26 Sep पेंशन भुगतान में विभाजन से बुजुर्गों को मुश्किल, अधिकार समूहों की चिंता
✎ सामाजिक सुरक्षा पेंशन के वितरण को दो भागों में विभाजित करने का प्रस्ताव दूरदराज के क्षेत्रों में लाभार्थियों के लिए कठिनाई और भ्रम पैदा कर सकता है, जबकि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, कल्याणकारी योजनाएँ | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशन
- Prelims: सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), SNA-SPARSH प्रणाली, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन
- Essay: कल्याणकारी राज्य की अवधारणा और सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल समावेशन और ग्रामीण भारत
त्वरित पुनरावृत्ति: सामाजिक सुरक्षा पेंशन के वितरण को दो भागों में विभाजित करने का प्रस्ताव दूरदराज के क्षेत्रों में लाभार्थियों के लिए कठिनाई और भ्रम पैदा कर सकता है, जबकि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, अधिकार समूहों ने आंध्र प्रदेश सरकार से सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगियों को उनके दरवाजे पर एक ही भुगतान में पूरी पेंशन राशि प्राप्त करना सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। यह आग्रह पंचायत राज और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी एक ज्ञापन के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत केंद्र के हिस्से की पेंशन को सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में SNA-SPARSH प्रणाली के माध्यम से भेजने का प्रस्ताव है, जिससे पेंशन का भुगतान दो भागों में बँट जाएगा।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) केंद्र प्रायोजित योजना है जो वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के माध्यम से गरीब परिवारों को सामाजिक सहायता प्रदान करती है।
- वर्तमान में, कई राज्यों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वितरण लाभार्थियों के दरवाजे पर नकद भुगतान के रूप में किया जाता है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुविधा मिलती है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) एक ऐसी प्रणाली है जिसके तहत सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और पारदर्शिता बढ़ती है।
- SNA-SPARSH प्रणाली एक केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली है जिसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत भुगतानों को सुव्यवस्थित करना है।
- अधिकार समूहों का तर्क है कि पेंशन को दो भागों में विभाजित करने से लाखों लाभार्थियों, विशेषकर दूरदराज के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए कठिनाई और भ्रम पैदा हो सकता है, जहाँ बैंकिंग सुविधाओं तक पहुँच सीमित है।
- एक अध्ययन के अनुसार, दूरदराज के क्षेत्रों में कई पेंशनभोगी अपने खातों से पैसे निकालने के लिए बैंक जाने में काफी खर्च करते हैं, जो उनकी पेंशन राशि का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) क्या है?
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
- इसका उद्देश्य भारत के संविधान के अनुच्छेद 41 और 42 में निहित राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों को पूरा करना है।
- यह योजना वृद्धावस्था, विधवापन और दिव्यांगता के मामलों में सामाजिक सहायता के लिए एक राष्ट्रीय नीति प्रदान करती है।
- NSAP के तहत पाँच उप-योजनाएँ हैं: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना (IGNDPS), राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (NFBS) और अन्नपूर्णा योजना।
- यह योजना गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों के पात्र सदस्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- केंद्र सरकार इन योजनाओं के तहत लाभार्थियों को एक निश्चित मासिक राशि का योगदान करती है, जबकि राज्य सरकारें अक्सर इसमें अपनी ओर से अतिरिक्त राशि जोड़ती हैं।
- DBT के माध्यम से भुगतान का उद्देश्य लीकेज को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि लाभ सीधे पात्र व्यक्तियों तक पहुँचे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| पेंशन भुगतान का विभाजन | सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगियों को एकमुश्त भुगतान के बजाय दो भागों में पेंशन प्राप्त होगी। |
| प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) | केंद्र सरकार का हिस्सा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में SNA-SPARSH प्रणाली के माध्यम से भेजा जाएगा। |
| घर-घर नकद भुगतान | राज्य सरकार का हिस्सा घर-घर जाकर नकद के रूप में वितरित किया जाएगा। |
| प्रभावित लाभार्थी | 9.34 लाख से अधिक लाभार्थियों की पेंशन विभाजित होगी, विशेषकर 80 वर्ष से अधिक आयु के 2.11 लाख से अधिक पेंशनभोगी प्रभावित होंगे। |
| दूरस्थ क्षेत्रों पर प्रभाव | आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं तक सीमित पहुंच वाले लोगों के लिए कठिनाई बढ़ सकती है। |
महत्व
सामाजिक न्याय
- यह सुनिश्चित करना कि कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को सामाजिक सुरक्षा लाभ बिना किसी बाधा के मिलें, सामाजिक न्याय के सिद्धांत के लिए महत्वपूर्ण है।
- पेंशन भुगतान में जटिलता से वृद्ध, विधवा और दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमापूर्ण जीवन जीने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
प्रशासनिक दक्षता
- पेंशन वितरण प्रणाली की दक्षता और सुगमता यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी योजनाएँ अपने लक्षित लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचें।
