13 Sep पीएम मोदी और फिलीपींस राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की
✎ भारत और फिलीपींस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने तथा रक्षा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष और लोगों से लोगों के संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की है, जो भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' के लिए…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- Prelims: भारत-फिलीपींस संबंध, एक्ट ईस्ट नीति, BRICS शिखर सम्मेलन, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI), आसियान (ASEAN), रणनीतिक साझेदारी
- Essay: भारत की विदेश नीति में बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय सहयोग का महत्व, एक्ट ईस्ट नीति: भारत के लिए अवसर और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत और फिलीपींस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने तथा रक्षा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष और लोगों से लोगों के संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की है, जो भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर ने नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के दौरान द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, रेलवे अवसंरचना, फिनटेक, शिक्षा, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों से लोगों के संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। फिलीपींस के राष्ट्रपति ने BRICS शिखर सम्मेलन में ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ सत्र में भी भाग लिया।
पृष्ठभूमि
- भारत और फिलीपींस के बीच अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मार्कोस की भारत यात्रा के दौरान एक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) स्थापित की गई थी।
- फिलीपींस भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, और दोनों देश आसियान (ASEAN) के माध्यम से व्यापक रणनीतिक साझेदारी बनाए हुए हैं।
- दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) में, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- फिलीपींस ने हाल ही में आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure – CDRI) में शामिल होने का निर्णय लिया है, जिसका भारत ने स्वागत किया है।
- BRICS समूह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत 2026 में BRICS का अध्यक्ष है और 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
- BRICS भागीदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।
भारत-फिलीपींस रणनीतिक साझेदारी
- भारत और फिलीपींस के बीच रणनीतिक साझेदारी अगस्त 2025 में स्थापित हुई, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक और गहरा करना है।
- यह साझेदारी रक्षा और सुरक्षा सहयोग, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में, को बढ़ावा देती है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
- आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापार और निवेश, फिनटेक (Fintech) और रेलवे अवसंरचना जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहयोग दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाएगा।
- शिक्षा, पर्यटन और लोगों से लोगों के संबंधों को बढ़ावा देने से सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ में वृद्धि होगी।
- फिलीपींस का आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) में शामिल होना आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में सहयोग का संकेत है।
- यह साझेदारी भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी सहयोग करते हैं, जिसमें बहुपक्षीय मंचों जैसे आसियान और संयुक्त राष्ट्र में समन्वय शामिल है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| रणनीतिक साझेदारी | अगस्त 2025 में स्थापित, यह दोनों देशों के बीच संबंधों को एक व्यापक और दीर्घकालिक ढाँचा प्रदान करती है। |
| रक्षा और सुरक्षा सहयोग | क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण, विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में। |
| व्यापार और निवेश | आर्थिक संबंधों को गहरा करने और दोनों देशों के लिए आर्थिक अवसरों को बढ़ाने की क्षमता। |
| अंतरिक्ष और रेलवे अवसंरचना | तकनीकी सहयोग और बुनियादी ढाँचा विकास में साझेदारी के नए रास्ते खोलना। |
| आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) में फिलीपींस का शामिल होना | आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना। |
| ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी | बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देना। |
महत्व
सामरिक महत्व
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति (Act East Policy) के तहत फिलीपींस एक महत्वपूर्ण भागीदार है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की उपस्थिति को मजबूत करता है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर, दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
- आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure – CDRI) में फिलीपींस का शामिल होना जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देता है।
आर्थिक महत्व
- व्यापार और निवेश में वृद्धि से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, जिससे व्यापार संतुलन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- फिनटेक (Fintech), शिक्षा, पर्यटन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग से नई आर्थिक संभावनाएँ खुलेंगी और ज्ञान-साझाकरण बढ़ेगा।
- रेलवे अवसंरचना में सहयोग से फिलीपींस में बुनियादी ढाँचे के विकास में भारत की विशेषज्ञता का लाभ उठाया जा सकता है, जो भारत के लिए निवेश के अवसर भी पैदा करेगा।
बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग
- ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में फिलीपींस के राष्ट्रपति की भागीदारी बहुपक्षीय मंचों पर भारत और फिलीपींस के बीच समन्वय को दर्शाती है।
- आसियान (ASEAN) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में फिलीपींस की भूमिका भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।
- दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में सहायक है।
चुनौतियाँ
1. भू-राजनीतिक जटिलताएँ
- दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद दोनों देशों के लिए संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर सावधानीपूर्वक संतुलन बनाने की आवश्यकता है।
