10 Sep बीओसीडब्ल्यू राष्ट्रीय सम्मेलन मुंबई में: डिजिटल पहल और उपकर संग्रह में बड़ा बदलाव

✎ भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए डिजिटल पहलों को मजबूत करने हेतु मुंबई में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें राज्य BOCW डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था
- Prelims: भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) अधिनियम, 1996, राज्य BOCW डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र (LCFC), ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल, श्रम और रोजगार मंत्रालय, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक
- Essay: भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का कल्याण और सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल इंडिया पहल और श्रम सुधारों का एकीकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए डिजिटल पहलों को मजबूत करने हेतु मुंबई में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें राज्य BOCW डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल पर प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
यह खबर चर्चा में क्यों?
श्रम और रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से, मुंबई में भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिकों (BOCW) पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नवंबर 2025 में आयोजित राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में शुरू की गई प्रमुख पहलों, जैसे राज्य BOCW डिजिटल लेबर चौक, लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र और ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल की प्रगति की समीक्षा करना है। यह सम्मेलन निर्माण श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, कल्याण और रोजगार के अवसरों के प्रभावी वितरण हेतु केंद्र, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और BOCW कल्याण बोर्डों के बीच समन्वय स्थापित करने पर केंद्रित है।
पृष्ठभूमि
- भारत में निर्माण क्षेत्र कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है, जिसमें लाखों श्रमिक कार्यरत हैं।
- इन श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र से आता है, जिन्हें अक्सर सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य लाभ और उचित कार्य परिस्थितियों से वंचित रहना पड़ता है।
- भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 (BOCW अधिनियम) इन श्रमिकों के कल्याण के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
- इस अधिनियम के तहत, निर्माण परियोजनाओं पर लगाए गए उपकर (Cess) से एकत्र किए गए धन का उपयोग श्रमिकों के कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।
- डिजिटल इंडिया पहल के तहत, सरकार ने श्रमिकों के पंजीकरण, लाभ वितरण और उपकर संग्रह प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को अपनाने पर जोर दिया है।
- नवंबर 2025 में आयोजित राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन ने निर्माण श्रमिकों के लिए डिजिटल और प्रौद्योगिकी-सक्षम पहलों को आगे बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख पहलों की शुरुआत की थी।
भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) अधिनियम, 1996 और संबंधित पहलें
- भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के रोजगार और सेवा शर्तों को विनियमित करना, उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के उपाय करना है।
- यह अधिनियम निर्माण परियोजनाओं की लागत के 1% से 2% तक उपकर लगाने का प्रावधान करता है, जिसे राज्य सरकारों द्वारा एकत्र किया जाता है और BOCW कल्याण बोर्डों को हस्तांतरित किया जाता है।
- राज्य BOCW कल्याण बोर्ड इन उपकर निधियों का उपयोग श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, जैसे शिक्षा सहायता, स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व लाभ, पेंशन आदि को लागू करने के लिए करते हैं।
- राज्य BOCW डिजिटल लेबर चौक एक डिजिटल मंच है जिसका उद्देश्य निर्माण श्रमिकों को रोजगार से संबंधित सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करना और नियोक्ताओं को कुशल श्रमिक खोजने में मदद करना है।
- लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र (LCFC) भौतिक केंद्र हैं जो निर्माण श्रमिकों को रोजगार, पंजीकरण, कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें सम्मानजनक और सुलभ सेवाएं मिल सकें।
- ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल एक डिजिटल प्रणाली है जिसे उपकर संग्रह और निगरानी में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे धन के दुरुपयोग को रोका जा सके और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त निधि सुनिश्चित हो सके।
- ये पहलें रोजगार सुविधा को मजबूत करने, श्रमिक-केंद्रित सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने और उपकर संग्रह तथा निगरानी में पारदर्शिता व दक्षता में सुधार करने पर केंद्रित हैं।
