फार्मास्युटिकल पीएलआई योजना: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन की स्थिति और चुनौतियाँ 2026 तक

फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना — diagram

फार्मास्युटिकल पीएलआई योजना: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन की स्थिति और चुनौतियाँ 2026 तक

फार्मास्युटिकल पीएलआई योजना: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन की स्थिति और चुनौतियाँ 2026 तक — फार्मास्युटिकल पीएलआई योजनाओं के अंतर्गत वितरित प्रोत्साहन राशि
आरेख: फार्मास्युटिकल पीएलआई योजनाओं के अंतर्गत वितरित प्रोत्साहन राशि

✎ फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना का लक्ष्य भारत को उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना और थोक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करना है, हालांकि इसके…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाने, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय  |  GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिज़ाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे
  • Prelims: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, थोक दवाएँ, चिकित्सा उपकरण, किण्वन आधारित उत्पादन, आत्मनिर्भर भारत
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, सरकारी नीतियों का औद्योगिक विकास पर प्रभाव: चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना का लक्ष्य भारत को उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना और थोक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करना है, हालांकि इसके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री ने लोकसभा में बताया कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, जो वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू हुई थी, के तहत मार्च 2026 तक कुल 15,000 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय में से 6,659 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। थोक दवाओं के लिए PLI योजना के कार्यान्वयन में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और किण्वन (fermentation) आधारित उत्पादन की लंबी अवधि जैसी बाधाओं के कारण देरी हुई है, जिससे निधि वितरण भी प्रभावित हुआ है।

पृष्ठभूमि

  • भारत विश्व में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है, जिसे ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में जाना जाता है।
  • भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग मात्रा के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य के हिसाब से 14वां सबसे बड़ा है।
  • कोविड-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता को उजागर किया, जिससे भारत में महत्वपूर्ण सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API) और थोक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता महसूस हुई।
  • सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की शुरुआत की।
  • फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना का उद्देश्य भारत को उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के विनिर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
  • थोक दवाओं के लिए PLI योजना का लक्ष्य देश में महत्वपूर्ण थोक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?

  • यह योजना वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू की गई थी, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय 15,000 करोड़ रुपये है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारत में उच्च मूल्य वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
  • योजना के तहत, पात्र विनिर्माताओं को वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें नई विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • योजना में विभिन्न श्रेणियों के फार्मास्युटिकल उत्पादों को शामिल किया गया है, जिनमें जटिल जेनेरिक दवाएँ, बायोफार्मास्युटिकल्स, पेटेंट-मुक्त दवाएँ, सेल-आधारित या जीन थेरेपी उत्पाद और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।
  • थोक दवाओं के लिए PLI योजना एक अलग उप-योजना है, जिसका उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API) और प्रमुख शुरुआती सामग्री (KSM) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
  • थोक दवाओं के लिए PLI योजना का कुल परिव्यय 6,940 करोड़ रुपये है, जिसका लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना और फार्मास्युटिकल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • योजना के कार्यान्वयन में कुछ बाधाएँ सामने आई हैं, जैसे भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय, पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने में देरी, उच्च उपयोगिता लागत और किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि।
  • किण्वन (fermentation) एक जैविक प्रक्रिया है जो जीवित कोशिकाओं की गतिविधि पर निर्भर करती है, जिसकी वृद्धि दर रासायनिक संश्लेषण की तुलना में धीमी और प्राकृतिक होती है, जिससे परियोजनाओं के आरंभ होने में देरी होती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए
वित्तीय वर्ष 2022-23 में आरंभ योजना के हालिया कार्यान्वयन और प्रगति को दर्शाता है
कुल वित्तीय परिव्यय ₹15,000 करोड़ सरकार की प्रतिबद्धता और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में निवेश की क्षमता को दर्शाता है
मार्च 2026 तक ₹6,659 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित योजना के तहत अब तक की वित्तीय प्रगति और लाभार्थियों को प्राप्त लाभ को दर्शाता है
थोक दवाओं के लिए PLI योजना महत्वपूर्ण मध्यवर्ती और सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (API) के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान
प्रोत्साहन राशि उत्पादों की बिक्री पर आधारित उत्पादन और बिक्री के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है, जिससे वास्तविक उत्पादन को बढ़ावा मिलता है

