पीएम ई-ड्राइव योजना: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति

पीएम ई-ड्राइव योजना: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy)  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology)  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment and Ecology)  |  GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप (Government Policies and Interventions)
  • Prelims: पीएम ई-ड्राइव योजना, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), चार्जिंग अवसंरचना, घरेलू विनिर्माण, जीवाश्म ईंधन, उत्सर्जन में कमी
  • Essay: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य और सतत विकास, आत्मनिर्भर भारत और हरित अर्थव्यवस्था की ओर भारत का संक्रमण

त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम ई-ड्राइव योजना भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने, चार्जिंग अवसंरचना विकसित करने और घरेलू ईवी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य सतत परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारी उद्योग मंत्रालय ने हाल ही में पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना की मुख्य विशेषताओं, उद्देश्यों, वित्तीय परिव्यय और वर्तमान स्थिति पर विस्तृत जानकारी प्रदान की है। यह योजना देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने, चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करने और ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने पर केंद्रित है, जो ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण का समर्थन करती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने, वायु प्रदूषण कम करने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।
  • परंपरागत रूप से, भारत का परिवहन क्षेत्र जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भर रहा है, जिससे उच्च कार्बन उत्सर्जन और आयात बिल में वृद्धि हुई है।
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने से न केवल पर्यावरणीय लाभ मिलते हैं, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को भी गति देता है।
  • चार्जिंग अवसंरचना की कमी और ईवी की उच्च प्रारंभिक लागत भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में प्रमुख बाधाएं रही हैं।
  • पूर्व में, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (EMPS) जैसी योजनाएं भी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही थीं, जिन्हें अब पीएम ई-ड्राइव योजना में समाहित कर दिया गया है।
  • सरकार का लक्ष्य टियर-II, टियर-III शहरों और आकांक्षी क्षेत्रों में भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को व्यापक रूप से अपनाना सुनिश्चित करना है।

पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है?

  • पीएम ई-ड्राइव योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाना, एक मजबूत चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना और एक व्यापक ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है।
  • इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹10,900 करोड़ है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • यह योजना विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे e-2W (दोपहिया), e-3W (तिपहिया), e-truck (ट्रक), e-ambulance (एम्बुलेंस) और e-bus (बस) को प्रोत्साहन प्रदान करती है।
  • प्रोत्साहन दरें प्रति kWh के आधार पर निर्धारित की गई हैं, जिसमें प्रति वाहन अधिकतम सीमा भी तय की गई है, और यह एक्स-फैक्ट्री मूल्य के प्रतिशत तक सीमित हो सकती है।
  • योजना 29 सितंबर, 2024 को अधिसूचित की गई थी और 01 अप्रैल, 2024 से प्रभावी है, जिसे 31 मार्च, 2028 तक क्रियान्वित किया जा रहा है (कुछ श्रेणियों के लिए अलग-अलग अंतिम तिथियां हैं)।
  • यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को घटाने पर केंद्रित है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है और आयात बिल घटाता है।
चार्जिंग अवसंरचना का विकास यह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आने वाली प्रमुख बाधाओं में से एक को दूर करता है, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ता है।
घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देता है, रोजगार सृजित करता है और देश को वैश्विक ईवी आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाता है।
विभिन्न श्रेणियों के लिए प्रोत्साहन यह दोपहिया वाहनों से लेकर बसों और ट्रकों तक, इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यापक स्पेक्ट्रम को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे समग्र परिवर्तन को गति मिलती है।
पर्याप्त वित्तीय परिव्यय (₹10,900 करोड़) यह योजना के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करके विदेशी मुद्रा बचाता है, जिससे व्यापार घाटा कम होता है।
  • यह इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और संबंधित उद्योगों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल मजबूत होती है।
  • यह बैटरी उत्पादन, चार्जिंग अवसंरचना और संबद्ध सेवाओं में निवेश आकर्षित करके रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • यह वाहनों से होने वाले उत्सर्जन (Emission) को कम करता है, जिससे वायु प्रदूषण पर नियंत्रण होता है और शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • यह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के शमन में योगदान देता है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करते हैं।
  • यह सतत परिवहन (Sustainable Transportation) समाधानों को बढ़ावा देता है, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप है।

सामाजिक महत्व

  • यह स्वच्छ और शांत परिवहन विकल्प प्रदान करके शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।
  • यह ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को बढ़ाता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए विदेशी तेल पर कम निर्भर हो जाता है।
  • यह नागरिकों को आधुनिक और कुशल परिवहन विकल्पों तक पहुंच प्रदान करके जीवन स्तर को ऊपर उठाता है।

रणनीतिक महत्व

  • यह भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करता है।
  • यह उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास और अपनाने को प्रोत्साहित करता है, जिससे देश की तकनीकी क्षमता बढ़ती है।
  • यह ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण का समर्थन करता है, जिसमें एक आधुनिक, टिकाऊ और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की परिकल्पना की गई है।

चुनौतियाँ

1. चार्जिंग अवसंरचना की कमी

  • देश भर में सार्वजनिक और निजी चार्जिंग स्टेशनों की अपर्याप्त उपलब्धता इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में एक बड़ी बाधा है।
  • विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार धीमा है।

2. बैटरी प्रौद्योगिकी और लागत

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की उच्च लागत उन्हें पारंपरिक वाहनों की तुलना में महंगा बनाती है।
  • बैटरी के सीमित जीवनकाल और पुनर्चक्रण (Recycling) की चुनौतियों के कारण पर्यावरणीय चिंताएं भी हैं।

