पीएम ई-ड्राइव योजना: ₹10,900 करोड़ के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा

पीएम ई-ड्राइव योजना: ₹10,900 करोड़ के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा — PM E-DRIVE Scheme Incentives by EV Category

पीएम ई-ड्राइव योजना: ₹10,900 करोड़ के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: पीएम ई-ड्राइव योजना, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), चार्जिंग अवसंरचना, भारी उद्योग मंत्रालय, मेक इन इंडिया, जीवाश्म ईंधन
  • Essay: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य: आर्थिक संवृद्धि, पर्यावरणीय स्थिरता और आत्मनिर्भरता, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हरित परिवहन की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम ई-ड्राइव योजना भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने, चार्जिंग अवसंरचना के विकास और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक सरकारी पहल है, जिसका कुल परिव्यय ₹10,900 करोड़ है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारी उद्योग मंत्रालय ने हाल ही में पीएम ई-ड्राइव योजना (PM e-DRIVE Scheme) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility) को बढ़ावा देने से संबंधित एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में योजना की मुख्य विशेषताओं, उद्देश्यों, वित्तीय परिव्यय, वर्तमान स्थिति और इलेक्ट्रिक वाहनों की विभिन्न श्रेणियों के लिए दिए जा रहे प्रोत्साहनों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह जानकारी भारत में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की गति और संबंधित अवसंरचना के विकास को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने, वायु प्रदूषण कम करने और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
  • परिवहन क्षेत्र भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों में से एक है, और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना इस क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकता है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के लिए चार्जिंग अवसंरचना की कमी और उच्च प्रारंभिक लागत जैसी चुनौतियाँ प्रमुख बाधाएँ रही हैं।
  • विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए स्वच्छ और सतत परिवहन समाधानों को अपनाना एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है?

  • पीएम ई-ड्राइव योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाना, चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना और एक मजबूत EV विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है।
  • इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹10,900 करोड़ है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • यह योजना 29 सितंबर, 2024 को अधिसूचित की गई थी और 01 अप्रैल, 2024 से प्रभावी है, जिसमें पूर्ववर्ती EMPS 2024 योजना को समाहित कर दिया गया है।
  • योजना के तहत विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे e-2W (दोपहिया), e-3W (तिपहिया – ई-रिक्शा, ई-कार्ट, L5), e-truck (ट्रक) और e-ambulance (एम्बुलेंस) के लिए प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।
  • प्रोत्साहन राशि प्रति kWh बैटरी क्षमता के आधार पर निर्धारित की जाती है, जो वाहन के एक्स-फैक्ट्री मूल्य के एक निश्चित प्रतिशत या एक अधिकतम सीमा तक सीमित होती है।
  • e-bus (इलेक्ट्रिक बस) के लिए भी प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं, जो प्रति kWh बैटरी क्षमता और बस की लंबाई पर आधारित होते हैं, जिसकी सीमा वाहन की लागत के 20% तक होती है।
  • योजना वर्तमान में 31 मार्च, 2028 तक क्रियान्वित की जा रही है, हालांकि कुछ श्रेणियों जैसे e-2W और e-3W (L5) के लिए अंतिम तिथियां भिन्न हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक।
चार्जिंग अवसंरचना का विकास ईवी अपनाने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) का निर्माण, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा।
घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके घटकों के स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
विभिन्न श्रेणियों के वाहनों को प्रोत्साहन दोपहिया (e-2W), तिपहिया (e-3W), बस (e-bus), ट्रक (e-truck) और एम्बुलेंस (e-ambulance) जैसी विविध श्रेणियों को शामिल कर व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना।
वित्तीय परिव्यय ₹10,900 करोड़ योजना के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करना।
ईएमपीएस 2024 का पीएम ई-ड्राइव में विलय पूर्ववर्ती योजना के उद्देश्यों और लाभों को एकीकृत कर एक सुसंगत और व्यापक नीतिगत ढाँचा तैयार करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन: यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके घटकों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देती है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) होती है।
  • आयात बिल में कमी: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आएगी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और व्यापार घाटा (Trade Deficit) नियंत्रित होगा।
  • निवेश आकर्षित करना: ईवी क्षेत्र में प्रोत्साहन से घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित होगा, जिससे अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरणीय महत्व

