नमामि गंगे: सीवरेज परियोजनाओं से गंगा प्रदूषण नियंत्रण में प्रगति

नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत परियोजनाएं — concept mind map

नमामि गंगे: सीवरेज परियोजनाओं से गंगा प्रदूषण नियंत्रण में प्रगति

✎ नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने और उसके समग्र संरक्षण एवं कायाकल्प के लिए एक व्यापक और एकीकृत केंद्रीय कार्यक्रम है, जिसमें सीवरेज उपचार, जैव-विविधता संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी जैसे बहुआयामी घटक शामिल हैं।

नमामि गंगे अभियान-IIसीवरेज परियोजनाएं70 परियोजनाएं2025 तकएसटीपी चालू25 संयंत्र2025 तकसीवेज क्षमता4,263 एमएलडीजून 2026 तकप्रदूषण नियंत्रणसीपीसीबी रिपोर्टमुख्यधारा सुधारजैव-विविधताघड़ियाल, कछुएसंरक्षण प्रयास
नमामि गंगे अभियान-II

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (नदी प्रणालियाँ, पर्यावरण भूगोल)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप)  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (संरक्षण, प्रदूषण, जैव-विविधता)
  • Prelims: नमामि गंगे अभियान, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), सीवरेज उपचार संयंत्र (STP), जैविक जल गुणवत्ता (BWQ), घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना, गंगा डॉल्फ़िन, रिवर रैंचिंग, आर्द्रभूमि संरक्षण
  • Essay: नदी संरक्षण और सतत विकास, पर्यावरण शासन और सामुदायिक भागीदारी, भारत में जल संसाधन प्रबंधन की चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने और उसके समग्र संरक्षण एवं कायाकल्प के लिए एक व्यापक और एकीकृत केंद्रीय कार्यक्रम है, जिसमें सीवरेज उपचार, जैव-विविधता संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी जैसे बहुआयामी घटक शामिल हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नमामि गंगे अभियान-II (NGM-II) के तहत वर्ष 2025 के दौरान 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं को क्रियान्वित किया गया, जिनमें 25 सीवरेज उपचार संयंत्र (STP) चालू किए गए। जून 2026 तक 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन किया गया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा की मुख्यधारा के प्रदूषित खंडों में सुधार देखा गया है और जैव-विविधता संरक्षण के प्रयासों में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसमें घड़ियाल, कछुओं और डॉल्फ़िन का संरक्षण तथा रिवर रैंचिंग शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदियों में से एक है, जो देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी का भरण-पोषण करती है।
  • दशकों से, शहरीकरण, औद्योगीकरण और कृषि अपवाह के कारण गंगा नदी गंभीर प्रदूषण का शिकार रही है।
  • गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए विभिन्न सरकारी कार्यक्रम चलाए गए हैं, जिनमें गंगा कार्य योजना (Ganga Action Plan – GAP) भी शामिल है, जिसे 1986 में शुरू किया गया था।
  • इन पूर्ववर्ती कार्यक्रमों की सीमित सफलता के बाद, भारत सरकार ने 2014 में ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत संरक्षण मिशन को मंजूरी दी।
  • यह कार्यक्रम गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करने और उसके संरक्षण और कायाकल्प के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए शुरू किया गया था।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।

नमामि गंगे अभियान क्या है?

  • नमामि गंगे अभियान एक एकीकृत संरक्षण मिशन है, जिसे जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्लैगशिप कार्यक्रम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करना और उसके संरक्षण एवं कायाकल्प को सुनिश्चित करना है।
  • यह कार्यक्रम गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए सीवरेज उपचार अवसंरचना के निर्माण और औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने पर केंद्रित है।
  • नदी की पारिस्थितिक अखंडता को बहाल करने के लिए नदी की सतह की सफाई, जैव-विविधता संरक्षण, वनीकरण और आर्द्रभूमि (Wetland) संरक्षण जैसे उपाय भी किए जाते हैं।
  • जैविक जल गुणवत्ता (Biological Water Quality – BWQ) की निगरानी के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और जैव-निगरानी की जाती है, जो जलीय जीवन के स्वास्थ्य का संकेतक है।
  • घड़ियाल, गंगा डॉल्फ़िन और कछुओं जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें बचाव और पुनर्वास केंद्र स्थापित करना शामिल है।
  • समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ‘गंगा प्रहरी’ जैसे स्वयंसेवकों को शामिल किया जाता है, जो स्थानीय स्तर पर संरक्षण गतिविधियों में सहायता करते हैं।
  • यह अभियान गंगा नदी के किनारे शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करता है ताकि दीर्घकालिक नदी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सीवरेज अवसंरचना परियोजनाएँ (STP) गंगा नदी में प्रदूषण कम करने और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए सीवेज उपचार क्षमता का निर्माण।
प्रदूषित नदी खंडों (PRS) में सुधार गंगा की मुख्यधारा के कई खंडों में प्रदूषण के स्तर में कमी, विशेषकर उत्तराखंड में।
जैविक जल गुणवत्ता (BWQ) निगरानी नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन, जलीय जीवन को बनाए रखने की क्षमता का संकेतक।
जैव-विविधता संरक्षण घड़ियाल, डॉल्फ़िन, कछुओं और मछलियों जैसी जलीय प्रजातियों का संरक्षण और उनके आवासों की बहाली।
नदी रैंचिंग (River Ranching) देशी मछलियों की आबादी को फिर से बढ़ाने और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण।
आर्द्रभूमि (Wetland) बहाली और प्रबंधन पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान, संरक्षण और प्रबंधन, जो नदी पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न अंग हैं।

