28 Jul पीएलआई-ऑटो योजना: भारत में ऑटो उद्योग को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहल


मानचित्र व माइंड-मैप: PLI-Auto Scheme in India
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology) | GS Paper III — अवसंरचना (Infrastructure)
- Prelims: पीएलआई-ऑटो योजना, उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT), घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA), उन्नत रसायन शास्त्र सेल (ACC) बैटरी पीएलआई, पीएम ई-ड्राइव योजना, कैपिटल गुड्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता
- Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, भारत में तकनीकी नवाचार और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने में सरकारी नीतियां
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएलआई-ऑटो योजना भारत में उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों के घरेलू विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (पीएलआई-ऑटो) की प्रगति और अन्य संबंधित योजनाओं की जानकारी साझा की है। यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं की शुरुआत की है।
- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग भारत के प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में से एक है, जो देश की GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है और बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करता है।
- उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और उनके घटकों के विनिर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
- इन योजनाओं का उद्देश्य वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना और देश को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
- अनुसंधान और विकास (R&D) पर जोर देकर, सरकार नवीनतम तकनीकों को अपनाने और नवाचार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रख रही है।
- ये योजनाएं ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक अभिन्न अंग हैं, जिसका उद्देश्य विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को बढ़ाना है।
भारत में ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (पीएलआई-ऑटो) क्या है?
- यह योजना 23 सितंबर, 2021 को ₹25,938 करोड़ के बजटीय व्यय के साथ अनुमोदित की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है।
- यह योजना न्यूनतम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) सहित AAT उत्पादों के विनिर्माण पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- इसका लक्ष्य ऑटोमोटिव विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में निवेश को आकर्षित करना है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि हो सके।
- 31 मार्च, 2026 तक इस योजना ने ₹44,326 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है और 67,820 रोजगार उत्पन्न किए हैं।
- लाभार्थी कंपनियों द्वारा अनुसंधान और विकास (R&D) पर किए गए खर्च को निवेश मानदंडों को पूरा करने की अनुमति दी गई है, जिससे वे अपनी परियोजनाओं में नवीनतम तकनीक को शामिल कर सकें।
- यह योजना भारत को उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- इसका उद्देश्य स्वच्छ गतिशीलता समाधानों को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना भी है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों पर केंद्रित | इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) सहित भविष्य की प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देता है। |
| न्यूनतम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) की शर्त | घरेलू विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करता है, आयात पर निर्भरता कम करता है। |
| ₹25,938 करोड़ का बजटीय परिव्यय | योजना के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता। |
| 31.03.2026 तक ₹44,326 करोड़ का निवेश आकर्षित | योजना की सफलता और उद्योग में विश्वास का प्रमाण। |
| 67,820 रोजगारों का सृजन | प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसरों में वृद्धि। |
| अनुसंधान और विकास (R&D) खर्च को निवेश मानदंडों में शामिल करना | नवीनतम तकनीक अपनाने और नवाचार को प्रोत्साहित करता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन: यह योजना भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट के उत्पादन को बढ़ावा देती है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलती है।
- निवेश आकर्षित करना: इसने महत्वपूर्ण घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित किया है, जो इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है।
- रोजगार सृजन: योजना के तहत बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, जिससे बेरोजगारी कम करने में मदद मिलती है।
- निर्यात क्षमता में वृद्धि: उन्नत प्रौद्योगिकी उत्पादों के घरेलू उत्पादन से भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक ऑटोमोटिव बाजार में इसकी हिस्सेदारी बढ़ेगी।
रणनीतिक महत्व
- आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: घरेलू मूल्य संवर्धन पर जोर देकर, यह योजना महत्वपूर्ण ऑटोमोटिव घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम करती है, जिससे रणनीतिक आत्मनिर्भरता प्राप्त होती है।
- तकनीकी उन्नयन: अनुसंधान और विकास पर खर्च को प्रोत्साहन देकर, यह भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को नवीनतम तकनीकों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत बैटरी प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बनाता है।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति: उन्नत विनिर्माण क्षमताओं के विकास से भारत वैश्विक ऑटोमोटिव आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
सामाजिक महत्व
- कौशल विकास: नए विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कौशल विकास और प्रशिक्षण की आवश्यकता को बढ़ाएंगे।
- जीवन स्तर में सुधार: रोजगार सृजन और आर्थिक विकास से लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
पर्यावरणीय महत्व
- हरित गतिशीलता को बढ़ावा: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के विनिर्माण पर जोर देने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा मिलेगा।
- उन्नत रसायन शास्त्र सेल (ACC) बैटरी उत्पादन: ACC बैटरी के घरेलू उत्पादन से EV इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी अंतराल और नवाचार
- भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को अभी भी उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों (AAT) के कुछ क्षेत्रों में वैश्विक मानकों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास की आवश्यकता है।
- विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर निवेश और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ
2. घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का विकास
- 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का विकास आवश्यक है, जिसमें छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
- गुणवत्ता नियंत्रण और लागत-प्रभावशीलता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: औद्योगिक नीति, विनिर्माण क्षेत्र
3. कौशल विकास और मानव संसाधन
- उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से EV और बैटरी विनिर्माण के लिए विशेष कौशल वाले कार्यबल की आवश्यकता है।
- मौजूदा कार्यबल को पुनः कौशल प्रदान करना और नए कौशल विकसित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
4. बुनियादी ढांचा और चार्जिंग नेटवर्क
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए एक मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों का विकास आवश्यक है।
- यह चुनौती विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अधिक है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, ऊर्जा
5. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
- भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को वैश्विक खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिनके पास उन्नत तकनीक, बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं और स्थापित ब्रांड हैं।
- लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना और गुणवत्ता में सुधार करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी उन्नयन की गति | वैश्विक नवाचारों के साथ तालमेल बिठाना और स्वदेशी R&D को बढ़ावा देना। |
| घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) लक्ष्य | गुणवत्ता और लागत प्रभावी घरेलू घटकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| कौशल अंतराल | उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए प्रशिक्षित कार्यबल की कमी। |
| बुनियादी ढांचा | EV चार्जिंग नेटवर्क और संबंधित सुविधाओं का धीमा विकास। |
| निवेश का निरंतर प्रवाह | योजना की अवधि के बाद भी निवेश को बनाए रखना। |
| वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटके | भू-राजनीतिक तनाव या महामारी जैसी स्थितियों से आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (पीएलआई-ऑटो)
- उन्नत रसायन शास्त्र सेल (एसीसी) बैटरी स्टोरेज पर राष्ट्रीय कार्यक्रम हेतु उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना
- पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना
- भारतीय कैपिटल गुड्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना – चरण-II
आगे की राह
- अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश को और बढ़ाना, विशेष रूप से बैटरी प्रौद्योगिकी, स्वायत्त ड्राइविंग और कनेक्टेड वाहनों जैसे क्षेत्रों में।
- घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए MSMEs को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना, जिससे 50% DVA लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सके।
- उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक कौशल वाले कार्यबल को तैयार करने हेतु शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी में कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क के विकास में तेजी लाना, विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को प्रोत्साहित करना ताकि नवीनतम प्रौद्योगिकियों और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जा सके।
- नियामक ढांचे को सरल और पारदर्शी बनाना ताकि निवेश को और आकर्षित किया जा सके तथा व्यापार करने में आसानी हो।
- योजना के प्रदर्शन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना, ताकि आवश्यकतानुसार सुधार और समायोजन किए जा सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना · उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) · घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) · उन्नत रसायन शास्त्र सेल (एसीसी) बैटरी · पीएम ई-ड्राइव योजना · कैपिटल गुड्स क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता · आत्मनिर्भर भारत · विनिर्माण इकोसिस्टम · अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) · उद्योग 4.0
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(g)’, ‘note’: ‘व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(b) और (c)’, ‘note’: ‘संसाधनों का समान वितरण, धन का संकेंद्रण रोकना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा PLI-ऑटो योजना की घोषणा (₹25,938 करोड़) → उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों के विनिर्माण को प्रोत्साहन → घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) और R&D पर जोर → निवेश आकर्षित होता है और रोजगार सृजित होते हैं → घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि और तकनीकी उन्नयन → आत्मनिर्भरता, निर्यात वृद्धि और हरित गतिशीलता को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत में ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (पीएलआई-ऑटो) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
2. यह योजना न्यूनतम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) के साथ एएटी उत्पादों के विनिर्माण पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
3. इस योजना के तहत अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) पर किए गए खर्च को निवेश मानदंडों को पूरा करने की अनुमति नहीं दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह योजना न्यूनतम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) के साथ एएटी उत्पादों के विनिर्माण पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। कथन 3 गलत है क्योंकि इस योजना के तहत लाभार्थी कंपनियों द्वारा अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) पर किए गए खर्च को निवेश मानदंडों को पूरा करने की अनुमति दी गई है।
Q2. उन्नत रसायन शास्त्र सेल (एसीसी) बैटरी स्टोरेज पर राष्ट्रीय कार्यक्रम हेतु उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
1. देश में एसीसी बैटरियों के लिए एक प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम स्थापित करना।
2. 50 GWH एसीसी बैटरियों की क्षमता प्राप्त करना।
3. केवल विदेशी कंपनियों को भारत में एसीसी विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का उद्देश्य देश में एसीसी बैटरियों के लिए एक प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम स्थापित करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि इसका लक्ष्य 50 GWH एसीसी बैटरियों की क्षमता प्राप्त करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है, न कि केवल विदेशी कंपनियों को प्रोत्साहित करना।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और प्रौद्योगिकी उन्नयन को प्रोत्साहित करना है। इस कथन के आलोक में, पीएलआई-ऑटो योजना के प्रमुख उद्देश्यों, इसके द्वारा आकर्षित निवेश और रोजगार सृजन पर चर्चा कीजिए। साथ ही, उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों के विनिर्माण में इसके महत्व का विश्लेषण कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में पीएलआई-ऑटो योजना के उद्देश्यों को स्पष्ट करें, जिसमें उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों का विनिर्माण और घरेलू मूल्य संवर्धन शामिल है। दूसरे भाग में, योजना द्वारा आकर्षित निवेश और सृजित रोजगार के आंकड़ों का उल्लेख करें। अंत में, एएटी उत्पादों के विनिर्माण में इस योजना के महत्व पर प्रकाश डालें, जिसमें आत्मनिर्भरता, निर्यात क्षमता और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना शामिल है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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