3. उपभोक्ता जागरूकता और धारणा

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रदर्शन, रेंज और रखरखाव के बारे में उपभोक्ताओं के बीच जानकारी की कमी और गलत धारणाएं हैं।
  • चार्जिंग समय और लंबी यात्राओं के लिए चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता को लेकर ‘रेंज एंग्जायटी’ एक प्रमुख चिंता है।

4. घरेलू विनिर्माण क्षमताएं

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रमुख घटकों, विशेषकर बैटरी सेल के लिए अभी भी आयात पर निर्भरता है।
  • घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

5. प्रोत्साहन योजनाओं की निरंतरता

  • प्रोत्साहन दरों में बदलाव या योजनाओं की समाप्ति से इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
  • दीर्घकालिक और स्थिर नीतिगत ढांचा निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
चार्जिंग अवसंरचना सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की अपर्याप्त संख्या और धीमी गति से विस्तार।
बैटरी की लागत इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत का एक प्रमुख कारण।
रेंज एंग्जायटी चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता को लेकर उपभोक्ताओं में चिंता, विशेषकर लंबी यात्राओं के लिए।
घरेलू विनिर्माण बैटरी जैसे महत्वपूर्ण घटकों के लिए आयात पर निर्भरता।
नीतिगत निरंतरता प्रोत्साहन योजनाओं में बदलाव से बाजार में अनिश्चितता।
टियर-II/III शहरों में पैठ बड़े शहरों के बाहर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में धीमी गति।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (EMPS) 2024

आगे की राह

  • चार्जिंग अवसंरचना का तेजी से विस्तार करें, विशेषकर टियर-II और टियर-III शहरों तथा आकांक्षी जिलों में, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देकर।
  • बैटरी विनिर्माण और पुनर्चक्रण (Recycling) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाएं और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं का विस्तार करें।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों और चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि उपभोक्ताओं की गलत धारणाओं को दूर किया जा सके।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक स्थिर और दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा सुनिश्चित करें, जिसमें प्रोत्साहन और नियामक उपाय शामिल हों, ताकि निवेशकों और उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।
  • घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए स्थानीयकरण को बढ़ावा दें और इलेक्ट्रिक वाहन घटकों के विनिर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करें।
  • सार्वजनिक परिवहन बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों और अन्य वाणिज्यिक वाहनों को अपनाने के लिए विशेष प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता प्रदान करें।
  • बैटरी स्वैपिंग (Battery Swapping) स्टेशनों और मानकीकृत चार्जिंग प्रोटोकॉल को बढ़ावा दें ताकि चार्जिंग की सुविधा और गति में सुधार हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पीएम ई-ड्राइव योजना · इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन · चार्जिंग अवसंरचना · घरेलू विनिर्माण · कार्बन उत्सर्जन में कमी · जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता · मेक इन इंडिया · सतत गतिशीलता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा
  • अनुच्छेद 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार)

अवधारणा प्रवाह

पीएम ई-ड्राइव योजना का शुभारंभ  →  इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर प्रोत्साहन  →  चार्जिंग अवसंरचना का विकास  →  घरेलू ईवी विनिर्माण में वृद्धि  →  जीवाश्म ईंधन की खपत में कमी  →  वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में गिरावट  →  आर्थिक संवृद्धि और ऊर्जा सुरक्षा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. पीएम ई-ड्राइव योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना और चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना है।
2. यह योजना केवल दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों को ही प्रोत्साहन प्रदान करती है।
3. योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹10,900 करोड़ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है। पीएम ई-ड्राइव योजना का प्राथमिक उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना, चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना और देश में ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है। कथन 2 गलत है। यह योजना दोपहिया और तिपहिया वाहनों के साथ-साथ ई-ट्रक, ई-एम्बुलेंस और ई-बस जैसी श्रेणियों को भी प्रोत्साहन प्रदान करती है। कथन 3 सही है। योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹10,900 करोड़ है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से पीएम ई-ड्राइव योजना का/के उद्देश्य है/हैं?
1. इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना।
2. चार्जिंग अवसंरचना का विकास।
3. देश में ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास।
4. जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करना।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — पीएम ई-ड्राइव योजना का प्राथमिक उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को तेजी से अपनाना, चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना और देश में ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है। जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करना और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को घटाना इस योजना के अप्रत्यक्ष परिणाम हैं, न कि प्राथमिक उद्देश्य। इसलिए, कथन 1, 2 और 3 सीधे योजना के उद्देश्य हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पीएम ई-ड्राइव योजना के प्रमुख उद्देश्यों और विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए। यह योजना भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल को सुदृढ़ करने में किस प्रकार सहायक है? इसके समक्ष चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पीएम ई-ड्राइव योजना के उद्देश्यों (जैसे ईवी को अपनाना, चार्जिंग अवसंरचना, विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र) और प्रमुख विशेषताओं (जैसे वित्तीय परिव्यय, विभिन्न वाहन श्रेणियों के लिए प्रोत्साहन) का विस्तार से उल्लेख करें। दूसरे भाग में बताएं कि यह योजना किस प्रकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देती है (जैसे मांग प्रोत्साहन, चार्जिंग स्टेशन) और ‘मेक इन इंडिया’ को कैसे सुदृढ़ करती है (जैसे घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन)। अंत में, योजना के कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों (जैसे चार्जिंग अवसंरचना की कमी, बैटरी लागत, उपभोक्ता जागरूकता) पर संक्षिप्त चर्चा करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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