- प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है, जिससे भारत और फिलीपींस को अपनी विदेश नीति में सतर्कता बरतनी होगी।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत और उसके पड़ोसी-संबंध
2. आर्थिक एकीकरण में बाधाएँ
- व्यापार बाधाएँ और निवेश के लिए नियामक चुनौतियाँ आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता का दोहन करने में बाधा डाल सकती हैं।
- बुनियादी ढाँचे के विकास और तकनीकी हस्तांतरण में वित्तपोषण और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियाँ आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास
3. क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- रक्षा, अंतरिक्ष और फिनटेक जैसे उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग के लिए क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एक चुनौती हो सकती है।
- दोनों देशों के बीच तकनीकी मानकों और नियामक ढाँचों में सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक होगा।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| दक्षिण चीन सागर विवाद | क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री अधिकारों पर प्रभाव, जिससे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। |
| व्यापार असंतुलन | यदि व्यापार और निवेश के अवसर समान रूप से वितरित नहीं होते हैं, तो यह आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। |
| बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का वित्तपोषण | बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है। |
| साइबर सुरक्षा | डिजिटल सहयोग बढ़ने के साथ, साइबर हमलों और डेटा उल्लंघनों का जोखिम बढ़ जाता है। |
| आपदा लचीलापन | जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रभावी समन्वय और संसाधन जुटाना। |
आगे की राह
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, जिसमें समुद्री डोमेन जागरूकता और संयुक्त अभ्यास शामिल हैं।
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए व्यापार बाधाओं को कम करना और निवेश के अनुकूल माहौल बनाना।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, फिनटेक और रेलवे अवसंरचना जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के लिए विशिष्ट परियोजनाओं की पहचान करना।
- आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) के तहत सहयोग को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाना और ज्ञान-साझाकरण करना।
- शिक्षा, पर्यटन और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना।
- बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स और आसियान में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण और समन्वय को मजबूत करना।
- नियमित उच्च-स्तरीय संवाद और संस्थागत तंत्रों के माध्यम से रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत-फिलीपींस संबंध · एक्ट ईस्ट नीति · रणनीतिक साझेदारी · रक्षा सहयोग · व्यापार और निवेश · आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन · आसियान · BRICS शिखर सम्मेलन · हिंद-प्रशांत क्षेत्र · बहुपक्षीय कूटनीति
अवधारणा प्रवाह
भारत और फिलीपींस के नेताओं की बैठक → द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति → रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष, फिनटेक आदि क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार → रणनीतिक साझेदारी का सुदृढ़ीकरण → क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. BRICS शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।
2. फिलीपींस BRICS का पूर्ण सदस्य है।
3. आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) का उद्देश्य जलवायु और आपदा जोखिमों के लिए नई और मौजूदा अवसंरचना प्रणालियों के लचीलेपन को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि BRICS शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि फिलीपींस BRICS का पूर्ण सदस्य नहीं है, बल्कि एक भागीदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया था। कथन 3 सही है क्योंकि CDRI का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना को बढ़ावा देना है।
Q2. भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह नीति केवल आर्थिक सहयोग पर केंद्रित है।
- यह नीति 1990 के दशक में ‘लुक ईस्ट नीति’ के रूप में शुरू हुई थी।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य पश्चिमी एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना है।
- यह नीति रक्षा और सुरक्षा सहयोग को शामिल नहीं करती है।
उत्तर: यह नीति 1990 के दशक में ‘लुक ईस्ट नीति’ के रूप में शुरू हुई थी। — भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ 1990 के दशक में ‘लुक ईस्ट नीति’ के रूप में शुरू हुई थी, जिसे बाद में 2014 में ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में अपग्रेड किया गया। यह नीति केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रणनीतिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग भी शामिल है, और इसका ध्यान दक्षिण-पूर्व एशियाई और पूर्वी एशियाई देशों पर है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में फिलीपींस के साथ रणनीतिक साझेदारी के महत्व का विश्लेषण कीजिए। इस साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रमुख क्षेत्रों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का संक्षिप्त परिचय और फिलीपींस के साथ इसके महत्व का उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में फिलीपींस का महत्व: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसकी भू-रणनीतिक स्थिति, आसियान (ASEAN) में इसकी भूमिका, समुद्री सुरक्षा में सहयोग की आवश्यकता।
2. रणनीतिक साझेदारी के आयाम: अगस्त 2025 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख, रक्षा और सुरक्षा सहयोग (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल समझौता), व्यापार और निवेश, अंतरिक्ष, रेलवे अवसंरचना, फिनटेक, शिक्षा, पर्यटन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों से लोगों के बीच संबंध।
3. क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे: दक्षिण चीन सागर विवाद में भारत का रुख, बहुपक्षीय मंचों (जैसे BRICS, आसियान) पर सहयोग।
4. आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) में फिलीपींस का शामिल होना और इसका महत्व।
निष्कर्ष: भारत-फिलीपींस संबंधों के भविष्य की संभावनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता एवं समृद्धि में इसकी भूमिका का सारांश।
स्रोत: orissapost.com
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