28 Jul फेम इंडिया 2.0: ईवी अपनाने में तेजी, 16.72 लाख वाहनों को मिला समर्थन


मानचित्र व माइंड-मैप: FAME India Phase-II & EV schemes
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण | GS Paper II — शासन, नीतियाँ एवं हस्तक्षेप
- Prelims: FAME इंडिया योजना, PLI योजनाएँ (ऑटो, ACC बैटरी), PM ई-ड्राइव योजना, PM ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र योजना, SPMEPCI योजना, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना
- Essay: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य: आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक आयाम, आत्मनिर्भर भारत में हरित परिवहन की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए FAME इंडिया, PLI योजनाओं और अन्य विशिष्ट पहलों के माध्यम से मांग प्रोत्साहन, विनिर्माण क्षमता वृद्धि और चार्जिंग अवसंरचना विकास पर बहुआयामी रणनीति अपना रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारी उद्योग मंत्रालय ने हाल ही में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के तीव्र अपनाने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं और पहलों की जानकारी प्रदान की है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कोई राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन नीति या राष्ट्रीय रूपरेखा विचाराधीन नहीं है, बल्कि एक संतुलित और समन्वित EV पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए कई योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। यह जानकारी FAME इंडिया योजना के चरण-II के समापन और अन्य संबंधित योजनाओं की प्रगति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सके, वायु प्रदूषण में कमी आए और देश में विनिर्माण को प्रोत्साहन मिले।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन, चार्जिंग अवसंरचना का विकास और घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना प्रमुख रणनीतिक स्तंभ हैं।
- FAME इंडिया योजना (हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को तीव्र अपनाने और विनिर्माण) 2015 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए मांग प्रोत्साहन प्रदान करना था।
- FAME इंडिया योजना चरण-II को 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2024 तक 11,500 करोड़ रुपये के कुल बजटीय समर्थन के साथ कार्यान्वित किया गया था।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ देश में उन्नत प्रौद्योगिकियों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन और उनकी बैटरियाँ भी शामिल हैं।
- इलेक्ट्रिक वाहनों पर GST दर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जो उनके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रोत्साहन है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली प्रमुख योजनाएँ
- FAME इंडिया योजना चरण-II: इस योजना ने ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-4डब्ल्यू की खरीद पर मांग प्रोत्साहन प्रदान किया और ई-बसों तथा ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (EVPCS) की स्थापना के लिए अनुदान दिया। इसके तहत लगभग 16.72 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को सहायता मिली और 5,197 ई-बसें तैनात की गईं।
- ऑटोमोबाइल एवं ऑटो अवयव उद्योग के लिए PLI योजना (PLI-ऑटो): 25,938 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह योजना उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल हैं, के लिए भारत की विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित है।
- उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम हेतु PLI योजना: 18,100 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ, इसका उद्देश्य देश में 50 गीगावाट-घंटा (GWh) क्षमता की ACC बैटरियों के लिए प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
- PM ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना: 3,435.33 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह योजना 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में सहायता करती है और सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (PTA) द्वारा भुगतान में चूक की स्थिति में ई-बस संचालकों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके चार्जरों/चार्जिंग स्टेशनों पर GST दर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे उनकी लागत कम होती है और वे उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बनते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| FAME इंडिया योजना चरण-II | इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने और उनके विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए मांग प्रोत्साहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास। |
| PLI-ऑटो योजना | उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल हैं, के घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना। |
| ACC बैटरी भंडारण के लिए PLI योजना | देश में उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरियों के विनिर्माण के लिए प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना। |
| PM ई-ड्राइव योजना | विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए अनुदान प्रदान करना। |
| PM ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना | सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा भुगतान में चूक की स्थिति में ई-बस संचालकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना। |
| SPMECI योजना | भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देना और घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को प्रोत्साहित करना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करना और व्यापार घाटे को नियंत्रित करना।
- नई नौकरियों का सृजन, विशेषकर विनिर्माण, अनुसंधान और विकास, और सेवा क्षेत्रों में।
- बैटरी विनिर्माण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आकर्षित करके अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना।
पर्यावरण संबंधी महत्व
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना।
- शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार और नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव।
- भारत के जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान, विशेषकर COP26 में घोषित ‘पंचामृत’ लक्ष्यों के संदर्भ में।
सामरिक महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन आयातित तेल पर निर्भरता कम करते हैं।
- वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करना।
- तकनीकी नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, जिससे भारत एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरे।
चुनौतियाँ
1. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
- देशभर में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की अपर्याप्त संख्या, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
- चार्जिंग गति और मानकीकरण (standardization) से संबंधित मुद्दे, जिससे उपभोक्ताओं को असुविधा होती है।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढांचा: ऊर्जा
