नशा मुक्त भारत अभियान: 29.32 करोड़ नागरिकों तक पहुंच, युवा व महिला भागीदारी

नशा मुक्त भारत अभियान: 29.32 करोड़ नागरिकों तक पहुंच, युवा व महिला भागीदारी — Nash Mukt Bharat Abhiyan Reach

नशा मुक्त भारत अभियान: 29.32 करोड़ नागरिकों तक पहुंच, युवा व महिला भागीदारी

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — सामाजिक मुद्दे, भारतीय समाज  |  GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, स्वास्थ्य, शासन  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (मादक पदार्थों की तस्करी)
  • Prelims: नशा मुक्त भारत अभियान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, NAPDDR (नशीले पदार्थों की मांग कम करने हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना), IRCA (एकीकृत पुनर्वास केंद्र), नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446, जन आंदोलन, मादक द्रव्य दुरुपयोग, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
  • Essay: नशा मुक्त भारत: एक स्वस्थ समाज की ओर, युवा शक्ति और मादक पदार्थों का दुरुपयोग: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: नशा मुक्त भारत अभियान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जो सामुदायिक भागीदारी और बहु-हितधारक दृष्टिकोण के माध्यम से मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने तथा उपचार व पुनर्वास प्रदान करने के लिए एक ‘जन आंदोलन’ के रूप में कार्य कर रहा है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की हालिया प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ ने सामुदायिक भागीदारी और देशव्यापी जागरूकता अभियानों के माध्यम से 29.32 करोड़ से अधिक नागरिकों तक अपनी पहुँच बनाई है, जिसमें 11.20 करोड़ से अधिक युवा और 7.92 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं। यह अभियान देश भर में 21 लाख से अधिक जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ उपचार और पुनर्वास सेवाओं को सुदृढ़ कर रहा है, जो इसे एक महत्वपूर्ण ‘जन आंदोलन’ बनाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में मादक पदार्थों का दुरुपयोग एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या है, जो व्यक्तियों, परिवारों और समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करती है।
  • संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ड्रग्स एंड क्राइम (UNODC) की रिपोर्टें भारत में मादक पदार्थों के सेवन में वृद्धि की ओर इशारा करती हैं, विशेषकर युवाओं में।
  • सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए विभिन्न नीतियाँ और कार्यक्रम तैयार किए हैं, जिनमें ‘नशीले पदार्थों की मांग कम करने हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR)’ प्रमुख है।
  • मादक पदार्थों का दुरुपयोग न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ पैदा करता है, बल्कि अपराध, हिंसा और आर्थिक अस्थिरता को भी बढ़ावा देता है।
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ और भौगोलिक स्थिति भारत को मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील बनाती हैं, जिससे आंतरिक सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ता है।

नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) क्या है?

  • यह अभियान 15 अगस्त 2020 को ‘नशीले पदार्थों की मांग कम करने हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR)’ के तहत शुरू किया गया था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य जागरूकता के प्रसार, सामुदायिक भागीदारी, उपचार, पुनर्वास, देखभाल और समाज में दोबारा शामिल करने के माध्यम से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना है।
  • शुरुआत में 272 सबसे संवेदनशील जिलों में केंद्रित यह अभियान अब पूरे देश में फैल चुका है।
  • यह अभियान युवाओं, महिलाओं और समुदाय के सदस्यों को शामिल करने पर विशेष जोर देता है, जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों, युवा क्लबों और महिला समूहों की सक्रिय भागीदारी होती है।
  • यह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वयंसेवी संस्थाओं, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट करता है।
  • अभियान ‘जन आंदोलन’ के रूप में विकसित हुआ है, जो हर नागरिक को नशीले पदार्थों के सेवन का उन्मूलन करने और एक स्वस्थ समाज बनाने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • NMBA ऐप 2.0 और नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 जैसे डिजिटल उपकरण जागरूकता और सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • यह साक्ष्यों पर आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करता है और विभिन्न मंत्रालयों व हितधारकों के प्रयासों को एकजुट करता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
व्यापक पहुँच 29.32 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँच, जिसमें युवा और महिलाएँ प्रमुख हैं, जो अभियान की प्रभावशीलता दर्शाती है।
सामुदायिक भागीदारी यह अभियान ‘जन आंदोलन’ पर केंद्रित है, जिसमें स्थानीय समुदायों, शिक्षण संस्थानों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भूमिका है।
उपचार और पुनर्वास IRCA, CPLI, ODIC और ATF जैसे केंद्रों के माध्यम से 28.29 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है, जिससे उपचार सेवाओं में 294% की वृद्धि हुई है।
जागरूकता गतिविधियाँ स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 21 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो रोकथाम पर जोर देते हैं।
समन्वित दृष्टिकोण विभिन्न सरकारी एजेंसियों (NCB, राज्य सरकारें, पुलिस) और गैर-सरकारी संगठनों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
डिजिटल पहल नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 और NMBA ऐप 2.0 परामर्श, जानकारी और रेफरल सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल माध्यम हैं।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह अभियान स्वस्थ और अनुशासित युवा तैयार करने में मदद करता है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
  • मादक पदार्थों के दुरुपयोग से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने और पीड़ितों को समाज में पुनः एकीकृत करने में सहायक है।
  • महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से समाज में सकारात्मक बदलाव आता है और सामाजिक ताना-बाना मजबूत होता है।

