिनका उत्पादन इस योजना के तहत शुरू हो चुका है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का उद्देश्य भारत में KSM/DI/API के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। कथन 2 भी सही है, योजना के लिए स्वीकृत परिव्यय 6,940 करोड़ रुपये है। कथन 3 भी सही है, पेनिसिलिन जी, डेक्सामेथासोन और एटोरवास्टेटिन उन 18 API में से हैं जिनका उत्पादन शुरू हो चुका है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा/से उत्पाद थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत अनुमोदित ‘किण्वन आधारित प्रमुख KSM/औषधि मध्यवर्ती’ की श्रेणी में आता/आते है/हैं?
1. पेनिसिलिन जी
2. क्लैवुलैनिक एसिड
3. पैरा एमिनो फिनोल
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — पेनिसिलिन जी और क्लैवुलैनिक एसिड दोनों किण्वन आधारित प्रमुख KSM/औषधि मध्यवर्ती की श्रेणी में आते हैं। पैरा एमिनो फिनोल प्रमुख रासायनिक संश्लेषण आधारित KSM/औषधि मध्यवर्ती की श्रेणी में आता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के महत्व का परीक्षण करें। यह योजना देश की आयात निर्भरता को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने में कितनी सफल रही है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: फार्मास्युटिकल क्षेत्र में PLI योजना का संक्षिप्त परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य (KSM/DI/API के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना)।
महत्व:
1. आयात निर्भरता में कमी: चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करना।
2. आत्मनिर्भरता और औषधि सुरक्षा: महत्वपूर्ण दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना।
3. आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन: निवेश आकर्षित करना और विनिर्माण क्षमता बढ़ाना।
4. वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: भारतीय फार्मा उद्योग की वैश्विक स्थिति को मजबूत करना।
सफलता का मूल्यांकन:
1. स्वीकृत परियोजनाएं और निवेश: 48 परियोजनाओं की मंजूरी, 6,940 करोड़ रुपये का परिव्यय, 5,070.45 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश।
2. उत्पादन क्षमता का सृजन: 28 API/KSM/DI के लिए क्षमता निर्माण।
3. वाणिज्यिक उत्पादन: 18 API का उत्पादन शुरू (जैसे पेनिसिलिन जी, डेक्सामेथासोन, एटोरवास्टेटिन)।
4. प्रोत्साहन वितरण: मार्च 2026 तक 87.70 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन वितरण।
चुनौतियाँ और आगे की राह: कुछ परियोजनाओं का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू न होना, निरंतर निवेश और अनुसंधान एवं विकास पर जोर।
निष्कर्ष: योजना की समग्र सफलता का आकलन और भविष्य की संभावनाएँ।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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