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना घरेलू फार्मास्युटिकल विनिर्माण को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करती है।
  • आयात पर निर्भरता कम करके विदेशी मुद्रा की बचत होती है और व्यापार घाटे को कम करने में सहायता मिलती है।
  • विनिर्माण क्षमताओं में वृद्धि से रोजगार सृजन होता है और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलती है।

सामरिक महत्व

  • दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है, विशेषकर संकट के समय में।
  • भारत की ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ की स्थिति को और मजबूत करता है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य में इसकी भूमिका बढ़ती है।
  • महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आत्मनिर्भरता (Self-reliance) प्राप्त करने में मदद करता है, जिससे भू-राजनीतिक दबावों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।

सामाजिक महत्व

  • सस्ती और सुलभ दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करके सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है।
  • नवीन अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करता है, जिससे नई दवाओं और उपचारों का विकास होता है।
  • गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार करके नागरिकों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में मदद करता है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण में देरी

  • नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि के अधिग्रहण में लगने वाला समय परियोजनाओं के आरंभ होने में विलंब का एक प्रमुख कारण है।
  • यह कानूनी प्रक्रियाओं, स्थानीय विरोध और मुआवजे से संबंधित मुद्दों के कारण हो सकता है।

2. पर्यावरण मंजूरी

  • फार्मास्युटिकल परियोजनाओं को पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और विभिन्न नियामक निकायों से मंजूरी प्राप्त करने में समय लगता है।
  • कठोर पर्यावरण नियम और लंबी अनुमोदन प्रक्रियाएं परियोजनाओं की शुरुआत में बाधा डालती हैं।

3. उच्च उपयोगिता लागत

  • बिजली, पानी और अन्य आवश्यक उपयोगिताओं की उच्च लागत विनिर्माण इकाइयों के लिए परिचालन लागत बढ़ाती है।
  • यह विशेष रूप से किण्वन (Fermentation) आधारित प्रक्रियाओं के लिए एक चुनौती है, जिन्हें निरंतर ऊर्जा आपूर्ति की आवश्यकता होती है।

4. किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि

  • किण्वन एक जैविक प्रक्रिया है जो जीवित कोशिकाओं पर निर्भर करती है, जिनकी वृद्धि धीमी और प्राकृतिक होती है।
  • रासायनिक संश्लेषण (Chemical Synthesis) की तुलना में, यह प्रक्रिया अधिक समय लेती है, जिससे उत्पादन चक्र लंबा हो जाता है और प्रोत्साहन वितरण प्रभावित होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि अधिग्रहण परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी, निवेश में बाधा
पर्यावरण मंजूरी नियामक बाधाएं, परियोजना शुरू होने में विलंब
उच्च उपयोगिता लागत विनिर्माण लागत में वृद्धि, प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रभाव
किण्वन आधारित उत्पादन की लंबी अवधि प्रोत्साहन वितरण में देरी, उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने में चुनौती
प्रोत्साहन राशि का बिक्री आधारित वितरण परियोजनाओं के विलंब से निधि वितरण प्रभावित होता है
थोक दवाओं के लिए कम प्रोत्साहन वितरण महत्वपूर्ण मध्यवर्ती के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने में अपेक्षित गति का अभाव

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) – फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए
  • थोक दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI)
  • चिकित्सा उपकरणों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI)