  • कार्बन उत्सर्जन में कमी: इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से वाहनों से होने वाले उत्सर्जन (Vehicular Emissions) में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
  • जीवाश्म ईंधन की खपत में कमी: यह योजना जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने में सहायक है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) बढ़ती है और पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) को बढ़ावा मिलता है।

सामाजिक महत्व

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार: वायु प्रदूषण में कमी आने से श्वसन संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आएगी, जिससे नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • आधुनिक परिवहन प्रणाली: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने से देश में एक आधुनिक, स्वच्छ और कुशल परिवहन प्रणाली का विकास होगा, जो शहरी नियोजन और जीवनशैली को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।

रणनीतिक महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और भू-राजनीतिक (Geopolitical) जोखिमों से बचाव होगा।
  • तकनीकी आत्मनिर्भरता: ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास से भारत तकनीकी रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेगा और वैश्विक ईवी आपूर्ति श्रृंखला (Global EV Supply Chain) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चुनौतियाँ

1. चार्जिंग अवसंरचना का अभाव

  • सार्वजनिक और निजी चार्जिंग स्टेशनों की अपर्याप्त संख्या, विशेषकर टियर-II और टियर-III शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • चार्जिंग गति और संगतता (compatibility) से संबंधित मुद्दे, जो उपयोगकर्ताओं के लिए असुविधा पैदा करते हैं।

2. उच्च प्रारंभिक लागत

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद लागत अभी भी पारंपरिक वाहनों की तुलना में अधिक है, जिससे व्यापक रूप से अपनाने में बाधा आती है।
  • बैटरी की लागत, जो ईवी की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा है, अभी भी अपेक्षाकृत अधिक है।

3. बैटरी प्रौद्योगिकी और पुनर्चक्रण

  • बैटरी जीवनकाल, रेंज चिंता (range anxiety) और चार्जिंग समय से संबंधित तकनीकी चुनौतियाँ।
  • इस्तेमाल की गई बैटरियों के सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण (recycling) के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का अभाव।

4. घरेलू विनिर्माण क्षमता

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के महत्वपूर्ण घटकों, विशेषकर बैटरी सेल के लिए आयात पर निर्भरता।
  • स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) और अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं को और मजबूत करने की आवश्यकता।

5. उपभोक्ता जागरूकता और स्वीकार्यता

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों और रखरखाव के बारे में उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता की कमी।
  • ईवी प्रौद्योगिकी और प्रदर्शन के बारे में गलत धारणाएँ या संदेह।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
चार्जिंग अवसंरचना सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की कमी, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में।
उच्च खरीद लागत इलेक्ट्रिक वाहनों की प्रारंभिक लागत पारंपरिक वाहनों की तुलना में अधिक होना।
बैटरी प्रौद्योगिकी बैटरी रेंज, जीवनकाल और पुनर्चक्रण से संबंधित चुनौतियाँ।
घरेलू आपूर्ति श्रृंखला महत्वपूर्ण घटकों, जैसे बैटरी सेल, के लिए आयात पर निर्भरता।
उपभोक्ता स्वीकार्यता ईवी के बारे में जागरूकता की कमी और गलत धारणाएँ।
वित्तीय स्थिरता योजना के तहत प्रोत्साहन दरों में भविष्य में संभावित कमी का उद्योग पर प्रभाव।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम 2024 (ईएमपीएस 2024)

