18 Sep भारत ने अरब सागर में नौसेना जहाज टक्कर पर पाकिस्तान के आरोपों को किया खारिज, नौसेना का किया बचाव
✎ अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के पोतों के बीच टकराव ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अधिकारों और भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास-निर्माण उपायों के महत्व को रेखांकित किया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper II — भारत और उसके पड़ोसी-संबंध | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: अरब सागर, भारतीय नौसेना, पाकिस्तान नौसेना, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ), समुद्र में टकराव रोकने के अंतर्राष्ट्रीय नियम (COLREGs), सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की गतिविधियों पर अग्रिम सूचना पर भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता, 1991
- Essay: भारत की समुद्री सुरक्षा चुनौतियाँ और रणनीतियाँ, पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के पोतों के बीच टकराव ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के अधिकारों और भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास-निर्माण उपायों के महत्व को रेखांकित किया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, अरब सागर में एक भारतीय नौसेना के युद्धपोत और एक पाकिस्तानी नौसेना के पोत के बीच टकराव की घटना सामने आई। भारत ने पाकिस्तान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि यह घटना पाकिस्तान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) में भारतीय पोत द्वारा ‘अत्यधिक उत्तेजक और अस्वीकार्य कार्रवाई’ के कारण हुई। भारत ने पाकिस्तान नौसेना के पोत के ‘अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण’ पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिसने टकराव का कारण बना।
पृष्ठभूमि
- यह घटना तब हुई जब भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS कोलकाता उत्तरी अरब सागर में एक नियमित निगरानी मिशन पर था।
- भारत के अनुसार, पाकिस्तानी नौसेना के पोत ‘हुनैन’ ने भारतीय युद्धपोत के करीब आकर ‘खतरनाक ओवरटेकिंग युद्धाभ्यास’ किया, जिसके परिणामस्वरूप टकराव हुआ।
- भारत ने इस घटना को सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की गतिविधियों पर अग्रिम सूचना पर भारत और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का घोर उल्लंघन बताया है, जिसमें कहा गया है कि समुद्र में नौसैनिक इकाइयाँ एक-दूसरे के तीन समुद्री मील के भीतर नहीं होनी चाहिए।
- इसके अतिरिक्त, भारत ने कहा कि पाकिस्तानी पोत ने समुद्र में टकराव रोकने के अंतर्राष्ट्रीय नियमों (International Regulations for Preventing Collisions at Sea – COLREGs) का भी उल्लंघन किया।
- पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यह घटना पाकिस्तान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में भारतीय पोत द्वारा अत्यधिक उत्तेजक और अस्वीकार्य कार्रवाई के बाद हुई।
- भारत ने पाकिस्तान के आरोपों और निहितार्थों को खारिज कर दिया है और सभी सैन्य इकाइयों को उचित सावधानी बरतने तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए दोनों पक्षों के बीच प्रासंगिक समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करने की आवश्यकता के बारे में पाकिस्तान को फिर से सलाह दी है।
समुद्री कानून और अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ): यह समुद्र का एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर एक संप्रभु राज्य के पास समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग के संबंध में विशेष अधिकार होते हैं, जिसमें ऊर्जा उत्पादन भी शामिल है। यह आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक फैला होता है।
- समुद्र में टकराव रोकने के अंतर्राष्ट्रीय नियम (COLREGs): ये अंतर्राष्ट्रीय नियम हैं जो समुद्र में जहाजों के बीच टकराव को रोकने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें जहाजों की रोशनी, आकार, ध्वनि संकेत और संचालन के नियम शामिल हैं।
- सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की गतिविधियों पर अग्रिम सूचना पर भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता, 1991: यह समझौता दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों में पारदर्शिता और विश्वास निर्माण को बढ़ावा देने के लिए किया गया था, ताकि आकस्मिक टकराव या गलतफहमी से बचा जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून: संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (United Nations Convention on the Law of the Sea – UNCLOS) समुद्री गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढाँचा है, जिसमें नेविगेशन की स्वतंत्रता, EEZ के अधिकार और समुद्री पर्यावरण का संरक्षण शामिल है।
- नेविगेशन की स्वतंत्रता: यह एक अंतर्राष्ट्रीय कानून सिद्धांत है जो सभी जहाजों को अंतर्राष्ट्रीय जल में स्वतंत्र रूप से यात्रा करने की अनुमति देता है, बशर्ते वे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और विनियमों का पालन करें।
- कूटनीतिक विरोध: जब एक देश दूसरे देश के आचरण पर आपत्ति जताता है, तो वह कूटनीतिक विरोध दर्ज कराता है, जिसमें राजदूत या चार्ज डी’अफेयर को तलब करना और औपचारिक बयान जारी करना शामिल हो सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness – MDA) | समुद्री सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए जहाजों की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखना महत्वपूर्ण है। |
| अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून | यह राष्ट्रों के समुद्री आचरण को नियंत्रित करता है, जिसमें विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) और खुले समुद्र में नेविगेशन के अधिकार शामिल हैं। |
| टकराव रोकथाम के अंतर्राष्ट्रीय नियम (International Regulations for Preventing Collisions at Sea – COLREGs) | समुद्र में जहाजों के बीच टकराव को रोकने के लिए वैश्विक मानक प्रदान करते हैं। |
| द्विपक्षीय समझौते | भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के बीच सैन्य अभ्यासों और गतिविधियों के संबंध में समझौते, समुद्री घटनाओं को रोकने में सहायक होते हैं। |
| कूटनीतिक विरोध | अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक देश द्वारा दूसरे देश के आचरण पर आपत्ति व्यक्त करने का एक औपचारिक तरीका। |
महत्व
सामरिक महत्व
- अरब सागर (Arabian Sea) भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र है, जो व्यापार मार्गों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अशांति या घटना भारत की सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकती है।
- यह घटना समुद्री सुरक्षा और निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है, विशेषकर भारत के पश्चिमी तट पर।
अंतर्राष्ट्रीय कानून और कूटनीति
- यह घटना अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों, विशेष रूप से COLREGs और EEZ से संबंधित प्रावधानों के पालन के महत्व को रेखांकित करती है।
- भारत द्वारा पाकिस्तान के दावे को खारिज करना और कूटनीतिक विरोध दर्ज कराना, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति और संप्रभुता को बनाए रखने का प्रयास है।
भारत-पाकिस्तान संबंध
- इस तरह की समुद्री घटनाएं दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और जटिल बना सकती हैं।
- यह घटना दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही पर अग्रिम सूचना के समझौते (Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements) के उल्लंघन के आरोपों को सामने लाती है, जो विश्वास बहाली के उपायों (Confidence Building Measures – CBMs) के महत्व को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. समुद्री सीमा विवाद और उल्लंघन
- भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमाओं को लेकर अस्पष्टता और विवाद, विशेषकर सर क्रीक क्षेत्र में, ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकते हैं।
- EEZ में अन्य देशों के जहाजों की गतिविधियों को लेकर अक्सर विवाद उत्पन्न होते हैं, जिससे समुद्री कानून के उल्लंघन के आरोप लगते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत और उसके पड़ोसी
2. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन
- कुछ देश जानबूझकर या अनजाने में COLREGs और अन्य अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन करते हैं, जिससे टकराव का खतरा बढ़ जाता है।
- समुद्री कानूनों की व्याख्या और प्रवर्तन को लेकर राष्ट्रों के बीच मतभेद हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ
3. विश्वास बहाली के उपायों का अभाव
- भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य गतिविधियों पर अग्रिम सूचना जैसे समझौतों का उल्लंघन, दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है।
- पर्याप्त संचार और समन्वय तंत्र की कमी समुद्री घटनाओं को बढ़ा सकती है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत और उसके पड़ोसी
4. क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता
- अरब सागर जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती हैं।
- समुद्री डकैती, आतंकवाद और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता है, लेकिन ऐसी घटनाएं इसमें बाधा डालती हैं।
यूपीएससी लिंक: सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| समुद्री टकराव | कर्मचारियों की सुरक्षा, जहाजों को नुकसान और क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि का जोखिम। |
| अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन | अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों की अवहेलना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की संभावना। |
| द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन | भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली के प्रयासों को कमजोर करना। |
| विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में घुसपैठ | देश की संप्रभुता और समुद्री संसाधनों पर अधिकार का उल्लंघन। |
| कूटनीतिक तनाव | दोनों देशों के बीच संबंधों में और गिरावट, जिससे अन्य मुद्दों पर सहयोग बाधित हो सकता है। |
आगे की राह
- भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही पर अग्रिम सूचना के समझौते का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
- समुद्र में टकराव को रोकने के अंतर्राष्ट्रीय नियमों (COLREGs) का सभी समुद्री इकाइयों द्वारा अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।
- दोनों देशों के सैन्य और नौसैनिक अधिकारियों के बीच संचार के चैनलों को मजबूत किया जाए ताकि गलतफहमी और घटनाओं को रोका जा सके।
- समुद्री घटनाओं की जांच के लिए एक संयुक्त तंत्र स्थापित करने पर विचार किया जा सकता है, जिससे निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।
- अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर समुद्री कानून और जिम्मेदार समुद्री आचरण के महत्व पर जोर दिया जाना चाहिए।
