धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा कार्यकाल: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा कार्यकाल: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शिक्षा, मानव संसाधन  |  GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
  • Prelims: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, निपुण भारत मिशन, PM SHRI योजना, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, PARAKH
  • Essay: भारत में शिक्षा सुधार: चुनौतियाँ और आगे की राह, विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्रालय कार्यकाल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन, निपुण भारत मिशन और PM SHRI जैसी प्रमुख पहलों के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने के प्रयासों के लिए जाना जाता है, हालांकि कार्यान्वयन में चुनौतियां भी रहीं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्रालय से बाहर होना हाल ही में चर्चा का विषय रहा है। उनके पांच साल के कार्यकाल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) के कार्यान्वयन के प्रयासों में तेजी लाने के लिए जाना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान कई ‘सुधार’ और पहलें शुरू की गईं, जिनमें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework), लचीली शिक्षा, बहु-विषयक दृष्टिकोण, PM SHRI योजना, त्रि-भाषा सूत्र और नए शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। इन पहलों का मूल्यांकन और उनके कार्यान्वयन की स्थिति वर्तमान में विश्लेषण का विषय है।

पृष्ठभूमि

  • धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री का पद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकार किए जाने के एक साल बाद संभाला था।
  • उनके कार्यकाल का मुख्य जोर NEP 2020 के विभिन्न पहलुओं को जमीनी स्तर पर लागू करना था।
  • शिक्षा मंत्रालय ने प्रदर्शन मूल्यांकन, जवाबदेही, कौशल-शिक्षा अभिसरण और ‘भारतीयता’ की एक निश्चित दृष्टि को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया।
  • कई पहलें, जैसे निपुण भारत मिशन (Nipun Bharat Mission) और राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक शिक्षकों के लिए (National Professional Standards for Teachers), महामारी के दौरान सीखने के नुकसान को दूर करने और शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार के लिए शुरू की गईं।
  • हालांकि, इन पहलों के कार्यान्वयन में चुनौतियां और विविधता के प्रति केंद्रीयकरण के आरोप भी सामने आए।
  • अधिकांश सुधार अभी भी प्रगति पर हैं, जिन्हें नए शिक्षा मंत्री द्वारा आगे बढ़ाया जाना है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और संबंधित पहलें

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: यह 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है, जिसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को बदलना है ताकि इसे 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) के अनुरूप बनाया जा सके।
  • निपुण भारत मिशन: जुलाई 2021 में शुरू किया गया, इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में प्रत्येक बच्चा 2026-27 तक ग्रेड 3 के अंत तक मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (Foundational Literacy and Numeracy) प्राप्त कर ले।
  • PM SHRI योजना: यह योजना केंद्र प्रायोजित है और इसका उद्देश्य देश भर में 14,500 से अधिक स्कूलों को ‘PM SHRI स्कूल’ के रूप में अपग्रेड और विकसित करना है, जो NEP 2020 के सभी घटकों को प्रदर्शित करेंगे।
  • राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF): यह NEP 2020 के अनुरूप स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण प्रथाओं के विकास के लिए एक दिशानिर्देश प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक शिक्षकों के लिए (NPST): यह शिक्षकों का मूल्यांकन और वर्गीकरण करने के लिए भारत की पहली पहल है, जिसमें करियर की प्रगति को इन मानकों से जोड़ा गया है।
  • PARAKH (Performance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic Development): यह एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र है जिसका उद्देश्य छात्रों के सीखने के परिणामों का समग्र मूल्यांकन करना है।
  • राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (National Mentoring Mission): इसका उद्देश्य अनुभवी शिक्षकों की पहचान करना है जो नए या कम अनुभवी शिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) का कार्यान्वयन शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया, जिसमें लचीला अधिगम (flexible learning), बहु-विषयकता (multidisciplinarity) और कौशल-शिक्षा अभिसरण (skilling-education convergence) शामिल हैं।
निपुण भारत मिशन बच्चों में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (foundational literacy and numeracy) सुनिश्चित करने पर केंद्रित, जिसका उद्देश्य 2026-27 तक ग्रेड 3 के अंत तक प्रत्येक बच्चे को यह क्षमता प्रदान करना है।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework) शिक्षा के विभिन्न स्तरों के लिए पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धतियों को नया स्वरूप देने का प्रयास, जो NEP 2020 के सिद्धांतों के अनुरूप है।
PM SHRI योजना स्कूलों को आदर्श विद्यालयों के रूप में विकसित करने की पहल, जो NEP 2020 को पूरी तरह से लागू करेंगे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेंगे।
राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक (National Professional Standards for Teachers) शिक्षकों का मूल्यांकन और वर्गीकरण करने के लिए भारत की पहली पहल, जो एक समान राष्ट्रीय मानकों के आधार पर करियर प्रगति को जोड़ती है।
राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (National Mentoring Mission) शिक्षकों को उनके व्यावसायिक विकास में मार्गदर्शन करने के लिए मेंटर शिक्षकों की पहचान और तैनाती, जिसका उद्देश्य शिक्षण गुणवत्ता में सुधार करना है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • शिक्षा में समानता और समावेशन को बढ़ावा देना, विशेषकर वंचित वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना।
  • बच्चों में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के स्तर में सुधार करके सीखने के परिणामों को बेहतर बनाना, जैसा कि ASER और PARAKH रिपोर्टों में देखा गया है।
  • शिक्षकों के व्यावसायिक विकास और मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत ढाँचा स्थापित करना, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।

