24 Sep पूर्वी दिल्ली में दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 2 फुट-ओवर ब्रिज की आधारशिला रखी गई
✎ दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे पर फुट-ओवर ब्रिज का निर्माण और सौर पैनलों का एकीकरण आधुनिक, नागरिक-केंद्रित और सतत बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (शहरीकरण, बुनियादी ढाँचा) | GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, नागरिक-केंद्रित प्रशासन) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा, सतत विकास)
- Prelims: दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे, फुट-ओवर ब्रिज (FOB), राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-709B), सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, बुनियादी ढाँचा विकास, नागरिक-केंद्रित शहरी नियोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, नेट ज़ीरो लक्ष्य
- Essay: आधुनिक बुनियादी ढाँचा और जीवन की सुगमता: भारत के विकास में योगदान, शहरीकरण की चुनौतियाँ और सतत समाधान: जन सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता
त्वरित पुनरावृत्ति: दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे पर फुट-ओवर ब्रिज का निर्माण और सौर पैनलों का एकीकरण आधुनिक, नागरिक-केंद्रित और सतत बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, कॉर्पोरेट कार्य और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने पूर्वी दिल्ली में दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-709B) पर दो फुट-ओवर ब्रिज (FOB) की आधारशिला रखी। ये फुट-ओवर ब्रिज पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सुगमता और आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिफ्ट सुविधाओं से सुसज्जित होंगे। इस पहल में भजनपुरा, गढ़ी मेंडू के पास एक और फुट-ओवर ब्रिज को भी मंजूरी दी गई है, जो कुल 12.8 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगे।
पृष्ठभूमि
- दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना है, जिसका उद्देश्य दिल्ली और देहरादून के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
- इस एक्सप्रेसवे का दिल्ली खंड घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की आवश्यकता बढ़ जाती है।
- भारत सरकार देश भर में आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बुनियादी ढाँचे के विकास पर जोर दे रही है, जिसमें सड़क नेटवर्क का विस्तार और सुधार शामिल है।
- सड़क सुरक्षा भारत में एक प्रमुख चिंता का विषय है, और पैदल यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में अब पर्यावरण स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जैसा कि इस एक्सप्रेसवे पर सौर पैनल लगाने की योजना से स्पष्ट है।
- यह परियोजना ‘विकसित भारत@2047’ के विजन के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य देश को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसमें आधुनिक बुनियादी ढाँचा और नागरिकों के लिए जीवन की सुगमता शामिल है।
दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे और संबंधित पहलें
- दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे (NH-709B) एक प्रमुख सड़क परियोजना है जो राष्ट्रीय राजधानी को देहरादून से जोड़ती है, जिससे यात्रा का समय कम होता है और कनेक्टिविटी बढ़ती है।
- पूर्वी दिल्ली में गीता कॉलोनी/गांधी नगर और रमेश पार्क, लक्ष्मी नगर में दो फुट-ओवर ब्रिज की आधारशिला रखी गई है, जबकि भजनपुरा, गढ़ी मेंडू के पास एक तीसरे FOB को मंजूरी मिली है।
- इन फुट-ओवर ब्रिज को लिफ्ट सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों, छात्रों और अन्य पैदल यात्रियों के लिए पहुंच आसान और सुरक्षित होगी।
- ये FOB पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच दुर्घटनाओं की आशंका को कम करेंगे, जिससे वाहनों का आवागमन भी निर्बाध रहेगा।
- एक्सप्रेसवे के दिल्ली खंड के एलिवेटेड हिस्से के नीचे पार्किंग सुविधाओं का निर्माण शुरू हो गया है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और शौचालय जैसी सार्वजनिक सुविधाएँ भी शामिल होंगी।
- दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड हिस्से पर सौर पैनल लगाए जा रहे हैं, जो राजमार्ग संबंधी आवश्यकताओं के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करेंगे और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में योगदान देंगे।
- ये पहलें नागरिक-केंद्रित बुनियादी ढाँचे के विकास पर सरकार के फोकस को दर्शाती हैं, जो जीवन की सुगमता और सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता देती हैं।
- यह परियोजना भारत के 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे पर फुट-ओवर ब्रिज (FOB) | पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वाहनों के सुचारु आवागमन को बनाए रखना। |
| लिफ्ट सुविधाओं से लैस FOB | वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों, छात्रों और श्रमिकों सहित सभी पैदल यात्रियों के लिए सुगम पहुँच सुनिश्चित करना। |
| एक्सप्रेसवे के दिल्ली खंड के नीचे पार्किंग सुविधाएँ | एलिवेटेड कॉरिडोर के नीचे की जगह का बेहतर उपयोग, पार्किंग प्रबंधन में सुधार और सार्वजनिक सुविधाओं का प्रावधान। |
| सौर पैनलों की स्थापना | नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करना और सतत विकास लक्ष्यों में योगदान। |
| व्यापक सौंदर्यीकरण योजना | कॉरिडोर की समग्र सुंदरता बढ़ाना और स्थानीय निवासियों, व्यापारियों तथा दैनिक यात्रियों को लाभ पहुँचाना। |
महत्व
बुनियादी ढाँचा विकास
- यह पहल आधुनिक, नागरिक-केंद्रित बुनियादी ढांचे के निर्माण के दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य जीवन की सुगमता और सुरक्षित आवागमन में सुधार करना है।
- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे उच्च क्षमता वाले सड़क गलियारों का विकास भारत में परिवहन नेटवर्क को मजबूत करता है।
सामाजिक प्रभाव
- फुट-ओवर ब्रिज और लिफ्ट सुविधाएँ पैदल यात्रियों, विशेषकर कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा और सुविधा बढ़ाती हैं।
- यह पहल शहरी क्षेत्रों में पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने में सहायक है।
पर्यावरण और स्थिरता
- सौर पैनलों की स्थापना नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में योगदान करती है, जो भारत के 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्य के अनुरूप है।
- यह सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आर्थिक लाभ
- बेहतर बुनियादी ढाँचा और सुगम आवागमन आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है और व्यापार तथा वाणिज्य के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।
- पार्किंग सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे सकता है।
चुनौतियाँ
1. शहरी नियोजन और भूमि अधिग्रहण
- घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है।
- परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-I: शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके उपचार; सामान्य अध्ययन-II: सरकार की नीतियाँ और हस्तक्षेप
2. परियोजना कार्यान्वयन और लागत प्रबंधन
- बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में लागत में वृद्धि और समय पर पूरा न होने का जोखिम होता है।
- गुणवत्ता नियंत्रण और निर्माण मानकों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: अवसंरचना; निवेश मॉडल
3. पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
- शहरी क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं का स्थानीय पर्यावरण पर प्रभाव पड़ सकता है, जैसे वायु और ध्वनि प्रदूषण।
- पर्यावरणीय नियमों का पालन और शमन उपायों को लागू करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; पर्यावरण प्रभाव आकलन
4. रखरखाव और दीर्घकालिक स्थिरता
- निर्मित बुनियादी ढांचे का उचित रखरखाव और मरम्मत सुनिश्चित करना उसकी दीर्घकालिक उपयोगिता के लिए महत्वपूर्ण है।
- सौर पैनलों और लिफ्ट जैसी सुविधाओं के लिए नियमित रखरखाव की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| शहरी भीड़भाड़ | घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे का निर्माण और उसके आसपास की सुविधाओं का विकास यातायात प्रबंधन और स्थानीय निवासियों के लिए चुनौती पेश कर सकता है। |
| वित्तपोषण और संसाधन | बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए पर्याप्त और सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। |
| प्रौद्योगिकी एकीकरण | सौर पैनलों और लिफ्ट जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी एकीकरण और उनका रखरखाव सुनिश्चित करना। |
| सार्वजनिक-निजी भागीदारी | परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू करना और जोखिमों का प्रबंधन करना। |
आगे की राह
- शहरी नियोजन में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना, जिसमें परिवहन, आवास और पर्यावरण संबंधी पहलुओं को शामिल किया जाए।
- परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अत्याधुनिक तकनीक और निर्माण पद्धतियों का उपयोग करना ताकि दक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
- स्थानीय समुदायों के साथ प्रभावी जुड़ाव और उनकी आवश्यकताओं को परियोजना डिजाइन में शामिल करना।
- बुनियादी ढांचे के दीर्घकालिक रखरखाव और संचालन के लिए एक स्थायी वित्तपोषण मॉडल विकसित करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए और अधिक पहल करना, विशेषकर शहरी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में।
- परियोजनाओं के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन को मजबूत करना और शमन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बुनियादी ढांचा विकास · शहरी नियोजन · यातायात प्रबंधन · पैदल यात्री सुरक्षा · सार्वजनिक सुविधाएं · नवीकरणीय ऊर्जा · सतत विकास · जीवन की सुगमता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
अवधारणा प्रवाह
बुनियादी ढाँचा विकास की आवश्यकता (घनी आबादी वाले क्षेत्र) → दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण → पैदल यात्री सुरक्षा और आवागमन की चुनौतियाँ → फुट-ओवर ब्रिज और लिफ्ट सुविधाओं का निर्माण → सुरक्षित आवागमन, दुर्घटनाओं में कमी, सुगम पहुँच → पार्किंग, सौंदर्यीकरण और सौर पैनलों का एकीकरण → जीवन की सुगमता में सुधार और सतत विकास की ओर अग्रसर
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजमार्ग-709बी का एक हिस्सा है।
2. फुट-ओवर ब्रिज (FOB) का निर्माण केवल पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और इसमें लिफ्ट की सुविधा नहीं होती है।
3. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के दिल्ली खंड के एलिवेटेड हिस्से पर सौर पैनल लगाए जा रहे हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे को NH-709B के रूप में संदर्भित किया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि फुट-ओवर ब्रिज पैदल यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ लिफ्ट सुविधाओं से भी लैस होंगे। कथन 3 सही है क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एलिवेटेड हिस्से पर सौर पैनल लगाए जा रहे हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे पर फुट-ओवर ब्रिज के निर्माण के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक नहीं है?
- पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना।
- वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पहुंच में सुधार।
- वाहनों के आवागमन को निर्बाध बनाना।
- एक्सप्रेसवे के नीचे वाणिज्यिक दुकानों का निर्माण करना।
उत्तर: एक्सप्रेसवे के नीचे वाणिज्यिक दुकानों का निर्माण करना। — फुट-ओवर ब्रिज का मुख्य उद्देश्य पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सुगमता और आवागमन को बेहतर बनाना है, जिसमें लिफ्ट की सुविधा से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों को लाभ होगा। यह वाहनों के आवागमन को भी निर्बाध बनाएगा। एक्सप्रेसवे के नीचे पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन फुट-ओवर ब्रिज का प्राथमिक उद्देश्य वाणिज्यिक दुकानों का निर्माण नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में ‘जीवन की सुगमता’ और ‘सतत विकास’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: ‘जीवन की सुगमता’ (Ease of Living) और ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) की अवधारणाओं को परिभाषित करें और बताएं कि वे आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) की भूमिका: PPP मॉडल की विशेषताओं और इसके लाभों पर प्रकाश डालें, जैसे कि वित्तीय संसाधन जुटाना, तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग, परियोजना कार्यान्वयन में दक्षता और जोखिम साझाकरण।
जीवन की सुगमता में योगदान: बताएं कि कैसे PPP मॉडल के तहत निर्मित एक्सप्रेसवे, फुट-ओवर ब्रिज और अन्य शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं नागरिकों के लिए आवागमन को सुरक्षित, सुविधाजनक और कुशल बनाती हैं। उदाहरण के लिए, लिफ्ट सुविधाओं वाले FOB, पार्किंग समाधान और सार्वजनिक सुविधाएं।
सतत विकास में योगदान: चर्चा करें कि कैसे PPP परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर पैनल), हरित निर्माण सामग्री और पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइन के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देती हैं। ‘नेट ज़ीरो’ (Net Zero) लक्ष्य और कार्बन उत्सर्जन में कमी के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर बल दें।
चुनौतियाँ और समालोचना: PPP मॉडल से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण करें, जैसे कि परियोजना लागत में वृद्धि, पारदर्शिता की कमी, जोखिम आवंटन के मुद्दे, और सार्वजनिक हित बनाम निजी लाभ का संतुलन। कुछ मामलों में परियोजना में देरी या गुणवत्ता संबंधी चिंताओं का भी उल्लेख किया जा सकता है।
निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें PPP मॉडल की क्षमता और सीमाओं दोनों को स्वीकार किया जाए। भविष्य की परियोजनाओं के लिए सिफारिशें दें, जैसे कि बेहतर नियामक ढांचा, मजबूत निगरानी और हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय, ताकि ‘जीवन की सुगमता’ और ‘सतत विकास’ के लक्ष्यों को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Uttarakhand PCS (UKPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तराखंड में प्रस्तावित दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के हरिद्वार और देहरादून जिलों से होकर गुजरेगा। 2. इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) तक की यात्रा का समय घट जाएगा। 3. इस परियोजना में पूर्वी दिल्ली में दो फुट-ओवर ब्रिजों का निर्माण शामिल है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 असत्य है क्योंकि एक्सप्रेसवे हरिद्वार से होकर नहीं गुजरेगा। कथन 2 और 3 सत्य हैं।
Mains: उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के विकास से संबंधित चुनौतियों एवं अवसरों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य के आर्थिक विकास में इन बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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