स्वास्थ्य महत्व

  • उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करके मादक पदार्थों के सेवन से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को कम करता है।
  • नशा मुक्ति हेल्पलाइन और परामर्श सेवाओं के माध्यम से पीड़ितों को समय पर सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
  • जागरूकता अभियानों से रोकथाम को बढ़ावा मिलता है, जिससे नए उपयोगकर्ताओं की संख्या में कमी आती है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • यह अभियान ‘नशीले पदार्थों की मांग कम करने हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR)’ के उद्देश्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण है।
  • विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संबंधित पक्षों के प्रयासों को एकजुट करके एक प्रभावी नीतिगत ढाँचा तैयार करता है।
  • साक्ष्यों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाकर नीतियों और कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को बढ़ाता है।

आर्थिक महत्व

  • मादक पदार्थों के दुरुपयोग से होने वाले आर्थिक नुकसान (उत्पादकता में कमी, स्वास्थ्य देखभाल लागत) को कम करने में मदद करता है।
  • पुनर्वास के माध्यम से व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में लाकर उनकी आर्थिक उत्पादकता को बढ़ाता है।
  • अपराध दर में कमी लाकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर होने वाले खर्च को कम कर सकता है।

चुनौतियाँ

1. सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी

  • भारत की भौगोलिक स्थिति (गोल्डन क्रिसेंट और गोल्डन ट्रायंगल के बीच) इसे मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक पारगमन बिंदु बनाती है।
  • आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है और घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाती है।

2. जागरूकता की कमी और सामाजिक कलंक

  • कई क्षेत्रों में अभी भी मादक पदार्थों के दुरुपयोग को एक बीमारी के बजाय नैतिक विफलता के रूप में देखा जाता है।
  • यह पीड़ितों को सहायता मांगने से हतोत्साहित करता है और पुनर्वास प्रक्रियाओं में बाधा डालता है।

3. उपचार और पुनर्वास सुविधाओं की अपर्याप्तता

  • देश के कुछ दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त उपचार और पुनर्वास केंद्रों की कमी है।
  • विशेषज्ञ कर्मियों और प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की कमी भी एक चुनौती है।

4. युवाओं में बढ़ती प्रवृत्ति

  • पीयर प्रेशर, बेरोजगारी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण युवाओं में मादक पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
  • डिजिटल माध्यमों से मादक पदार्थों की उपलब्धता और प्रचार भी एक चिंता का विषय है।

5. कानूनी और प्रवर्तन चुनौतियाँ

  • मादक पदार्थ नियंत्रण कानूनों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • अवैध व्यापार में शामिल बड़े नेटवर्क को तोड़ना और वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करना जटिल है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
नशीले पदार्थों की उपलब्धता अंतर्राष्ट्रीय तस्करी मार्गों और घरेलू अवैध उत्पादन के कारण आसान पहुँच।
मानसिक स्वास्थ्य सह-रुग्णता मादक पदार्थों के सेवन और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बीच गहरा संबंध, जिसके लिए एकीकृत उपचार की आवश्यकता।
प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग डार्क वेब और सोशल मीडिया के माध्यम से मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री और प्रचार।
पुनर्वास के बाद की चुनौतियाँ पुनर्वास के बाद सामाजिक स्वीकृति, रोजगार और relapse (पुनरावृत्ति) की रोकथाम।
डेटा संग्रह और विश्लेषण मादक पदार्थों के दुरुपयोग के पैटर्न और प्रभाव का सटीक और अद्यतन डेटा प्राप्त करने में चुनौतियाँ।
महिलाओं और बच्चों पर विशेष प्रभाव मादक पदार्थों के दुरुपयोग से महिलाओं और बच्चों पर पड़ने वाले विशिष्ट नकारात्मक प्रभाव, जिनके लिए विशेष हस्तक्षेप की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • नशीले पदार्थों की मांग कम करने हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR)
  • मादक द्रव्य व्यसन उपचार सुविधाएँ (ATF)
  • एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCA)
  • समुदाय आधारित पीयर-लेड इंटरवेंशन सेंटर (CPLI)
  • आउटरीच और ड्रॉप-इन सेंटर (ODIC)
  • नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446
  • NMBA ऐप 2.0
  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा संचालित विभिन्न पहलें
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की नशा मुक्ति योजनाएँ
  • प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) – कुछ हद तक उपचार में सहायक