महत्व

पर्यावरणिक महत्व

  • गंगा नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार, जिससे मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों को लाभ होता है।
  • जलीय जैव-विविधता का संरक्षण, जिसमें गंगा डॉल्फ़िन, घड़ियाल और विभिन्न मछली प्रजातियाँ शामिल हैं, जो नदी के पारिस्थितिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • आर्द्रभूमि का वैज्ञानिक प्रबंधन और बहाली, जो बाढ़ नियंत्रण, जल शोधन और जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

सामाजिक महत्व

  • स्वच्छ गंगा जल से लाखों लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका में सुधार, जो नदी पर निर्भर हैं।
  • गंगा प्रहरियों जैसे सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय समुदायों को नदी संरक्षण से जोड़ना।
  • सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाली गंगा नदी के पुनरुद्धार से लोगों की आस्था और जुड़ाव को सुदृढ़ करना।

आर्थिक महत्व

  • मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए ‘रिवर रैंचिंग’ जैसी पहलों से स्थानीय मछुआरों की आजीविका में वृद्धि।
  • स्वच्छ नदी और बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र पर्यटन और संबंधित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
  • सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश से रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।

चुनौतियाँ

1. निरंतर प्रदूषण का दबाव

  • शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट का निरंतर निर्वहन।
  • कृषि अपवाह और गैर-बिंदु स्रोतों से प्रदूषण को नियंत्रित करना एक चुनौती है।

2. जैव-विविधता संरक्षण की चुनौतियाँ

  • अवैध शिकार, आवासों का नुकसान और जलवायु परिवर्तन से जलीय प्रजातियों पर खतरा।
  • विदेशी प्रजातियों का आक्रमण और उनका देशी प्रजातियों पर प्रभाव।

3. अंतर-राज्यीय समन्वय

  • गंगा बेसिन कई राज्यों में फैला हुआ है, जिससे प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समन्वय आवश्यक है।
  • विभिन्न राज्यों की प्राथमिकताएँ और संसाधन आवंटन में भिन्नताएँ।

4. तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ

  • आधुनिक सीवेज उपचार संयंत्रों के निर्माण और रखरखाव के लिए उच्च लागत।
  • पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
शहरी और औद्योगिक अपशिष्ट सीवेज उपचार क्षमता में वृद्धि के बावजूद, अनुपचारित अपशिष्ट का निर्वहन अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
जलीय प्रजातियों का संरक्षण घड़ियाल, डॉल्फ़िन और कछुओं जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए आवासों का क्षरण और मानवीय हस्तक्षेप।
आर्द्रभूमि का अतिक्रमण शहरीकरण और कृषि विस्तार के कारण महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का नुकसान, जिससे नदी का प्राकृतिक फिल्टरिंग तंत्र कमजोर होता है।
जन जागरूकता और भागीदारी नदी संरक्षण के महत्व के बारे में व्यापक जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
डेटा अंतराल और निगरानी जल गुणवत्ता और जैव-विविधता पर व्यापक और निरंतर डेटा संग्रह तथा निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • नमामि गंगे अभियान (Namami Gange Programme)

आगे की राह

  • सीवेज उपचार क्षमता का विस्तार और मौजूदा संयंत्रों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना।
  • औद्योगिक अपशिष्टों के सख्त विनियमन और उपचार के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
  • जलीय जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण आवासों की बहाली और संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • समुदाय-आधारित संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना और जन जागरूकता बढ़ाना।
  • गंगा बेसिन राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन रणनीतियों को शामिल करना।
  • नदी रैंचिंग और आर्द्रभूमि बहाली जैसे पारिस्थितिकी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

नमामि गंगे अभियान · गंगा नदी संरक्षण · जैव-विविधता संरक्षण · सीवरेज उपचार संयंत्र · प्रदूषित नदी खंड · जैविक जल गुणवत्ता · राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना · नदी में मछलियाँ छोड़ने का कार्य · आर्द्रभूमि प्रबंधन · गंगा प्रहरी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य’}