आगे की राह

  • चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार: टियर-II और टियर-III शहरों तथा आकांक्षी क्षेत्रों (Aspirational Districts) में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में तेजी से वृद्धि करना और निजी चार्जिंग को प्रोत्साहित करना।
  • बैटरी विनिर्माण और पुनर्चक्रण: उन्नत बैटरी प्रौद्योगिकी के अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना और इस्तेमाल की गई बैटरियों के सुरक्षित निपटान तथा पुनर्चक्रण के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा: इलेक्ट्रिक वाहनों के महत्वपूर्ण घटकों के स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजनाओं का विस्तार करना।
  • जागरूकता और शिक्षा अभियान: इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों, रखरखाव और उपलब्ध प्रोत्साहनों के बारे में उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाना।
  • वित्तीय प्रोत्साहन का युक्तिकरण: इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत को और कम करने के लिए कर लाभ (Tax Benefits), सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाओं जैसे वित्तीय प्रोत्साहनों को जारी रखना और उनका समय-समय पर मूल्यांकन करना।
  • अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा: बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग समाधान और हल्के सामग्री (lightweight materials) के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अकादमिक और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना।
  • अंतर-मंत्रालयी समन्वय: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा (राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने का प्रयास करेगा)।
  • अनुच्छेद 39(b): भौतिक संसाधनों के स्वामित्व और नियंत्रण का इस प्रकार वितरण हो कि वह सामूहिक हित के लिए सर्वोत्तम रूप से सहायक हो (संसाधनों का सतत उपयोग)।

अवधारणा प्रवाह

सरकारी प्रोत्साहन (पीएम ई-ड्राइव योजना)  →  इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद में वृद्धि  →  चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार  →  जीवाश्म ईंधन की खपत में कमी  →  वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी  →  वायु गुणवत्ता में सुधार और जलवायु परिवर्तन का शमन  →  स्वच्छ और सतत परिवहन प्रणाली का विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. पीएम ई-ड्राइव योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना और चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना है।
2. यह योजना केवल दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान करती है।
3. योजना का कुल परिव्यय ₹10,900 करोड़ है और यह 31 मार्च, 2028 तक क्रियान्वित की जा रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का प्राथमिक उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को तेजी से अपनाना, चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करना और देश में ईवी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना ई-ट्रक और ई-एम्बुलेंस जैसी अन्य श्रेणियों को भी प्रोत्साहन प्रदान करती है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना का कुल परिव्यय ₹10,900 करोड़ है और यह 31 मार्च, 2028 तक क्रियान्वित की जा रही है।

Q2. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के संदर्भ में, पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत निम्नलिखित में से कौन-सी पहल शामिल है?
1. इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (ईवीपीसीएस) की तैनाती के लिए वित्तीय आवंटन।
2. इलेक्ट्रिक वाहनों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन।
3. टियर-II और टियर-III शहरों तथा आकांक्षी क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (ईवीपीसीएस) की तैनाती के लिए ₹2,000 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। कथन 3 गलत है क्योंकि सरकार टियर-II और टियर-III शहरों तथा आकांक्षी क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखती है, यह वर्तमान में योजना का हिस्सा नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पीएम ई-ड्राइव योजना भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है? इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने, जीवाश्म ईंधन की खपत कम करने और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए किए गए उपायों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इसके अतिरिक्त, चार्जिंग अवसंरचना और बैटरी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में इसकी भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पीएम ई-ड्राइव योजना के उद्देश्यों और महत्व को रेखांकित करें। दूसरे भाग में, योजना के तहत विभिन्न इलेक्ट्रिक वाहन श्रेणियों के लिए दिए जा रहे प्रोत्साहनों, चार्जिंग अवसंरचना के विकास और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा करें। जीवाश्म ईंधन की खपत और उत्सर्जन में कमी पर इसके संभावित प्रभाव का उल्लेख करें। अंत में, चार्जिंग अवसंरचना और बैटरी विनिर्माण तथा पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में योजना की भूमिका का विश्लेषण करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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