आगे की राह

  • जागरूकता अभियानों को और अधिक लक्षित और स्थानीय भाषा में संचालित किया जाए, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • उपचार और पुनर्वास सुविधाओं का विस्तार किया जाए तथा विशेषज्ञ कर्मियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया जाए।
  • मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सीमा सुरक्षा और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाए।
  • युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवाओं को सुलभ बनाया जाए ताकि वे तनाव और अवसाद के कारण मादक पदार्थों की ओर न मुड़ें।
  • पुनर्वास के बाद के चरण में पीड़ितों के लिए कौशल विकास, रोजगार के अवसर और सामाजिक एकीकरण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए।
  • डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणालियों को मजबूत किया जाए ताकि मादक पदार्थों के दुरुपयोग के उभरते पैटर्न की पहचान की जा सके।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर ऑनलाइन परामर्श और सहायता सेवाओं को बढ़ाया जाए, विशेषकर उन लोगों के लिए जो सीधे केंद्रों तक नहीं पहुँच सकते।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया जाए ताकि सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

नशा मुक्त भारत अभियान · सामुदायिक भागीदारी · जन आंदोलन · नशीले पदार्थों की मांग में कमी · उपचार और पुनर्वास · युवा सशक्तिकरण · सामाजिक न्याय · आंतरिक सुरक्षा · बहु-हितधारक दृष्टिकोण · राष्ट्रीय कार्य योजना · स्वास्थ्य और कल्याण · सतत विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 47 — राज्य का कर्तव्य है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करे और मादक पेय तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थों के सेवन को प्रतिबंधित करे। (राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत)
  • सातवीं अनुसूची — सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता (राज्य सूची), आपराधिक कानून (समवर्ती सूची), मादक पदार्थों से संबंधित कानून (समवर्ती सूची)।
  • नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 — मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और खपत को विनियमित और प्रतिबंधित करता है।
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय — मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम और पुनर्वास के लिए नोडल मंत्रालय।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 — गैर-संचारी रोगों और मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने पर जोर देती है।

अवधारणा प्रवाह

मादक पदार्थों का दुरुपयोग (समस्या)  →  NMBA का शुभारंभ (सरकारी पहल)  →  जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी (रोकथाम)  →  उपचार और पुनर्वास सेवाएँ (हस्तक्षेप)  →  सामाजिक एकीकरण (दीर्घकालिक समाधान)  →  नशा मुक्त भारत (लक्ष्य)

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह अभियान 15 अगस्त 2020 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था।
2. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम पर केंद्रित है।
3. नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 इस अभियान का एक महत्वपूर्ण घटक है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है। NMBA 15 अगस्त 2020 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। कथन 2 गलत है। यह अभियान शुरुआत में 272 संवेदनशील जिलों में शुरू किया गया था और अब पूरे देश में फैल चुका है, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र शामिल हैं। कथन 3 सही है। नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो परामर्श और रेफरल सेवाएँ प्रदान करता है।

Q2. नशीले पदार्थों की मांग कम करने हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR) के तहत निम्नलिखित में से कौन सी सेवाएँ प्रदान की जाती हैं?
1. इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर्स फॉर एडिक्ट्स (IRCA)
2. कम्युनिटी-बेस्ड पीयर-लेड इंटरवेंशन सेंटर्स (CPLI)
3. आउटरीच तथा ड्रॉप-इन सेंटर्स (ODIC)
4. एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटीज (ATF)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, NAPDDR के तहत IRCA, CPLI, ODIC और ATF सभी उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत किया गया है। अतः सभी विकल्प सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ “नशा मुक्त भारत अभियान” एक ‘जन आंदोलन’ के रूप में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या से निपटने में कितना सफल रहा है? इस अभियान की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए, भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग से जुड़ी चुनौतियों और आगे की राह पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की ‘जन आंदोलन’ के रूप में सफलता का मूल्यांकन करें, जिसमें उसकी व्यापक पहुँच, सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता गतिविधियों का उल्लेख करें। दूसरे भाग में अभियान की प्रमुख विशेषताओं (जैसे NAPDDR के तहत शुरुआत, उपचार-पुनर्वास सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, डिजिटल पहल) को रेखांकित करें। तीसरे भाग में भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग से जुड़ी चुनौतियों (जैसे सीमा पार तस्करी, सामाजिक कलंक, सुविधाओं की कमी) का विश्लेषण करें। अंत में, आगे की राह के रूप में कुछ ठोस सुझाव (जैसे लक्षित जागरूकता, सुविधाओं का विस्तार, अंतर-एजेंसी समन्वय) प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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