- सम्मेलन में महाराष्ट्र, तेलंगाना, दिल्ली, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्य अपनी डिजिटल लेबर चौक पहल शुरू करेंगे, जबकि मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल ऑनलाइन उपकर संग्रह पोर्टल का उद्घाटन करेंगे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| राज्य BOCW डिजिटल लेबर चौक | निर्माण श्रमिकों को रोजगार संबंधी सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करना। |
| ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल | उपकर संग्रह और निगरानी में पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ाना। |
| लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र (LCFC) | श्रमिकों के लिए रोजगार और कल्याण सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाना। |
| राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का अनुभव साझा करना | सफल कार्य प्रणालियों को साझा करना और अन्य राज्यों में दोहराने योग्य दृष्टिकोणों की पहचान करना। |
| केंद्र, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और BOCW कल्याण बोर्डों के बीच समन्वय | कार्यान्वयन अंतराल की पहचान करना और प्रभावी सेवा वितरण के लिए कार्रवाई को व्यवस्थित करना। |
महत्व
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- यह सम्मेलन निर्माण श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा, कल्याण और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
- डिजिटल पहलों के माध्यम से श्रमिकों को बेहतर रोजगार सुविधा और सम्मानजनक, सुलभ श्रमिक-केंद्रित सेवाएं मिलेंगी, जिससे अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों का सशक्तिकरण होगा।
- उपकर संग्रह में पारदर्शिता और दक्षता से कल्याणकारी योजनाओं के लिए अधिक धन उपलब्ध होगा, जिससे श्रमिकों के लिए बेहतर लाभ सुनिश्चित होंगे।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह सम्मेलन नवंबर 2025 में आयोजित राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में शुरू की गई प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा करेगा, जो नीति कार्यान्वयन की निगरानी में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा डिजिटल लेबर चौक और ऑनलाइन उपकर संग्रह पोर्टल जैसी पहलों का शुभारंभ ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप है, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
- केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मजबूत समन्वय से नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद मिलेगी और संघवाद (Federalism) के सिद्धांतों को मजबूत किया जाएगा।
तकनीकी महत्व
- डिजिटल लेबर चौक और ऑनलाइन उपकर संग्रह पोर्टल जैसी प्रौद्योगिकी-सक्षम पहलों का कार्यान्वयन निर्माण क्षेत्र में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देगा।
- ये पहल डेटा संग्रह, विश्लेषण और निगरानी को बेहतर बनाएंगी, जिससे नीति निर्माताओं को श्रमिकों की जरूरतों को समझने और लक्षित हस्तक्षेप करने में मदद मिलेगी।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म श्रमिकों को बिचौलियों के बिना सीधे रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाएंगे, जिससे भ्रष्टाचार कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल साक्षरता और पहुंच
- निर्माण श्रमिकों के बीच डिजिटल साक्षरता की कमी और स्मार्टफोन/इंटरनेट तक सीमित पहुंच डिजिटल पहलों के प्रभावी उपयोग में बाधा बन सकती है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी भी इन पहलों की पहुंच को सीमित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का उत्थान; शासन: ई-गवर्नेंस
2. पंजीकरण और पहचान
- असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कई निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण BOCW बोर्डों के तहत नहीं होता है, जिससे वे कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।
- श्रमिकों की पहचान और उनके डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करना एक चुनौती है, खासकर प्रवासी श्रमिकों के मामले में।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का उत्थान; शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही
3. उपकर संग्रह और उपयोग
- BOCW उपकर के संग्रह में अक्सर अनियमितताएं और लीकेज की समस्या देखी जाती है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं हो पाता।
- संग्रहित उपकर का प्रभावी और समय पर उपयोग सुनिश्चित करना भी एक चुनौती है, जिससे श्रमिकों को लाभ मिलने में देरी होती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही; भारतीय अर्थव्यवस्था: सरकारी बजट
4. अंतर-राज्य समन्वय
- प्रवासी निर्माण श्रमिकों के लिए विभिन्न राज्यों के BOCW बोर्डों के बीच समन्वय की कमी एक बड़ी समस्या है, जिससे उन्हें दूसरे राज्य में लाभ प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
