पीएम मोदी ने पीएमएफएमई योजना से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया

पीएम मोदी ने पीएमएफएमई योजना से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोजगार
  • Prelims: प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, उद्यमिता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, एक जिला एक उत्पाद (ODOP)
  • Essay: ग्रामीण भारत में उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण: एक विकास इंजन के रूप में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की भूमिका: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को औपचारिक बनाने, उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय, तकनीकी और बाजार संबंधी सहायता प्रदान करती है, विशेषकर ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) दृष्टिकोण के माध्यम से।

यह खबर चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान द्वारा लिखे एक लेख को साझा किया है। इस लेख में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है, जो कम लागत, प्रौद्योगिकी, ब्रांडिंग और बाजार संपर्कों के माध्यम से सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सुव्यवस्थित कर रही है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह योजना जमीनी स्तर पर उद्यमिता, विशेषकर महिलाओं के बीच, को बढ़ावा दे रही है, जिससे स्थानीय उत्पादक रोजगार सृजनकर्ता बन रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है, जो कृषि उपज के मूल्यवर्धन, किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन में सहायक है।
  • सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ (Micro Food Processing Units) भारतीय खाद्य प्रसंस्करण परिदृश्य का एक बड़ा हिस्सा हैं, जिनमें से अधिकांश असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं और आधुनिक तकनीक, वित्त तथा बाजार तक पहुंच की कमी का सामना कर रही हैं।
  • कोविड-19 महामारी के बाद ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय उत्पादों और उद्योगों को समर्थन देने की आवश्यकता महसूस की गई।
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (Ministry of Food Processing Industries) देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों को लागू करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देना और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक रहा है।
  • भारत में कृषि उत्पादों की विविधता और प्रचुरता सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती है, बशर्ते उन्हें उचित सहायता और संरचनात्मक सहायता मिले।
  • इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को औपचारिक बनाना और उन्हें प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करना है।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) क्या है?

  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था।
  • इसका उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करके असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को औपचारिक बनाना है।
  • यह योजना ‘एक जिला एक उत्पाद’ (One District One Product – ODOP) दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसके तहत जिलों में विशिष्ट खाद्य उत्पादों को बढ़ावा दिया जाता है।
  • योजना के तहत, व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को पात्र परियोजना लागत के 35 प्रतिशत की दर से क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये प्रति इकाई है।
  • इसमें स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups – SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organizations – FPOs) और सहकारी समितियों को भी पूंजी निवेश, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
  • योजना का लक्ष्य इन इकाइयों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार संपर्कों तक पहुंच प्रदान करके उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और आय में वृद्धि करना है।
  • यह योजना विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है, जिससे जमीनी स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  • इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण को बढ़ावा देना भी है, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद मिल सकें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कृषि उत्पादों को मूल्य संवर्धित वस्तुओं में परिवर्तित करता है।
उद्यमिता को बढ़ावा विशेषकर महिलाओं के बीच जमीनी स्तर पर नए उद्यमों की स्थापना को प्रोत्साहित करता है, जिससे स्वरोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
कम लागत वित्त छोटे उद्यमियों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराता है, जिससे वे अपने व्यवसाय शुरू या विस्तारित कर सकें।
प्रौद्योगिकी का उपयोग आधुनिक तकनीकों और उपकरणों तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में सुधार होता है।
ब्रांडिंग और बाजार संपर्क स्थानीय उत्पादों को बेहतर ब्रांडिंग और व्यापक बाजार तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उनकी बिक्री और लाभप्रदता बढ़ती है।
औपचारिकीकरण (Formalisation) असंगठित सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक क्षेत्र में लाने में मदद करता है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता का लाभ मिल सके।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है और कृषि आय में वृद्धि करता है, जिससे किसानों की स्थिति में सुधार होता है।
  • सूक्ष्म उद्यमों के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होते हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी कम होती है।
  • खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मूल्य संवर्धन (Value Addition) से उत्पादों की शेल्फ-लाइफ बढ़ती है और अपव्यय कम होता है।

सामाजिक महत्व

  • महिलाओं को उद्यमिता के अवसर प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है और लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है।
  • स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाकर क्षेत्रीय विशिष्टताओं और पारंपरिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों को संरक्षित करता है।

शासनिक महत्व

  • सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन से जमीनी स्तर पर विकास सुनिश्चित होता है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  • असंगठित क्षेत्र के उद्यमों को औपचारिक ढांचे में लाकर उन्हें नियामक लाभ और वित्तीय सहायता तक पहुंच प्रदान करता है।

चुनौतियाँ

1. वित्त तक पहुंच का अभाव

  • सूक्ष्म उद्यमियों के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करना अक्सर मुश्किल होता है, खासकर जब उनके पास पर्याप्त संपार्श्विक (Collateral) न हो।
  • वित्तीय साक्षरता की कमी भी छोटे उद्यमियों को उपलब्ध वित्तीय योजनाओं का लाभ उठाने से रोकती है।

