21 Jul फेम-II योजना में देरी: इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की राह में चुनौतियाँ
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — पर्यावरण
- Prelims: फेम इंडिया योजना, इलेक्ट्रिक वाहन, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी, सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन
- Essay: भारत में सतत परिवहन का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और संबंधित विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए फेम-II, PLI योजनाओं और अन्य नीतिगत उपायों सहित एक बहुआयामी रणनीति अपना रही है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) ने फेम-II (FAME-II) इलेक्ट्रिक मोबिलिटी योजना के कार्यान्वयन में देरी और इसके उपयोग में कमी को स्वीकार किया है। मंत्रालय ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के विकास और चार्जिंग स्टेशनों के प्रावधान के लिए विभिन्न योजनाओं का विवरण भी प्रस्तुत किया है, जिसमें फेम-II के साथ-साथ अन्य उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ और नई पहलें शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
- परिवहन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन एक महत्वपूर्ण समाधान प्रस्तुत करते हैं।
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी।
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत भारत में इनके व्यापक उपयोग में प्रमुख बाधाएँ रही हैं।
- सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं।
- फेम इंडिया योजना का पहला चरण 2015 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देना था।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन संवर्धन हेतु प्रमुख सरकारी योजनाएँ
- **फेम इंडिया योजना चरण-II (FAME India Scheme Phase-II):** यह योजना 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2024 तक पाँच वर्षों के लिए लागू की गई थी, जिसका कुल बजटीय अनुदान 11,500 करोड़ रुपये था। इसका उद्देश्य ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू और ई-4डब्ल्यू वाहनों की मांग को प्रोत्साहित करना, ई-बसों के लिए अनुदान प्रदान करना और ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (EV PCS) स्थापित करने में सहायता देना था।
- **मोटरवाहन और मोटरवाहन पुर्जे उद्योग के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI-Auto) योजना:** 23 सितंबर, 2021 को अधिसूचित इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों सहित उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है, जिसके लिए 25,938 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
- **उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए PLI योजना:** 9 जून, 2021 को अधिसूचित इस योजना का उद्देश्य देश में ACC के निर्माण के लिए 18,100 करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ 50 गीगावॉट ACC बैटरियों के लिए एक प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण प्रणाली स्थापित करना है।
- **पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट (PM eDrive) योजना:** 29 सितंबर, 2024 को अधिसूचित 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह योजना लगभग 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिसमें ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-ट्रक, ई-बस और ई-एम्बुलेंस शामिल हैं। इसमें ईवी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन और परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए भी अनुदान उपलब्ध है।
- **प्रधानमंत्री ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना:** 28 अक्टूबर, 2024 को अधिसूचित 3,435.33 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह योजना 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में सहयोग करती है और सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (PTA) द्वारा भुगतान में चूक होने की स्थिति में ई-बस संचालकों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है।
- **भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए योजना (SPMEPCI):** 15 मार्च, 2024 को अधिसूचित इस योजना के तहत आवेदकों को न्यूनतम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा और तीसरे वर्ष के अंत तक न्यूनतम 25 प्रतिशत और पांचवें वर्ष के अंत तक न्यूनतम 50 प्रतिशत का विकास लाभ (DVA) प्राप्त करना होगा।
- **अन्य सरकारी पहलें:** राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स माफ करने की सलाह दी गई है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| FAME-II योजना | इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने और उनके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन। इसमें ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-4डब्ल्यू और ई-बसों के लिए मांग प्रोत्साहन तथा चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना शामिल है। |
| उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (ऑटो) | उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना। |
| PLI योजना (ACC बैटरी) | देश में उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरियों के निर्माण के लिए एक प्रतिस्पर्धी घरेलू विनिर्माण प्रणाली स्थापित करना, जो EV के लिए महत्वपूर्ण है। |