- भुगतान विभाजन से प्रशासनिक भ्रम और लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त बोझ उत्पन्न हो सकता है, जिससे योजना का उद्देश्य कमजोर हो सकता है।
वित्तीय समावेशन
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का उद्देश्य वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच की कमी इस उद्देश्य को बाधित कर सकती है।
- लाभार्थियों को बैंक से पैसा निकालने में लगने वाला समय और लागत उनके वित्तीय बोझ को बढ़ा सकती है।
चुनौतियाँ
1. बैंकिंग पहुंच का अभाव
- दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की सीमित उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है।
- लाभार्थियों को बैंक खातों से पैसा निकालने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे समय और धन दोनों बर्बाद होंगे।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास
2. वित्तीय बोझ में वृद्धि
- बैंक से पैसा निकालने के लिए यात्रा और अन्य खर्चों के कारण लाभार्थियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
- कुछ मामलों में, यह खर्च प्राप्त पेंशन राशि के एक महत्वपूर्ण हिस्से के बराबर हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: गरीबी उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा
3. भ्रम और असुविधा
- पेंशन भुगतान को दो भागों में विभाजित करने से लाभार्थियों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है कि उन्हें कितनी राशि कब और कैसे प्राप्त होगी।
- विशेष रूप से वृद्ध और अशिक्षित व्यक्तियों के लिए यह प्रणाली समझना और उसका पालन करना मुश्किल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोक प्रशासन
4. डिजिटल डिवाइड
- DBT प्रणाली के लिए डिजिटल साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आवश्यक है, जो सभी लाभार्थियों के पास नहीं होती।
- यह डिजिटल डिवाइड उन लोगों को हाशिए पर धकेल सकता है जिनके पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है।
यूपीएससी लिंक: डिजिटल समावेशन, सामाजिक सशक्तिकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पेंशन भुगतान का विभाजन | लाभार्थियों के लिए भ्रम और असुविधा, विशेषकर वृद्ध और दूरस्थ क्षेत्रों में। |
| DBT के माध्यम से केंद्र का हिस्सा | बैंकिंग सुविधाओं तक सीमित पहुंच वाले लोगों के लिए कठिनाई, बैंक से पैसा निकालने में अतिरिक्त खर्च। |
| घर-घर नकद भुगतान | केवल राज्य के हिस्से का नकद भुगतान, केंद्र के हिस्से के लिए बैंक पर निर्भरता। |
| दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्र | परिवहन और बैंकिंग सुविधाओं की कमी के कारण लाभार्थियों पर अत्यधिक वित्तीय बोझ। |
| 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगी | इस आयु वर्ग के लिए बैंक लेनदेन अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme – NSAP)
आगे की राह
- राज्य सरकार को केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर पेंशन के पूर्ण भुगतान को एकमुश्त घर-घर वितरित करने का प्रयास करना चाहिए।
- यदि भुगतान विभाजन अपरिहार्य है, तो दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल बैंकिंग वैन या बैंक मित्र सेवाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।
- लाभार्थियों को डिजिटल साक्षरता और बैंकिंग प्रक्रियाओं के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
- बैंक से पैसा निकालने में लगने वाले खर्चों की प्रतिपूर्ति के लिए एक तंत्र विकसित करने पर विचार किया जा सकता है, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों के लिए।
- पेंशन वितरण प्रणाली की प्रभावशीलता का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके।
- लाभार्थियों की प्रतिक्रिया और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और प्रणाली में सुधार के लिए उनका उपयोग किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सामाजिक सुरक्षा पेंशन · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) · कल्याणकारी राज्य · वित्तीय समावेशन · डिजिटल डिवाइड · पेंशन वितरण प्रणाली · राज्य और केंद्र संबंध · बुजुर्गों का सशक्तिकरण · न्यायिक समीक्षा · मानवाधिकार · ग्रामीण विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘बेरोजगारी, बुढ़ापे में सार्वजनिक सहायता’}
अवधारणा प्रवाह
राज्य सरकार द्वारा पेंशन भुगतान का विभाजन → केंद्र का हिस्सा DBT से, राज्य का हिस्सा नकद से → दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच की समस्या → लाभार्थियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और भ्रम → सामाजिक सुरक्षा लाभों की प्रभावशीलता में कमी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
2. इसके तहत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांगता पेंशन जैसी उप-योजनाएं शामिल हैं।
3. इस कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता राशि राज्य सरकारों की तुलना में अधिक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित एक केंद्र प्रायोजित योजना है, लेकिन यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत आता है। कथन 2 सही है। NSAP में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना जैसी उप-योजनाएं शामिल हैं। कथन 3 गलत है। NSAP के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता राशि आमतौर पर राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की जाने वाली कुल पेंशन राशि का एक छोटा हिस्सा होती है, जैसा कि लेख में भी उल्लेख किया गया है कि केंद्र का योगदान राज्य के कुल पेंशन व्यय का लगभग 1% है।
