31 Aug भारतीय नौसेना में शामिल हुआ गहरे समुद्र में गोताखोरी जहाज आईएनएस निपुण: जानिए इसकी खासियतें
✎ आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है, जो गहरे समुद्र में गोताखोरी और तेजी से पनडुब्बी बचाव अभियानों में सक्षम है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा को बल मिलता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — आंतरिक सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS पेपर II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (समुद्री सुरक्षा)
- Prelims: आईएनएस निपुण, डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV), निस्तार-श्रेणी, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, पनडुब्बी बचाव अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR), समुद्री सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत
- Essay: भारत की बढ़ती समुद्री क्षमताएँ और क्षेत्रीय सुरक्षा, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा: एक विश्लेषण
त्वरित पुनरावृत्ति: आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है, जो गहरे समुद्र में गोताखोरी और तेजी से पनडुब्बी बचाव अभियानों में सक्षम है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा को बल मिलता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना ने मुंबई में गहरे समुद्र में गोताखोरी पोत (Deep-Sea Diving Vessel) आईएनएस निपुण को कमीशन किया है। यह निस्तार-श्रेणी का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है और इसमें तेजी से पनडुब्बी बचाव (Submarine Rescue) करने की क्षमता है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामिनाथन की उपस्थिति में इस पोत को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया, जो भारत की समुद्री क्षमताओं को और सुदृढ़ करेगा।
पृष्ठभूमि
- आईएनएस निपुण, निस्तार-श्रेणी का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है।
- इसका निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (Hindustan Shipyard Ltd.) द्वारा किया गया है।
- यह पोत 119.4 मीटर लंबा है और इसकी क्षमता 10,500 टन है।
- यह 300 मीटर तक की गहराई में गोताखोरी अभियानों को सहायता प्रदान कर सकता है।
- आईएनएस निपुण को मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief – HADR) अभियानों के लिए भी तैनात किया जा सकता है।
- नौसेना प्रमुख ने पश्चिमी एशिया में संकट के बीच समुद्री वातावरण में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक उथल-पुथल पर प्रकाश डाला, जो ऐसे पोतों के महत्व को रेखांकित करता है।
डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) क्या है?
- डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) विशेष पोत होते हैं जिन्हें पानी के भीतर गोताखोरी (Underwater Diving) अभियानों का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
- ये पोत गहरे समुद्र में गोताखोरों को आवश्यक उपकरण, आवास और सहायता प्रदान करते हैं, जिससे वे पानी के नीचे मरम्मत, रखरखाव और बचाव कार्य कर सकें।
- आईएनएस निपुण की प्रमुख क्षमताओं में तेजी से पनडुब्बी बचाव अभियान चलाना शामिल है, जो संकटग्रस्त पनडुब्बियों से कर्मियों को निकालने में महत्वपूर्ण है।
- यह पोत उन्नत डाइविंग प्रणालियों, जैसे सैचुरेशन डाइविंग (Saturation Diving) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) से लैस होता है, जो गहरे पानी में जटिल कार्यों को संभव बनाता है।
- डीएसवी का उपयोग पानी के नीचे के बुनियादी ढांचे (जैसे केबल और पाइपलाइन) के निरीक्षण और मरम्मत, समुद्री अनुसंधान और सर्वेक्षण के लिए भी किया जाता है।
- आपदा राहत और मानवीय अभियानों में, ये पोत पानी के नीचे मलबे को हटाने, खोज और बचाव कार्य करने और आवश्यक सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- आईएनएस निपुण का कमीशन भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाता है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| गहरे समुद्र में गोताखोरी पोत (Deep-sea Diving Vessel) | समुद्री बचाव अभियानों और पानी के नीचे की मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण। |
| INS निपुण (INS Nipun) | भारतीय नौसेना में शामिल किया गया दूसरा ऐसा पोत, जो समुद्री क्षमताओं को बढ़ाता है। |
| पनडुब्बी बचाव क्षमता | तेजी से पनडुब्बी बचाव प्रदान करने में सक्षम, नौसेना की परिचालन तत्परता को मजबूत करता है। |
| आपदा राहत और मानवीय अभियान | प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के दौरान सहायता प्रदान करने में उपयोग किया जा सकता है। |
| हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित | घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देता है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का समर्थन करता है। |
