20 Sep द्रौपदी मुर्मु गुजरात दौरे पर: 21-23 सितंबर 2026 को प्रमुख आयोजन

✎ भारत का राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है, जो राष्ट्र की एकता का प्रतीक है और विभिन्न संवैधानिक, औपचारिक तथा प्रेरक भूमिकाओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: संवैधानिक पद, शक्तियाँ और उत्तरदायित्व | GS Paper II — शासन: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper I — भारतीय संस्कृति: कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला
- Prelims: भारत के राष्ट्रपति, संवैधानिक पद, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, दीक्षांत समारोह, एकता नगर, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय
- Essay: भारत के राष्ट्रपति का पद: संवैधानिक गरिमा और राष्ट्र निर्माण में भूमिका, युवा शक्ति और आध्यात्मिक जागरण: विकसित भारत की नींव
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है, जो राष्ट्र की एकता का प्रतीक है और विभिन्न संवैधानिक, औपचारिक तथा प्रेरक भूमिकाओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 21 से 23 सितंबर, 2026 तक गुजरात के दौरे पर रहेंगी। इस यात्रा के दौरान, वे 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करेंगी, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी, और ब्रह्माकुमारीज़ के ‘विश्व नव निर्माण हेतु आध्यात्मिक जागरण’ अभियान तथा ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ अभियान का शुभारंभ करेंगी। यह यात्रा राष्ट्रपति के संवैधानिक कर्तव्यों और राष्ट्र निर्माण में उनकी प्रतीकात्मक तथा प्रेरक भूमिका को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
- भारत का राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है और भारतीय सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर भी होता है।
- राष्ट्रपति का पद भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है।
- राष्ट्रपति विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों, पुरस्कार समारोहों और शैक्षणिक दीक्षांत समारोहों में भाग लेकर राष्ट्र के सांस्कृतिक, सामाजिक और शैक्षिक ताने-बाने को सुदृढ़ करते हैं।
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा में उत्कृष्टता को मान्यता देने वाले सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक हैं, जो कला और संस्कृति को बढ़ावा देने में राष्ट्रपति की भूमिका को दर्शाते हैं।
- विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति की उपस्थिति छात्रों को प्रेरित करती है और शिक्षा के महत्व को उजागर करती है।
- आध्यात्मिक और युवा-केंद्रित अभियानों का शुभारंभ राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों और युवा भागीदारी के महत्व पर जोर देता है।
भारत के राष्ट्रपति का पद और उनकी भूमिकाएँ
- भारत का राष्ट्रपति भारतीय गणराज्य का राष्ट्राध्यक्ष होता है। यह पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 के तहत स्थापित है।
- राष्ट्रपति भारत के प्रथम नागरिक होते हैं और संघ की कार्यकारी शक्ति उन्हीं में निहित होती है, जिसका प्रयोग वे सीधे या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करते हैं (अनुच्छेद 53)।
- राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली और पुडुचेरी) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
- राष्ट्रपति की भूमिकाएँ केवल औपचारिक नहीं होतीं, बल्कि वे राष्ट्र के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, संविधान का संरक्षण, प्रतिरक्षण और बचाव करते हैं (अनुच्छेद 60)।
- राष्ट्रपति विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे देश की छवि और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
- वे विभिन्न संवैधानिक निकायों और आयोगों के अध्यक्षों तथा सदस्यों की नियुक्ति करते हैं, जैसे सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, राज्यपाल, मुख्य चुनाव आयुक्त आदि।
- राष्ट्रपति संसद द्वारा पारित विधेयकों को कानून बनाने के लिए अपनी सहमति देते हैं, और कुछ विशेष परिस्थितियों में अध्यादेश (Ordinances) भी जारी कर सकते हैं (अनुच्छेद 123)।
- राष्ट्रपति की यात्राएँ और सार्वजनिक कार्यक्रम राष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में नागरिकों के साथ जुड़ने और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रपति का गुजरात दौरा | यह राष्ट्रपति के संवैधानिक दायित्वों और राष्ट्रव्यापी उपस्थिति को दर्शाता है, जो संघीय ढांचे में राज्यों के साथ जुड़ाव को मजबूत करता है। |
| राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार | भारतीय सिनेमा के योगदान को मान्यता देता है, कला और संस्कृति को बढ़ावा देता है तथा फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करता है। यह सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सरकार की भूमिका को भी रेखांकित करता है। |
| विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह | उच्च शिक्षा के महत्व को दर्शाता है, छात्रों की उपलब्धियों का सम्मान करता है और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति को प्रोत्साहन देता है। यह युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। |