2. बैटरी प्रौद्योगिकी और लागत
- इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत, जिसका एक बड़ा हिस्सा बैटरी की कीमत होती है।
- बैटरी के लिए महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता और भू-राजनीतिक जोखिम।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ
3. घरेलू विनिर्माण क्षमता
- इलेक्ट्रिक वाहन घटकों, विशेषकर उन्नत बैटरी और मोटर के लिए घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का अभी भी विकासशील अवस्था में होना।
- गुणवत्ता नियंत्रण और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: विनिर्माण क्षेत्र
4. उपभोक्ता स्वीकृति और जागरूकता
- इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रदर्शन, रेंज और रखरखाव के बारे में उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणाएं।
- इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
5. कौशल विकास
- इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण, रखरखाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रशिक्षित कार्यबल की कमी।
- नई प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए कौशल उन्नयन (upskilling) की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| चार्जिंग अवसंरचना | अधूरा नेटवर्क, धीमी चार्जिंग गति, मानकीकरण का अभाव। |
| बैटरी लागत | EVs की उच्च प्रारंभिक लागत, महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता। |
| घरेलू विनिर्माण | घटकों के लिए अपर्याप्त स्थानीय उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण। |
| उपभोक्ता धारणा | रेंज, प्रदर्शन और रखरखाव के बारे में गलतफहमी। |
| कौशल अंतराल | EV विनिर्माण और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कार्यबल की कमी। |
| नीतिगत निरंतरता | दीर्घकालिक और स्थिर नीतिगत ढांचे की आवश्यकता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- भारत में (हाइब्रिड एवं) इलेक्ट्रिक वाहनों को तीव्र अपनाने और विनिर्माण (FAME इंडिया) योजना चरण-II
- भारत में ऑटोमोबाइल एवं ऑटो अवयव उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना (PLI-ऑटो)
- उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम हेतु उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना
- पीएम ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना
- भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना (SPMECI)
आगे की राह
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को प्राथमिकता देना, विशेषकर राजमार्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में, और फास्ट चार्जिंग तकनीक को बढ़ावा देना।
- बैटरी विनिर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना तथा महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए PLI जैसी योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन और स्थानीयकरण (localization) पर जोर देना।
- उपभोक्ताओं के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और खरीद के लिए आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
- इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के लिए आवश्यक कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और कार्यबल को प्रशिक्षित करना।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक दीर्घकालिक, स्थिर और सामंजस्यपूर्ण राष्ट्रीय नीति ढांचा विकसित करना।
- बैटरी रीसाइक्लिंग और निपटान के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना ताकि पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
इलेक्ट्रिक वाहन · फेम इंडिया योजना · उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना · उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी · ईवी चार्जिंग अवसंरचना · घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) · कार्बन उत्सर्जन में कमी · आत्मनिर्भर भारत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता → वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन → इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन → घरेलू विनिर्माण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर → पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फेम इंडिया योजना चरण-II का उद्देश्य केवल दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देना है।
2. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना – ऑटो, इलेक्ट्रिक वाहनों सहित उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देती है।
3. पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 40 लाख से अधिक जनसंख्या वाले सात शहरों में ई-बसों की तैनाती के लिए विशेष आवंटन किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि फेम इंडिया योजना चरण-II ई-2 डब्ल्यू, ई-3 डब्ल्यू, ई-4 डब्ल्यू और ई-बसों सहित विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान करती है। कथन 2 सही है। कथन 3 सही है, पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सात बड़े शहरों और जम्मू एवं कश्मीर के लिए ई-बसों की तैनाती का प्रावधान है।
Q2. उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम हेतु उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को सीधे सब्सिडी देना।
- देश में 50 गीगावाट-घंटा (GWh) क्षमता की एसीसी बैटरियों के लिए प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना।
- सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा ई-बस संचालकों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करना।
- इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण के लिए न्यूनतम घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) प्राप्त करना।
उत्तर: देश में 50 गीगावाट-घंटा (GWh) क्षमता की एसीसी बैटरियों के लिए प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना। — उन्नत रसायन सेल (एसीसी) बैटरी भंडारण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम हेतु पीएलआई योजना का मुख्य उद्देश्य देश में 50 गीगावाट-घंटा (GWh) क्षमता की एसीसी बैटरियों के लिए प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को तीव्र अपनाने और उनके विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। इन योजनाओं ने देश में ईवी पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में किस प्रकार योगदान दिया है और भविष्य की राह क्या होनी चाहिए? (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, फेम इंडिया योजना, पीएलआई-ऑटो, एसीसी बैटरी पीएलआई योजना, पीएम ई-ड्राइव और एसपीएमईपीसीआई जैसी विभिन्न योजनाओं का संक्षेप में उल्लेख करें और उनके प्रमुख उद्देश्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, इन योजनाओं के माध्यम से ईवी बिक्री में वृद्धि, चार्जिंग अवसंरचना के विकास और घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि जैसे योगदानों का विश्लेषण करें। अंत में, भविष्य की राह के लिए सुझाव दें, जिसमें अनुसंधान एवं विकास, बैटरी रीसाइक्लिंग, कौशल विकास और उपभोक्ता जागरूकता जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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