- राज्यों के बीच डेटा साझाकरण और नीतियों के मानकीकरण का अभाव भी प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद: केंद्र-राज्य संबंध; सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का उत्थान
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल पहुंच और साक्षरता | निर्माण श्रमिकों के बीच डिजिटल उपकरणों और इंटरनेट के उपयोग की सीमित जानकारी तथा पहुंच। |
| असंगठित क्षेत्र में पंजीकरण | कई निर्माण श्रमिकों का BOCW बोर्डों के तहत पंजीकृत न होना, जिससे वे कल्याणकारी लाभों से वंचित रह जाते हैं। |
| उपकर संग्रह और उपयोग की दक्षता | उपकर संग्रह में लीकेज और संग्रहित धन के प्रभावी तथा समय पर उपयोग की कमी। |
| प्रवासी श्रमिकों के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय | विभिन्न राज्यों में BOCW बोर्डों के बीच समन्वय का अभाव, जिससे प्रवासी श्रमिकों को लाभ प्राप्त करने में कठिनाई होती है। |
| डेटा गोपनीयता और सुरक्षा | डिजिटल प्लेटफॉर्म पर श्रमिकों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार का विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 (Building and Other Construction Workers (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996)
- भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 (Building and Other Construction Workers’ Welfare Cess Act, 1996)
आगे की राह
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और निर्माण श्रमिकों के लिए डिजिटल उपकरणों तक पहुंच सुनिश्चित करना।
- पंजीकरण प्रक्रियाओं को सरल बनाना और जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक श्रमिकों को BOCW बोर्डों के तहत पंजीकृत करना।
- उपकर संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ऑनलाइन पोर्टलों का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना तथा संग्रहित धन के प्रभावी उपयोग की निगरानी करना।
- प्रवासी निर्माण श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना और अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाना।
- लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्रों की संख्या बढ़ाना और उनमें श्रमिकों के लिए आवश्यक सभी कल्याणकारी सेवाएं उपलब्ध कराना।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा गोपनीयता और सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र स्थापित करना।
- नियमित अंतराल पर हितधारकों के साथ परामर्श और समीक्षा बैठकें आयोजित करना ताकि कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) · असंगठित क्षेत्र के श्रमिक · सामाजिक सुरक्षा · डिजिटल श्रम चौक · उपकर संग्रह पोर्टल · कल्याण बोर्ड · रोजगार सुविधा · पारदर्शिता और दक्षता · श्रम सुधार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि करेगा।
- अनुच्छेद 39: राज्य कुछ नीति का अनुसरण करेगा (विशेषकर श्रमिकों के कल्याण के संबंध में)।
- अनुच्छेद 41: कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।
- अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।
- अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि।
अवधारणा प्रवाह
निर्माण श्रमिकों की असुरक्षित कार्यदशाएं और सामाजिक सुरक्षा का अभाव। → भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार का विनियमन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 का अधिनियमन। → BOCW कल्याण बोर्डों का गठन और उपकर संग्रह का प्रावधान। → डिजिटल लेबर चौक, ऑनलाइन उपकर पोर्टल और लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्रों जैसी पहलों का शुभारंभ। → इन पहलों के माध्यम से श्रमिकों को बेहतर रोजगार, कल्याण और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना। → श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार और अनौपचारिक क्षेत्र का सशक्तिकरण।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) अधिनियम, 1996 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अधिनियम निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए एक कल्याण कोष के गठन का प्रावधान करता है।
2. इस अधिनियम के तहत उपकर (cess) का संग्रह केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
3. यह अधिनियम 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निर्माण कार्यों में नियोजित करने पर प्रतिबंध लगाता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि BOCW अधिनियम, 1996 का मुख्य उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए एक कोष स्थापित करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि उपकर का संग्रह राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह अधिनियम विशेष रूप से बाल श्रम पर प्रतिबंध नहीं लगाता, बल्कि यह बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के दायरे में आता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी पहलें भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन (BOCW) में शुरू की गई या उनकी प्रगति की समीक्षा की गई?