अवधारणा प्रवाह

सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन  →  सीवेज उपचार क्षमता में वृद्धि  →  नदी में प्रदूषण भार में कमी  →  जैविक जल गुणवत्ता में सुधार  →  जलीय जैव-विविधता का संरक्षण और बहाली  →  स्वच्छ और स्वस्थ गंगा नदी पारिस्थितिकी तंत्र

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नमामि गंगे अभियान- II के अंतर्गत, वर्ष 2025 के दौरान कुल 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया।
2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2025 में गंगा की मुख्यधारा में कोई भी प्रदूषित खंड नहीं रहा है।
3. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है, क्योंकि रिपोर्ट में आंशिक सुधार और कुछ खंडों में अभी भी प्रदूषण का उल्लेख है। कथन 3 सही है।

Q2. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत जैव-विविधता संरक्षण के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
1. इस कार्यक्रम में वैज्ञानिक शोध, प्राकृतिक आवास की बहाली और प्रजातियों के संरक्षण को एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया गया है।
2. ‘राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना’ गंगा नदी में पाए गए घड़ियालों की संख्या के आधार पर तैयार की गई है।
3. ‘टर्टल सर्वाइवल अलायंस फ़ाउंडेशन इंडिया’ (TSAFI) के माध्यम से गंभीर रूप से लुप्तप्राय ‘रेड-क्राउंड रूफ़्ड टर्टल’ के संरक्षण में सहायता की जा रही है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी कथन नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत जैव-विविधता संरक्षण के विभिन्न पहलुओं का सही वर्णन करते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसके पुनरुद्धार के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इस अभियान के प्रमुख उद्देश्यों और अब तक प्राप्त सफलताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** नमामि गंगे अभियान (Namami Gange Programme) का संक्षिप्त परिचय, इसके लॉन्च का वर्ष (2014) और मुख्य लक्ष्य (प्रदूषण उन्मूलन और गंगा का संरक्षण व कायाकल्प) का उल्लेख।
2. **प्रमुख उद्देश्य:** अभियान के बहुआयामी उद्देश्यों का वर्णन करें:
* **प्रदूषण उन्मूलन:** सीवरेज उपचार अवसंरचना (Sewage Treatment Infrastructure) का विकास, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण।
* **नदी संरक्षण और कायाकल्प:** नदी की सतह की सफाई, जैव-विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation), वनीकरण, ग्रामीण स्वच्छता।
* **जनभागीदारी:** गंगा प्रहरियों (Ganga Praharis) और स्थानीय समुदायों को शामिल करना।
* **अनुसंधान और निगरानी:** वैज्ञानिक अध्ययन, जल गुणवत्ता निगरानी।
3. **प्राप्त सफलताएँ (सकारात्मक पक्ष):**
* **सीवरेज उपचार क्षमता:** जून 2026 तक 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन और एसटीपी परियोजनाओं का क्रियान्वयन।
* **जल गुणवत्ता में सुधार:** केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार कुछ प्रदूषित नदी खंडों (Polluted River Stretches) में सुधार (जैसे उत्तराखंड में हरिद्वार से सुल्तानपुर खंड का हटाना)। जैविक जल गुणवत्ता (Biological Water Quality) का ‘अच्छा’ से ‘मध्यम’ होना।
* **जैव-विविधता संरक्षण:** घड़ियाल (Gharial) और कछुओं (Turtles) के संरक्षण कार्यक्रम, ‘राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना’ का निर्माण, डॉल्फ़िन बचाव एम्बुलेंस, ‘नदी में मछलियाँ छोड़ने का कार्य’ (River Ranching) के माध्यम से देशी मछलियों की संख्या में वृद्धि।
* **आर्द्रभूमि प्रबंधन:** आर्द्रभूमियों (Wetlands) की वैज्ञानिक पहचान और प्रबंधन योजनाएँ।
* **सामुदायिक भागीदारी:** गंगा प्रहरियों की सक्रिय भूमिका।
4. **चुनौतियाँ/समालोचना (यदि कोई हो, संतुलित दृष्टिकोण के लिए):**
* अभी भी कुछ प्रदूषित खंडों का मौजूद होना (जैसे बिहार और पश्चिम बंगाल में)।
* परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और निरंतरता।
* जनभागीदारी को और अधिक व्यापक बनाने की आवश्यकता।
* सहायक नदियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता।
5. **निष्कर्ष:** अभियान की समग्र महत्ता को रेखांकित करें और भविष्य की राह सुझाएं, जिसमें निरंतर प्रयास, प्रौद्योगिकी का उपयोग और सभी हितधारकों की भागीदारी शामिल हो।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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