28 Jul पीएलआई-ऑटो योजना: सरकार ने 25,938 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी, जानिए पूरी डिटेल्स
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित विषय | GS Paper III — विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और औद्योगिक नीति
- Prelims: PLI योजना, ऑटोमोबाइल उद्योग, उन्नत ऑटोमोटिव उत्पाद (AAT), भारी उद्योग मंत्रालय, सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट, पीएम ई-ड्राइव योजना
- Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन में सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: PLI-ऑटो योजना ₹25,938 करोड़ के बजटीय व्यय के साथ भारत में उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सरकार ने भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (PLI-ऑटो) की प्रगति की जानकारी साझा की है। इस योजना को 23 सितंबर, 2021 को ₹25,938 करोड़ के बजटीय व्यय के साथ उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से मंजूरी दी गई थी। 31 मार्च, 2026 तक, स्वीकृत आवेदकों ने ₹42,500 करोड़ के निवेश लक्ष्य के मुकाबले ₹44,326 करोड़ के निवेश की सूचना दी है, जो योजना की सफलता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना शुरू की है।
- PLI योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्माताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, निवेश आकर्षित करना, निर्यात बढ़ाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।
- ऑटोमोबाइल उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक है, जो GDP में महत्वपूर्ण योगदान देता है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
- उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) में इलेक्ट्रिक वाहन (EV), हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन और उनके घटक शामिल हैं, जो भविष्य की गतिशीलता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- यह योजना भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- PLI-ऑटो योजना का क्रियान्वयन भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) द्वारा किया जा रहा है।
ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए PLI योजना (PLI-ऑटो) क्या है?
- PLI-ऑटो योजना का उद्देश्य भारत में उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
- इस योजना के तहत, पात्र निर्माताओं को भारत में निर्मित उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों की बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
- योजना का कुल बजटीय परिव्यय ₹25,938 करोड़ है, जिसे पांच वर्षों की अवधि में वितरित किया जाएगा।
- यह योजना दो घटकों में विभाजित है: चैंपियन OEM प्रोत्साहन योजना (बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहनों के निर्माताओं के लिए) और कंपोनेंट चैंपियन प्रोत्साहन योजना (उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी घटकों के निर्माताओं के लिए)।
- इसका लक्ष्य नए निवेश को आकर्षित करना, अत्याधुनिक तकनीक को अपनाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।
- योजना के तहत, सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (Sintered Rare Earth Permanent Magnets) के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के महत्वपूर्ण घटक हैं।
- यह योजना भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में सहायक होगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बजटीय परिव्यय | ₹25,938 करोड़ का बजटीय व्यय ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करेगा। |
| लक्ष्य | उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना। |
| निवेश लक्ष्य बनाम प्राप्त | ₹42,500 करोड़ के निवेश लक्ष्य के मुकाबले ₹44,326 करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ, जो योजना की सफलता को दर्शाता है। |
| सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट | इसके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव का अनुरोध (RFP) प्रकाशित किया गया है, जो महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा। |
| पीएम ई-ड्राइव योजना | ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए ₹780 करोड़ का प्रावधान, जिससे गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में सुधार होगा। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना ऑटोमोबाइल क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देती है, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को बल मिलता है।
- उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के उत्पादन से भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है, निर्यात को बढ़ावा दे सकता है।
- भारी निवेश और उत्पादन से रोजगार सृजन होगा, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
सामरिक महत्व
- महत्वपूर्ण ऑटो कंपोनेंट जैसे सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम होगी।
- ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन से उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा।
तकनीकी महत्व
- उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों को अपनाने और विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगा।
- ई-मोबिलिटी और अन्य भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और क्षमताओं का विकास होगा।
चुनौतियाँ
1. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
- भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को वैश्विक दिग्गजों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, खासकर उन्नत प्रौद्योगिकियों में।
- अंतर्राष्ट्रीय मानकों और गुणवत्ता अपेक्षाओं को पूरा करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, उद्योग और व्यापार
2. कौशल विकास
- उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के निर्माण और रखरखाव के लिए उच्च कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी एक बाधा हो सकती है।