आर्थिक महत्व

  • कौशल-शिक्षा अभिसरण के माध्यम से युवाओं को रोजगार योग्य बनाना, जिससे श्रम बाजार की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और आर्थिक संवृद्धि (economic growth) को बढ़ावा मिले।
  • मानव पूंजी (human capital) के विकास में निवेश, जो दीर्घकालिक आर्थिक उत्पादकता और नवाचार के लिए महत्वपूर्ण है।

शासनिक महत्व

  • शिक्षा क्षेत्र में प्रदर्शन मूल्यांकन और जवाबदेही (accountability) पर जोर देना, जिससे योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके।
  • शिक्षा प्रणाली में एकरूपता और मानकीकरण लाने का प्रयास, हालांकि आलोचक इसे केंद्रीकरण और विविधता की उपेक्षा मानते हैं।

चुनौतियाँ

1. कार्यान्वयन अंतराल

  • कई पहलें अभी भी ‘कार्य प्रगति पर’ हैं और उनके पूर्ण प्रभाव का आकलन होना बाकी है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों के सीखने के परिणामों में अभी भी महत्वपूर्ण अंतराल हैं, जैसे कि ग्रेड 2 का पाठ पढ़ने वाले छात्रों का कम प्रतिशत।

2. केंद्रीयकरण और विविधता की उपेक्षा

  • आलोचकों का तर्क है कि एकरूपता पर जोर से राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और क्षेत्रीय विविधताओं की अनदेखी हो सकती है।
  • UGC के मसौदा विनियमों पर विरोध, विशेषकर कुलपति (vice-chancellor) नियुक्तियों में राज्यपालों की भूमिका और संविदात्मक प्रोफेसरशिप पर कैप हटाने को लेकर।

3. जागरूकता और प्रोत्साहन की कमी

  • राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन के बारे में शिक्षकों के बीच जागरूकता कम है, और NPST के लागू न होने से मेंटरिंग सत्रों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन की कमी है।

4. संसाधन और क्षमता निर्माण

  • बड़ी संख्या में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और नई नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधनों और क्षमता निर्माण की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
निपुण भारत मिशन के परिणाम ASER 2024 के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर ग्रेड 2 का पाठ पढ़ने वाले छात्रों का प्रतिशत अभी भी एक चौथाई से कम है, जो कार्यान्वयन अंतराल को दर्शाता है।
राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक (NPST) का कार्यान्वयन NPST अभी तक लागू नहीं हुआ है, जिससे शिक्षकों को राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन में शामिल होने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।
UGC के मसौदा विनियम 2025 कुलपति नियुक्तियों में राज्यपालों को निर्णायक भूमिका देने और संविदात्मक प्रोफेसरशिप पर कैप हटाने को लेकर कड़ा विरोध।
राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन की जागरूकता देश के एक करोड़ शिक्षकों के बीच इस मिशन के बारे में जागरूकता का स्तर कम है, जिससे इसका प्रभाव सीमित हो सकता है।
शिक्षा में केंद्रीकरण आलोचकों का तर्क है कि एकरूपता पर जोर से विविधता की अनदेखी हो सकती है और राज्यों की स्वायत्तता कम हो सकती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020)
  • निपुण भारत मिशन (Nipun Bharat Mission)
  • PM SHRI (PM Schools for Rising India)