| 119.4 मीटर लंबा, 10,500 टन क्षमता | बड़े पैमाने के अभियानों को संभालने और 300 मीटर तक की गहराई तक गोताखोरी का समर्थन करने में सक्षम। |
महत्व
सामरिक महत्व
- INS निपुण का जलावतरण भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है, विशेष रूप से गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव के क्षेत्र में। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करता है।
- यह पोत समुद्री वातावरण में बढ़ती चुनौतियों और जटिलताओं का सामना करने में नौसेना की तत्परता को बढ़ाता है, जैसा कि नौसेना प्रमुख ने उल्लेख किया है।
- यह भारत को समुद्री बचाव और सहायता अभियानों में एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है, जिससे पड़ोसी देशों को भी सहायता प्रदान की जा सकती है।
रक्षा और सुरक्षा
- पनडुब्बी बचाव की तीव्र क्षमता नौसेना के पनडुब्बी बेड़े की सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है। यह किसी भी आपात स्थिति में कर्मियों और उपकरणों को बचाने की क्षमता प्रदान करता है।
- यह पोत आपदा राहत और मानवीय अभियानों में भी तैनात किया जा सकता है, जिससे भारत की ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (SAGAR) नीति को बल मिलता है।
- घरेलू स्तर पर निर्माण (हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा) रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है।
तकनीकी और औद्योगिक महत्व
- इस तरह के उन्नत पोत का निर्माण भारत की इंजीनियरिंग और जहाज निर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन करता है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी दक्षता को बढ़ाता है।
- यह रक्षा औद्योगिक गलियारों और संबंधित उद्योगों में रोजगार सृजन को बढ़ावा देता है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलती है।
- यह परियोजना रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश को प्रोत्साहित करती है, जिससे भविष्य में और अधिक उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकियों का विकास संभव हो पाता है।
चुनौतियाँ
1. समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ
- हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री डकैती, आतंकवाद जैसी गैर-राज्य अभिकर्ताओं (Non-state Actors) से उत्पन्न खतरे भारतीय नौसेना के लिए निरंतर चुनौतियाँ पेश करते हैं।
- पश्चिमी एशिया में संकट और वैश्विक रणनीतिक उथल-पुथल समुद्री वातावरण को और अधिक जटिल बना रही है, जिससे नौसेना को अपनी क्षमताओं को लगातार उन्नत करने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: सुरक्षा चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन
2. तकनीकी उन्नयन और रखरखाव
- गहरे समुद्र में गोताखोरी पोतों जैसी अत्यधिक विशिष्ट नौसैनिक संपत्तियों के लिए निरंतर तकनीकी उन्नयन और उच्च-स्तरीय रखरखाव की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधन की आवश्यकता होती है।
- इन पोतों के संचालन के लिए अत्यधिक कुशल और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है, जिनकी कमी एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; रक्षा प्रौद्योगिकी
3. घरेलू रक्षा उत्पादन में चुनौतियाँ
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के बावजूद, महत्वपूर्ण घटकों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए अभी भी कुछ हद तक आयात पर निर्भरता बनी हुई है।
- अनुसंधान और विकास में निवेश को और बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि स्वदेशीकरण को गति मिल सके।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: भारतीय अर्थव्यवस्था; रक्षा विनिर्माण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बढ़ती समुद्री प्रतिस्पर्धा | हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विभिन्न देशों की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति से उत्पन्न रणनीतिक चुनौतियाँ। |
| तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता | गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव जैसे जटिल अभियानों के लिए उच्च-स्तरीय तकनीकी ज्ञान और प्रशिक्षण की निरंतर आवश्यकता। |
| रखरखाव और परिचालन लागत | अत्याधुनिक नौसैनिक पोतों के दीर्घकालिक रखरखाव और संचालन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता। |
| वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता | कुछ विशिष्ट उपकरणों और प्रौद्योगिकियों के लिए अभी भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता। |
आगे की राह
- भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और बढ़ाने के लिए गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव पोतों के बेड़े का विस्तार जारी रखना।
- रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना ताकि समुद्री प्रौद्योगिकियों में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सके।
- घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को और मजबूत करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ाना।
- गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए उच्च कुशल कर्मियों के प्रशिक्षण और विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
- आपदा राहत और मानवीय सहायता अभियानों में इन पोतों की भूमिका को अधिकतम करना, जिससे भारत की सॉफ्ट पावर में वृद्धि हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारतीय नौसेना · गहरे समुद्र में गोताखोरी पोत · आईएनएस निपुण · समुद्री सुरक्षा · आपदा राहत · मानवीय सहायता · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा विनिर्माण · रणनीतिक स्वायत्तता · हिंद महासागर क्षेत्र · पनडुब्बी बचाव · तटीय सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रक्षा का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
INS निपुण का जलावतरण → भारतीय नौसेना की गहरे समुद्र में गोताखोरी क्षमता में वृद्धि → पनडुब्बी बचाव और मानवीय अभियानों में सुधार → समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा → आत्मनिर्भर भारत और रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना का पहला गहरे समुद्र में गोताखोरी पोत (Diving Support Vessel) है।
2. इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है।
3. यह पनडुब्बी बचाव कार्यों में सक्षम है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि आईएनएस निपुण निस्तार-श्रेणी का दूसरा गहरे समुद्र में गोताखोरी पोत है। कथन 2 सही है, इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है। कथन 3 सही है, यह पनडुब्बी बचाव और मानवीय सहायता कार्यों में सक्षम है।
Q2. अभिकथन (A): भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कारण (R): हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियाँ हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि नौसेना लगातार नए पोतों को शामिल कर रही है। कारण (R) भी सही है, नौसेना प्रमुख ने स्वयं समुद्री वातावरण में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का उल्लेख किया है, जो नौसेना की क्षमता वृद्धि का एक प्रमुख कारण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हाल ही में भारतीय नौसेना में आईएनएस निपुण के शामिल होने के संदर्भ में, भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में गहरे समुद्र में गोताखोरी पोतों (Diving Support Vessels) के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: आईएनएस निपुण के हालिया कमीशनिंग का उल्लेख करें और गहरे समुद्र में गोताखोरी पोतों (DSV) की सामान्य परिभाषा दें।
2. गहरे समुद्र में गोताखोरी पोतों का महत्व (DSV): भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए DSV के बहुआयामी महत्व का विस्तार से वर्णन करें। इसमें शामिल होंगे:
क. पनडुब्बी बचाव क्षमता: संकटग्रस्त पनडुब्बियों से कर्मियों को बचाने की क्षमता।
ख. पानी के नीचे मरम्मत और रखरखाव: समुद्री बुनियादी ढाँचे और पोतों की पानी के नीचे मरम्मत।
ग. आपदा राहत और मानवीय सहायता: प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करना।
घ. समुद्री सर्वेक्षण और अन्वेषण: समुद्र तल का मानचित्रण और महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करना।
ङ. रणनीतिक महत्व: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और प्रभाव को मजबूत करना।
3. ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण की भूमिका:
क. स्वदेशी निर्माण का महत्व: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड जैसे भारतीय शिपयार्ड द्वारा निर्माण से आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
ख. आर्थिक लाभ: रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और घरेलू उद्योग को बढ़ावा।
ग. रणनीतिक स्वायत्तता: महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी निर्भरता कम करना।
घ. अनुसंधान और विकास: घरेलू नवाचार और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहन।
ङ. सुरक्षा निहितार्थ: आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के जोखिम को कम करना।
4. निष्कर्ष: भारत की बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं और सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में DSV के महत्व और स्वदेशीकरण के दूरगामी प्रभावों को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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