07 Aug बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 847 मैंग्रोव वृक्षों की कटाई की उच्च न्यायालय ने दी अनुमति
✎ बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव कटाई को 'असाधारण' अनुमति दी, लेकिन प्रतिपूरक वनीकरण के पारिस्थितिक उद्देश्य पर जोर दिया और राज्य सरकार को पारदर्शिता में सुधार का निर्देश दिया।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन, अवसंरचना
- Prelims: मैंग्रोव वन, प्रतिपूरक वनीकरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन, राष्ट्रीय हरित अधिकरण, न्यायिक सक्रियता, बुलेट ट्रेन परियोजना
- Essay: विकास बनाम पर्यावरण: एक सतत बहस, न्यायपालिका की भूमिका: पर्यावरण संरक्षण में एक प्रहरी
त्वरित पुनरावृत्ति: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव कटाई को ‘असाधारण’ अनुमति दी, लेकिन प्रतिपूरक वनीकरण के पारिस्थितिक उद्देश्य पर जोर दिया और राज्य सरकार को पारदर्शिता में सुधार का निर्देश दिया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से संबंधित एक पारेषण परियोजना के लिए 847 मैंग्रोव पेड़ों की कटाई को ‘असाधारण उपाय’ के रूप में अनुमति दी है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) केवल पेड़ों की संख्या बदलने का खेल नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पारिस्थितिक बहाली है। न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को प्रतिपूरक वनीकरण के संबंध में पारदर्शिता और निगरानी तंत्र में सुधार के लिए भी फटकार लगाई है।
पृष्ठभूमि
- मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जिसका उद्देश्य मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को कम करना है।
- परियोजना के लिए महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कंपनी (MahaTransco) को 132 KV पारेषण लाइन और सबस्टेशन के निर्माण हेतु 3.35 हेक्टेयर वन भूमि, जिसमें लगभग दो हेक्टेयर मैंग्रोव शामिल हैं, की आवश्यकता थी।
- पर्यावरण समूहों ने मैंग्रोव कटाई का विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि प्रभावित स्थल से सैकड़ों किलोमीटर दूर वनीकरण स्थानीय पारिस्थितिक कार्यों को बहाल नहीं कर सकता।
- उच्च न्यायालय ने इस परियोजना को ‘राष्ट्रीय महत्व’ का मानते हुए, महाट्रांसको द्वारा अतिरिक्त प्रतिबद्धताओं के आधार पर अनुमति दी, जिसमें प्रभावित स्थल के करीब मैंग्रोव के पौधे लगाना शामिल है।
- न्यायालय ने सितंबर 2025 में दिए गए अपने पिछले निर्देशों का पालन न करने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की, जिसमें वनीकरण भूमि बैंक बनाना, वृक्षारोपण डेटा प्रकाशित करना और निगरानी तंत्र स्थापित करना शामिल था।
- यह निर्णय MC मेहता मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के सिद्धांतों को दोहराता है कि प्रतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना है, न कि केवल काटे गए पेड़ों की संख्या को बदलना।
मैंग्रोव वन और उनका महत्व
- मैंग्रोव उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में तटीय खारे पानी में उगने वाले झाड़ियाँ या छोटे पेड़ होते हैं।
- ये वन तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये समुद्री जीवों के लिए नर्सरी का काम करते हैं और जैव विविधता को बनाए रखते हैं।
- मैंग्रोव तटीय कटाव को रोकते हैं, तूफानों और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से तटरेखा की रक्षा करते हैं।
- ये कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हुए बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
- भारत में मैंग्रोव वन मुख्य रूप से सुंदरबन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के तटों पर पाए जाते हैं।
- प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत विकास परियोजनाओं के कारण काटे गए वनों की भरपाई के लिए अन्य स्थानों पर नए पेड़ लगाए जाते हैं।
- भारत में, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि के गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग की अनुमति देने के लिए प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बॉम्बे उच्च न्यायालय का निर्णय | मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से संबंधित पारेषण लाइन के लिए 847 मैंग्रोव पेड़ों की कटाई को ‘असाधारण उपाय’ के रूप में अनुमति दी। |
| क्षतिपूरक वनीकरण पर न्यायालय की टिप्पणी | न्यायालय ने कहा कि क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) केवल पेड़ों की संख्या का प्रतिस्थापन नहीं है, बल्कि पारिस्थितिक बहाली के लिए है। दूरस्थ स्थानों पर वृक्षारोपण स्थानीय पारिस्थितिक लाभों को बहाल करने में विफल रहता है। |
| महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई | न्यायालय ने क्षतिपूरक वनीकरण को अधिक पारदर्शी और पारिस्थितिक रूप से सार्थक बनाने के लिए पिछले निर्देशों का पालन न करने पर राज्य सरकार की आलोचना की। |
| MC मेहता मामले का संदर्भ | सर्वोच्च न्यायालय के MC मेहता मामले का हवाला देते हुए न्यायालय ने क्षतिपूरक वनीकरण के उद्देश्य को दोहराया, जो पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना है। |
| MahaTransco की अतिरिक्त प्रतिबद्धताएं | परियोजना को अनुमति देने के लिए, MahaTransco ने सोलापुर में वैधानिक वृक्षारोपण के अतिरिक्त, ठाणे के पास 26,664 मैंग्रोव पौधे लगाने का वचन दिया। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- यह निर्णय विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय लागत और टिकाऊ विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है।
- मैंग्रोव (Mangroves) पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को रेखांकित करता है, जो तटीय सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और कार्बन पृथक्करण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
न्यायिक सक्रियता और शासन
- न्यायालय ने क्षतिपूरक वनीकरण के कार्यान्वयन में सरकार की ‘प्रशासनिक उदासीनता’ पर चिंता व्यक्त की, जो शासन में जवाबदेही की आवश्यकता को दर्शाता है।
- यह मामला न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के माध्यम से पर्यावरणीय कानूनों के प्रवर्तन और सरकारी नीतियों की निगरानी में न्यायपालिका की भूमिका को दर्शाता है।
बुनियादी ढांचा विकास
- बुलेट ट्रेन जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने में आने वाली जटिलताओं और चुनौतियों को दर्शाता है।
- यह दर्शाता है कि बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अक्सर पर्यावरणीय चिंताओं और विकास की तात्कालिकता के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना पड़ता है।
चुनौतियाँ
1. क्षतिपूरक वनीकरण की प्रभावशीलता
- दूरस्थ स्थानों पर वृक्षारोपण से स्थानीय पारिस्थितिक कार्यों और लाभों की बहाली सुनिश्चित नहीं होती है।
- केवल संख्यात्मक प्रतिस्थापन पर ध्यान केंद्रित करने से पारिस्थितिकी तंत्र की जटिलता और कार्यप्रणाली की अनदेखी होती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
2. शासन और कार्यान्वयन में कमी
- राज्य सरकार द्वारा न्यायालय के पूर्व निर्देशों का पालन न करना ‘प्रशासनिक उदासीनता’ को दर्शाता है।
- क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि बैंक, वृक्षारोपण डेटा और निगरानी तंत्र की कमी पारदर्शिता और जवाबदेही को बाधित करती है।
यूपीएससी लिंक: शासन; पारदर्शिता और जवाबदेही
3. विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण
- राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने में अक्सर विकास और संरक्षण के बीच संघर्ष होता है।
- पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए पर्याप्त और प्रभावी उपायों को सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी; सतत विकास
4. मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए मैंग्रोव वनों की कटाई तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
- मैंग्रोव के नुकसान से तटीय कटाव, जैव विविधता हानि और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी; जैव विविधता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| क्षतिपूरक वनीकरण की गुणवत्ता | पेड़ों की संख्या के बजाय पारिस्थितिक बहाली पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। |
| स्थानीय पारिस्थितिक हानि | दूरस्थ वृक्षारोपण से स्थानीय पारिस्थितिक कार्यों और लाभों की भरपाई नहीं हो पाती है। |
| सरकारी निर्देशों का पालन | राज्य सरकार द्वारा न्यायालय के पूर्व निर्देशों का पालन न करना प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। |
| पारदर्शिता और निगरानी | क्षतिपूरक वनीकरण डेटा, भूमि बैंक और निगरानी तंत्र की कमी से पारदर्शिता प्रभावित होती है। |
| मैंग्रोव का महत्व | मैंग्रोव वनों की कटाई से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय समुदायों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। |
आगे की राह
- क्षतिपूरक वनीकरण नीतियों को संख्यात्मक प्रतिस्थापन के बजाय पारिस्थितिक बहाली पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
- राज्य सरकारों को पर्यावरणीय कानूनों और न्यायिक निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
- क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भूमि बैंक, वृक्षारोपण डेटा और प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए।
- विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- मैंग्रोव जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण और बहाली के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।
- पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मुआवजा वनीकरण · पारिस्थितिक बहाली · बॉम्बे उच्च न्यायालय · पर्यावरण संरक्षण · बुलेट ट्रेन परियोजना · मैंग्रोव वन · राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएँ · न्यायिक सक्रियता · सतत विकास · प्रशासनिक जवाबदेही
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण शामिल’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘राज्य पर्यावरण संरक्षण का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘note’: ‘नागरिकों का कर्तव्य, पर्यावरण की रक्षा’}
अवधारणा प्रवाह
बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव की कटाई की आवश्यकता → MahaTransco द्वारा बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका → न्यायालय द्वारा ‘असाधारण’ अनुमति, लेकिन कड़ी शर्तें → क्षतिपूरक वनीकरण की प्रभावशीलता पर न्यायालय की टिप्पणी → महाराष्ट्र सरकार को निर्देशों का पालन न करने पर फटकार → क्षतिपूरक वनीकरण में सुधार और पारदर्शिता की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में मैंग्रोव वन केवल तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
2. मैंग्रोव वन तटीय कटाव को रोकने और तूफान से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. मुआवजा वनीकरण का उद्देश्य काटे गए पेड़ों की संख्या को प्रतिस्थापित करना है, न कि पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि मैंग्रोव मुख्य रूप से खारे पानी वाले तटीय और मुहाना क्षेत्रों में उगते हैं। कथन 2 भी सही है, मैंग्रोव अपनी जड़ों के जटिल नेटवर्क के कारण तटीय कटाव को रोकने और तूफान से सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि बॉम्बे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, मुआवजा वनीकरण का उद्देश्य केवल पेड़ों की संख्या को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना है।
Q2. मुआवजा वनीकरण (Compensatory Afforestation) के संबंध में, बॉम्बे उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के आलोक में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे उपयुक्त है?
- उच्च न्यायालय ने मुआवजा वनीकरण को केवल एक संख्यात्मक प्रतिस्थापन माना है।
- उच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि मुआवजा वनीकरण का उद्देश्य पारिस्थितिक बहाली है।
- उच्च न्यायालय ने मुआवजा वनीकरण के लिए दूरस्थ स्थानों पर वृक्षारोपण को प्राथमिकता दी है।
- उच्च न्यायालय ने मुआवजा वनीकरण के लिए राज्य सरकारों की वर्तमान नीतियों की सराहना की है।
उत्तर: उच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि मुआवजा वनीकरण का उद्देश्य पारिस्थितिक बहाली है। — बॉम्बे उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मुआवजा वनीकरण का उद्देश्य पारिस्थितिक बहाली है, न कि केवल काटे गए पेड़ों की संख्या को प्रतिस्थापित करना। न्यायालय ने दूरस्थ स्थानों पर वृक्षारोपण की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मुआवजा वनीकरण (Compensatory Afforestation) की अवधारणा पर चर्चा कीजिए और हाल ही में बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के संदर्भ में दिए गए निर्णय के आलोक में इसकी प्रभावशीलता और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: परिचय में मुआवजा वनीकरण की अवधारणा और इसके कानूनी आधार (जैसे वन संरक्षण अधिनियम, 1980) को संक्षेप में परिभाषित करें। मुख्य भाग में, बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्णय के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से बताएं, जिसमें ‘असाधारण उपाय’ के रूप में मैंग्रोव काटने की अनुमति, पारिस्थितिक बहाली पर जोर, दूरस्थ वृक्षारोपण की आलोचना, और महाराष्ट्र सरकार की प्रशासनिक उदासीनता पर टिप्पणी शामिल है। मुआवजा वनीकरण की प्रभावशीलता (जैसे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना) और चुनौतियों (जैसे उपयुक्त भूमि की कमी, प्रजातियों का गलत चयन, निगरानी का अभाव, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की उपेक्षा) पर समालोचनात्मक विश्लेषण करें। एम.सी. मेहता मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष दें जिसमें पारदर्शिता, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व और प्रभावी निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया जाए।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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