- राज्य BOCW डिजिटल श्रम चौक
- ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल
- लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र
- उपरोक्त सभी
उत्तर: उपरोक्त सभी — राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य BOCW डिजिटल श्रम चौक, ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल और लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र जैसी पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई और कुछ राज्यों द्वारा इन्हें लॉन्च भी किया गया।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (BOCW) अधिनियम, 1996, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस संदर्भ में, हाल ही में शुरू की गई डिजिटल पहलों का विश्लेषण करें और बताएं कि वे निर्माण श्रमिकों के कल्याण को कैसे सुदृढ़ कर सकती हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** BOCW अधिनियम, 1996 का संक्षिप्त परिचय और इसका महत्व, विशेषकर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए।
2. **अधिनियम के मुख्य प्रावधान:** अधिनियम के तहत कल्याण कोष, उपकर संग्रह और कल्याण बोर्डों की भूमिका का उल्लेख।
3. **हाल की डिजिटल पहलें:**
* **राज्य BOCW डिजिटल श्रम चौक:** इसका उद्देश्य (रोजगार सुविधा, श्रमिक-केंद्रित सेवाएं)।
* **ऑनलाइन BOCW उपकर संग्रह पोर्टल:** इसका उद्देश्य (पारदर्शिता, दक्षता, सुव्यवस्थित संग्रह)।
* **लेबर चौक-सह-सुविधा केंद्र:** इसका उद्देश्य (पहुंच में आसानी, आवश्यक सहायता)।
4. **कल्याण सुदृढ़ीकरण:** ये पहलें कैसे निर्माण श्रमिकों के कल्याण को सुदृढ़ कर सकती हैं, इस पर विश्लेषण:
* **पहुंच में सुधार:** डिजिटल प्लेटफॉर्म से जानकारी और सेवाओं तक आसान पहुंच।
* **पारदर्शिता और जवाबदेही:** उपकर संग्रह और वितरण में पारदर्शिता।
* **दक्षता में वृद्धि:** प्रक्रियाओं का सरलीकरण और त्वरित सेवा वितरण।
* **सामाजिक सुरक्षा का विस्तार:** अधिक श्रमिकों को मुख्यधारा में लाना।
* **डेटा-आधारित नीति निर्माण:** बेहतर डेटा उपलब्धता से लक्षित नीतियां बनाना।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** डिजिटल साक्षरता, बुनियादी ढांचे की कमी, जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियों का संक्षिप्त उल्लेख और उनके समाधान के लिए सुझाव।
6. **निष्कर्ष:** इन पहलों के समग्र महत्व और भविष्य की संभावनाओं पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: मुंबई में आयोजित होने वाले ‘भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिकों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (बीओसीडब्ल्यू)’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
- A. यह सम्मेलन महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
- B. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन करना है।
- C. बीओसीडब्ल्यू अधिनियम 1996 के तहत निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी बोर्ड स्थापित किए जाते हैं।
- D. महाराष्ट्र में निर्माण श्रमिकों के लिए ‘मुख्यमंत्री निर्माण कामगार सहायता योजना’ लागू नहीं है।
उत्तर: C. बीओसीडब्ल्यू अधिनियम 1996 के तहत निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी बोर्ड स्थापित किए जाते हैं। — बीओसीडब्ल्यू अधिनियम 1996 के तहत राज्य सरकारें निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी बोर्ड स्थापित करती हैं, जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है।
Mains: महाराष्ट्र में निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू की गई प्रमुख योजनाओं का वर्णन कीजिए तथा ‘भवन निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिकों पर राष्ट्रीय सम्मेलन (बीओसीडब्ल्यू)’ के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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