- भारत को अपनी समुद्री निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए ताकि अपने EEZ और अंतर्राष्ट्रीय जल में गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से नजर रखी जा सके।
- समुद्री सुरक्षा पर क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, जिसमें सूचना साझाकरण और संयुक्त अभ्यास शामिल हैं, जिससे सभी हितधारकों के लिए सुरक्षित समुद्री वातावरण सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समुद्री कानून · अनन्य आर्थिक क्षेत्र · संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि · भारत-पाकिस्तान संबंध · अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन · समुद्री सुरक्षा · नौवहन स्वतंत्रता · सैन्य अभ्यास · टकराव से बचाव · अंतर्राष्ट्रीय संबंध
अवधारणा प्रवाह
भारतीय नौसेना का जहाज अरब सागर में नियमित निगरानी पर था। → पाकिस्तानी नौसेना के जहाज ने भारतीय युद्धपोत के करीब आकर ‘अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर’ युद्धाभ्यास किया। → इस युद्धाभ्यास के कारण दोनों जहाजों के बीच टक्कर हुई। → भारत ने पाकिस्तान के दावे को खारिज किया और कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया। → भारत ने पाकिस्तान पर द्विपक्षीय समझौते और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) तटरेखा से 200 समुद्री मील तक फैला होता है, जहाँ तटीय राज्य को प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण और दोहन का संप्रभु अधिकार होता है।
2. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत, सभी राज्यों के जहाजों को अनन्य आर्थिक क्षेत्र में नौवहन और उड़ान भरने की स्वतंत्रता है।
3. भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही पर अग्रिम सूचना संबंधी समझौता, 1991, नौसेना इकाइयों को समुद्र में एक-दूसरे के तीन समुद्री मील के भीतर नहीं आने का प्रावधान करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) तटरेखा से 200 समुद्री मील तक फैला होता है और तटीय राज्य को इसमें प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण और दोहन का संप्रभु अधिकार प्राप्त होता है।
कथन 2 सही है। UNCLOS के अनुच्छेद 58(1) के तहत, सभी राज्यों को EEZ में नौवहन और उड़ान भरने की स्वतंत्रता है, बशर्ते वे तटीय राज्य के अधिकारों और कर्तव्यों का सम्मान करें।
कथन 3 सही है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1991 के समझौते का अनुच्छेद 10 स्पष्ट रूप से कहता है कि नौसेना इकाइयाँ समुद्र में एक-दूसरे के तीन समुद्री मील के भीतर नहीं आएंगी।
Q2. अभिकथन (A): अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime Organization – IMO) समुद्री सुरक्षा और जहाजों द्वारा प्रदूषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय संधियों का विकास और रखरखाव करता है।
कारण (R): IMO संयुक्त राष्ट्र का एक विशेष अभिकरण है जो अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, और कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है। IMO वास्तव में समुद्री सुरक्षा और प्रदूषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय संधियों का विकास और रखरखाव करता है, और यह संयुक्त राष्ट्र का एक विशेष अभिकरण है जिसकी मुख्य जिम्मेदारी अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग को विनियमित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून में इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए। भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में समुद्री टकरावों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के महत्व का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की संक्षिप्त परिभाषा और अवधारणा का परिचय।
2. **EEZ की अवधारणा:**
* तटरेखा से 200 समुद्री मील तक विस्तार।
* तटीय राज्य के संप्रभु अधिकार (संसाधन अन्वेषण, दोहन, प्रबंधन)।
* अन्य राज्यों के अधिकार (नौवहन, उड़ान, केबल बिछाना)।
* संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत वैधानिक आधार (अनुच्छेद 55-75)।
3. **अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून में प्रासंगिकता:**
* संसाधन प्रबंधन (मत्स्य पालन, खनिज)।
* पर्यावरण संरक्षण।
* वैज्ञानिक अनुसंधान।
* तटीय राज्यों की आर्थिक संप्रभुता का विस्तार।
* अंतर्राष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता का संतुलन।
4. **भारत-पाकिस्तान संदर्भ में समुद्री टकरावों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों का महत्व:**
* **अंतर्राष्ट्रीय नियम:**
* UNCLOS के प्रावधान (EEZ में नौवहन के अधिकार और सीमाएं)।
* समुद्र में टकरावों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विनियम (International Regulations for Preventing Collisions at Sea – COLREGs) का पालन।
* अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की भूमिका।
* **द्विपक्षीय समझौते:**
* भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही पर अग्रिम सूचना संबंधी समझौता, 1991 (विशेषकर अनुच्छेद 10)।
* पारस्परिक सम्मान और पेशेवर आचरण का महत्व।
* **महत्व:**
* गलतफहमी और तनाव को कम करना।
* क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना।
* मानवीय और पर्यावरणीय क्षति को रोकना।
* अंतर्राष्ट्रीय कानून के शासन का सम्मान।
5. **निष्कर्ष:** समुद्री क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और द्विपक्षीय समझौतों के पालन की अनिवार्यता पर बल।
स्रोत: orissapost.com
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