22 Jul बच्चों-किशोरों के लिए स्वस्थ आहार: आईसीएमआर-एनआईएन ने नीतिगत सिफारिशें जारी कीं
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय | GS Paper III — आर्थिक विकास, पर्यावरण और जैव-विविधता
- Prelims: ICMR-NIN, लेट्स फिक्स आवर फूड समूह, पोषण साक्षरता, गैर-संचारी रोग (NCDs), खाद्य वातावरण, पैकेट के आगे पोषण संबंधी लेबलिंग
- Essay: भारत में पोषण सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ, बच्चों और युवाओं का स्वास्थ्य: एक राष्ट्र का भविष्य
त्वरित पुनरावृत्ति: ICMR-NIN के ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ समूह ने बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत सिफारिशें जारी की हैं, जो गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के नेतृत्व वाले ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ (LFOF) समूह ने हाल ही में ‘भारत में बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता वाले नीतिगत कदम’ शीर्षक से एक नीतिगत दस्तावेज जारी किया है। इस दस्तावेज में देशभर में बच्चों और किशोरों के बीच बेहतर खाद्य वातावरण बनाने तथा उनके खान-पान की आदतों में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित सिफारिशें प्रस्तुत की गई हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में बढ़ते वजन, मोटापे और खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों (Non-Communicable Diseases – NCDs) का बोझ एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है, खासकर बच्चों और किशोरों में।
- अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतें और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों तक आसान पहुँच इस समस्या को और बढ़ा रही है।
- ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ समूह ICMR-NIN के नेतृत्व में एक बहु-संस्थानीय राष्ट्रीय मंच है, जिसमें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठन शामिल हैं।
- यह समूह अनुसंधान, नीति विश्लेषण, समर्थन और हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से खाद्य वातावरण में बदलाव लाकर, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों को रोकने के भारत के प्रयासों में सहायता करता है।
- यह नीतिगत दस्तावेज लगभग तीन वर्षों के बहुविषयक अनुसंधान, हितधारकों के परामर्श और नीतिगत चर्चाओं का परिणाम है।
- नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने नई दिल्ली में आयोजित ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ प्रसार और परामर्श कार्यशाला के दौरान इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को जारी किया।
नीतिगत दस्तावेज की प्रमुख सिफारिशें
- स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण को बढ़ावा देना, जिसमें पौष्टिक भोजन की उपलब्धता और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध शामिल है।
- बच्चों और किशोरों के बीच पोषण साक्षरता (Nutrition Literacy) में सुधार के लिए शैक्षिक कार्यक्रम शुरू करना।
- पैकेट वाले खाद्य पदार्थों पर पोषण संबंधी लेबलिंग (Front-of-Pack Nutrition Labelling) को अनिवार्य करना ताकि उपभोक्ता स्वस्थ विकल्प चुन सकें।
- बच्चों को अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन (Marketing) को विनियमित करना, विशेष रूप से उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों का विज्ञापन।
- उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) की उच्च मात्रा वाले खाद्य पदार्थों पर टैक्स लगाना ताकि उनकी खपत को हतोत्साहित किया जा सके।
- स्वस्थ आहार संबंधी वसा और नमक का सेवन कम करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाना तथा कम सोडियम वाले नमक के विकल्पों को बढ़ावा देना।
- सामाजिक और व्यवहार में बदलाव के लिए बातचीत (Social and Behaviour Change Communication – SBCC) के माध्यम से स्वस्थ खान-पान की आदतों को प्रोत्साहित करना।
- स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने के लिए युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना और आर्थिक उपायों को लागू करना।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नीतिगत दस्तावेज़ का विमोचन | बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने हेतु साक्ष्य-आधारित सिफारिशें प्रस्तुत करता है। |
| बहु-संस्थानीय राष्ट्रीय मंच | ICMR-NIN के नेतृत्व में ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ समूह विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों को एक साथ लाता है। |
| प्रमुख नीतिगत सिफारिशें | स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण, पोषण साक्षरता, फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग, अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन का विनियमन, उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों पर कर जैसे क्षेत्रों को शामिल करता है। |
| गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम | खान-पान से जुड़ी NCDs के बढ़ते बोझ से निपटने और मोटापे को कम करने के भारत के प्रयासों में सहायता करता है। |
| युवाओं की भागीदारी | स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने में युवाओं की सक्रिय भूमिका और आर्थिक उपायों पर जोर देता है। |
महत्व
जन स्वास्थ्य पर प्रभाव
- यह दस्तावेज़ बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे और खान-पान से संबंधित गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) के बोझ को कम करने में सहायक होगा।
- स्वस्थ खाद्य वातावरण के निर्माण से दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा और भविष्य की पीढ़ियों का स्वास्थ्य बेहतर होगा।
नीति निर्माण और कार्यान्वयन
- यह नीति निर्माताओं को साक्ष्य-आधारित सिफारिशें प्रदान करता है, जिससे प्रभावी और बहु-क्षेत्रीय नीतिगत हस्तक्षेपों का मार्ग प्रशस्त होता है।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करेगा, जिससे पोषण संबंधी कार्यक्रमों का समग्र कार्यान्वयन संभव होगा।
सामाजिक और व्यवहारिक परिवर्तन
- पोषण साक्षरता और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार के माध्यम से स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देगा।
- बच्चों और किशोरों को अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के विपणन से बचाने और उनके खाद्य विकल्पों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
आर्थिक प्रभाव
- स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने से स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च में कमी आ सकती है, क्योंकि NCDs के उपचार का बोझ कम होगा।
- स्वस्थ कार्यबल और आबादी से उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का विपणन और उपलब्धता
- बच्चों और किशोरों को लक्षित करने वाले अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के आक्रामक विपणन को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है।
- उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की व्यापक उपलब्धता स्वस्थ विकल्पों को कमजोर करती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे
2. पोषण साक्षरता का अभाव
- जनसंख्या के बड़े हिस्से में, विशेषकर ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग में, स्वस्थ आहार के बारे में जागरूकता और समझ की कमी है।
- गलत सूचना और मिथक भी स्वस्थ खान-पान की आदतों को अपनाने में बाधा डालते हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: मानव संसाधन
3. नीतिगत समन्वय और कार्यान्वयन
- विभिन्न सरकारी विभागों (स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य प्रसंस्करण) और गैर-सरकारी संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- नीतिगत सिफारिशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना और उनकी निगरानी करना एक जटिल कार्य है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नीतियों का निर्माण एवं कार्यान्वयन
4. आर्थिक बाधाएँ
- स्वस्थ खाद्य पदार्थों की लागत कभी-कभी अस्वास्थ्यकर विकल्पों की तुलना में अधिक होती है, जिससे निम्न-आय वर्ग के लिए उन्हें खरीदना मुश्किल हो जाता है।
- उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों पर कर लगाने से उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसे संतुलित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: खाद्य सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का विज्ञापन | बच्चों और किशोरों को लक्षित करने वाले विज्ञापनों से उनके खान-पान के व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। |
| स्कूलों में खाद्य वातावरण | स्कूलों के आसपास और कैंटीन में अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता स्वस्थ विकल्पों को सीमित करती है। |
| फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग का अभाव | उपभोक्ताओं के लिए खाद्य उत्पादों में वसा, नमक और चीनी की मात्रा को समझना मुश्किल होता है। |
| उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) का सेवन | इन खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों का प्रमुख कारण है। |
| युवाओं की सीमित भागीदारी | स्वस्थ आहार संबंधी नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में युवाओं की आवाज और भागीदारी अक्सर कम होती है। |
आगे की राह
- स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीतियां लागू करना, जिसमें कैंटीन में पौष्टिक भोजन की उपलब्धता और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध शामिल हो।
- बच्चों और किशोरों को लक्षित करने वाले अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के विपणन और विज्ञापन पर सख्त विनियमन लागू करना।
- पैकेट के आगे पोषण संबंधी लेबलिंग (Front-of-Pack Labelling) को अनिवार्य करना, ताकि उपभोक्ता आसानी से खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी समझ सकें।
- उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों पर कर (Tax) लगाने पर विचार करना, जिससे उनके उपभोग को हतोत्साहित किया जा सके और स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा मिले।
- पोषण साक्षरता कार्यक्रमों को स्कूली पाठ्यक्रम में एकीकृत करना और जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना।
- स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान करना, ताकि पौष्टिक भोजन सभी के लिए किफायती और सुलभ हो सके।
- नीति निर्माण और कार्यान्वयन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना, क्योंकि वे इस मुद्दे से सीधे प्रभावित होते हैं।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वस्थ आहार · खाद्य वातावरण · गैर-संचारी रोग · पोषण साक्षरता · पैकेट के आगे पोषण संबंधी लेबलिंग · अस्वास्थ्यकर भोजन का विपणन · उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) · बहु-क्षेत्रीय सहयोग · बच्चों और किशोरों का स्वास्थ्य · सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियाँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य में सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
अस्वास्थ्यकर आहार और खाद्य वातावरण → बच्चों और किशोरों में मोटापा एवं NCDs का बढ़ना → ICMR-NIN द्वारा नीतिगत दस्तावेज़ जारी → स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत सिफारिशें → बेहतर खाद्य वातावरण और खान-पान की आदतें → जन स्वास्थ्य में सुधार और NCDs में कमी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ (LFOF) समूह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के नेतृत्व में एक बहु-संस्थानीय राष्ट्रीय मंच है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य वयस्कों में गैर-संचारी रोगों के प्रसार को कम करना है।
3. इसने हाल ही में भारत में बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत कदम सुझाए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि LFOF समूह ICMR-NIN के नेतृत्व में एक बहु-संस्थानीय मंच है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका मुख्य ध्यान बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य पर है, न कि वयस्कों पर। कथन 3 सही है क्योंकि इसने बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार और खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत दस्तावेज जारी किया है।
Q2. भारत में बच्चों और किशोरों के लिए स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने हेतु ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ समूह द्वारा सुझाई गई नीतिगत प्राथमिकताओं में निम्नलिखित में से क्या शामिल है/हैं?
1. स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण का निर्माण।
2. पोषण साक्षरता को बढ़ावा देना।
3. पैकेट के आगे पोषण संबंधी लेबलिंग को अनिवार्य करना।
4. बच्चों को अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन का विनियमन।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी विकल्प LFOF समूह द्वारा सुझाई गई नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इनमें स्कूलों में स्वस्थ खाद्य वातावरण, पोषण साक्षरता, पैकेट के आगे पोषण संबंधी लेबलिंग, और बच्चों को अस्वास्थ्यकर भोजन के विपणन का विनियमन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बच्चों और किशोरों के बीच बढ़ते मोटापे और गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बोझ से निपटने में स्वस्थ खाद्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत हस्तक्षेपों के महत्व का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। इस संदर्भ में, ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ (LFOF) समूह द्वारा सुझाई गई प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा कीजिए और बताइए कि ये प्राथमिकताएँ भारत की भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकती हैं। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, बच्चों और किशोरों में मोटापे और गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ को रेखांकित करते हुए स्वस्थ खाद्य वातावरण के महत्व पर प्रकाश डालें। नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता और उनके संभावित प्रभावों का विश्लेषण करें। दूसरे भाग में, ‘लेट्स फिक्स आवर फूड’ समूह द्वारा सुझाई गई प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं (जैसे स्कूलों में स्वस्थ भोजन, पोषण लेबलिंग, विपणन विनियमन, HFSS खाद्य पदार्थों पर कर) का विस्तार से उल्लेख करें। अंत में, इन प्राथमिकताओं के माध्यम से भारत की भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का मूल्यांकन करते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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