Q2. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के लाभों को सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाना है।
2. यह बिचौलियों को समाप्त करके पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाता है।
3. जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी DBT को सफल बनाने में सहायक रही है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1, 2 और 3 सभी सही हैं। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों को सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित करना है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और प्रणाली में पारदर्शिता व दक्षता आती है। जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी ने DBT को व्यापक रूप से सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे लाभार्थियों की पहचान और उनके खातों तक पहुंच आसान हुई है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- A. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना: 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति
- B. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना: 40-79 वर्ष की विधवाएं
- C. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना: 80% या अधिक विकलांगता वाले व्यक्ति
- D. राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना: परिवार के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु पर एकमुश्त सहायता
उत्तर: C. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना: 80% या अधिक विकलांगता वाले व्यक्ति — विकल्प C सही सुमेलित नहीं है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना 80% या अधिक विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए नहीं है, बल्कि यह उन व्यक्तियों के लिए है जिनकी विकलांगता 80% या अधिक है और वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। अन्य सभी विकल्प सही सुमेलित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सामाजिक सुरक्षा पेंशन के वितरण में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के उपयोग से जुड़े लाभों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में लाभार्थियों के लिए एक प्रभावी और समावेशी वितरण प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** सामाजिक सुरक्षा पेंशन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का संक्षिप्त परिचय दें। बताएं कि DBT का उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं।
2. **DBT के लाभ:**
* **पारदर्शिता और दक्षता:** बिचौलियों का उन्मूलन, भ्रष्टाचार में कमी।
* **लीकेज में कमी:** लक्षित लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचना।
* **वित्तीय समावेशन:** बैंक खातों के उपयोग को बढ़ावा।
* **जवाबदेही:** सरकारी तंत्र की जवाबदेही में वृद्धि।
3. **DBT से जुड़ी चुनौतियाँ:**
* **डिजिटल डिवाइड:** दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट व बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच का अभाव।
* **तकनीकी बाधाएँ:** नेटवर्क कनेक्टिविटी, आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar authentication) की समस्याएँ।
* **वित्तीय लागत:** बैंक जाने और पैसे निकालने का खर्च, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में। (लिबटेक इंडिया अध्ययन का उल्लेख)
* **जागरूकता का अभाव:** लाभार्थियों में DBT प्रक्रिया और बैंक खातों के प्रबंधन को लेकर जानकारी की कमी।
* **मानवीय संपर्क की कमी:** बुजुर्गों और अशिक्षितों के लिए व्यक्तिगत सहायता का अभाव।
* **पेंशन का विभाजन:** जैसा कि समाचार में है, पेंशन को दो भागों में बांटने से होने वाली भ्रम और कठिनाई।
4. **प्रभावी और समावेशी वितरण प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु उपाय:**
* **दोहरी प्रणाली का संतुलन:** DBT के साथ-साथ घर-घर नकद वितरण (doorstep delivery) को जारी रखना, विशेषकर कमजोर वर्गों और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए।
* **बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार:** ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बैंक मित्र (Bank Mitr), मोबाइल बैंकिंग व एटीएम की उपलब्धता बढ़ाना।
* **डिजिटल साक्षरता:** लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना।
* **शिकायत निवारण तंत्र:** मजबूत और सुलभ शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करना।
* **स्थानीय सहायता:** स्वयं सहायता समूहों (SHGs), ग्राम पंचायतों और स्थानीय स्वयंसेवकों को लाभार्थियों की सहायता के लिए शामिल करना।
* **केंद्र-राज्य समन्वय:** केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि पेंशन वितरण में एकरूपता और सुगमता सुनिश्चित हो सके।
* **न्यायिक हस्तक्षेप:** आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय जैसे उदाहरणों का उल्लेख, जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन के महत्व पर जोर देते हैं।
5. **निष्कर्ष:** एक समावेशी और न्यायसंगत कल्याणकारी राज्य के लिए यह आवश्यक है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वितरण न केवल कुशल हो बल्कि सभी लाभार्थियों, विशेषकर सबसे कमजोर लोगों के लिए सुलभ और गरिमापूर्ण भी हो। DBT के लाभों का उपयोग करते हुए, इसकी चुनौतियों का समाधान करना महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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