- नई प्रौद्योगिकियों के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना एक सतत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
3. अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश
- भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास पर पर्याप्त निवेश की कमी है, जिससे नवाचार धीमा हो सकता है।
- नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर और निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार
4. बुनियादी ढांचा
- उन्नत विनिर्माण इकाइयों और परीक्षण सुविधाओं के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है, जिसमें लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा आपूर्ति शामिल है।
- परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए पर्याप्त पूंजी और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा, औद्योगिक विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी उन्नयन | तेजी से बदलती ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाना और घरेलू क्षमताओं का निर्माण करना। |
| आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन | महत्वपूर्ण घटकों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना। |
| पर्यावरण मानक | उत्पादन प्रक्रियाओं और उत्पादों को सख्त पर्यावरणीय मानदंडों के अनुरूप बनाना। |
| नीतिगत स्थिरता | दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए स्थिर और अनुमानित नीतिगत ढांचा सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए)
आगे की राह
- घरेलू अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देना ताकि उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना ताकि उद्योग की बढ़ती तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन लाने और महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना।
- ई-मोबिलिटी और वैकल्पिक ईंधन प्रौद्योगिकियों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
- ऑटोमोटिव परीक्षण और प्रमाणन एजेंसियों की क्षमताओं को और उन्नत करना ताकि वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा किया जा सके।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को उन्नत ऑटो कंपोनेंट विनिर्माण में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना।
- दीर्घकालिक और स्थिर नीतिगत ढांचा प्रदान करना ताकि निवेशकों का विश्वास बना रहे और निरंतर निवेश आकर्षित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना · ऑटोमोबाइल उद्योग · ऑटो कंपोनेंट उद्योग · उन्नत ऑटोमोटिव उत्पाद (AAT) · विनिर्माण क्षमता · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · इलेक्ट्रिक वाहन · हरित गतिशीलता · आर्थिक संवृद्धि · रोजगार सृजन · निर्यात प्रोत्साहन
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा PLI-ऑटो योजना की मंजूरी → ₹25,938 करोड़ का बजटीय व्यय → उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों के निर्माण में निवेश और क्षमता वृद्धि → सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट जैसे महत्वपूर्ण घटकों का घरेलू उत्पादन → ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन (पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत) → भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग का विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना-ऑटो के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है।
2. यह योजना केवल पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।
3. योजना के तहत स्वीकृत आवेदकों ने निर्धारित निवेश लक्ष्य को पार कर लिया है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि PLI-ऑटो योजना का लक्ष्य उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना विशेष रूप से उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों को बढ़ावा देती है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य हरित प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, न कि केवल पारंपरिक ईंधन वाले वाहन। कथन 3 सही है क्योंकि स्वीकृत आवेदकों ने 31.03.2027 तक के ₹42,500 करोड़ के निवेश लक्ष्य के मुकाबले ₹44,326 करोड़ के निवेश की सूचना दी है।
Q2. भारत सरकार की ‘पीएम ई-ड्राइव योजना’ का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए उपभोक्ताओं को सब्सिडी प्रदान करना।
- ऑटोमोबाइल उद्योग में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
- ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान प्रदान करना।
- इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना।
उत्तर: ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान प्रदान करना। — पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत, ऑटोमोटिव परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान के रूप में ₹780 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में वाहन परीक्षण सुविधाओं को मजबूत करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना-ऑटो का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इस कथन के आलोक में, योजना के प्रमुख उद्देश्यों, अब तक की इसकी उपलब्धियों और भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर इसके संभावित प्रभावों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में PLI-ऑटो योजना के प्रमुख उद्देश्यों को रेखांकित करें, जैसे उन्नत ऑटोमोटिव उत्पादों (AAT) का विनिर्माण, आयात कम करना, निर्यात बढ़ाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी सुनिश्चित करना। दूसरे भाग में, योजना की अब तक की उपलब्धियों पर प्रकाश डालें, विशेष रूप से निवेश लक्ष्य को पार करने और सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट जैसे महत्वपूर्ण घटकों के उत्पादन को बढ़ावा देने का उल्लेख करें। अंत में, भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें, जिसमें रोजगार सृजन, आर्थिक संवृद्धि, तकनीकी उन्नयन, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देना तथा हरित गतिशीलता की दिशा में बदलाव शामिल है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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