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और त्वरित करने के लिए एक केंद्रीकृत तंत्र स्थापित करना।
  • पर्यावरण मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और समयबद्ध अनुमोदन सुनिश्चित करना, विशेष रूप से रणनीतिक क्षेत्रों के लिए।
  • फार्मास्युटिकल विनिर्माण इकाइयों के लिए बिजली और पानी जैसी उपयोगिताओं की लागत को कम करने हेतु विशेष सब्सिडी या रियायतें प्रदान करना।
  • किण्वन आधारित प्रक्रियाओं में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना ताकि उत्पादन अवधि को कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए नवीन तकनीकों का विकास किया जा सके।
  • PLI योजना के तहत प्रोत्साहन वितरण मॉडल की समीक्षा करना ताकि परियोजना के शुरुआती चरणों में भी कुछ अग्रिम प्रोत्साहन प्रदान किया जा सके, जिससे नकदी प्रवाह में सुधार हो।
  • थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए एक समर्पित कार्यबल का गठन करना और नियमित निगरानी सुनिश्चित करना।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर और अनुकूल नीतिगत माहौल बनाए रखना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) · फार्मास्युटिकल सेक्टर · थोक दवाएँ · चिकित्सा उपकरण · आत्मनिर्भर भारत · विनिर्माण प्रोत्साहन · आयात निर्भरता · किण्वन आधारित उत्पादन · औषधि उद्योग · रोज़गार सृजन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(b)’, ‘note’: ‘सामुदायिक भौतिक संसाधनों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा PLI योजना का शुभारंभ  →  घरेलू फार्मास्युटिकल विनिर्माण को प्रोत्साहन  →  परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधाएँ (भूमि, मंजूरी, लागत)  →  उत्पादन में देरी और बिक्री लक्ष्य प्रभावित  →  उत्पादन आधारित प्रोत्साहन वितरण में विलंब  →  योजना के अपेक्षित लाभों की प्राप्ति में चुनौती

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई थी।
2. थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत, मार्च 2026 तक वितरित प्रोत्साहन राशि कुल परिव्यय के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है।
3. किण्वन आधारित थोक औषधियों के उत्पादन में लगने वाला लंबा समय PLI परियोजनाओं के कार्यान्वयन में एक बाधा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि PLI योजना वित्त वर्ष 2022-23 में आरंभ हुई थी। कथन 2 गलत है क्योंकि थोक दवाओं के लिए PLI योजना के तहत, मार्च 2026 तक वितरित प्रोत्साहन राशि (87.70 करोड़ रुपये) कुल परिव्यय (6,940 करोड़ रुपये) का एक बहुत छोटा हिस्सा है। कथन 3 सही है क्योंकि किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि को परियोजनाओं के कार्यान्वयन में एक बाधा के रूप में उल्लेख किया गया है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कारक फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न कर रहा/रहे है/हैं?
1. भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय
2. पर्यावरण मंजूरी में देरी
3. उच्च उपयोगिता लागत
4. रासायनिक संश्लेषण पर अत्यधिक निर्भरता
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — दिए गए समाचार के अनुसार, भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय, पर्यावरण मंजूरी, उच्च उपयोगिता लागत और किण्वन आधारित थोक औषधियों के लिए लंबी निर्माण अवधि जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा है। रासायनिक संश्लेषण पर अत्यधिक निर्भरता एक बाधा नहीं है, बल्कि किण्वन आधारित उत्पादन की धीमी गति एक मुद्दा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के उद्देश्यों का विश्लेषण कीजिए और इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालिए। भारत के औषधि उद्योग के लिए यह योजना कितनी महत्वपूर्ण है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: PLI योजना का संक्षिप्त परिचय, विशेषकर फार्मास्युटिकल सेक्टर के संदर्भ में।
उद्देश्य: योजना के मुख्य उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात निर्भरता कम करना, उच्च मूल्य वाले उत्पादों का उत्पादन, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और रोज़गार सृजन। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संदर्भ में इसकी भूमिका।
कार्यान्वयन में चुनौतियाँ: समाचार में उल्लिखित बाधाओं को सूचीबद्ध करें और समझाएँ, जैसे भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय, पर्यावरण मंजूरी में देरी, उच्च उपयोगिता लागत, किण्वन आधारित उत्पादन की धीमी गति, और परिणामस्वरूप निधि वितरण में देरी।
महत्व: भारत के औषधि उद्योग के लिए इस योजना के महत्व पर चर्चा करें – जैसे दवा सुरक्षा में वृद्धि, नवाचार को प्रोत्साहन, निर्यात क्षमता में वृद्धि, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करना।
निष्कर्ष: चुनौतियों का समाधान करते हुए योजना की सफलता के लिए आगे की राह और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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