भारतीय नौसेना में शामिल होगा ‘मालवन’ पनडुब्बी रोधी जहाज, जानिए खासियतें

भारतीय नौसेना में शामिल होगा ‘मालवन’ पनडुब्बी रोधी जहाज, जानिए खासियतें

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (रक्षा प्रौद्योगिकी)  |  GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका)
  • Prelims: INS मालवन, माहे-श्रेणी युद्धपोत, एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC), आत्मनिर्भर भारत, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), बघ नखा, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR), अभय-श्रेणी कार्वेट
  • Essay: भारत की समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ और समाधान, आत्मनिर्भरता: रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति

त्वरित पुनरावृत्ति: INS मालवन भारत की स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूत करता है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय नौसेना ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित माहे-श्रेणी के दूसरे एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) INS मालवन को कमीशन किया है। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों का मुकाबला करने और भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण का भी प्रतीक है।

पृष्ठभूमि

  • भारत हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी तैनाती का मुकाबला करने के लिए अपनी पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता (Anti-Submarine Warfare – ASW) का तेजी से विस्तार कर रहा है।
  • INS मालवन का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की समृद्ध समुद्री विरासत को दर्शाता है।
  • यह युद्धपोत 2003 तक भारतीय नौसेना में सेवा देने वाले पूर्व INS मालवन की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
  • भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2035 तक अपने बेड़े को 200 युद्धपोतों तक पहुंचाना है, जो वर्तमान में लगभग 145 युद्धपोतों और पनडुब्बियों का सक्रिय बेड़ा है।

एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) क्या हैं?

  • ASW-SWC छोटे, बहुमुखी युद्धपोत हैं जिन्हें तटीय और उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • ये युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, ट्रैक करने और नष्ट करने में सक्षम हैं, जिससे महत्वपूर्ण समुद्री संचार लाइनों (Sea Lines of Communication – SLOC) की रक्षा होती है।
  • INS मालवन माहे-श्रेणी का दूसरा ASW-SWC है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित किया गया है।
  • यह 80 मीटर लंबा है और इसका विस्थापन (displacement) 1,100 टन से अधिक है, जो इसे तटीय और उथले पानी में संचालन के लिए उपयुक्त बनाता है।
  • यह जलजेट प्रणोदन (waterjet propulsion) और उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जिसमें टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट, आधुनिक रडार और सोनार शामिल हैं।
  • INS मालवन में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जो आधुनिक नौसेना जहाज निर्माण और डिजाइन में भारत की आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करता है।
  • ये युद्धपोत पुरानी अभय-श्रेणी के कार्वेट (corvettes) की जगह लेंगे और कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन (Low Intensity Maritime Operations – LIMO) तथा माइन वारफेयर (mine warfare) का समर्थन करेंगे।
  • भारतीय नौसेना कुल 16 विशेष ASW-SWC शामिल कर रही है, जिनमें से 8 अरनाला-श्रेणी के हैं (गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स – GRSE द्वारा निर्मित) और शेष 8 माहे-श्रेणी के हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
INS मालवन का जलावतरण भारत की स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता में वृद्धि
माहे-श्रेणी ASW-SWC का दूसरा पोत भारतीय नौसेना के बेड़े का विस्तार और आधुनिकीकरण
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा
80% से अधिक स्वदेशी सामग्री युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता
उथले पानी में पनडुब्बी-रोधी अभियान तटीय और समुद्री संचार लाइनों की सुरक्षा
‘बाघ नखा’ प्रतीक साहस, चपलता और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा का संकल्प

महत्व

सामरिक महत्व

  • हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों का मुकाबला करने में सहायक।
  • महत्वपूर्ण समुद्री संचार लाइनों (SLOCs) की सुरक्षा और समुद्री निगरानी में वृद्धि।
  • उथले तटीय जल में पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) क्षमताओं को मजबूत करना।
  • क्षेत्रीय समुद्री प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना।

आर्थिक महत्व

  • स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा, जिससे रक्षा आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) जैसे भारतीय शिपयार्डों के लिए रोजगार सृजन और तकनीकी उन्नति।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहन।

तकनीकी महत्व

  • उन्नत सोनार, रडार, टॉरपीडो और पनडुब्बी-रोधी रॉकेट जैसे आधुनिक प्रणालियों का एकीकरण।
  • जलजेट प्रणोदन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग, जो उथले पानी में बेहतर गतिशीलता प्रदान करता है।
  • युद्धपोत डिजाइन, निर्माण और एकीकरण में भारत की तकनीकी विशेषज्ञता का प्रदर्शन।