आगे की राह

  • कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन को मजबूत करना, विशेषकर जमीनी स्तर पर नीतियों के प्रभाव का नियमित आकलन करना।
  • शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ाना और उन्हें नई शिक्षण पद्धतियों और प्रौद्योगिकी से लैस करना।
  • राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक (NPST) को शीघ्रता से लागू करना और करियर प्रगति को इससे जोड़कर शिक्षकों को प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन के बारे में शिक्षकों के बीच जागरूकता बढ़ाना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी संचार रणनीतियाँ अपनाना।
  • संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए, राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और क्षेत्रीय विविधताओं को ध्यान में रखते हुए नीतियों को अनुकूलित करने की अनुमति देना।
  • UGC के मसौदा विनियमों पर हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श करना और आम सहमति बनाने का प्रयास करना।
  • सीखने के परिणामों में अंतराल को दूर करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप और उपचारात्मक शिक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 · निपुण भारत मिशन · राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा · शिक्षक प्रशिक्षण पहल · बहु-विषयक शिक्षा · प्रदर्शन मूल्यांकन · कौशल-शिक्षा अभिसरण · केन्द्रीकरण बनाम विविधता · राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक · पीएम श्री योजना

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 45’, ‘note’: ‘बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 30’, ‘note’: ‘अल्पसंख्यकों का शिक्षा संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘शिक्षा समवर्ती सूची का विषय’}

अवधारणा प्रवाह

NEP 2020 का कार्यान्वयन  →  निपुण भारत जैसे मिशनों की शुरुआत  →  शिक्षकों के लिए मानक और मेंटरिंग पहल  →  सीखने के परिणामों में सुधार का प्रयास  →  कार्यान्वयन अंतराल और चुनौतियाँ  →  सतत सुधार और नीतिगत समायोजन की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।
2. यह लचीले अधिगम (flexible learning) और बहु-विषयकता (multidisciplinarity) पर जोर देती है।
3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework) NEP 2020 के तहत एक प्रमुख पहल है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि NEP 2020 का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों और 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप ढालना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि नीति लचीले अधिगम और विभिन्न विषयों के एकीकरण को बढ़ावा देती है। कथन 3 भी सही है, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा NEP 2020 के कार्यान्वयन का एक महत्वपूर्ण घटक है।

Q2. निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat Mission) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात बढ़ाना।
  2. शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक स्थापित करना।
  3. प्रत्येक बच्चे के लिए ग्रेड 3 के अंत तक मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना।
  4. तकनीकी शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देना।

उत्तर: प्रत्येक बच्चे के लिए ग्रेड 3 के अंत तक मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता सुनिश्चित करना। — निपुण भारत मिशन का प्राथमिक उद्देश्य 2026-27 तक ग्रेड 3 के अंत तक प्रत्येक बच्चे के लिए मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (foundational literacy and numeracy) सुनिश्चित करना है। यह महामारी के दौरान हुए सीखने के नुकसान को दूर करने के लिए शुरू किया गया था।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के कार्यान्वयन में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल के दौरान की गई प्रमुख पहलों और उनसे जुड़ी चुनौतियों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। क्या ये पहलें भारत की शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित परिवर्तन लाने में सफल रही हैं?

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, NEP 2020 के तहत शुरू की गई प्रमुख पहलों जैसे राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, लचीले अधिगम, बहु-विषयकता, पीएम श्री, निपुण भारत मिशन, और नए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उल्लेख करें। दूसरे भाग में, इन पहलों के कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों, जैसे केन्द्रीकरण के आरोप, विविधता की उपेक्षा, और जमीनी स्तर पर जागरूकता की कमी पर चर्चा करें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें कि क्या ये पहलें भारत की शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित परिवर्तन लाने में सफल रही हैं या अभी भी प्रगति पर हैं।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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