| PM इलेक्ट्रिक ड्राइव इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट (PM eDrive) योजना | विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान करना और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों तथा परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए अनुदान देना। |
| प्रधानमंत्री ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना | सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा भुगतान में चूक होने पर ई-बस संचालकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर ई-बसों की तैनाती को सुविधाजनक बनाना। |
| इलेक्ट्रिक यात्री कारों के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना (SPMEPCI) | भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के निर्माण को प्रोत्साहित करना और घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को बढ़ावा देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में निवेश को बढ़ावा देना, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बल मिलेगा।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके आयात बिल में कमी लाना, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करना, विशेषकर बैटरी और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र में।
पर्यावरणीय महत्व
- वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना, जिससे शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में भारत के योगदान को बढ़ाना, जो वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
सामरिक महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) बढ़ाना, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
- परिवहन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना, जिससे भारत वैश्विक EV बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।
सामाजिक महत्व
- बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ परिवहन विकल्प प्रदान करना, विशेषकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में।
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से दूरदराज के क्षेत्रों में भी EV को सुलभ बनाना, जिससे क्षेत्रीय असमानताएं कम होंगी।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन में देरी और उपयोग में कमी
- योजनाओं के तहत आवंटित धन का पूरा उपयोग न हो पाना, जिससे EV अपनाने की गति धीमी होती है।
- लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधाएं, जैसे कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और उपभोक्ता जागरूकता का अभाव।
यूपीएससी लिंक: शासन, विकास प्रक्रियाएँ, सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
2. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
- सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की अपर्याप्त संख्या और उनकी भौगोलिक असमानता, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में EV उपयोगकर्ताओं को परेशानी होती है।
- चार्जिंग मानकों और इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) की कमी, जिससे विभिन्न EV मॉडलों के लिए चार्जिंग सुविधाएँ असंगत हो सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे
3. उच्च प्रारंभिक लागत
- इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद लागत पारंपरिक ईंधन वाहनों की तुलना में अधिक होना, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए वे कम आकर्षक होते हैं।
- बैटरी की लागत EV की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा होती है, और भारत में बैटरी उत्पादन अभी भी विकास के प्रारंभिक चरण में है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना
4. तकनीकी चुनौतियाँ
- बैटरी प्रौद्योगिकी में लगातार हो रहे बदलाव और बेहतर रेंज, चार्जिंग गति तथा जीवनकाल की आवश्यकता।
- EV के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता और भू-राजनीतिक जोखिम।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण
5. उपभोक्ता जागरूकता और स्वीकार्यता
- इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभों और रखरखाव के बारे में उपभोक्ताओं में जानकारी का अभाव।
- ‘रेंज एंग्जायटी’ (Range Anxiety) यानी चार्ज खत्म होने के डर के कारण EV अपनाने में झिझक।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, सामाजिक सशक्तिकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| FAME-II का कम उपयोग | योजना के तहत आवंटित 11,500 करोड़ रुपये के बजटीय अनुदान का पूर्ण उपयोग न होना, जिससे EV अपनाने की अपेक्षित गति बाधित हुई। |
| EV चार्जिंग स्टेशनों की कमी | देश भर में सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशनों (EVPCS) की स्थापना के लिए आवंटित 912.50 करोड़ रुपये के बावजूद, पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव। |
| ई-बसों की धीमी तैनाती | PM eDrive योजना के तहत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लक्ष्य के मुकाबले वास्तविक तैनाती में विलंब, विशेषकर बड़े शहरों में। |
| घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) लक्ष्य | SPMEPCI योजना के तहत EV यात्री कारों के लिए तीसरे और पांचवें वर्ष तक 25% और 50% DVA प्राप्त करने में संभावित चुनौतियाँ। |
| बैटरी विनिर्माण का विकास | ACC बैटरी PLI योजना के तहत 50 गीगावॉट क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य के बावजूद, घरेलू बैटरी उत्पादन में अपेक्षित तेजी की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए (FAME इंडिया) योजना चरण- II
- भारत में मोटरवाहन और मोटरवाहन पुर्जे के उद्योग के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना (PLI-ऑटो)
- उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (PLI) योजना
- PM इलेक्ट्रिक ड्राइव इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट (PM eDrive) योजना
- प्रधानमंत्री ई-बस सेवा – भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना
- भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए योजना (SPMEPCI)
आगे की राह
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार: सार्वजनिक और निजी भागीदारी के माध्यम से देश भर में पर्याप्त और सुलभ चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना करना।
- उपभोक्ता जागरूकता और प्रोत्साहन: EV के लाभों, सब्सिडी और रखरखाव के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना तथा खरीद पर अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
- घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना: बैटरी, मोटर और अन्य EV घटकों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए PLI योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
- अनुसंधान एवं विकास में निवेश: बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग गति और EV रेंज में सुधार के लिए अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करना।
- अंतर-मंत्रालयी समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि EV नीतियों और योजनाओं का सुचारु कार्यान्वयन हो सके।
- मानकीकरण और इंटरऑपरेबिलिटी: चार्जिंग प्रोटोकॉल और EV घटकों के लिए राष्ट्रीय मानकों को विकसित करना ताकि इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित हो सके।
- कौशल विकास: EV विनिर्माण, रखरखाव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवश्यक कौशल वाले कार्यबल को प्रशिक्षित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
इलेक्ट्रिक वाहन · फेम इंडिया योजना · उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना · चार्जिंग अवसंरचना · हरित गतिशीलता · कार्बन उत्सर्जन में कमी · आत्मनिर्भर भारत · ऊर्जा सुरक्षा · सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरण · बैटरी भंडारण
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा EV प्रोत्साहन योजनाएँ (जैसे FAME-II, PLI) → EV की खरीद पर सब्सिडी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अनुदान → EV अपनाने की दर में वृद्धि और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा → कार्यान्वयन में देरी और उपयोग में कमी की चुनौतियाँ → चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और उच्च प्रारंभिक लागत → EV अपनाने की धीमी गति और पर्यावरणीय लक्ष्यों पर प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. फेम-II योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना 01.04.2019 से 31.03.2024 तक पाँच वर्षों की अवधि के लिए लागू की गई थी।
2. इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को प्रोत्साहित करना और चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में सहायता प्रदान करना है।
3. इस योजना के तहत केवल ई-बसों को ही प्रोत्साहन प्रदान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 2
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। फेम-II योजना 01.04.2019 से 31.03.2024 तक पाँच वर्षों के लिए लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को प्रोत्साहित करना और चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में सहायता करना था। कथन 3 गलत है क्योंकि इस योजना के तहत ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू और ई-4डब्ल्यू वाहनों की बिक्री को भी बढ़ावा मिला है, न कि केवल ई-बसों को।
Q2. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई पहलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके चार्जर पर GST घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
2. बैटरी से चलने वाले वाहनों को परमिट की आवश्यकता से छूट दी गई है।
3. राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स माफ करने की सलाह जारी की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी कथन सही हैं। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जर पर GST घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है, बैटरी से चलने वाले वाहनों को परमिट की आवश्यकता से छूट दी है, और राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स माफ करने की सलाह दी है ताकि उनकी शुरुआती लागत कम हो सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं और पहलों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। इन पहलों के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, फेम-II, PLI-ऑटो, PLI-ACC बैटरी, PM ईड्राइव और PM ई-बस सेवा जैसी प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए उनके उद्देश्यों और उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण दें। दूसरे भाग में, कार्यान्वयन में देरी, उपयोग में कमी, चार्जिंग अवसंरचना की कमी, बैटरी प्रौद्योगिकी की लागत और उपभोक्ता जागरूकता जैसे मुद्दों पर चर्चा करें। समाधान के रूप में, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने, अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाने, स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और वित्तीय प्रोत्साहनों को युक्तिसंगत बनाने का सुझाव दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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