चुनौतियाँ

1. क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ

  • चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीतियां।
  • पाकिस्तान द्वारा अपनी पनडुब्बी बेड़े का आधुनिकीकरण और विस्तार, जिससे भारत के लिए समुद्री सुरक्षा जोखिम बढ़ रहा है।
  • समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और आतंकवाद जैसी गैर-राज्य अभिकर्ताओं से उत्पन्न खतरे।

2. स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता

  • रक्षा उत्पादन में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री प्राप्त करने के बावजूद, कुछ महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए अभी भी आयात पर निर्भरता।
  • रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश की आवश्यकता ताकि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ाना ताकि रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके।

3. नौसेना बेड़े का आधुनिकीकरण

  • भारतीय नौसेना के 2035 तक 200-पोत बेड़े के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर और त्वरित अधिग्रहण की आवश्यकता।
  • पुराने पड़ चुके युद्धपोतों और प्रणालियों को आधुनिक विकल्पों से बदलने की चुनौती।
  • बढ़ते रक्षा बजट और संसाधनों के कुशल आवंटन की आवश्यकता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
चीन की पनडुब्बी गतिविधियाँ हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती उपस्थिति और संभावित खतरे
पाकिस्तान का पनडुब्बी बेड़ा आधुनिकीकरण और विस्तार से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर प्रभाव
तटीय सुरक्षा 7,516 किलोमीटर लंबी तटरेखा की प्रभावी निगरानी और सुरक्षा
पुराने पड़ चुके पोत अभय-श्रेणी के कॉर्वेट्स जैसे पुराने पोतों को बदलने की आवश्यकता
रक्षा बजट आधुनिकीकरण और अधिग्रहण के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता

आगे की राह

  • रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना ताकि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास हो सके।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को और प्रोत्साहित करना और रक्षा विनिर्माण में नवाचार को बढ़ावा देना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी के माध्यम से उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों तक पहुंच सुनिश्चित करना।
  • भारतीय नौसेना के लिए एक सुदृढ़ और निरंतर आधुनिकीकरण योजना को लागू करना।
  • समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को बढ़ाने के लिए निगरानी क्षमताओं को मजबूत करना।
  • तटीय सुरक्षा बुनियादी ढांचे को उन्नत करना और तटीय समुदायों को इसमें शामिल करना।
  • क्षेत्रीय और वैश्विक भागीदारों के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग को गहरा करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

INS मालवन · माहे-श्रेणी · एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) · आत्मनिर्भर भारत · हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) · समुद्री सुरक्षा · तटीय जल रक्षा · पनडुब्बी रोधी युद्ध · स्वदेशी रक्षा उत्पादन · नौसेना आधुनिकीकरण · रणनीतिक स्वायत्तता

अवधारणा प्रवाह

बढ़ती क्षेत्रीय समुद्री चुनौतियाँ (चीन, पाकिस्तान)  →  भारतीय नौसेना की आधुनिकीकरण की आवश्यकता  →  स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी युद्धपोतों का विकास (जैसे INS मालवन)  →  ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा उत्पादन को बढ़ावा  →  समुद्री सुरक्षा और संचार लाइनों की सुरक्षा  →  हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति का सुदृढ़ीकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. INS मालवन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारतीय नौसेना के माहे-श्रेणी के एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) बेड़े का दूसरा जहाज है।
2. इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया गया है।
3. यह 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का प्रतीक है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि INS मालवन माहे-श्रेणी का दूसरा ASW-SWC है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा किया गया है, GRSE द्वारा नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है और यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक है।

Q2. एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. गहरे समुद्र में लंबी दूरी की मिसाइलें दागना
  2. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर समुद्री डकैती का मुकाबला करना
  3. तटीय और उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियान चलाना
  4. मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) कार्यों में भाग लेना

उत्तर: तटीय और उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियान चलाना — ASW-SWC को विशेष रूप से तटीय और उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियान चलाने, महत्वपूर्ण समुद्री संचार लाइनों की रक्षा करने और शत्रु पनडुब्बियों का पता लगाने तथा उन्हें बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण के प्रयासों ने देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को कैसे मजबूत किया है? INS मालवन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संक्षिप्त परिचय दें। मुख्य भाग में, INS मालवन के उदाहरण का उपयोग करते हुए, स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लाभों पर प्रकाश डालें। चर्चा करें कि कैसे यह जहाज ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का प्रतीक है और तटीय तथा उथले पानी में पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमताओं को बढ़ाता है। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती चुनौतियों, विशेषकर चीन और पाकिस्तान की पनडुब्बी तैनाती के संदर्भ में, इन प्रयासों के रणनीतिक महत्व का विश्लेषण करें। अंत में, समुद्री सुरक्षा में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय शक्ति प्रक्षेपण के लिए इसके निहितार्थों पर जोर देते हुए एक निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: Times of India


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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