2. प्रौद्योगिकी और कौशल की कमी

  • कई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ पुरानी तकनीकों का उपयोग करती हैं, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और दक्षता प्रभावित होती है।
  • आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों और खाद्य सुरक्षा मानकों के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण का अभाव एक बड़ी चुनौती है।

3. बाजार संपर्क और ब्रांडिंग की समस्या

  • छोटे उत्पादकों के पास अपने उत्पादों के लिए बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने और प्रभावी ब्रांडिंग करने के सीमित साधन होते हैं।
  • प्रतिस्पर्धात्मक माहौल में बड़े ब्रांडों के सामने अपने उत्पादों को स्थापित करना कठिन होता है।

4. नियामक और अनुपालन बोझ

  • खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों से संबंधित विभिन्न नियमों का पालन करना सूक्ष्म उद्यमियों के लिए जटिल और महंगा हो सकता है।
  • असंगठित क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में आने पर उन्हें कई कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पूंजी की कमी छोटे व्यवसायों के लिए विस्तार और आधुनिकीकरण हेतु पर्याप्त धन जुटाना मुश्किल।
तकनीकी पिछड़ापन उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए आधुनिक मशीनों और प्रक्रियाओं का अभाव।
गुणवत्ता नियंत्रण खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन न कर पाने से उत्पादों की विश्वसनीयता पर असर।
प्रशिक्षण का अभाव उद्यमियों और श्रमिकों में प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन कौशल की कमी।
बाजार पहुंच स्थानीय उत्पादों को बड़े शहरी बाजारों और निर्यात अवसरों तक ले जाने में कठिनाई।
संगठन का अभाव असंगठित क्षेत्र के कारण सरकारी योजनाओं और संस्थागत समर्थन का पूरा लाभ न मिल पाना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME)

आगे की राह

  • सूक्ष्म उद्यमियों को आसान और सस्ती दरों पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए विशेष वित्तीय उत्पादों का विकास करना।
  • खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • खाद्य सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन के लिए सामूहिक मंच (जैसे स्वयं सहायता समूह या किसान उत्पादक संगठन) को बढ़ावा देना।
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमियों को व्यापक बाजार से जोड़ना।
  • महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को विशेष प्रोत्साहन और प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी भागीदारी बढ़ाना।
  • प्रसंस्करण इकाइयों के लिए एक सरल और पारदर्शी नियामक ढांचा तैयार करना ताकि अनुपालन बोझ कम हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) · खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र · सूक्ष्म उद्यम · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · उद्यमिता · महिला सशक्तिकरण · आत्मनिर्भर भारत · कम लागत वित्त · प्रौद्योगिकी उन्नयन · बाजार संपर्क

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39 (क)’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक हितों को बढ़ावा’}

अवधारणा प्रवाह

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) का कार्यान्वयन  →  सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण और सशक्तिकरण  →  कम लागत वित्त, प्रौद्योगिकी, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क प्रदान करना  →  स्थानीय उत्पादकों का रोजगार सृजनकर्ता बनना  →  ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ होना  →  आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन पर केंद्रित है।
2. इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी और बाजार संपर्क प्रदान करके उन्हें औपचारिक बनाना है।
3. यह विशेष रूप से महिला उद्यमियों के बीच जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने पर बल देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि PMFME योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का उन्नयन करना है। कथन 2 सही है, क्योंकि यह योजना कम लागत वाले वित्त, प्रौद्योगिकी, ब्रांडिंग और बाजार संपर्कों के माध्यम से उद्यमों को औपचारिक बनाने में मदद करती है। कथन 3 भी सही है, क्योंकि यह जमीनी स्तर पर, विशेषकर महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है।

Q2. भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन में सहायक है।
2. यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. यह किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य अपशिष्ट को कम करने में योगदान देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी कथन सही हैं। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि उत्पादों को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करके किसानों की आय बढ़ाता है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करता है। साथ ही, यह कटाई के बाद के नुकसान को कम करके खाद्य अपशिष्ट को कम करने में भी मदद करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में किस प्रकार सहायक है? चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, PMFME योजना के मुख्य उद्देश्यों और घटकों का संक्षेप में उल्लेख करें। इसके बाद, विस्तार से बताएं कि यह योजना कैसे सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को औपचारिक बनाने, उन्हें वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी और बाजार संपर्क प्रदान करने में मदद करती है। दूसरे भाग में, इन प्रयासों का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों, जैसे रोजगार सृजन, किसानों की आय में वृद्धि, महिला उद्यमिता को बढ़ावा और खाद्य अपशिष्ट में कमी पर चर्चा करें। अंत में, इन सभी कारकों को आत्मनिर्भर भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़ते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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