| ब्रह्माकुमारीज़ के अभियान | आध्यात्मिक जागरण और युवा सशक्तिकरण पर केंद्रित ये पहलें सामाजिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा और समग्र विकास को बढ़ावा देती हैं, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन | यह आध्यात्मिक पर्यटन और शांतिपूर्ण वातावरण के विकास को बढ़ावा देता है, जो मानसिक कल्याण और सामाजिक सद्भाव के लिए सहायक है। |
महत्व
सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का वितरण भारतीय कला और संस्कृति, विशेषकर सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है। यह सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मकता को बढ़ावा देता है।
- विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति की उपस्थिति उच्च शिक्षा के महत्व को रेखांकित करती है और युवाओं को ज्ञान तथा कौशल के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।
- ब्रह्माकुमारीज़ जैसे आध्यात्मिक संगठनों के अभियानों का शुभारंभ सामाजिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देता है, जो एक संतुलित और सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
- ये कार्यक्रम युवाओं को ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण से जोड़ने और उनमें आंतरिक शक्ति तथा राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत करने का प्रयास करते हैं।
संवैधानिक और संस्थागत महत्व
- राष्ट्रपति का राज्य दौरा भारत के संघीय ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय तथा संवाद को मजबूत करता है। यह राष्ट्रपति के संवैधानिक दायित्वों का हिस्सा है, जिसमें वे राष्ट्र के विभिन्न हिस्सों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों में भागीदारी, जैसे पुरस्कार वितरण और संस्थानों का उद्घाटन, संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनकी प्रतीकात्मक और औपचारिक भूमिका को दर्शाती है।
- यह यात्रा विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और समर्थन प्रदान करती है, जिससे उनके उद्देश्यों की पूर्ति में सहायता मिलती है।
चुनौतियाँ
1. कला और संस्कृति का संरक्षण
- डिजिटल युग में पारंपरिक कला रूपों और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना एक चुनौती है।
- फिल्म उद्योग में क्षेत्रीय सिनेमा को पर्याप्त प्रोत्साहन और पहचान सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-1: भारतीय संस्कृति; सामान्य अध्ययन पेपर-4: नीतिशास्त्र
2. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच
- देश के सभी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की समान गुणवत्ता और पहुंच सुनिश्चित करना।
- स्नातकों को रोजगार योग्य कौशल प्रदान करना और उद्योग की मांगों के अनुरूप पाठ्यक्रम अद्यतन करना।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: शिक्षा; सामान्य अध्ययन पेपर-3: मानव संसाधन
3. युवा सशक्तिकरण और नैतिक विकास
- युवाओं में नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रभावी ढंग से विकसित करना।
- आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ एकीकृत करना।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-1: समाज; सामान्य अध्ययन पेपर-4: नीतिशास्त्र
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सांस्कृतिक संरक्षण | आधुनिकता के साथ पारंपरिक कला रूपों का सामंजस्य और उनका व्यापक प्रचार। |
| शिक्षा में गुणवत्ता | विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करना। |
| युवाओं का नैतिक विकास | बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं में सकारात्मक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का संचार। |
| आध्यात्मिक जागरण | आध्यात्मिक शिक्षा को केवल धार्मिक अनुष्ठानों से परे ले जाकर व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण से जोड़ना। |
आगे की राह
- कला और संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के माध्यम से क्षेत्रीय सिनेमा और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को अधिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाए।
- शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाई जाएं।
- युवाओं को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ने के लिए कौशल विकास (Skill Development) और उद्यमिता (Entrepreneurship) कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए।
- नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा को स्कूली तथा उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में उपयुक्त रूप से एकीकृत किया जाए ताकि युवाओं में समग्र व्यक्तित्व का विकास हो।
- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और आध्यात्मिक संस्थाओं के साथ साझेदारी को बढ़ावा दिया जाए ताकि सामाजिक कल्याण और सामुदायिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
- राज्यों के साथ मिलकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए ताकि राष्ट्रीय एकता और विविधता का सम्मान सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रपति की भूमिका · संवैधानिक पद · राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार · दीक्षांत समारोह · आध्यात्मिक जागरण · विकसित भारत · युवा शक्ति · सांस्कृतिक कार्यक्रम · सामाजिक पहल · संघीय व्यवस्था
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 52’, ‘note’: ‘भारत का एक राष्ट्रपति होगा।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 53’, ‘note’: ‘संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 60’, ‘note’: ‘राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 79’, ‘note’: ‘संसद का गठन (राष्ट्रपति इसका अभिन्न अंग)।’}
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रपति का राज्य दौरा → विभिन्न क्षेत्रों में भागीदारी (कला, शिक्षा, आध्यात्मिकता) → राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से कला प्रोत्साहन → विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह से शिक्षा को बढ़ावा → आध्यात्मिक अभियानों से नैतिक विकास → युवा सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में योगदान → समग्र सामाजिक-सांस्कृतिक विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के राष्ट्रपति का पद संवैधानिक प्रमुख का होता है और वे सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
2. राष्ट्रपति राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करते हैं, जो कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण राजकीय सम्मान है।
3. राष्ट्रपति विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में भाग लेकर शिक्षा के क्षेत्र को प्रोत्साहित करते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि भारत के राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि राष्ट्रपति राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि राष्ट्रपति विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में भाग लेते हैं।
Q2. अभिकथन (A): भारत के राष्ट्रपति राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
कारण (R): राष्ट्रपति की भागीदारी राष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में सरकार की उपस्थिति और प्रोत्साहन को दर्शाती है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। कारण (R) भी सही है और यह A की सही व्याख्या करता है, क्योंकि उनकी उपस्थिति से विभिन्न क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के राष्ट्रपति की भूमिका केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और हाल के उदाहरणों के प्रकाश में उनकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति:** अनुच्छेद 53, 74, 75 आदि का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति की औपचारिक शक्तियों और वास्तविक शक्तियों के बीच अंतर स्पष्ट करें।
2. **औपचारिक भूमिका से परे:** बताएं कि कैसे राष्ट्रपति विभिन्न कार्यक्रमों (जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण, दीक्षांत समारोह, सामाजिक अभियानों का शुभारंभ) में भाग लेकर राष्ट्र के नैतिक और सांस्कृतिक नेतृत्व को मजबूत करते हैं।
3. **राष्ट्र निर्माण में योगदान:** शिक्षा, कला, संस्कृति और सामाजिक उत्थान से संबंधित पहलों में उनकी भागीदारी का विश्लेषण करें। उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में भागीदारी से शिक्षा को प्रोत्साहन, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से कला को सम्मान, और ‘विकसित भारत के लिए युवा’ जैसे अभियानों से युवा शक्ति को प्रेरणा।
4. **हाल के उदाहरण:** गुजरात दौरे के संदर्भ में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह, और ब्रह्माकुमारीज़ के अभियानों का उल्लेख करें।
5. **समालोचनात्मक परीक्षण:** इस बात पर भी चर्चा करें कि क्या ये भूमिकाएँ केवल प्रतीकात्मक हैं या इनका वास्तविक प्रभाव होता है। राष्ट्रपति का पद राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक कैसे बनता है।
6. **निष्कर्ष:** राष्ट्रपति की भूमिका को संवैधानिक मर्यादाओं में रहते हुए राष्ट्र के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करने वाले एक महत्वपूर्ण पद के रूप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 21 से 23 सितंबर 2024 तक गुजरात के किस शहर में अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान ‘राष्ट्रपति भवन’ के बाहर ‘गुजरात मॉडल’ पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगी?
- A. गांधीनगर
- B. अहमदाबाद
- C. वडोदरा
- D. राजकोट
उत्तर: A. गांधीनगर — राष्ट्रपति मुर्मू गांधीनगर में ‘गुजरात मॉडल’ पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगी, जो राज्य के विकास मॉडल को प्रदर्शित करेगी।
Mains: गुजरात राज्य में ‘गुजरात मॉडल’ के विकास में राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे के दौरान प्रस्तावित गतिविधियों एवं उनके राज्य के विकास में योगदान का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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